CBSE Class 10 Hindi Kshitij Chapter 14: एक कहानी यह भी NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 14 of Class 10 Hindi Kshitij, titled 'Ek Kahani Yeh Bhi', authored by Mannu Bhandari. The solutions delve into the significant influences on the author's personality, particularly from her father and her teacher, Shila Agarwal. It explores the father's perspective on the kitchen as a 'bhatiyarkhana' and the author's resulting feelings of inferiority and eventual self-discovery. The text also highlights the intellectual clashes between the author and her father regarding women's roles, education, and early marriage. Furthermore, it vividly portrays the backdrop of the Indian freedom struggle in 1946-47, emphasizing Mannu Bhandari's active participation and leadership within the movement. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the chapter, understand the historical context, and prepare effectively for their examinations by offering clear explanations and insights into the author's life and times.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
SubjectHindi Kshitiz
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 14

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 14, 'Ek Kahani Yeh Bhi', by Mannu Bhandari, focus on the author's personal development and her involvement in the Indian freedom movement. The solutions explain the impact of her father and teacher, the concept of 'bhatiyarkhana', and the author's intellectual conflicts with her father. They also detail the socio-political atmosphere of the 1946-47 freedom struggle and Mannu Bhandari's role within it, offering a comprehensive understanding of the chapter's themes and historical context.

Learning outcomes

  • Understand the influence of key individuals on the author's personality.
  • Analyze the father's perspective on women's roles and the 'bhatiyarkhana' concept.
  • Identify and explain the intellectual conflicts between the author and her father.
  • Describe the socio-political environment of the Indian freedom struggle.
  • Recognize Mannu Bhandari's active participation in the freedom movement.
  • Compare societal expectations for girls in the past versus the present.

Topics covered

Paper topics

  • Author's personality development
  • Influence of father
  • Influence of teacher Shila Agarwal
  • Concept of 'Bhatiyarkhana'
  • Inferiority complex
  • Self-confidence
  • Intellectual clashes with father
  • Women's education and roles
  • Indian freedom struggle (1946-47)
  • Author's role in the freedom movement
  • Comparison of past and present for girls
  • Autobiographical elements

Important topics

  • Influence of father and teacher
  • Intellectual conflicts and women's roles
  • Participation in the freedom struggle
  • The concept of 'Bhatiyarkhana'
  • Author's personal growth and self-discovery

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखिका के व्यक्तित्व पर किन-किन व्यक्तियों का किस रूप में प्रभाव पड़ा?
Solution: लेखिका के व्यक्तित्व पर मुख्य रूप से दो व्यक्तियों का गहरा प्रभाव पड़ा: उनके पिता और उनकी शिक्षिका शीला अग्रवाल।

पिता का प्रभाव: लेखिका के पिता का उनके जीवन पर एक जटिल प्रभाव था। एक ओर, उनके पिता की बातों और व्यवहार के कारण लेखिका में हीन भावना और आत्मविश्वास की कमी उत्पन्न हुई, खासकर उनके काले रंग को लेकर। दूसरी ओर, पिता के देशभक्तिपूर्ण विचारों और चर्चाओं ने लेखिका में देशप्रेम की भावना का संचार किया।

शिक्षिका शीला अग्रवाल का प्रभाव: शीला अग्रवाल ने लेखिका के जीवन में एक महत्वपूर्ण सकारात्मक बदलाव लाया। उनकी जोशीली बातों और प्रेरणादायक व्यक्तित्व ने लेखिका के खोए हुए आत्मविश्वास को पुनः स्थापित किया। साथ ही, शीला अग्रवाल ने लेखिका की देशप्रेम की अंकुरित भावना को सही दिशा और प्रोत्साहन दिया, जिससे लेखिका स्वतंत्रता आंदोलन में खुलकर भाग लेने के लिए प्रेरित हुई।

प्रश्न 2

इस आत्मकथ्य में लेखिका के पिता ने रसोई को 'भटियारखाना' कहकर क्यों संबोधित किया है?
Solution: लेखिका के पिता रसोई को 'भटियारखाना' कहकर संबोधित करते थे क्योंकि उनका यह मानना था कि रसोई में काम करने वाली लड़कियों की क्षमता और प्रतिभा वहीं सीमित होकर रह जाती है। उनके अनुसार, खाना पकाने और परोसने जैसे कामों में व्यस्त रहने के कारण लड़कियाँ अपनी वास्तविक प्रतिभा का उपयोग नहीं कर पातीं और उनकी क्षमता एक तरह से भट्टी में झोंक दी जाती है। इस प्रकार, वे प्रतिभा के क्षय का स्थान होने के कारण रसोई को 'भटियारखाना' कहते थे।

प्रश्न 3

वह कौन सी घटना थी जिसके बारे में सुनने पर लेखिका को न अपनी आँखों पर विश्वास हो पाया और न अपने कानों पर?
Solution: वह घटना तब हुई जब कॉलेज से लेखिका के पिता के नाम एक पत्र आया। पत्र में प्रिंसिपल ने लेखिका की गतिविधियों के संबंध में अनुशासनात्मक कार्यवाही करने की बात कही थी। इस पत्र को पढ़कर लेखिका के पिता अत्यंत क्रोधित होकर कॉलेज गए। लेखिका इस बात से बहुत भयभीत थी कि उसके पिता क्या करेंगे।

जब पिता कॉलेज से लौटे और प्रिंसिपल से मिलने के बाद उनके व्यवहार में एक अप्रत्याशित परिवर्तन आया। उन्हें अपनी बेटी से कोई शिकायत नहीं रही, बल्कि वे शांत थे। पिता के इस अचानक बदले हुए और शांत व्यवहार को देखकर लेखिका को अपनी आँखों पर विश्वास नहीं हुआ और न ही कानों पर, क्योंकि उसने जो सोचा था, उसके विपरीत ही हुआ।

प्रश्न 4

लेखिका की अपने पिता से वैचारिक टकराहट को अपने शब्दों में लिखिए।
Solution: लेखिका और उनके पिता के बीच अक्सर वैचारिक मतभेद होते थे, जो उनके विचारों की भिन्नता को दर्शाते हैं:

स्त्रियों की भूमिका और शिक्षा: यद्यपि लेखिका के पिता स्त्रियों की शिक्षा के विरोधी नहीं थे, परंतु वे स्त्रियों का दायरा घर की चारदीवारी तक ही सीमित रखना चाहते थे। इसके विपरीत, लेखिका खुले विचारों वाली और अधिक स्वतंत्रता की आकांक्षी थी।

विवाह और जीवन की आकांक्षाएँ: पिता लड़कियों की शादी जल्दी करने के पक्ष में थे, जबकि लेखिका अपने जीवन की आकांक्षाओं को पूरा करना चाहती थी और संभवतः विवाह को लेकर उनके विचार भिन्न थे।

स्वतंत्रता संग्राम में भागीदारी: लेखिका का स्वतंत्रता संग्राम में भाग लेना और भाषण देना उनके पिता को पसंद नहीं था, जो उनके पिता की रूढ़िवादी सोच को दर्शाता है।

स्त्री के प्रति व्यवहार: लेखिका के पिता का लेखिका की माँ के साथ व्यवहार अच्छा नहीं था। लेखिका ऐसे व्यवहार को अनुचित मानती थी और स्त्री के प्रति सम्मानजनक व्यवहार की अपेक्षा रखती थी।

रंग भेद और उपेक्षा: बचपन में लेखिका के काले रंग के कारण उसके पिता का मन उसकी तरफ़ से उदासीन रहता था, जो लेखिका के लिए भावनात्मक आघात था और यह भी वैचारिक भिन्नता का एक पहलू था कि पिता बाहरी रूप को अधिक महत्व देते थे।

प्रश्न 5

इस आत्मकथ्य के आधार पर स्वाधीनता आंदोलन के परिदृश्य का चित्रण करते हुए उसमें मन्नू जी की भूमिका को रेखांकित कीजिए।
Solution: सन् 1946-47 के आसपास का समय भारत छोड़ो आंदोलन के चरम पर था। इस दौरान पूरे देश में हड़तालें, प्रभात फेरियाँ, जुलूस और नारेबाज़ी का माहौल था। यह राष्ट्रीय चेतना का एक ज्वलंत काल था।

मन्नू जी की भूमिका: लेखिका मन्नू भंडारी, अपने पिता और उनके साथियों के बीच होने वाली गोष्ठियों और राजनीतिक गतिविधियों से बचपन से ही प्रभावित थीं। उनकी शिक्षिका शीला अग्रवाल ने उन्हें स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रेरित किया। जब देश में नियम-कानून और मर्यादाएँ टूट रही थीं और आंदोलन उफान पर था, तब पिता की नाराज़गी की परवाह न करते हुए मन्नू जी पूरे उत्साह के साथ आंदोलन में कूद पड़ीं। उनमें संगठन क्षमता थी और वे विरोध करने के तरीकों से अच्छी तरह वाकिफ थीं। वे चौराहों पर बेझिझक भाषण देतीं, नारे लगातीं और हड़तालों में भाग लेतीं। इस प्रकार, उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में एक सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 6

लेखिका ने बचपन में अपने भाइयों के साथ गिल्ली डंडा तथा पतंग उड़ाने जैसे खेल भी खेले किंतु लड़की होने के कारण उनका दायरा घर की चारदीवारी तक सीमित था। क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ ऐसी ही हैं या बदल गई हैं, अपने परिवेश के आधार पर लिखिए।
Solution: लेखिका के समय में, लड़कियों को खेलने और पढ़ने की आज़ादी तो थी, लेकिन उनके खेलने का दायरा अक्सर गाँव की निर्धारित सीमाओं या घर तक ही सीमित रहता था, जैसा कि गिल्ली डंडा और पतंग उड़ाने जैसे खेलों में भाइयों के साथ खेलने के बावजूद महसूस होता था।

आज की स्थिति में बहुत बड़ा बदलाव आया है। आज लड़कियाँ केवल अपने गाँव या शहर तक ही सीमित नहीं हैं। वे उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए एक शहर से दूसरे शहर और यहाँ तक कि विदेशों तक जाती हैं। खेल के क्षेत्र में भी उन्होंने अपनी पहचान बनाई है, चाहे वह क्रिकेट हो, बैडमिंटन हो या अन्य कोई खेल। भारतीय महिलाएँ अब अंतरिक्ष तक पहुँच चुकी हैं और दुनिया भर में अपने देश का नाम रोशन कर रही हैं। इसलिए, यह कहना गलत नहीं होगा कि आज लड़कियों के लिए स्थितियाँ काफी बदल गई हैं और उन्हें पहले से कहीं अधिक अवसर और स्वतंत्रता प्राप्त है।

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Common mistakes

  • Confusing the father's strictness with a complete opposition to women's education.
  • Underestimating the psychological impact of the father's words on the author's self-esteem.
  • Failing to connect the author's personal experiences with the broader national movement.
  • Not fully grasping the symbolic meaning of 'bhatiyarkhana'.

Revision tips

  • Focus on the contrasting influences of the father and Shila Agarwal on the author.
  • Understand the historical context of the 1946-47 freedom struggle as described in the chapter.
  • Analyze the author's intellectual disagreements with her father, noting specific points of conflict.
  • Reflect on the comparison between the author's childhood experiences and the current situation for girls.
  • Pay attention to the author's active role in the independence movement.

Practice MCQs

Q1. लेखिका के पिता रसोई को 'भटियारखाना' क्यों कहते थे?

Q2. लेखिका पर किस शिक्षिका का गहरा प्रभाव पड़ा?

Q3. लेखिका को किस घटना के बाद अपने पिता के व्यवहार में अप्रत्याशित परिवर्तन महसूस हुआ?

Q4. लेखिका के पिता स्त्रियों की शिक्षा के बारे में क्या सोचते थे?

Q5. स्वाधीनता आंदोलन के दौरान लेखिका की क्या भूमिका थी?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान कक्षा 10 के हिंदी क्षितिज भाग 2 के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 14 'एक कहानी यह भी' पर केंद्रित हैं।

अध्याय 'एक कहानी यह भी' में लेखिका के जीवन पर किन दो मुख्य व्यक्तियों का प्रभाव दर्शाया गया है?

लेखिका के जीवन पर उनके पिता और उनकी शिक्षिका शीला अग्रवाल का गहरा प्रभाव दर्शाया गया है।

लेखिका के पिता रसोई को 'भटियारखाना' क्यों कहते थे?

लेखिका के पिता का मानना था कि रसोई का काम लड़कियों की क्षमता और प्रतिभा को नष्ट कर देता है, इसलिए वे इसे 'भटियारखाना' कहते थे।

लेखिका ने स्वाधीनता आंदोलन में किस प्रकार भाग लिया?

लेखिका ने स्वाधीनता आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिसमें भाषण देना, नारे लगाना और हड़तालें करना शामिल था।

क्या आज भी लड़कियों के लिए स्थितियाँ वैसी ही हैं जैसी लेखिका के बचपन में थीं?

नहीं, समाधान बताते हैं कि आज लड़कियों के लिए स्थितियाँ काफी बदल गई हैं और उन्हें शिक्षा तथा अन्य क्षेत्रों में अधिक स्वतंत्रता प्राप्त है।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद कर सकते हैं?

ये समाधान अध्याय की मुख्य अवधारणाओं, पात्रों के प्रभाव, ऐतिहासिक संदर्भ और लेखिका की भूमिका को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को समझने और उत्तर देने में मदद मिलती है।

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