कक्षा 9 विज्ञान: जीवों में विविधता - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 7, 'जीवों में विविधता' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता, वर्गीकरण के आधारभूत लक्षण जैसे कोशिका संरचना, निवास स्थान, और विकासवादी जटिलता पर चर्चा की गई है। समाधान व्हिटेकर के पांच जगत वर्गीकरण (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया) और विभिन्न पदानुक्रमों को स्पष्ट करते हैं। यह छात्रों को पौधों और जंतुओं के बीच अंतर, विभिन्न जंतु समूहों (जैसे पोरिफेरा, सिलेंटरेटा, एनालिडा, आर्थोपोडा) और पादप समूहों (जैसे टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म) की विशेषताओं को समझने में मदद करता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन हैं, जो छात्रों को जटिल अवधारणाओं को सरलता से समझने और याद रखने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectविज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. जीवों में विविधता

Chapter summary

कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 7 'जीवों में विविधता' के ये NCERT समाधान जीवों के वर्गीकरण के महत्व और विभिन्न आधारों पर प्रकाश डालते हैं। इसमें कोशिका संरचना, विकासवादी जटिलता, और व्हिटेकर के पांच-जगत वर्गीकरण प्रणाली का विस्तृत विवरण शामिल है। समाधान विभिन्न पादप और जंतु समूहों के बीच अंतर स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्रों को जीवों की विशाल विविधता को व्यवस्थित रूप से समझने में मदद मिलती है। यह अध्याय परीक्षा की तैयारी के लिए आवश्यक है।

Learning outcomes

  • जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता और लाभों को समझना।
  • वर्गीकरण के विभिन्न आधारभूत लक्षणों की पहचान करना।
  • व्हिटेकर के पांच-जगत वर्गीकरण प्रणाली को समझना।
  • पादप और जंतु जगत के प्रमुख वर्गों के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • विभिन्न जंतु और पादप समूहों की विशेषताओं का वर्णन करना।
  • आदिम और उन्नत जीवों के बीच के अंतर को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • जीवों में विविधता
  • वर्गीकरण की आवश्यकता
  • वर्गीकरण के आधारभूत लक्षण
  • कोशिका संरचना
  • व्हिटेकर का पांच-जगत वर्गीकरण
  • मोनेरा जगत
  • प्रॉटिस्टा जगत
  • पादप जगत का वर्गीकरण
  • जंतु जगत का वर्गीकरण
  • आदिम और उन्नत जीव
  • जटिलता का विकास
  • वर्गीकरण पदानुक्रम

Important topics

  • जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता और लाभ
  • व्हिटेकर का पांच-जगत वर्गीकरण
  • पादप जगत के प्रमुख वर्ग
  • जंतु जगत के प्रमुख वर्ग
  • आदिम बनाम उन्नत जीव
  • कोशिका संरचना का महत्व

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Questions and Solutions

प्रश्न 1: हम जीवधारियों का वर्गीकरण क्यों करते हैं?

हम जीवधारियों का वर्गीकरण क्यों करते हैं?
Solution: हम जीवधारियों का वर्गीकरण निम्नलिखित कारणों से करते हैं:
  1. अध्ययन में सुगमता: पृथ्वी पर अनगिनत प्रकार के जीव पाए जाते हैं। इन सभी जीवों का व्यक्तिगत रूप से अध्ययन करना अत्यंत कठिन है। वर्गीकरण द्वारा जीवों को उनकी समानताओं और भिन्नताओं के आधार पर विभिन्न समूहों में बाँटा जाता है, जिससे उनका अध्ययन सरल हो जाता है।
  2. संबंधों का ज्ञान: वर्गीकरण से हमें विभिन्न जीवों के बीच विकासवादी संबंधों और उनकी समानता का पता चलता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि कौन से जीव एक-दूसरे से अधिक निकटता से संबंधित हैं।
  3. पहचान में आसानी: किसी भी नए जीव की खोज होने पर, उसे वर्गीकरण प्रणाली में उसके उपयुक्त स्थान पर रखकर आसानी से पहचाना जा सकता है।
  4. जैव विविधता को समझना: वर्गीकरण हमें पृथ्वी पर मौजूद विभिन्न प्रकार के जीवों और उनकी विविधता को व्यवस्थित रूप से समझने में सहायता करता है।

प्रश्न 2: अपने चारों ओर फैले जीव रूपों की विभिन्नता के तीन उदाहरण दें।

अपने चारों ओर फैले जीव रूपों की विभिन्नता के तीन उदाहरण दें।
Solution: हमारे चारों ओर पाए जाने वाले जीव रूपों की विभिन्नता के तीन उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. आकार में भिन्नता: कुछ जीव अत्यंत सूक्ष्म होते हैं जिन्हें नग्न आँखों से नहीं देखा जा सकता (जैसे बैक्टीरिया), जबकि कुछ जीव बहुत विशाल होते हैं (जैसे हाथी या व्हेल)।
  2. निवास स्थान में भिन्नता: कुछ जीव केवल पानी में रहते हैं (मछलियाँ, व्हेल), कुछ जमीन पर (शेर, हिरण), कुछ हवा में उड़ते हैं (पक्षी, कीड़े), और कुछ अत्यंत गर्म या ठंडे वातावरण में भी पाए जाते हैं (जैसे रेगिस्तान के जीव या ध्रुवीय भालू)।
  3. पोषण की विधि में भिन्नता: कुछ जीव अपना भोजन स्वयं बनाते हैं (जैसे पौधे, जो प्रकाश संश्लेषण करते हैं), जबकि अन्य जीव भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं (जैसे जंतु, जो पौधों या अन्य जंतुओं को खाते हैं)।

प्रश्न 3: जीवों के वर्गीकरण के लिए सर्वाधिक मुलभुत लक्षण क्या हो सकता है?

जीवों के वर्गीकरण के लिए सर्वाधिक मुलभुत लक्षण क्या हो सकता है?
  1. उनका निवास स्थान
  2. उनकी कोशिका संरचना
Solution: जीवों के वर्गीकरण के लिए सर्वाधिक मुलभुत लक्षण उनकी कोशिका संरचना है।

कारण:

  • कोशिका किसी भी जीव की मूल संरचनात्मक और कार्यात्मक इकाई होती है। कोशिका की संरचना, जैसे कि उसमें केंद्रक (nucleus) और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग (membrane-bound organelles) की उपस्थिति या अनुपस्थिति, जीवों के बीच मौलिक अंतर को दर्शाती है।
  • उदाहरण के लिए, प्रोकैरियोटिक कोशिकाएँ (जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक नहीं होता, जैसे मोनेरा जगत के जीव) यूकेरियोटिक कोशिकाओं (जिनमें सुस्पष्ट केंद्रक होता है, जैसे प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया) से मौलिक रूप से भिन्न होती हैं। यह अंतर जीवों के विकासवादी इतिहास और जटिलता के स्तर को समझने के लिए एक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
  • निवास स्थान एक महत्वपूर्ण कारक हो सकता है, लेकिन यह कोशिका संरचना जितना मौलिक नहीं है। एक ही प्रकार की कोशिका संरचना वाले जीव विभिन्न निवास स्थानों में पाए जा सकते हैं।

प्रश्न 4: जीवों के प्रारंभिक विभाजन के लिए किस मूल लक्षण को आधार बनाया गया?

जीवों के प्रारंभिक विभाजन के लिए किस मूल लक्षण को आधार बनाया गया?
Solution: जीवों के प्रारंभिक विभाजन के लिए मुख्य रूप से कोशिका संरचना को आधार बनाया गया।

इस आधार पर जीवों को दो मुख्य समूहों में बाँटा गया:

  1. प्रोकैरियोट्स (Prokaryotes): इनमें सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग नहीं होते हैं। उदाहरण: बैक्टीरिया (मोनेरा जगत)।
  2. यूकेरियोट्स (Eukaryotes): इनमें सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग होते हैं। उदाहरण: प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया।

इसके अतिरिक्त, एककोशिकीय (unicellular) और बहुकोशिकीय (multicellular) जीवों के बीच का अंतर भी एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक विभाजन का आधार बना।

प्रश्न 5: किस आधार पर जंतुओं और वनस्पतियों को एक-दुसरे से भिन्न वर्ग में रखा जाता है?

किस आधार पर जंतुओं और वनस्पतियों को एक-दुसरे से भिन्न वर्ग में रखा जाता है?
Solution: जंतुओं और वनस्पतियों (पौधों) को मुख्य रूप से निम्नलिखित आधारों पर एक-दूसरे से भिन्न वर्गों में रखा जाता है:
  1. पोषण की विधि: पौधे स्वपोषी (autotrophs) होते हैं, अर्थात वे प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। इसके विपरीत, जंतु परपोषी (heterotrophs) होते हैं, अर्थात वे भोजन के लिए प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पौधों या अन्य जंतुओं पर निर्भर रहते हैं।
  2. कोशिका भित्ति: पादप कोशिकाओं में कोशिका भित्ति (cell wall) पाई जाती है, जो मुख्य रूप से सेलूलोज़ से बनी होती है। जंतु कोशिकाओं में कोशिका भित्ति नहीं पाई जाती है।
  3. गतिशीलता: अधिकांश जंतु गतिशील होते हैं और एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा सकते हैं। अधिकांश पौधे स्थिर होते हैं और एक ही स्थान पर जुड़े रहते हैं, हालांकि उनके कुछ भाग (जैसे पत्तियाँ, फूल) गति कर सकते हैं।
  4. विकास और संगठन: पौधों का शरीर मुख्य रूप से भोजन बनाने की क्षमता के अनुसार विकसित होता है, जबकि जंतुओं का शरीर बाहर से भोजन ग्रहण करने और उसे पचाने के लिए विकसित होता है।

प्रश्न 1: आदिम जीव किन्हें कहते हैं? ये तथाकथित उन्नत जीवों से किस प्रकार भिन्न हैं?

आदिम जीव किन्हें कहते हैं? ये तथाकथित उन्नत जीवों से किस प्रकार भिन्न हैं?
Solution:

आदिम जीव (Primitive Organisms): आदिम जीव उन जीवों को कहा जाता है जिनकी शारीरिक संरचना में विकास के क्रम में बहुत लंबे समय से कोई महत्वपूर्ण परिवर्तन नहीं हुआ है। ये जीव अपेक्षाकृत सरल संरचना वाले होते हैं।

उन्नत जीव (Advanced Organisms): उन्नत जीव वे होते हैं जिनकी शारीरिक संरचना में समय के साथ पर्याप्त परिवर्तन, जटिलता और विशिष्टीकरण (specialization) हुआ है। ये जीव विकास के क्रम में बाद में विकसित हुए माने जाते हैं।

भिन्नताएँ:

  1. संरचनात्मक जटिलता: आदिम जीव सरल संरचना वाले होते हैं, जबकि उन्नत जीव अधिक जटिल और विशिष्ट संरचना वाले होते हैं।
  2. कोशिका संरचना: कई आदिम जीव प्रोकैरियोटिक होते हैं (जैसे बैक्टीरिया), जबकि अधिकांश उन्नत जीव यूकेरियोटिक होते हैं।
  3. श्रम-विभाजन: उन्नत जीवों में ऊतकों, अंगों और अंग-प्रणालियों का स्पष्ट श्रम-विभाजन पाया जाता है, जो आदिम जीवों में अनुपस्थित या बहुत कम होता है।
  4. विकासवादी इतिहास: आदिम जीव विकास के प्रारंभिक चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि उन्नत जीव विकास के बाद के और अधिक जटिल चरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।

प्रश्न 2: क्या उन्नत जीव और जटिल जीव एक होते हैं?

क्या उन्नत जीव और जटिल जीव एक होते हैं?
Solution: हाँ, सामान्यतः उन्नत जीव और जटिल जीव एक ही माने जाते हैं।

विकास के क्रम में, जैसे-जैसे जीव अधिक उन्नत होते जाते हैं, उनकी शारीरिक संरचना में जटिलता बढ़ती जाती है। जटिलता का अर्थ है विभिन्न प्रकार के ऊतकों, अंगों और अंग-प्रणालियों का विकास, जो विशिष्ट कार्यों को करने के लिए विशेषीकृत होते हैं। इसलिए, जो जीव अधिक उन्नत माने जाते हैं, वे अक्सर अधिक जटिल संरचना वाले होते हैं। उदाहरण के लिए, स्तनधारी (जैसे मनुष्य) को एक उन्नत और जटिल जीव माना जाता है क्योंकि उनमें विभिन्न अंग-प्रणालियाँ (जैसे पाचन तंत्र, श्वसन तंत्र, तंत्रिका तंत्र) अत्यंत विकसित और जटिल होती हैं।

प्रश्न 1: मोनेरा अथवा प्रॉटिस्टा जैसे जीवों के वर्गीकरण के मापदंड क्या है?

मोनेरा अथवा प्रॉटिस्टा जैसे जीवों के वर्गीकरण के मापदंड क्या है?
Solution: मोनेरा और प्रॉटिस्टा जगत के जीवों के वर्गीकरण के मुख्य मापदंड निम्नलिखित हैं:

मोनेरा जगत के लिए मापदंड:

  1. कोशिका संरचना: ये जीव प्रोकैरियोटिक होते हैं, अर्थात इनमें सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग नहीं होते हैं।
  2. संगठन का स्तर: ये जीव एककोशिकीय होते हैं।
  3. पोषण: ये स्वपोषी (प्रकाश संश्लेषी या रसायन संश्लेषी) या परपोषी हो सकते हैं।
  4. कोशिका भित्ति: कोशिका भित्ति उपस्थित हो सकती है, लेकिन इसकी संरचना अन्य जगतों से भिन्न होती है।

प्रॉटिस्टा जगत के लिए मापदंड:

  1. कोशिका संरचना: ये जीव यूकेरियोटिक होते हैं, अर्थात इनमें सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग होते हैं।
  2. संगठन का स्तर: ये जीव मुख्य रूप से एककोशिकीय होते हैं, लेकिन कुछ सरल बहुकोशिकीय रूप भी हो सकते हैं।
  3. पोषण: ये स्वपोषी (जैसे शैवाल) या परपोषी (जैसे प्रोटोजोआ) हो सकते हैं।
  4. गतिशीलता: इनमें गति के लिए सीलिया, फ्लैगेला या कूटपाद (pseudopodia) जैसे अंग पाए जा सकते हैं।

प्रश्न 2: प्रकाश-संश्लेषण करने वाले एककोशिक युकैरिओटिक जीव को आप किस जगत में रखेंगे?

प्रकाश-संश्लेषण करने वाले एककोशिक युकैरिओटिक जीव को आप किस जगत में रखेंगे?
Solution: प्रकाश-संश्लेषण करने वाले एककोशिक यूकेरियोटिक जीव को प्रॉटिस्टा (Protista) जगत में रखा जाएगा।

कारण:

  • यूकेरियोटिक: प्रश्न में स्पष्ट रूप से 'युकैरिओटिक' (eukaryotic) जीव का उल्लेख है, जिसका अर्थ है कि इसमें सुस्पष्ट केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांग होंगे। यह मोनेरा (जो प्रोकैरियोटिक होते हैं) से अलग है।
  • एककोशिक: यह जीव एककोशिकीय है।
  • प्रकाश-संश्लेषण: यह प्रकाश संश्लेषण करने में सक्षम है, जो इसे पादप जगत के कुछ सदस्यों (जैसे शैवाल) के समान बनाता है।

प्रॉटिस्टा जगत में ऐसे यूकेरियोटिक जीव शामिल हैं जो एककोशिकीय होते हैं और विभिन्न प्रकार के पोषण (स्वपोषी, परपोषी) प्रदर्शित करते हैं। कुछ प्रॉटिस्ट (जैसे डायटम और कुछ शैवाल) प्रकाश संश्लेषण करते हैं।

प्रश्न 3: वर्गीकरण के विभिन्न पदानुक्रमों में किस समूह में सर्वाधिक समान लक्षण वाले सबसे कम जीवों को और किस समूह में सबसे ज्यादा संख्या में जीवों को रखा जायेगा?

वर्गीकरण के विभिन्न पदानुक्रमों में किस समूह में सर्वाधिक समान लक्षण वाले सबसे कम जीवों को और किस समूह में सबसे ज्यादा संख्या में जीवों को रखा जायेगा?
Solution: वर्गीकरण के विभिन्न पदानुक्रमों में:
  1. सर्वाधिक समान लक्षण वाले सबसे कम जीवों का समूह: यह वर्गीकरण का सबसे निचला और सबसे विशिष्ट पदानुक्रम होता है, जिसे जाति (Species) कहते हैं। एक जाति के सभी जीव आपस में अत्यधिक समान होते हैं और आपस में प्रजनन कर सकते हैं।
  2. सबसे ज्यादा संख्या में जीवों का समूह: यह वर्गीकरण का सबसे ऊपरी और सबसे व्यापक पदानुक्रम होता है, जिसे जगत (Kingdom) कहते हैं। जगत में बहुत बड़े समूह के जीव शामिल होते हैं जिनमें कुछ सामान्य लक्षण तो होते हैं, लेकिन उनमें बहुत अधिक भिन्नता भी पाई जाती है।

वर्गीकरण पदानुक्रम (ऊपर से नीचे की ओर) इस प्रकार है: जगत (Kingdom) > संघ (Phylum) / विभाग (Division) > वर्ग (Class) > गण (Order) > कुल (Family) > वंश (Genus) > जाति (Species)। जैसे-जैसे हम जगत से जाति की ओर बढ़ते हैं, जीवों के बीच समानता बढ़ती जाती है और जीवों की संख्या घटती जाती है।

प्रश्न 1: सरलतम पौधों को किस वर्ग में रखा गया है?

सरलतम पौधों को किस वर्ग में रखा गया है?
Solution: सरलतम पौधों को सामान्यतः थैलोफाइटा (Thallophyta) वर्ग में रखा गया है।

थैलोफाइटा समूह में वे पौधे शामिल होते हैं जिनका शरीर सुस्पष्ट जड़, तना और पत्तियों में विभेदित नहीं होता है। इनका शरीर 'थैलस' (thallus) कहलाता है। इस समूह में शैवाल (algae), कवक (fungi) और कुछ हद तक ब्रायोफाइटा (bryophytes) के सरल सदस्य शामिल किए जाते हैं। ये पौधे अक्सर जलीय या नम वातावरण में पाए जाते हैं।

प्रश्न 2: टेरिडोफाइटा और फैनारोगैम में क्या अंतर है?

टेरिडोफाइटा और फैनारोगैम में क्या अंतर है?
Solution: टेरिडोफाइटा और फैनारोगैम (जिन्हें पुष्पोद्भिद भी कहते हैं) पौधों के दो प्रमुख समूह हैं, जिनमें मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

टेरिडोफाइटा (Pteridophyta):

  1. बीज: इनमें बीज नहीं बनते हैं। ये बीजाणुओं (spores) द्वारा प्रजनन करते हैं।
  2. जाइलम और फ्लोएम: इनमें जाइलम (xylem) और फ्लोएम (phloem) जैसे संवहन ऊतक (vascular tissues) पाए जाते हैं, जो इन्हें ब्रायोफाइटा से अलग करते हैं।
  3. शरीर: इनका शरीर जड़, तना और पत्तियों में विभेदित होता है।
  4. उदाहरण: फर्न (Ferns), हॉर्सटेल (Horsetails)।

फैनारोगैम (Phanerogams) / पुष्पोद्भिद (Angiosperms + Gymnosperms):

  1. बीज: इनमें बीज बनते हैं, जो भ्रूण को विकसित होने में मदद करते हैं।
  2. संवहन ऊतक: इनमें भी जाइलम और फ्लोएम पाए जाते हैं।
  3. पुष्प और फल: एंजियोस्पर्म (आवृतबीजी) में पुष्प और फल बनते हैं, जबकि जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी) में पुष्प नहीं बनते लेकिन बीज नग्न होते हैं।
  4. उदाहरण: जिम्नोस्पर्म (जैसे चीड़, देवदार) और एंजियोस्पर्म (जैसे आम, गुलाब, गेहूं)।

संक्षेप में, टेरिडोफाइटा बीज रहित संवहनी पौधे हैं, जबकि फैनारोगैम बीज वाले संवहनी पौधे हैं।

प्रश्न 3: जिम्नोस्पर्म और एन्जिओस्पर्म एक-दुसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?

जिम्नोस्पर्म और एन्जिओस्पर्म एक-दुसरे से किस प्रकार भिन्न हैं?
Solution: जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms) और एन्जिओस्पर्म (Angiosperms) दोनों ही बीज वाले पौधे (फैनारोगैम) हैं, लेकिन उनमें मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी):

  1. बीज: इनके बीज नग्न होते हैं, अर्थात ये किसी फल के अंदर बंद नहीं होते। ये बीज अक्सर शंकु (cones) पर लगे होते हैं।
  2. पुष्प: इनमें वास्तविक पुष्प नहीं बनते हैं।
  3. अंडाशय: इनमें अंडाशय (ovary) नहीं होता है, जो बीजांड (ovule) को घेरे रखे।
  4. उदाहरण: चीड़ (Pinus), देवदार (Deodar), साइकस (Cycads)।

एन्जिओस्पर्म (आवृतबीजी):

  1. बीज: इनके बीज फल के अंदर बंद होते हैं।
  2. पुष्प: इनमें पूर्ण विकसित पुष्प पाए जाते हैं।
  3. अंडाशय: इनमें अंडाशय उपस्थित होता है, जो निषेचन के बाद फल में विकसित हो जाता है।
  4. उदाहरण: आम (Mango), गुलाब (Rose), गेहूं (Wheat), मटर (Pea)।

मुख्य अंतर यह है कि जिम्नोस्पर्म में बीज नग्न होते हैं और फल नहीं बनता, जबकि एन्जिओस्पर्म में बीज फल के अंदर सुरक्षित रहते हैं और पुष्प बनते हैं।

प्रश्न 1: पोरिफेरा और सिलेंटरेटा वर्ग के जंतुओं में क्या अंतर है?

पोरिफेरा और सिलेंटरेटा वर्ग के जंतुओं में क्या अंतर है?
Solution: पोरिफेरा (Porifera) और सिलेंटरेटा (Coelenterata) जंतु जगत के दो प्रमुख संघ (phyla) हैं, जिनमें मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

पोरिफेरा (Porifera):

  1. शरीर: इनका शरीर छिद्रों (pores) से ढका होता है, जिन्हें ऑस्टिया (ostia) कहते हैं। इन छिद्रों से जल शरीर में प्रवेश करता है।
  2. ऊतक: इनमें ऊतकों का अभाव होता है; कोशिकाएँ अव्यवस्थित होती हैं।
  3. शरीर गुहा: शरीर में एक केंद्रीय गुहा (spongocoel) होती है जो एक मुख (osculum) द्वारा बाहर खुलती है।
  4. समरूपता: इनमें सामान्यतः अरीय समरूपता (radial symmetry) का अभाव होता है या यह बहुत कम होती है (असममित)।
  5. उदाहरण: साइकॉन (Scypha), स्पंजिला (Spongilla), यूप्लेक्टेला (Euplectella)।

सिलेंटरेटा (Coelenterata) / नाइडेरिया (Cnidaria):

  1. शरीर: इनका शरीर एक थैली के समान होता है जिसमें एक ही बाह्य द्वार (mouth) होता है जो पाचन गुहा (coelenteron) में खुलता है।
  2. ऊतक: इनमें ऊतकों का विकास हो चुका होता है (जैसे एक्टोडर्म और एंडोडर्म)।
  3. समरूपता: इनमें अरीय समरूपता (radial symmetry) पाई जाती है।
  4. विशेष कोशिकाएँ: इनमें विशेष प्रकार की दंश कोशिकाएँ (cnidocytes) पाई जाती हैं, जिनमें निमेटोसिस्ट (nematocysts) होते हैं, जिनका उपयोग शिकार पकड़ने और रक्षा के लिए होता है।
  5. उदाहरण: हाइड्रा (Hydra), जेलीफिश (Jellyfish), समुद्री एनीमोन (Sea Anemone)।

प्रश्न 2: एनालिडा के जंतु आर्थोपोडा के जंतुओं से किस प्रकार भिन्न हैं?

एनालिडा के जंतु आर्थोपोडा के जंतुओं से किस प्रकार भिन्न हैं?
Solution: एनालिडा (Annelida) और आर्थोपोडा (Arthropoda) जंतु जगत के दो प्रमुख संघ हैं, जिनमें निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं:

एनालिडा (Annelida):

  1. शरीर: इनका शरीर लम्बा, बेलनाकार और स्पष्ट रूप से खंडों (segments) में विभाजित होता है। ये खंड बाह्य और आंतरिक दोनों रूप से समान होते हैं (मेटामेरिक सेगमेंटेशन)।
  2. पाँव: इनमें पाँव (appendages) नहीं पाए जाते हैं।
  3. श्वसन: श्वसन सामान्यतः त्वचा द्वारा होता है।
  4. रक्त परिसंचरण: इनमें बंद प्रकार का रक्त परिसंचरण तंत्र पाया जाता है।
  5. उदाहरण: केंचुआ (Earthworm), जोंक (Leech)।

आर्थोपोडा (Arthropoda):

  1. शरीर: इनका शरीर भी खंडों में विभाजित होता है, लेकिन ये खंड सामान्यतः सिर (head), वक्ष (thorax) और उदर (abdomen) में स्पष्ट रूप से विभेदित होते हैं।
  2. पाँव: इनमें संधिपाद (jointed appendages) पाए जाते हैं, जो चलने, पकड़ने आदि में सहायक होते हैं।
  3. श्वसन: श्वसन के लिए श्वास रंध्र (spiracles) और श्वास नलिकाएँ (tracheae) पाई जाती हैं।
  4. रक्त परिसंचरण: इनमें खुले प्रकार का रक्त परिसंचरण तंत्र पाया जाता है।
  5. कंकाल: इनके शरीर पर काइटिन (chitin) का बना बाह्य कंकाल (exoskeleton) होता है।
  6. उदाहरण: तिलचट्टा (Cockroach), मकड़ी (Spider), केकड़ा (Crab), कीट (Insects)।

मुख्य अंतर शरीर के खंडों के संगठन, पाँवों की उपस्थिति, श्वसन अंग और रक्त परिसंचरण तंत्र के प्रकार में है।

प्रश्न 3: जल-स्थलचर और सरीसृप में क्या अंतर है?

जल-स्थलचर और सरीसृप में क्या अंतर है?
Solution: जल-स्थलचर (Amphibians) और सरीसृप (Reptiles) कशेरुकी (vertebrates) जंतुओं के दो अलग-अलग वर्ग हैं, जिनमें मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:

जल-स्थलचर (Amphibians):

  1. जीवन चक्र: इनका जीवन चक्र दो चरणों में पूरा होता है - जलीय (लार्वा अवस्था) और स्थलीय (वयस्क अवस्था)। लार्वा अवस्था में गलफड़े (gills) होते हैं और वयस्क अवस्था में फेफड़े (lungs) होते हैं।
  2. त्वचा: इनकी त्वचा चिकनी, नम और श्लेष्म ग्रंथियों (mucous glands) से युक्त होती है। ये त्वचा से भी श्वसन कर सकते हैं।
  3. अंडे: ये सामान्यतः पानी में अंडे देते हैं, जिनमें कवच नहीं होता।
  4. तापमान: ये असमतापी (ectothermic/cold-blooded) होते हैं, अर्थात इनके शरीर का तापमान बाहरी वातावरण के अनुसार बदलता रहता है।
  5. उदाहरण: मेंढक (Frog), सैलामैंडर (Salamander), न्यूट (Newt)।

सरीसृप (Reptiles):

  1. जीवन चक्र: ये पूर्ण रूप से स्थलीय जीवन के लिए अनुकूलित होते हैं।
  2. त्वचा: इनकी त्वचा शुष्क, खुरदरी और शल्कों (scales) या प्लेटों (scutes) से ढकी होती है। ये त्वचा से श्वसन नहीं करते।
  3. अंडे: ये जमीन पर अंडे देते हैं, जिनमें एक सुरक्षात्मक कवच होता है।
  4. तापमान: ये भी असमतापी (ectothermic/cold-blooded) होते हैं।
  5. उदाहरण: साँप (Snake), छिपकली (Lizard), कछुआ (Turtle), मगरमच्छ (Crocodile)।

मुख्य अंतर जीवन चक्र, त्वचा की प्रकृति, अंडे देने के स्थान और श्वसन के तरीके में है।

प्रश्न 4: पक्षी वर्ग और स्तनपायी वर्ग के जंतुओं में क्या अंतर है?

पक्षी वर्ग और स्तनपायी वर्ग के जंतुओं में क्या अंतर है?
Solution: पक्षी (Aves) और स्तनपायी (Mammalia) कशेरुकी जंतुओं के दो अत्यंत विकसित वर्ग हैं, जिनमें निम्नलिखित मुख्य अंतर हैं:

पक्षी वर्ग (Aves):

  1. शरीर का आवरण: इनके शरीर पर पंख (feathers) पाए जाते हैं।
  2. अंग: अग्रपाद (forelimbs) उड़ने के लिए पंखों में रूपांतरित होते हैं।
  3. श्वसन: श्वसन फेफड़ों द्वारा होता है, जिसमें वायुकोश (air sacs) भी सहायक होते हैं।
  4. हृदय: हृदय चार-कोष्ठीय होता है।
  5. अंडे: ये अंडे देते हैं (अंडप्रजक)।
  6. तापमान: ये समतापी (endothermic/warm-blooded) होते हैं, अर्थात इनके शरीर का तापमान स्थिर रहता है।
  7. उदाहरण: कौआ (Crow), कबूतर (Pigeon), चील (Eagle), शुतुरमुर्ग (Ostrich)।

स्तनपायी वर्ग (Mammalia):

  1. शरीर का आवरण: इनके शरीर पर बाल (hair) पाए जाते हैं।
  2. अंग: अग्रपाद सामान्यतः चलने, दौड़ने या अन्य कार्यों के लिए होते हैं।
  3. श्वसन: श्वसन केवल फेफड़ों द्वारा होता है।
  4. हृदय: हृदय चार-कोष्ठीय होता है।
  5. बच्चे: अधिकांश स्तनपायी बच्चे देते हैं (जरायुज/viviparous), और वे अपने बच्चों को दूध पिलाते हैं। कुछ अपवाद (जैसे प्लैटिपस) अंडे देते हैं।
  6. तापमान: ये समतापी (endothermic/warm-blooded) होते हैं।
  7. उदाहरण: मनुष्य (Human), कुत्ता (Dog), बिल्ली (Cat), हाथी (Elephant), व्हेल (Whale)।

मुख्य अंतर शरीर के आवरण (पंख बनाम बाल), अग्रपादों का रूपांतरण, प्रजनन की विधि (अंडे देना बनाम बच्चे देना), और दूध ग्रंथियों की उपस्थिति में है।

Q1. जीवों के वर्गीकरण से क्या लाभ है?

जीवों के वर्गीकरण से क्या लाभ है?
Solution: जीवों के वर्गीकरण से निम्नलिखित प्रमुख लाभ हैं:
  1. अध्ययन में सुगमता: यह जीवों के विशाल समूह को छोटे, प्रबंधनीय समूहों में विभाजित करके उनके अध्ययन को सरल बनाता है।
  2. पहचान: यह किसी भी जीव की पहचान करने में मदद करता है, क्योंकि उसे उसके विशिष्ट लक्षणों के आधार पर एक निश्चित समूह में रखा जा सकता है।
  3. संबंधों का ज्ञान: यह विभिन्न जीवों के बीच विकासवादी संबंधों और उनकी समानता को समझने में सहायता करता है।
  4. जैव विविधता का ज्ञान: यह पृथ्वी पर मौजूद विभिन्न प्रकार के जीवों और उनकी विविधता को व्यवस्थित रूप से समझने का एक ढाँचा प्रदान करता है।
  5. भविष्य के शोध: यह भविष्य के शोध के लिए एक आधार प्रदान करता है, जिससे नए जीवों की खोज और उनके अध्ययन में मदद मिलती है।

Q2. वर्गीकरण में पदानुक्रम निर्धारण के लिए दो लक्षणों में से आप किस लक्षण का चयन करेंगे?

वर्गीकरण में पदानुक्रम निर्धारण के लिए दो लक्षणों में से आप किस लक्षण का चयन करेंगे?
Solution: वर्गीकरण में पदानुक्रम निर्धारण के लिए, दो लक्षणों में से कोशिका संरचना को अधिक मौलिक और महत्वपूर्ण लक्षण माना जाएगा।

कारण:

  • कोशिका संरचना: यह जीवों के विकासवादी इतिहास और उनकी मौलिक प्रकृति को दर्शाती है। प्रोकैरियोटिक और यूकेरियोटिक कोशिकाओं के बीच का अंतर एक बहुत बड़ा विभाजन है। यह लक्षण जीवों के सबसे बुनियादी स्तर पर भिन्नता को दर्शाता है।
  • निवास स्थान: जबकि निवास स्थान जीवों के अनुकूलन को समझने के लिए महत्वपूर्ण है, यह कोशिका संरचना जितना मौलिक नहीं है। एक ही प्रकार की कोशिका संरचना वाले जीव विभिन्न निवास स्थानों में पाए जा सकते हैं। निवास स्थान वर्गीकरण का एक गौण लक्षण हो सकता है, लेकिन प्राथमिक विभाजन के लिए कोशिका संरचना अधिक उपयुक्त है।

इसलिए, पदानुक्रम निर्धारण के लिए कोशिका संरचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए क्योंकि यह जीवों के बीच सबसे गहरा और मौलिक अंतर प्रस्तुत करती है।

Q3. जीवों के पांच जगत में वर्गीकरण के आधार की व्याख्या कीजिए।

जीवों के पांच जगत में वर्गीकरण के आधार की व्याख्या कीजिए।
Solution: आर. एच. व्हिटेकर (R.H. Whittaker) ने 1969 में जीवों को पांच जगतों (Kingdoms) में वर्गीकृत किया था। इस वर्गीकरण के मुख्य आधार निम्नलिखित हैं:
  1. कोशिका संरचना: क्या कोशिका प्रोकैरियोटिक है (जैसे मोनेरा) या यूकेरियोटिक है (जैसे प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया)?
  2. जीव का प्रकार: क्या जीव एककोशिकीय (unicellular) है (जैसे प्रोटिस्टा) या बहुकोशिकीय (multicellular) है (जैसे फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया)?
  3. पोषण की विधि: क्या जीव स्वपोषी (autotrophic) है, जो अपना भोजन स्वयं बनाता है (जैसे पौधे), या परपोषी (heterotrophic) है, जो भोजन के लिए दूसरों पर निर्भर रहता है (जैसे जंतु, कवक)?
  4. संगठन का स्तर: क्या जीव में केवल कोशिकाएँ हैं, या ऊतक, अंग और अंग-प्रणालियाँ विकसित हुई हैं?
  5. प्रजनन: प्रजनन की विधि (अलैंगिक या लैंगिक) भी एक सहायक मापदंड हो सकती है।

इन आधारों पर जीवों को पांच जगतों में बाँटा गया है: मोनेरा (Monera), प्रोटिस्टा (Protista), फंजाई (Fungi), प्लांटी (Plantae), और एनिमेलिया (Animalia)।

Q4. पादप जगत के प्रमुख वर्ग कौन हैं? इस वर्गीकरण का क्या आधार हैं?

पादप जगत के प्रमुख वर्ग कौन हैं? इस वर्गीकरण का क्या आधार हैं?
Solution: पादप जगत (Plantae) को मुख्य रूप से निम्नलिखित वर्गों में वर्गीकृत किया गया है, जिनके वर्गीकरण का आधार उनकी शारीरिक संरचना, प्रजनन की विधि और संवहन ऊतकों की उपस्थिति है:

पादप जगत के प्रमुख वर्ग:

  1. थैलोफाइटा (Thallophyta):
    • आधार: शरीर सुस्पष्ट जड़, तना और पत्तियों में विभेदित नहीं होता (थैलस)। संवहन ऊतक अनुपस्थित। प्रजनन बीजाणुओं द्वारा।
    • उदाहरण: शैवाल (Algae), कवक (Fungi - हालांकि अब इन्हें अलग जगत माना जाता है), लाइकेन (Lichens)।
  2. ब्रायोफाइटा (Bryophyta):
    • आधार: शरीर में जड़, तना और पत्तियों जैसी संरचनाएँ होती हैं, लेकिन वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ नहीं होतीं। संवहन ऊतक अनुपस्थित। प्रजनन बीजाणुओं द्वारा। इन्हें 'पादप जगत का उभयचर' भी कहते हैं।
    • उदाहरण: मॉस (Moss), लिवरवर्ट (Liverwort)।
  3. टेरिडोफाइटा (Pteridophyta):
    • आधार: शरीर जड़, तना और पत्तियों में स्पष्ट रूप से विभेदित होता है। संवहन ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) उपस्थित होते हैं। प्रजनन बीजाणुओं द्वारा। इनमें बीज नहीं बनते।
    • उदाहरण: फर्न (Ferns), हॉर्सटेल (Horsetails)।
  4. फेनरोगैम (Phanerogams) / बीज वाले पौधे:
    • आधार: इनमें बीज बनते हैं। संवहन ऊतक उपस्थित होते हैं। इन्हें आगे दो उप-समूहों में बाँटा गया है:
      1. जिम्नोस्पर्म (Gymnosperms): बीज नग्न होते हैं, फल नहीं बनता। उदाहरण: चीड़, देवदार।
      2. एंजिओस्पर्म (Angiosperms): बीज फल के अंदर बंद होते हैं, पुष्प बनते हैं। उदाहरण: आम, गुलाब, गेहूं।

वर्गीकरण का मुख्य आधार संवहन ऊतकों की उपस्थिति/अनुपस्थिति, बीज निर्माण और फल निर्माण है।

Q5. वर्टीब्रेटा (कशेरुकी प्राणी) को विभिन्न वर्गों में बाँटने के आधार की व्याख्या कीजिए।

वर्टिब्रेटा (कशेरुकी प्राणी) को विभिन्न वर्गों में बाँटने के आधार की व्याख्या कीजिए।
Solution: वर्टीब्रेटा (कशेरुकी प्राणी) को उनके शारीरिक संगठन, प्रजनन की विधि, शरीर के आवरण, श्वसन अंग, हृदय की संरचना और शरीर के तापमान के नियंत्रण जैसे विभिन्न लक्षणों के आधार पर निम्नलिखित प्रमुख वर्गों में बाँटा गया है:
  1. मत्स्य (Pisces):
    • आधार: ये जलीय जीव हैं, गलफड़ों से श्वसन करते हैं, शरीर पर शल्क होते हैं, और पूंछ पंख (tail fin) गति में सहायक होता है। हृदय दो-कोष्ठीय होता है। ये असमतापी होते हैं।
    • उदाहरण: शार्क, रोहू, टूना।
  2. जल-स्थलचर (Amphibia):
    • आधार: ये जलीय और स्थलीय दोनों वातावरण में रह सकते हैं। त्वचा नम और श्लेष्म युक्त होती है। श्वसन गलफड़ों (लार्वा में) और फेफड़ों (वयस्क में) द्वारा होता है। हृदय तीन-कोष्ठीय होता है। ये असमतापी होते हैं।
    • उदाहरण: मेंढक, सैलामैंडर।
  3. सरीसृप (Reptilia):
    • आधार: ये पूर्णतः स्थलीय होते हैं। त्वचा शुष्क और शल्कों से ढकी होती है। श्वसन फेफड़ों द्वारा होता है। हृदय सामान्यतः तीन-कोष्ठीय होता है (मगरमच्छ में चार-कोष्ठीय)। ये असमतापी होते हैं।
    • उदाहरण: साँप, छिपकली, कछुआ।
  4. पक्षी (Aves):
    • आधार: शरीर पर पंख होते हैं, अग्रपाद उड़ने के लिए पंखों में रूपांतरित होते हैं। श्वसन फेफड़ों और वायुकोशों द्वारा होता है। हृदय चार-कोष्ठीय होता है। ये समतापी होते हैं।
    • उदाहरण: कौआ, कबूतर, चील।
  5. स्तनपायी (Mammalia):
    • आधार: शरीर पर बाल होते हैं, मादाओं में दुग्ध ग्रंथियाँ होती हैं। श्वसन फेफड़ों द्वारा होता है। हृदय चार-कोष्ठीय होता है। ये समतापी होते हैं।
    • उदाहरण: मनुष्य, कुत्ता, बिल्ली, हाथी।

इन वर्गों का निर्धारण मुख्य रूप से शरीर के आवरण, श्वसन अंग, हृदय की संरचना और शरीर के तापमान के नियंत्रण जैसे लक्षणों के आधार पर किया जाता है।

प्रश्न : उन जीवों के नाम बताइए जो वर्गीकरण से बाहर रखा गया है।

उन जीवों के नाम बताइए जो वर्गीकरण से बाहर रखा गया है।
Solution: पारंपरिक वर्गीकरण प्रणालियों में, वायरस (Viruses) और प्रीओन (Prions) जैसे जीवों को अक्सर वर्गीकरण से बाहर रखा जाता है।

कारण:

  • वायरस: वायरस सजीव और निर्जीव के बीच की कड़ी माने जाते हैं। वे केवल जीवित कोशिका के अंदर ही अपनी प्रतिकृति (replicate) बना सकते हैं और उनमें कोशिका संरचना का अभाव होता है। इसलिए, उन्हें किसी भी जगत में शामिल नहीं किया जाता है।
  • प्रीओन: प्रीओन संक्रामक प्रोटीन कण होते हैं जिनमें कोई आनुवंशिक पदार्थ (जैसे डीएनए या आरएनए) नहीं होता है। वे भी जीवित कोशिका के बाहर निष्क्रिय होते हैं और केवल जीवित तंत्र में ही रोग उत्पन्न करते हैं। इस कारण उन्हें भी पारंपरिक वर्गीकरण में स्थान नहीं दिया गया है।

Common mistakes

  • वर्गीकरण के आधारभूत लक्षणों को पहचानने में भ्रमित होना।
  • आदिम और उन्नत जीवों के बीच के अंतर को गलत समझना।
  • विभिन्न जंतु और पादप समूहों की विशेषताओं को याद रखने में कठिनाई।
  • जटिल वर्गीकरण पदानुक्रमों को समझने में चूक।

Revision tips

  • वर्गीकरण के मुख्य आधारों को सूचीबद्ध करें और उन्हें याद करें।
  • पांच जगतों की मुख्य विशेषताओं को सारणीबद्ध करें।
  • विभिन्न जंतु और पादप वर्गों के बीच तुलनात्मक अध्ययन करें।
  • आदिम और उन्नत जीवों के उदाहरणों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • अभ्यास प्रश्नों को हल करके अपनी समझ का परीक्षण करें।

Practice MCQs

Q1. जीवों के वर्गीकरण का मुख्य उद्देश्य क्या है?

Q2. व्हिटेकर के पांच-जगत वर्गीकरण में कौन सा जगत शामिल नहीं है?

Q3. कोशिका संरचना के आधार पर जीवों का वर्गीकरण किस प्रकार महत्वपूर्ण है?

Q4. आदिम जीव (Primitive organisms) किसे कहा जाता है?

Q5. पादप जगत के वर्गीकरण का मुख्य आधार क्या है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 7 'जीवों में विविधता' में मुख्य रूप से क्या पढ़ाया जाता है?

इस अध्याय में जीवों के वर्गीकरण की आवश्यकता, वर्गीकरण के आधारभूत लक्षण, व्हिटेकर का पांच-जगत वर्गीकरण (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया), और विभिन्न पादप व जंतु समूहों की विशेषताओं का अध्ययन किया जाता है।

जीवों का वर्गीकरण क्यों महत्वपूर्ण है?

जीवों का वर्गीकरण उनके अध्ययन को व्यवस्थित और सरल बनाता है। यह जीवों के बीच संबंधों को समझने, उनकी विशेषताओं को पहचानने और जैव विविधता का अध्ययन करने में मदद करता है।

व्हिटेकर के पांच-जगत वर्गीकरण के आधार क्या हैं?

व्हिटेकर के वर्गीकरण के मुख्य आधार कोशिका संरचना (प्रोकेरियोटिक/यूकेरियोटिक), जीव का प्रकार (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय), पोषण की विधि (प्रकाश संश्लेषी/विषमपोषी), और संगठन का स्तर हैं।

आदिम जीव और उन्नत जीव में क्या अंतर है?

आदिम जीव वे होते हैं जिनकी शारीरिक संरचना में प्राचीन काल से कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है, जबकि उन्नत जीव वे होते हैं जिनकी शारीरिक संरचना में समय के साथ पर्याप्त परिवर्तन और जटिलता आई है।

क्या ये समाधान कक्षा 9 की विज्ञान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों और अवधारणाओं को कवर करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी करने में मदद मिलेगी।

वर्गीकरण के लिए कोशिका संरचना कितनी महत्वपूर्ण है?

कोशिका संरचना, विशेष रूप से केंद्रक और झिल्ली-बद्ध कोशिकांगों की उपस्थिति या अनुपस्थिति, जीवों के प्रारंभिक और मौलिक विभाजन के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार है।

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