CBSE Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 19: Sapnon ke-se Din NCERT Solutions

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CBSE Class 10 Hindi Sanchayan Chapter 19, 'Sapnon ke-se Din' NCERT Solutions, offers a deep dive into the author's nostalgic reflections on his school days. It explores his early experiences, his relationships with teachers, particularly PT Sir, and his youthful perspective on studies versus play. The solutions clarify why language is no barrier in shared games, the impact of PT Sir's encouragement, and the bittersweet feeling of starting a new academic year with old books. Students will understand the author's sense of pride during scout parades, the reasons behind PT Sir's disciplinary action, and the author's changing views on schooling. The chapter's conclusion touches upon holiday homework and the author's imaginative dreams of bravery, inspired by a character named Oma. These solutions aim to enhance comprehension and aid in exam preparation.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 19

Chapter summary

Chapter 19, 'Sapnon ke-se Din' (Days Like Dreams) from Class 10 Hindi Sanchayan, is explored through these NCERT Solutions. The solutions address questions about the author's school life, focusing on his childhood memories, the role of language in social interaction, the strict yet motivating PT Sir, and the emotional impact of academic progression. It clarifies the author's mixed feelings about school, the reasons for PT Sir's dismissal, and the author's imaginative ways of dealing with holiday homework. These solutions offer a clear understanding of the chapter's narrative and themes.

Learning outcomes

  • Understand the author's childhood experiences and feelings about school.
  • Analyze the role of language in social interactions as depicted in the chapter.
  • Explain the significance of PT Sir's teaching methods and their impact on students.
  • Describe the author's emotional responses to academic changes and school activities.
  • Identify the reasons behind specific events in the chapter, such as PT Sir's suspension.
  • Evaluate the author's strategies for managing academic tasks and his imaginative coping mechanisms.

Topics covered

Paper topics

  • Childhood school memories
  • Language and communication
  • Teacher-student relationships
  • PT Sir's teaching methods
  • Emotional impact of academic changes
  • Scout parades and self-perception
  • Reasons for teacher suspension
  • Author's perspective on school
  • Holiday homework challenges
  • Imagination and bravery

Important topics

  • Author's childhood school experiences
  • PT Sir's character and methods
  • Emotional responses to academic progression
  • The role of extracurricular activities
  • Author's coping mechanisms for homework

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती— पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता हैं?
Solution: पाठ के उस अंश से यह सिद्ध होता है जहाँ लेखक बताता है कि बचपन में उसके आधे से ज़्यादा साथी राजस्थान या हरियाणा जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से थे। उन सबके साथ खेलते समय उनकी बोलियाँ भले ही अलग-अलग थीं और वे एक-दूसरे की बोली को बहुत कम समझ पाते थे, लेकिन खेलते समय इस बात का ज़रा भी एहसास नहीं होता था। वे एक-दूसरे की बात समझ लेते थे और उनके व्यवहार में भाषा के कारण कोई अंतर नहीं आता था। इससे स्पष्ट होता है कि भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती।

प्रश्न 2

पीटी साहब की शाबाश फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी। स्पष्ट कीजिए।
Solution: पीटी साहब, प्रीतमचंद, एक बहुत सख्त अध्यापक थे। यदि कोई बच्चा कतार से थोड़ा भी इधर-उधर होता या खुजलाने लगता, तो वे बाघ की तरह झपट पड़ते थे। लेकिन, जब बच्चे कोई भी गलती नहीं करते थे और अनुशासन में रहते थे, तो पीटी साहब उन्हें 'शाबाश' कहते थे। बच्चों को यह 'शाबाश' शब्द सुनकर बहुत खुशी मिलती थी। उन्हें ऐसा लगता था मानो उन्हें फौज में सिपाही को मिलने वाले तमगों (पदकों) से सम्मानित किया गया हो, जो उनकी मेहनत और अनुशासन का प्रतीक था।

प्रश्न 3

नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?
Solution: जब लेखक नयी श्रेणी में जाता था, तो हेडमास्टर जी उसे एक अमीर घर के बच्चे की पुरानी किताबें देते थे। इन नयी कापियों और पुरानी किताबों से एक विशेष प्रकार की गंध आती थी, जो लेखक के मन को उदास कर देती थी। इसका कारण यह था कि नयी श्रेणी में जाने का मतलब था और भी कठिन पढ़ाई और नए मास्टरों से पिटाई का डर। पुराने मास्टरों की अपेक्षाएँ भी बढ़ जाती थीं, क्योंकि वे सोचते थे कि बच्चे नयी श्रेणी में आकर तेज हो गए हैं। अपेक्षाओं पर खरा न उतरने पर उन्हें चमड़ी उधेड़ने में देर नहीं लगती थी, इसी भय से लेखक का मन उदास हो जाता था।

प्रश्न 4

स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण आदमी फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?
Solution: स्काउट परेड में भाग लेते समय लेखक साफ़-सुथरे, धोबी से धुले हुए कपड़े पहनता था और पॉलिश किए हुए बूट पहनकर चलता था। जब वह 'ठक-ठक' की आवाज़ के साथ अकड़कर चलता था, तो उसे लगता था कि वह किसी फौजी जवान से कम नहीं है। वह अपने अंदर एक फौजी जैसी आन-बान-शान महसूस करता था, जिससे वह स्वयं को एक महत्वपूर्ण व्यक्ति समझने लगता था।

प्रश्न 5

हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअत्तल कर दिया?
Solution: एक दिन मास्टर प्रीतमचंद (पीटी साहब) ने कक्षा में बच्चों को फ़ारसी के शब्द रूप याद करने के लिए दिए। जब बच्चे उन्हें याद नहीं कर पाए, तो मास्टर जी ने उन्हें सज़ा के तौर पर मुर्गा बना दिया। बच्चे इस सज़ा को ज़्यादा देर तक सहन नहीं कर पाए और कुछ ही देर में लुढ़कने लगे। उसी समय नम्र हृदय वाले हेडमास्टर जी वहाँ से गुज़रे। उन्होंने बच्चों की यह दयनीय हालत देखी तो वे सहन नहीं कर पाए और उन्होंने पीटी मास्टर को तुरंत निलंबित (मुअत्तल) कर दिया।

प्रश्न 6

लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल ख़ुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?
Solution: लेखक के अनुसार, उन्हें सामान्य तौर पर स्कूल जाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था, क्योंकि यह खुशी से भाग जाने की जगह नहीं थी। परन्तु, जब स्कूल में मास्टर प्रीतमचंद रंग-बिरंगे झंडे लेकर और गले में रूमाल बाँधकर परेड करवाते थे, तो लेखक को यह गतिविधि बहुत अच्छी लगती थी। जब सभी बच्चे 'ठक-ठक' की आवाज़ के साथ राइट टर्न, लेफ्ट टर्न या अवाउट टर्न करते थे और मास्टर जी उन्हें 'शाबाश' कहते थे, तो लेखक को यह पूरे साल में मिले गुड़ों (अंकों) से भी ज़्यादा अच्छा लगता था। इसी विशेष गतिविधि के कारण लेखक को स्कूल जाना अच्छा लगने लगा था।

प्रश्न 7

लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति बहादुर बनने की कल्पना किया करता था?
Solution: जब लेखक के स्कूल में छुट्टियाँ होती थीं और उन्हें काम करने के लिए मिलता था, तो वह उसे पूरा करने के लिए एक विस्तृत समय-सारणी बनाया करता था। वह योजना बनाता था कि कौन-सा काम, कितना काम और किस दिन पूरा करना है। हालाँकि, खेल-कूद और अन्य गतिविधियों में समय बीत जाने के कारण वह अक्सर अपना काम पूरा नहीं कर पाता था। धीरे-धीरे समय बीतने लगता और काम अधूरा रह जाता। ऐसी स्थिति में, लेखक ओमा नामक एक ठिगने और बलिष्ठ लड़के जैसा बहादुर बनना चाहता था। ओमा उद्दंड था और काम करने के बजाय पिटना ज़्यादा आसान समझता था। लेखक कल्पना करता था कि वह भी ओमा की तरह निर्भीक होकर काम न करने के परिणाम का सामना कर लेगा।

प्रश्न 8

पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Solution: पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर (मास्टर प्रीतमचंद) की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:
  1. अनुशासनप्रिय: वे अनुशासन को बहुत महत्व देते थे और बच्चों को कतार में चलने तथा नियमों का पालन करने के लिए सख़्ती से प्रेरित करते थे। जरा सी चूक पर वे बच्चों पर झपट पड़ते थे।
  2. प्रेरक: सख़्ती के बावजूद, वे बच्चों को प्रोत्साहित भी करते थे। जब बच्चे गलती नहीं करते थे, तो उनकी 'शाबाश' बच्चों के लिए बड़े पुरस्कार के समान होती थी, जिससे उन्हें अच्छा प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलती थी।
  3. कठोरता: वे अपनी सज़ाओं के लिए जाने जाते थे, जैसे कि बच्चों को मुर्गा बनाना। उनकी कठोरता का उद्देश्य बच्चों को अनुशासित रखना था, लेकिन कभी-कभी यह अत्यधिक हो जाती थी।
  4. कर्तव्यनिष्ठ: वे अपनी ड्यूटी के प्रति समर्पित थे और परेड जैसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास पर ध्यान देते थे।
  5. संवेदनशीलता (अप्रत्यक्ष): यद्यपि वे सख़्त थे, लेकिन बच्चों की अत्यधिक पीड़ा को देखकर हेडमास्टर जी द्वारा निलंबित किए जाने की घटना अप्रत्यक्ष रूप से यह दर्शाती है कि शायद उनकी कठोरता की सीमा थी, जिसे पार करने पर वे भी विवश हो सकते थे (हालांकि यह हेडमास्टर जी की संवेदनशीलता थी)।
कुल मिलाकर, पीटी सर एक सख्त लेकिन बच्चों को प्रेरित करने वाले शिक्षक थे, जिनका मुख्य उद्देश्य अनुशासन बनाए रखना था।

Common mistakes

  • Confusing the author's feelings about different teachers.
  • Misinterpreting the reasons for the author's sadness about new books.
  • Underestimating the impact of PT Sir's praise on the students' morale.
  • Failing to connect the author's desire to be like Oma with his approach to homework.

Revision tips

  • Reread the chapter focusing on the author's emotional journey.
  • Pay close attention to the descriptions of PT Sir and his methods.
  • Discuss the author's feelings about new classes and old books with peers.
  • Summarize the key events that led to PT Sir's suspension.
  • Reflect on the author's imaginative solutions to homework challenges.

Practice MCQs

Q1. पाठ के अनुसार, बच्चों के बीच आपसी व्यवहार में कौन सी चीज़ बाधा नहीं बनती थी?

Q2. पीटी साहब की 'शाबाश' बच्चों को क्यों लगती थी?

Q3. नई कापियों और पुरानी किताबों की विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो जाता था?

Q4. स्काउट परेड के दौरान लेखक स्वयं को कैसा महसूस करता था?

Q5. हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअत्तल (निलंबित) कर दिया?

Q6. लेखक को स्कूल जाना कब अच्छा लगने लगा?

Q7. छुट्टियों के काम को पूरा न कर पाने की स्थिति में लेखक किसकी तरह बहादुर बनने की कल्पना करता था?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान कक्षा 10 की हिंदी की पुस्तक 'संचयन' के अध्याय 19 'सपनों के-से दिन' के लिए हैं।

इन समाधानों में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

इन समाधानों में लेखक के बचपन के स्कूल के अनुभव, भाषा की भूमिका, पीटी सर जैसे शिक्षकों के प्रभाव, और अकादमिक बदलावों के प्रति लेखक की भावनाओं जैसे विषयों को शामिल किया गया है।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय की गहरी समझ प्रदान करते हैं और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत सहायक हैं।

लेखक को नई श्रेणी में जाने पर उदासी क्यों होती थी?

नई श्रेणी में जाने का अर्थ था अधिक कठिन पढ़ाई और नए मास्टरों से पिटाई का भय, साथ ही पुरानी किताबों से आने वाली विशेष गंध भी उसे उदास कर देती थी।

पीटी साहब को हेडमास्टर जी ने क्यों निलंबित किया?

पीटी साहब द्वारा बच्चों को मुर्गा बनाने पर जब बच्चे सहन नहीं कर पाए, तो हेडमास्टर जी ने बच्चों की हालत देखकर उन्हें निलंबित कर दिया।

लेखक छुट्टियों के काम को पूरा न कर पाने पर क्या कल्पना करता था?

लेखक उद्दंड ओमा नामक लड़के की तरह बहादुर बनने की कल्पना करता था, जो काम करने के बजाय पिटना सस्ता सौदा समझता था।

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