कक्षा 9 हिंदी स्पर्श NCERT समाधान: पाठ 1 - धूल (रामविलास शर्मा)

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यह पृष्ठ कक्षा 9 की हिंदी स्पर्श पुस्तक के पाठ 1, 'धूल', रामविलास शर्मा द्वारा लिखित, के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ धूल के महत्व, विशेषकर ग्रामीण परिवेश और बचपन से उसके गहरे संबंध पर प्रकाश डालता है। समाधानों में धूल को शिशु के सौंदर्य प्रसाधन, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भक्ति के प्रतीक के रूप में समझाया गया है। यह पाठ शहरी सभ्यता की कृत्रिमता और धूल से बचने की प्रवृत्ति पर भी व्यंग्य करता है, जबकि ग्रामीण जीवन की सहजता और प्रकृति से जुड़ाव को महत्व देता है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, मुख्य अवधारणाओं को स्पष्ट करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter1. रामविलास शर्मा - धूल

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के पाठ 1 'धूल' के ये NCERT समाधान रामविलास शर्मा के निबंध पर आधारित हैं। इनमें धूल के महत्व को विभिन्न दृष्टियों से समझाया गया है, जैसे कि शिशु के लिए इसका सौंदर्यवर्धक होना, मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भक्ति का प्रतीक होना, और अखाड़े की मिट्टी का विशेष स्थान। समाधान शहरी सभ्यता की बनावटीपन और धूल से दूरी पर व्यंग्य करते हैं, जबकि ग्रामीण जीवन की सहजता और प्रकृति से जुड़ाव की सराहना करते हैं। यह छात्रों को पाठ के मूल भाव को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • धूल के महत्व को विभिन्न संदर्भों में समझना।
  • शिशु के सौंदर्य और सहजता में धूल की भूमिका का विश्लेषण करना।
  • मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भक्ति की अभिव्यक्ति के रूप में धूल को पहचानना।
  • शहरी और ग्रामीण सभ्यता के बीच धूल के प्रति दृष्टिकोण का अंतर स्पष्ट करना।
  • रामविलास शर्मा के व्यंग्यात्मक शैली को समझना।
  • पाठ में प्रयुक्त साहित्यिक भाषा और भावों की व्याख्या करना।

Topics covered

Paper topics

  • धूल का महत्व
  • शिशु और धूल
  • मातृभूमि के प्रति श्रद्धा और भक्ति
  • अखाड़े की मिट्टी
  • शहरी सभ्यता की कृत्रिमता
  • ग्रामीण परिवेश की सहजता
  • रामविलास शर्मा की व्यंग्य शैली
  • सौंदर्य और धूल
  • पार्थिवता और बनावट
  • साहित्यिक व्याख्या
  • प्रकृति और धूल का संबंध
  • बालकृष्ण और धूल

Important topics

  • धूल का प्रतीकात्मक अर्थ (श्रद्धा, भक्ति, सौंदर्य)
  • शहरी बनाम ग्रामीण सभ्यता का दृष्टिकोण
  • शिशु के जीवन में धूल का स्थान
  • अखाड़े की मिट्टी का विशेष महत्व
  • लेखक का व्यंग्य

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

हीरे के प्रेमी उसे किस रूप में पसंद करते हैं?
Solution: हीरे के प्रेमी हीरे को उसकी प्राकृतिक अवस्था में नहीं, बल्कि उसे तराशकर, साफ़-सुथरा और पूरी तरह से सुडौल बनाए जाने पर पसंद करते हैं। वे ऐसे हीरे को महत्व देते हैं जो अपनी चमक और गुणों से आँखों को चकाचौंध कर दे।

प्रश्न 2

लेखक ने संसार में किस प्रकार के सुख को दुर्लभ माना है?
Solution: लेखक ने संसार में उस सुख को दुर्लभ माना है जो अखाड़े की मिट्टी में लेटने और उससे देह को मलने से प्राप्त होता है। यह मिट्टी विशेष होती है क्योंकि इसे तेल और मट्ठे से सिझाया जाता है, जिससे यह पवित्र हो जाती है और इसे देवताओं पर भी चढ़ाया जाता है। इस पवित्र मिट्टी का स्पर्श पाना अत्यंत दुर्लभ सुख है।

प्रश्न 3

मिट्टी की आभा क्या है? उसकी पहचान किससे होती है?
Solution: लेखक के अनुसार, मिट्टी की आभा का नाम 'धूल' है। मिट्टी की पहचान भी उसी की धूल से होती है। जब मिट्टी में चमक या विशेष गुण उत्पन्न होते हैं, तो वह धूल के रूप में प्रकट होती है।

प्रश्न 4

धूल के बिना किसी शिशु की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती?
Solution: धूल के बिना शिशु की कल्पना इसलिए नहीं की जा सकती क्योंकि धूल शिशु के जीवन का एक अभिन्न अंग है। माँ की गोद से उतरकर जब शिशु मातृभूमि पर घुटनों के बल चलना सीखता है, तो वह धूल से सनकर ही निखरता है। यह धूल उसके मुख पर लगती है तो उसकी शोभा और भी बढ़ जाती है। धूल में लिपटे रहने पर ही शिशु की सुंदरता बढ़ती है, इसीलिए उन्हें 'धूल भरे हीरे' कहा जाता है। धूल शिशु का प्राकृतिक सौंदर्य प्रसाधन है।

प्रश्न 5

हमारी सभ्यता धूल से क्यों बचना चाहती है?
Solution: हमारी सभ्यता धूल से इसलिए बचना चाहती है क्योंकि वह ऊँचाइयों को छूना चाहती है और धूल को सुंदरता के लिए एक बाधा मानती है। शहरी सभ्यता में बनावट और कृत्रिमता को अधिक महत्व दिया जाता है। वे वास्तविकता से दूर रहकर कल्पनाओं में जीना पसंद करते हैं और धूल से बचने के लिए ऊँचे-ऊँचे घरों में रहना चाहते हैं, ताकि उनके बच्चे धूल से दूर रहें।

प्रश्न 6

अखाड़े की मिट्टी की क्या विशेषता होती है?
Solution: अखाड़े की मिट्टी साधारण मिट्टी नहीं होती, बल्कि यह अत्यंत पवित्र मानी जाती है। इसे तेल और मट्ठे से सिझाया जाता है, जिससे यह विशेष गुणों से युक्त हो जाती है। पहलवान इस मिट्टी को पूजते हैं क्योंकि यह उनके शरीर को मजबूत बनाती है। इस मिट्टी का स्पर्श पाना सबसे बड़ा सुख माना जाता है और इसे देवताओं पर भी चढ़ाया जाता है।

प्रश्न 7

श्रद्धा, भक्ति, स्नेह की व्यंजना के लिए धूल सर्वोत्तम साधन किस प्रकार है?
Solution: धूल श्रद्धा, भक्ति और स्नेह जैसी भावनाओं को व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम है। वीर योद्धा अपनी श्रद्धा जताने के लिए धूल को आँखों पर लगाते हैं। मातृभूमि के प्रति अपनी भक्ति व्यक्त करने के लिए लोग धूल को माथे से लगाते हैं। इसी प्रकार, धूल में सने शिशु को चूमकर माता-पिता अपना स्नेह प्रकट करते हैं। इस प्रकार, धूल इन पवित्र भावनाओं की अभिव्यक्ति का एक सहज और सर्वोत्तम साधन बनती है।

प्रश्न 8

इस पाठ में लेखक ने नगरीय सभ्यता पर क्या व्यंग्य किया है?
Solution: लेखक ने नगरीय सभ्यता पर यह व्यंग्य किया है कि वह सहजता के स्थान पर कृत्रिमता को अधिक महत्व देती है। शहरी लोग बनावट और श्रृंगार को प्राथमिकता देते हैं और वास्तविकता से दूर रहकर एक कृत्रिम जीवन जीते हैं। वे धूल जैसी प्राकृतिक चीज़ से बचना चाहते हैं और इसके लिए ऊँचे-ऊँचे घरों में रहते हैं। लेखक ऐसे लोगों पर भी कटाक्ष करते हैं जो अखाड़े की मिट्टी से उबकाई महसूस करते हैं और काँच के हीरे पसंद करते हैं, जो बनावटीपन का प्रतीक है।

प्रश्न 9

लेखक 'बालकृष्ण' के मुँह पर छाई धूल को श्रेष्ठ क्यों मानता है?
Solution: लेखक 'बालकृष्ण' के मुँह पर लगी धूल को श्रेष्ठ इसलिए मानता है क्योंकि यह धूल उनके सौंदर्य को और भी अधिक निखार देती है। यह शिशु की सहज, प्राकृतिक सुंदरता को उजागर करती है, जो किसी भी बनावटी प्रसाधन से संभव नहीं है। यह धूल बालकृष्ण की पार्थिवता और मासूमियत का प्रतीक है, जो उनकी सुंदरता में चार चाँद लगा देती है।

प्रश्न 10

लेखक ने धूल और मिट्टी में क्या अंतर बताया है?
Solution: लेखक ने धूल और मिट्टी के बीच का अंतर शरीर और आत्मा के समान बताया है। वे दोनों को एक दूसरे का पूरक मानते हैं, जैसे देह और प्राण या चाँद और चाँदनी। मिट्टी की आभा ही धूल है और मिट्टी की पहचान भी धूल से ही होती है। जब मिट्टी में एक विशेष चमक या पवित्रता उत्पन्न होती है, तो वह धूल का रूप ले लेती है।

प्रश्न 11

ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के कौन-कौन से सुंदर चित्र प्रस्तुत करती है?
Solution: ग्रामीण परिवेश में प्रकृति धूल के कई मनमोहक चित्र प्रस्तुत करती है:
  • शाम के समय, जब अमराइयों के पीछे से सूर्य की किरणें निकलती हैं और धूल पर पड़ती हैं, तो ऐसा लगता है मानो आकाश पर सोने की परत छा गई हो।
  • सांयकाल की गोधूलि बेला में उड़ने वाली धूल का दृश्य अत्यंत सुंदर होता है, जो विशेष रूप से ग्रामीण परिवेश का हिस्सा है।
  • शिशु के मुख पर लगी धूल फूलों की पंखुड़ियों के समान सुंदर लगती है और उसकी मासूमियत को और बढ़ा देती है।

Common mistakes

  • धूल को केवल गंदगी समझना और उसके सकारात्मक पहलुओं को अनदेखा करना।
  • शहरी सभ्यता की कृत्रिमता और ग्रामीण जीवन की सहजता के बीच के अंतर को ठीक से न समझना।
  • पाठ के व्यंग्यात्मक लहजे को न पकड़ पाना।
  • धूल के प्रतीकात्मक अर्थों (जैसे श्रद्धा, भक्ति) को समझने में चूक करना।

Revision tips

  • पाठ के मुख्य विचारों को रेखांकित करें, विशेष रूप से धूल के महत्व पर केंद्रित बिंदुओं को।
  • शहरी और ग्रामीण जीवन शैली के प्रति लेखक के दृष्टिकोण की तुलना करें।
  • उन वाक्यों या अंशों पर ध्यान दें जहाँ लेखक व्यंग्य करता है।
  • धूल के प्रतीकात्मक अर्थों को याद करने के लिए फ्लैशकार्ड का उपयोग करें।

Practice MCQs

Q1. हीरे के प्रेमी हीरे को किस रूप में पसंद करते हैं?

Q2. लेखक ने संसार में किस प्रकार के सुख को दुर्लभ माना है?

Q3. मिट्टी की आभा को लेखक ने क्या नाम दिया है?

Q4. धूल के बिना शिशु की कल्पना क्यों नहीं की जा सकती?

Q5. हमारी सभ्यता धूल से क्यों बचना चाहती है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के पाठ 1 का शीर्षक क्या है और इसके लेखक कौन हैं?

कक्षा 9 हिंदी स्पर्श के पाठ 1 का शीर्षक 'धूल' है और इसके लेखक रामविलास शर्मा हैं।

लेखक के अनुसार, धूल का शिशु के लिए क्या महत्व है?

लेखक के अनुसार, धूल शिशु के लिए सौंदर्य प्रसाधन का काम करती है। धूल में सने शिशु की शोभा बढ़ती है और वे 'धूल भरे हीरे' कहलाते हैं।

लेखक ने किस प्रकार के सुख को दुर्लभ माना है?

लेखक ने अखाड़े की मिट्टी में लेटने और मलने के सुख को दुर्लभ माना है, क्योंकि यह मिट्टी तेल और महे से सिझाई जाती है और पवित्र होती है।

हमारी सभ्यता धूल से क्यों बचना चाहती है?

हमारी सभ्यता धूल से इसलिए बचना चाहती है क्योंकि वह आसमान छूने की इच्छा रखती है, धूल को सुंदरता के लिए खतरा मानती है और बनावटीपन को अधिक महत्व देती है।

पाठ 'धूल' में लेखक किस पर व्यंग्य करता है?

लेखक नगरीय सभ्यता के कृत्रिमता, बनावट-श्रृंगार और वास्तविकता से दूरी पर व्यंग्य करता है, जो धूल जैसी सहज और प्राकृतिक चीज़ से बचना चाहती है।

धूल, श्रद्धा, भक्ति और स्नेह की व्यंजना कैसे करती है?

धूल को आँखों पर लगाकर श्रद्धा, माथे से लगाकर भक्ति और शिशु को धूल में सने देखकर स्नेह प्रकट किया जाता है, इस प्रकार यह इन भावनाओं को व्यक्त करने का साधन बनती है।

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