NCERT Class 12 Mathematics Ganit-I: Chapter 2 — गणित
यह अध्याय 20, 'प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन', NCERT की कक्षा 12 गणित की पुस्तक 'गणित-I' का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह अध्याय त्रिकोणमितीय फलनों के प्रतिलोमों की अवधारणा को प्रस्तुत करता है, जो अध्याय 1 में फलन के प्रतिलोम के अध्ययन पर आधारित है। यह बताता है कि प्रतिलोम फलन का अस्तित्व तभी होता है जब फलन एकैकी और आच्छादक हो। त्रिकोणमितीय फलन अपने सामान्य प्रांतों में एकैकी और आच्छादक नहीं होते हैं, इसलिए उनके प्रतिलोमों के अस्तित्व के लिए प्रांतों और परिसरों पर प्रतिबंध लगाना आवश्यक है। अध्याय विभिन्न त्रिकोणमितीय फलनों जैसे साइन, कोसाइन, टैनजेंट आदि के लिए इन प्रतिबंधों और उनके संगत प्रतिलोम फलनों (जैसे sin⁻¹, cos⁻¹, tan⁻¹) की मुख्य शाखाओं पर चर्चा करता है। यह कलन, विज्ञान और अभियांत्रिकी में इन प्रतिलोम फलनों के महत्व पर भी प्रकाश डालता है। यह अध्याय छात्रों को प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों की मूल संकल्पनाओं और उनके अनुप्रयोगों को समझने में मदद करता है।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Mathematics |
| Book | Ganit-I |
| Chapter | Chapter 2 — गणित |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 4 minutes |
| Word count | 793 |
Learning outcomes
- Understand the concept of inverse functions and their existence criteria.
- Identify the need for restricting the domain and range of trigonometric functions to define their inverses.
- Define and understand the principal values of inverse trigonometric functions like sin⁻¹, cos⁻¹, tan⁻¹.
- Recognize the importance of inverse trigonometric functions in calculus and other fields.
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| प्रतिलोम फलन | Inverse function |
| त्रिकोणमितीय फलन | Trigonometric function |
| एकैकी | One-to-one (injective) |
| आच्छादक | Onto (surjective) |
| प्रांत | Domain |
| परिसर | Range |
| प्रतिबंध | Restriction |
| मुख्य शाखा | Principal branch |
| कलन | Calculus |
| अभियांत्रिकी | Engineering |
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Practice questions
- प्रतिलोम फलन के अस्तित्व के लिए क्या आवश्यक है? Answer: फलन का एकैकी और आच्छादक होना आवश्यक है।
- sin⁻¹ फलन का मुख्य परिसर क्या है? Answer: sin⁻¹ फलन का मुख्य परिसर [–π/2, π/2] है।
- त्रिकोणमितीय फलनों के प्रतिलोमों को परिभाषित करने के लिए प्रांतों पर प्रतिबंध क्यों लगाए जाते हैं? Answer: त्रिकोणमितीय फलन अपने सामान्य प्रांतों में एकैकी और आच्छादक नहीं होते हैं, इसलिए उनके प्रतिलोमों को परिभाषित करने के लिए प्रांतों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन सा फलन एकैकी और आच्छादक नहीं है?
Explanation: sine फलन अपने सामान्य प्रांत R में एकैकी और आच्छादक नहीं होता है, इसलिए इसके प्रतिलोम को परिभाषित करने के लिए प्रांत को प्रतिबंधित करना पड़ता है।
Q2. sin⁻¹ फलन का प्रांत क्या है?
Explanation: sin⁻¹ फलन का प्रांत वह परिसर होता है जिस पर sine फलन को एकैकी और आच्छादक बनाया जाता है, जो कि [–1, 1] है।
Q3. प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन किस क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?
Explanation: प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन कलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, विशेष रूप से समाकल (Integrals) को परिभाषित करने में।
Q4. sin फलन के लिए मुख्य परिसर क्या है जब इसे sin⁻¹ के रूप में परिभाषित किया जाता है?
Explanation: sin⁻¹ फलन की मुख्य शाखा का परिसर [–π/2, π/2] होता है।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा कथन सत्य है?
Explanation: sin⁻¹ फलन का प्रांत [–1, 1] होता है, जो sine फलन का परिसर था।
Frequently asked questions
प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन क्या हैं?
प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलन वे फलन हैं जो त्रिकोणमितीय फलनों के व्युत्क्रम (inverse) होते हैं। इन्हें परिभाषित करने के लिए त्रिकोणमितीय फलनों के प्रांतों और परिसरों को प्रतिबंधित किया जाता है।
sin⁻¹ फलन का मुख्य मान क्या होता है?
sin⁻¹ फलन का मुख्य मान वह मान है जो उसके मुख्य परिसर [–π/2, π/2] में आता है।
क्या सभी त्रिकोणमितीय फलनों के प्रतिलोम होते हैं?
नहीं, त्रिकोणमितीय फलन अपने सामान्य प्रांतों में एकैकी और आच्छादक नहीं होते हैं, इसलिए उनके प्रतिलोमों को परिभाषित करने के लिए उनके प्रांतों को प्रतिबंधित करना पड़ता है।
प्रतिलोम त्रिकोणमितीय फलनों का उपयोग कहाँ होता है?
इनका उपयोग कलन (Calculus) में समाकल (Integrals) को परिभाषित करने के लिए, तथा विज्ञान और अभियांत्रिकी के क्षेत्र में होता है।
sin⁻¹ फलन का प्रांत क्या है?
sin⁻¹ फलन का प्रांत [–1, 1] है।
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NCERT Class 12 Mathematics — Ganit-I — Chapter 2 — गणित. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.