कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 3: परमाणु एवं अणु - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 3, 'परमाणु एवं अणु' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें तत्वों, यौगिकों और अणुओं की अवधारणाओं को शामिल किया गया है, जिसमें डाल्टन के परमाणु सिद्धांत, द्रव्यमान संरक्षण के नियम और निश्चित अनुपात के नियम जैसे महत्वपूर्ण सिद्धांतों पर जोर दिया गया है। समाधान छात्रों को परमाणु द्रव्यमान इकाई, मोल अवधारणा और आवोगाद्रो संख्या को समझने में मदद करते हैं। यह अध्याय विभिन्न रासायनिक अभिक्रियाओं और आयनों की प्रकृति की भी पड़ताल करता है। ये समाधान छात्रों को इन मूलभूत रासायनिक अवधारणाओं में महारत हासिल करने और उनकी परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectविज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter3. परमाणु एवं अणु

Chapter summary

कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 3, 'परमाणु एवं अणु' के लिए NCERT समाधान, तत्वों, यौगिकों और अणुओं की बुनियादी समझ प्रदान करते हैं। यह अध्याय डाल्टन के परमाणु सिद्धांत, द्रव्यमान संरक्षण के नियम और निश्चित अनुपात के नियम जैसे प्रमुख रासायनिक नियमों की पड़ताल करता है। समाधान परमाणु द्रव्यमान, मोल अवधारणा और आवोगाद्रो संख्या की व्याख्या करते हैं, जो छात्रों को रासायनिक गणनाओं के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • तत्वों, यौगिकों और अणुओं के बीच अंतर को समझना।
  • डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के प्रमुख अभिगृहीतों को समझाना।
  • द्रव्यमान संरक्षण के नियम और निश्चित अनुपात के नियम को लागू करना।
  • परमाणु द्रव्यमान इकाई और मोल अवधारणा की गणना करना।
  • आवोगाद्रो संख्या और इसके महत्व को समझना।
  • आयनिक यौगिकों और बहुपरमाणुक आयनों की पहचान करना।

Topics covered

Paper topics

  • तत्व, यौगिक और अणु
  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
  • द्रव्यमान संरक्षण का नियम
  • निश्चित अनुपात का नियम
  • परमाणु द्रव्यमान इकाई (amu)
  • परमाणु
  • अणु
  • आयन
  • बहुपरमाणुक आयन
  • मोल अवधारणा
  • आवोगाद्रो संख्या
  • मोलर द्रव्यमान

Important topics

  • डाल्टन का परमाणु सिद्धांत
  • द्रव्यमान संरक्षण का नियम
  • निश्चित अनुपात का नियम
  • मोल अवधारणा और आवोगाद्रो संख्या
  • परमाणु और अणु की संरचना

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

एक अभिक्रिया में 5.3 ग्राम सोडियम कार्बोनेट तथा 6.0 ग्राम एथेनोइक अम्ल अभिकृत होता है। 2.2 ग्राम कार्बन डाइऑक्साइड, 8.2 ग्राम सोडियम एथेनोएट एवं 0.9 ग्राम जल उत्पादन के रूप में प्राप्त होता है। इस अभिक्रिया द्वारा दिखाइए की यह परिक्षण द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुरूप है।
Solution:

द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में न तो द्रव्यमान का सृजन होता है और न ही विनाश होता है। इसका अर्थ है कि अभिकारकों का कुल द्रव्यमान उत्पादों के कुल द्रव्यमान के बराबर होना चाहिए।

इस अभिक्रिया में:

अभिकारकों का कुल द्रव्यमान:

  • सोडियम कार्बोनेट का द्रव्यमान = 5.3 ग्राम
  • एथेनोइक अम्ल का द्रव्यमान = 6.0 ग्राम
  • कुल अभिकारकों का द्रव्यमान = 5.3 ग्राम + 6.0 ग्राम = 11.3 ग्राम

उत्पादों का कुल द्रव्यमान:

  • सोडियम एथेनोएट का द्रव्यमान = 8.2 ग्राम
  • कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) का द्रव्यमान = 2.2 ग्राम
  • जल (H₂O) का द्रव्यमान = 0.9 ग्राम
  • कुल उत्पादों का द्रव्यमान = 8.2 ग्राम + 2.2 ग्राम + 0.9 ग्राम = 11.3 ग्राम

चूंकि अभिकारकों का कुल द्रव्यमान (11.3 ग्राम) उत्पादों के कुल द्रव्यमान (11.3 ग्राम) के बराबर है, यह अभिक्रिया द्रव्यमान संरक्षण के नियम का पालन करती है।

प्रश्न 2

हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन द्रव्यमान के अनुसार 1:8 के अनुपात में संयोग करके जल निर्मित करते हैं। 3 ग्राम हाइड्रोजन गैस के साथ पूर्ण रूप से संयोग करने के लिए कितने ऑक्सीजन गैस के द्रव्यमान की आवश्यकता होगी?
Solution:

प्रश्न के अनुसार, जल के निर्माण में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान अनुपात 1:8 है। इसका मतलब है कि 1 ग्राम हाइड्रोजन के साथ संयोग करने के लिए 8 ग्राम ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है।

हमें 3 ग्राम हाइड्रोजन गैस के साथ पूर्ण रूप से संयोग करने के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा ज्ञात करनी है।

यदि 1 ग्राम हाइड्रोजन के लिए 8 ग्राम ऑक्सीजन की आवश्यकता है,

तो 3 ग्राम हाइड्रोजन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की मात्रा होगी:

आवश्यक ऑक्सीजन = 3 ग्राम हाइड्रोजन × (8 ग्राम ऑक्सीजन / 1 ग्राम हाइड्रोजन)

आवश्यक ऑक्सीजन = 24 ग्राम

अतः, 3 ग्राम हाइड्रोजन गैस के साथ पूर्ण रूप से संयोग करने के लिए 24 ग्राम ऑक्सीजन गैस की आवश्यकता होगी।

प्रश्न 3

डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का कौन-सा अभिगृहीत द्रव्यमान के संरक्षण के नियम का परिणाम है?
Solution:

डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का वह अभिगृहीत जो द्रव्यमान संरक्षण के नियम का परिणाम है, वह यह है कि "परमाणु अविनाशी कण होते हैं।"

इस अभिगृहीत के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में परमाणु न तो बनाए जा सकते हैं और न ही नष्ट किए जा सकते हैं। वे केवल पुनर्व्यवस्थित होते हैं। इसलिए, अभिक्रिया के दौरान अभिकारकों और उत्पादों का कुल द्रव्यमान समान रहता है, जो द्रव्यमान संरक्षण के नियम को दर्शाता है।

Common mistakes

  • द्रव्यमान संरक्षण के नियम को लागू करते समय अभिकारकों और उत्पादों के द्रव्यमान की गलत गणना करना।
  • रासायनिक अभिक्रियाओं में तत्वों के बीच द्रव्यमान अनुपात को गलत समझना।
  • परमाणु द्रव्यमान और आणविक द्रव्यमान के बीच भ्रमित होना।
  • मोल अवधारणा और आवोगाद्रो संख्या के अनुप्रयोग में त्रुटियाँ करना।

Revision tips

  • प्रत्येक नियम (द्रव्यमान संरक्षण, निश्चित अनुपात) के लिए उदाहरणों को हल करने का अभ्यास करें।
  • डाल्टन के परमाणु सिद्धांत के प्रत्येक अभिगृहीत को याद करें और समझें।
  • परमाणु द्रव्यमान, आणविक द्रव्यमान और मोलर द्रव्यमान की गणना करने के तरीकों की समीक्षा करें।
  • आवोगाद्रो संख्या का उपयोग करके कणों की संख्या ज्ञात करने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. द्रव्यमान संरक्षण के नियम के अनुसार, किसी रासायनिक अभिक्रिया में:

Q2. जल (H₂O) में हाइड्रोजन और ऑक्सीजन का द्रव्यमान के अनुसार अनुपात क्या है?

Q3. डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का कौन सा अभिगृहीत निश्चित अनुपात के नियम का आधार है?

Q4. 6.022 x 10²³ कणों के समूह को क्या कहा जाता है?

Q5. निम्नलिखित में से कौन एक बहुपरमाणुक आयन का उदाहरण है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 विज्ञान के अध्याय 3 में कौन से मुख्य रासायनिक नियम समझाए गए हैं?

अध्याय 3 में मुख्य रूप से द्रव्यमान संरक्षण के नियम और निश्चित अनुपात के नियम को समझाया गया है, जो रासायनिक अभिक्रियाओं के व्यवहार को समझने के लिए मौलिक हैं।

डाल्टन के परमाणु सिद्धांत का क्या महत्व है?

डाल्टन का परमाणु सिद्धांत तत्वों के गुणों और रासायनिक अभिक्रियाओं में उनके व्यवहार को समझाने के लिए एक आधार प्रदान करता है, जिसमें परमाणु की अविभाज्यता और तत्वों के विशिष्ट परमाणु द्रव्यमान जैसी अवधारणाएं शामिल हैं।

मोल अवधारणा क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?

मोल अवधारणा पदार्थ की मात्रा को मापने का एक तरीका है, जो आवोगाद्रो संख्या (6.022 x 10²³) से संबंधित है। यह रसायन विज्ञान में गणनाओं के लिए महत्वपूर्ण है, जैसे कि अभिकारकों और उत्पादों की मात्रा निर्धारित करना।

परमाणु और अणु में क्या अंतर है?

परमाणु किसी तत्व का सबसे छोटा कण होता है, जबकि अणु दो या दो से अधिक परमाणुओं का समूह होता है जो रासायनिक बंधों द्वारा एक साथ जुड़े होते हैं।

आयन क्या होते हैं?

आयन विद्युत आवेशित कण होते हैं जो तब बनते हैं जब कोई परमाणु या परमाणुओं का समूह एक या अधिक इलेक्ट्रॉन प्राप्त करता है या खो देता है। धनायन (धनात्मक आवेश) और ऋणायन (ऋणात्मक आवेश) होते हैं।

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