कक्षा 9 विज्ञान: अध्याय 6 ऊतक NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 6, 'ऊतक' के लिए व्यापक NCERT समाधान प्रदान करता है। यह अध्याय पौधों और जानवरों में विभिन्न प्रकार के ऊतकों की संरचना, कार्य और संगठन की पड़ताल करता है। समाधानों में विभज्योतक और स्थायी ऊतकों, सरल और जटिल ऊतकों, एपिथेलियल ऊतकों, संयोजी ऊतकों और पेशी ऊतकों जैसे प्रमुख विषयों को शामिल किया गया है। प्रत्येक प्रश्न को स्पष्टीकरण और चरण-दर-चरण समाधान के साथ विस्तृत किया गया है, जिससे छात्रों को ऊतकों की अवधारणाओं को गहराई से समझने में मदद मिलती है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जो ऊतक विज्ञान की उनकी समझ को मजबूत करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 9 |
| Subject | विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. ऊतक |
Chapter summary
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 6 'ऊतक' के लिए NCERT समाधान पौधों और जानवरों में ऊतकों की मूल बातें शामिल करते हैं। यह अध्याय ऊतकों की परिभाषा, पौधों में विभज्योतक और स्थायी ऊतकों के बीच अंतर, और विभिन्न प्रकार के सरल स्थायी ऊतकों (पैरेंकाइमा, कोलेन्काइमा, स्केरेन्काइमा) की व्याख्या करता है। यह एपिडर्मिस, रंध्र और वाष्पोत्सर्जन जैसे पौधों के ऊतकों पर भी चर्चा करता है। जंतुओं के ऊतकों में, यह एपिथेलियल, संयोजी (रक्त, हड्डी, उपास्थि) और पेशी ऊतकों को कवर करता है। समाधान छात्रों को इन ऊतकों की संरचना और कार्यों को समझने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- ऊतक की परिभाषा और बहुकोशिकीय जीवों में इसके महत्व को समझें।
- पौधों में विभज्योतक और स्थायी ऊतकों के बीच अंतर करें।
- सरल स्थायी ऊतकों (पैरेंकाइमा, कोलेन्काइमा, स्केरेन्काइमा) के कार्यों और उदाहरणों की पहचान करें।
- जंतुओं में विभिन्न प्रकार के ऊतकों (एपिथेलियल, संयोजी, पेशी) की संरचना और कार्यों का वर्णन करें।
- रक्त और अन्य संयोजी ऊतकों की भूमिका को समझें।
- पौधों में जल और भोजन के परिवहन में संवहन ऊतकों (जाइलम और फ्लोएम) के महत्व को समझें।
Topics covered
Paper topics
- ऊतक की परिभाषा
- पौधों में ऊतक
- विभज्योतक ऊतक
- स्थायी ऊतक
- सरल स्थायी ऊतक (पैरेंकाइमा, कोलेन्काइमा, स्केरेन्काइमा)
- जटिल स्थायी ऊतक (जाइलम, फ्लोएम)
- जंतुओं में ऊतक
- एपिथेलियल ऊतक
- संयोजी ऊतक (रक्त, हड्डी, उपास्थि)
- पेशी ऊतक
- तंत्रिका ऊतक
- ऊतकों का विभेदीकरण
Important topics
- पौधों में विभज्योतक और स्थायी ऊतक
- सरल स्थायी ऊतकों के प्रकार और कार्य
- जाइलम और फ्लोएम के कार्य
- जंतुओं में एपिथेलियल ऊतक
- संयोजी ऊतक के विभिन्न प्रकार
- पेशी ऊतक के प्रकार
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
ऊतक कोशिकाओं का एक समूह होता है जो समान संरचना और कार्य साझा करते हैं। बहुकोशिकीय जीवों में, विशिष्ट कार्यों को करने के लिए कोशिकाएँ ऊतकों में व्यवस्थित होती हैं, जिससे दक्षता बढ़ती है। उदाहरण के लिए, रक्त, फ्लोएम और पेशी ऊतक हैं।
प्रश्न 2
पौधों में ऊतकों को मुख्य रूप से दो प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है:
- विभज्योतक ऊतक (Meristematic Tissues): ये ऊतक पौधों के वृद्धि वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं और इनमें लगातार विभाजित होने की क्षमता होती है। ये ऊतक पौधे की लंबाई और मोटाई बढ़ाने में मदद करते हैं। विभज्योतक ऊतक के तीन प्रकार हैं: एपिकल (शीर्षस्थ), पार्श्व (लैटरल), और अंतर्वेशी (इंटरकैलेरी)।
- स्थायी ऊतक (Permanent Tissues): ये ऊतक विभज्योतक ऊतक से बनते हैं जो विभाजित होने की क्षमता खो देते हैं और एक विशिष्ट कार्य करने के लिए एक स्थायी आकार और संरचना प्राप्त करते हैं। स्थायी ऊतकों को आगे दो प्रकारों में विभाजित किया गया है:
- सरल स्थायी ऊतक (Simple Permanent Tissues): ये केवल एक ही प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं। उदाहरणों में पैरेंकाइमा (भोजन भंडारण), कोलेन्काइमा (लचीलापन प्रदान करना), और स्केरेन्काइमा (कठोरता और मजबूती प्रदान करना) शामिल हैं।
- जटिल स्थायी ऊतक (Complex Permanent Tissues): ये विभिन्न प्रकार की कोशिकाओं से बने होते हैं जो एक साथ मिलकर एक इकाई के रूप में कार्य करते हैं। जाइलम (जल और खनिज परिवहन) और फ्लोएम (भोजन परिवहन) जटिल स्थायी ऊतक के उदाहरण हैं।
प्रश्न 3
विभज्योतक ऊतक और स्थायी ऊतक के बीच मुख्य अंतर निम्नलिखित हैं:
| आधार | विभज्योतक ऊतक | स्थायी ऊतक |
| कोशिकाएँ | जीवित, पतली कोशिका भित्ति वाली, सघन कोशिकाद्रव्य और स्पष्ट केंद्रक युक्त। लगातार विभाजित होती रहती हैं। | विभज्योतक ऊतक से व्युत्पन्न, विभाजित होने की क्षमता खो देती हैं। कोशिका भित्ति मोटी हो सकती है। |
| कार्य | मुख्य रूप से वृद्धि (लंबाई और मोटाई में) के लिए जिम्मेदार। | विशिष्ट कार्य करते हैं जैसे सहारा देना, भोजन भंडारण, परिवहन, सुरक्षा आदि। |
| स्थान | पौधे के वृद्धि वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं (जैसे तने और जड़ के सिरे, पत्तियों के आधार)। | पौधे के विभिन्न भागों में पाए जाते हैं। |
| अंतरकोशिकीय स्थान | आमतौर पर अनुपस्थित होते हैं क्योंकि कोशिकाएँ सघन रूप से पैक होती हैं। | उपस्थित हो सकते हैं (जैसे पैरेंकाइमा में)। |
प्रश्न 4
पौधों में तीन प्रकार के सरल स्थायी ऊतक पाए जाते हैं:
- पैरेंकाइमा (Parenchyma): यह ऊतक जीवित कोशिकाओं से बना होता है जिनकी कोशिका भित्ति पतली होती है। यह मुख्य रूप से भोजन के भंडारण का कार्य करता है। यह क्लोरोफिल युक्त होने पर प्रकाश संश्लेषण भी कर सकता है (जिसे एरेंकाइमा कहते हैं)।
- कोलेन्काइमा (Collenchyma): इस ऊतक की कोशिकाएँ जीवित होती हैं और इनके कोनों पर कोशिका भित्ति मोटी होती है। यह ऊतक पौधों के विभिन्न भागों, जैसे तने और पत्तियों में लचीलापन प्रदान करता है, जिससे वे बिना टूटे झुक सकते हैं।
- स्केरेन्काइमा (Sclerenchyma): इस ऊतक की कोशिकाएँ मृत होती हैं और इनकी कोशिका भित्ति बहुत मोटी होती है, जो लिग्निन के जमाव के कारण होती है। यह ऊतक पौधों को कठोरता और मजबूती प्रदान करता है। नारियल के छिलके स्केरेन्काइमा ऊतक के उदाहरण हैं।
प्रश्न 5
एपिडर्मिस (Epidermis) पौधों की बाहरी सुरक्षात्मक परत बनाती है। इसके मुख्य कार्य निम्नलिखित हैं:
- सुरक्षा: यह ऊतक पौधे के आंतरिक भागों को यांत्रिक चोट, शुष्कन और संक्रमण से बचाता है।
- जल अवशोषण: जड़ों की एपिडर्मिस में पाए जाने वाले मूल रोम (root hairs) जल और खनिज लवणों के अवशोषण में मदद करते हैं।
- वाष्पोत्सर्जन और गैस विनिमय: पत्तियों और तनों की एपिडर्मिस पर रंध्र (stomata) पाए जाते हैं, जो गैसों के आदान-प्रदान (जैसे CO2 और O2) और वाष्पोत्सर्जन (जल वाष्प का निकलना) में सहायक होते हैं। रंध्रों को रक्षी कोशिकाएँ घेरे रहती हैं जो इनके खुलने और बंद होने को नियंत्रित करती हैं।
- जल अवरोधन: मरुस्थलीय पौधों में, एपिडर्मिस पर क्यूटीन (cutin) नामक मोमी परत होती है जो जल की हानि को कम करती है।
प्रश्न 6
जंतुओं के शरीर में मुख्य रूप से चार प्रकार के ऊतक पाए जाते हैं:
- एपिथेलियल ऊतक (Epithelial Tissue): ये ऊतक शरीर की बाहरी सतहों को ढकते हैं और आंतरिक अंगों की परत बनाते हैं। ये सुरक्षा, स्राव (जैसे ग्रंथियों में) और अवशोषण का कार्य करते हैं। उदाहरण: त्वचा, मुख गुहा की परत, रक्त वाहिकाओं की परत।
- संयोजी ऊतक (Connective Tissue): ये ऊतक विभिन्न अंगों और ऊतकों को जोड़ने, सहारा देने और शरीर के विभिन्न भागों के बीच परिवहन का कार्य करते हैं। इनमें कोशिकाओं के बीच पर्याप्त अंतरकोशिकीय पदार्थ (मैट्रिक्स) होता है। उदाहरण: रक्त (गैसों, पोषक तत्वों, हार्मोन आदि का परिवहन), हड्डी (शरीर को ढाँचा और सहारा देना), उपास्थि (कान, नाक, श्वास नली में लचीलापन प्रदान करना), वसा ऊतक (वसा का भंडारण)।
- पेशी ऊतक (Muscle Tissue): ये ऊतक संकुचन और प्रसार के माध्यम से गति उत्पन्न करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। जंतुओं में तीन प्रकार की पेशियाँ होती हैं: कंकाल पेशी (ऐच्छिक, हड्डियों से जुड़ी), चिकनी पेशी (अनैच्छिक, अंगों की दीवारों में), और हृदय पेशी (अनैच्छिक, केवल हृदय में पाई जाती है)।
- तंत्रिका ऊतक (Nervous Tissue): यह ऊतक उत्तेजनाओं को ग्रहण करने और उन्हें शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक संचारित करने का कार्य करता है। यह मस्तिष्क, मेरुरज्जु और तंत्रिकाओं का निर्माण करता है, जिससे शरीर के विभिन्न भागों के बीच समन्वय और नियंत्रण संभव होता है।
प्रश्न 7
रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है जो शरीर में कई महत्वपूर्ण कार्य करता है:
- परिवहन: यह ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पचे हुए भोजन (जैसे ग्लूकोज, अमीनो एसिड), हार्मोन और उत्सर्जी पदार्थों (जैसे यूरिया) को शरीर के एक भाग से दूसरे भाग तक ले जाता है।
- सुरक्षा: श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC) शरीर को संक्रमण से बचाती हैं, और प्लेटलेट्स रक्तस्राव को रोकने में मदद करते हैं।
- तापमान नियंत्रण: रक्त शरीर के तापमान को नियंत्रित करने में मदद करता है।
- pH संतुलन: रक्त शरीर के pH को स्थिर बनाए रखने में भूमिका निभाता है।
रक्त के तरल मैट्रिक्स को प्लाज्मा कहते हैं, जिसमें लाल रक्त कोशिकाएँ (RBC), श्वेत रक्त कोशिकाएँ (WBC), और प्लेटलेट्स निलंबित होते हैं।
प्रश्न 8
जाइलम और फ्लोएम पौधों में पाए जाने वाले संवहन ऊतक हैं, जो मिलकर संवहन बंडल बनाते हैं। इनके कार्य निम्नलिखित हैं:
- जाइलम (Xylem): इसका मुख्य कार्य जड़ों द्वारा अवशोषित जल और खनिज लवणों को पौधे के तने, पत्तियों और अन्य भागों तक पहुँचाना है। यह पौधे को यांत्रिक मजबूती भी प्रदान करता है। जाइलम चार प्रकार के घटकों से मिलकर बना होता है: वाहिकाएँ (vessels), वाहिनीकाएँ (tracheids), जाइलम पैरेन्काइमा (xylem parenchyma), और जाइलम रेशे (xylem fibres)।
- फ्लोएम (Phloem): इसका मुख्य कार्य पत्तियों में संश्लेषित भोजन (जैसे शर्करा और अमीनो एसिड) को पौधे के अन्य भागों, जैसे वृद्धि वाले क्षेत्रों और भंडारण अंगों तक पहुँचाना है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण (translocation) कहते हैं। फ्लोएम भी चार प्रकार के घटकों से मिलकर बना होता है: चालनी नलिकाएँ (sieve tubes), सहकोशिकाएँ (companion cells), फ्लोएम पैरेन्काइमा (phloem parenchyma), और फ्लोएम रेशे (phloem fibres)।
Common mistakes
- पौधों और जंतुओं के ऊतकों के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
- सरल और जटिल ऊतकों के बीच अंतर को ठीक से न समझना।
- विभिन्न प्रकार के पेशी ऊतकों के कार्यों को याद रखने में कठिनाई।
- जाइलम और फ्लोएम के कार्यों को आपस में मिला देना।
Revision tips
- पौधों और जंतुओं के ऊतकों के बीच मुख्य अंतरों की एक तालिका बनाएं।
- प्रत्येक प्रकार के ऊतक के लिए विशिष्ट कार्यों और उदाहरणों को याद करें।
- जाइलम और फ्लोएम द्वारा परिवहन की दिशा पर ध्यान दें।
- विभिन्न प्रकार के संयोजी ऊतकों की संरचना और उनके द्वारा प्रदान किए जाने वाले समर्थन के प्रकार की समीक्षा करें।
Practice MCQs
Q1. पौधों में कौन सा ऊतक पौधों को कठोर और मजबूत बनाता है?
Explanation: स्केरेन्काइमा एक प्रकार का सरल स्थायी ऊतक है जो पौधों को कठोरता और मजबूती प्रदान करता है, जैसा कि नारियल के छिलके में देखा जाता है।
Q2. रक्त किस प्रकार का ऊतक है?
Explanation: रक्त को एक संयोजी ऊतक माना जाता है क्योंकि यह शरीर के विभिन्न भागों के बीच पदार्थों के परिवहन के लिए एक माध्यम के रूप में कार्य करता है।
Q3. पौधों में लचीलापन किस ऊतक के कारण होता है?
Explanation: कोलेन्काइमा ऊतक पौधों के विभिन्न भागों, जैसे पत्तियों और तनों में बिना टूटे लचीलापन प्रदान करता है।
Q4. जंतुओं के शरीर को ढकने या रक्षा प्रदान करने वाले ऊतक को क्या कहते हैं?
Explanation: एपिथेलियल ऊतक जंतुओं के शरीर की बाहरी सतहों को ढकते हैं और आंतरिक अंगों की रक्षा करते हैं।
Q5. जाइलम का मुख्य कार्य क्या है?
Explanation: जाइलम ऊतक जड़ों से जल और खनिज लवणों को पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।
Frequently asked questions
कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 6 'ऊतक' में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में पौधों और जंतुओं में विभिन्न प्रकार के ऊतकों की संरचना और कार्यों को शामिल किया गया है, जिसमें विभज्योतक ऊतक, स्थायी ऊतक, एपिथेलियल ऊतक, संयोजी ऊतक और पेशी ऊतक शामिल हैं।
NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को ऊतकों की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलती है।
पौधों में विभज्योतक ऊतक और स्थायी ऊतक में क्या अंतर है?
विभज्योतक ऊतक लगातार विभाजित होते रहते हैं और वृद्धि के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि स्थायी ऊतक विभज्योतक कोशिकाओं से बनते हैं जो विभाजित होने की क्षमता खो देते हैं और विशिष्ट कार्य करते हैं।
जंतुओं में संयोजी ऊतक का क्या कार्य है?
संयोजी ऊतक जंतुओं में विभिन्न ऊतकों और अंगों को सहारा, जोड़ना और अलग करना जैसे कार्य करते हैं। रक्त एक महत्वपूर्ण संयोजी ऊतक है जो पदार्थों का परिवहन करता है।
क्या ये समाधान कक्षा 9 की विज्ञान परीक्षा के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान विशेष रूप से कक्षा 9 की विज्ञान परीक्षा के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और अध्याय 6 'ऊतक' से संबंधित प्रश्नों के उत्तर देने के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं।
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