कक्षा 8 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 2 - दो गौरेया (कहानी)
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी की पाठ्यपुस्तक के पाठ 2, 'दो गौरेया' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह कहानी दो गौरैया पक्षियों और उनके घर में आने से उत्पन्न स्थितियों के इर्द-गिर्द घूमती है। समाधान पाठ के विभिन्न अभ्यासों को कवर करते हैं, जिसमें पात्रों के संवादों के पीछे के कारणों, उनकी भावनाओं और कहानी के नैतिक संदेशों की गहन व्याख्या शामिल है। छात्र यह समझ सकते हैं कि माँ ने गौरैयों की मदद क्यों नहीं की, पिताजी ने गुस्से में ऐसा क्यों कहा, और कमरे में शोर होने पर भी वे क्यों मुस्कुराए। यह समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के दृष्टिकोण को समझने, पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने और परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने में मदद करेगा।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | पाठ 2 - दो गौरेया (कहानी) |
Chapter summary
कक्षा 8 हिंदी के पाठ 2 'दो गौरेया' के ये NCERT समाधान कहानी के मुख्य पात्रों, विशेष रूप से माँ और पिताजी के विचारों और भावनाओं पर केंद्रित हैं। समाधान अभ्यास 1, 2, 7, 8, और 11 के उत्तर प्रदान करते हैं, जो गौरैयों को घर से निकालने के प्रयासों, पशु-पक्षियों के मानवीयकरण, 'सराय' के रूपक और माँ की करुणा जैसे विषयों की पड़ताल करते हैं। ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के संवादों के पीछे छिपे अर्थों को समझने और पशु-पक्षियों के प्रति सहानुभूति विकसित करने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- पाठ 'दो गौरेया' के पात्रों के संवादों और उनके पीछे के कारणों को समझना।
- पशु-पक्षियों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण और संवेदनशीलता का विश्लेषण करना।
- कहानी में प्रयुक्त 'सराय' जैसे रूपकों के अर्थ को स्पष्ट करना।
- पाठ के नैतिक संदेशों और सीखों की पहचान करना।
- अभ्यासों के माध्यम से कहानी की मुख्य घटनाओं का सारांश प्रस्तुत करना।
Topics covered
Paper topics
- दो गौरेया कहानी का सारांश
- पात्रों का विश्लेषण (माँ, पिताजी)
- पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता
- घर और सराय की तुलना
- पिताजी का गुस्सा और माँ की करुणा
- कहानी का नैतिक संदेश
- अभ्यास 1: पाठ से प्रश्नोत्तर
- अभ्यास 2: पशु-पक्षी और हम
- अभ्यास 7: किससे-क्या-कैसे
- अभ्यास 8: सराय
- अभ्यास 11: माँ की बात
- कहानी में संवादों का महत्व
Important topics
- माँ और पिताजी के दृष्टिकोण का अंतर
- पशु-पक्षियों के प्रति सहानुभूति का महत्व
- कहानी में 'सराय' का रूपक
- पिताजी के गुस्से के पीछे की वजह
- माँ की करुणा और समझदारी
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Questions and Solutions
अभ्यास 1: पाठ से
(क) दोनों गाँरैयों को पिताजी जब घर से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे थे तो माँ क्यों मदद नहीं कर रही थी? बस, वह हँसती क्यों जा रही थी?
माँ दोनों गौरैयों को घर से बाहर निकालने में पिताजी की मदद इसलिए नहीं कर रही थीं क्योंकि वह नहीं चाहती थीं कि उनका बसेरा उजड़ जाए। पिताजी जब गौरैयों को ताली बजाकर, बाहें झलाकर या 'श-शू' करके उड़ाने की कोशिश कर रहे थे, तो गौरैया घोंसले से सिर निकालकर चीं-चीं करती और फिर वापस घोंसले में चली जाती। यह दृश्य माँ को मनोरंजक लग रहा था, इसलिए वह हँस रही थीं।
(ख) "देखों जी, चिड़ियों को मत निकालो।" माँ ने पिताजी से गंभीरता से यह क्यों कहा?
माँ ने पिताजी से गंभीरता से यह इसलिए कहा क्योंकि उन्हें इस बात की चिंता थी कि कहीं चिड़ियों ने घोंसले में अंडे तो नहीं दे दिए होंगे। यदि अंडे दिए होते, तो उनके बच्चों का क्या होता। माँ का ममतामयी हृदय यह नहीं सह सकता था कि नन्हे बच्चों को उनकी माँ से बिछड़ने का कष्ट हो।
(ग) "किसी को सचम्च बाहर निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए," पिताजी ने गुस्से में ऐसा क्यों कहा? क्या पिताजी के इस कथन से माँ सहमत थी? क्या तुम सहमत हो? अगर नहीं तो क्यों?
पिताजी ने यह बात इसलिए कही क्योंकि वे गौरैयों के बार-बार आने और तिनके बिखेरने से बहुत परेशान हो गए थे। वे चाहते थे कि चिड़ियाँ हमेशा के लिए चली जाएँ। माँ इस बात से सहमत नहीं थीं। उन्हें लगता था कि किसी का घर तोड़ना उचित नहीं है, खासकर तब जब उसमें अंडे या बच्चे हो सकते हैं। हम भी पिताजी की इस बात से सहमत नहीं हैं। प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए पशु-पक्षी महत्वपूर्ण हैं और हमें उन्हें नुकसान पहुँचाने के बजाय उनके प्रति दयालु होना चाहिए। आज के समय में तो वैसे भी उनके प्राकृतिक आवास कम हो रहे हैं, इसलिए हमें उनकी मदद करनी चाहिए।
(घ) कमरे में फिर से शोर होने पर भी पिताजी अबकी बार गाँरैया की तरफ़ देखकर मुस्कुराए क्यों रहे?
जब पिताजी घोंसला तोड़ रहे थे, तो उसमें से चीं-चीं की आवाज़ आई। उन्हें पता चला कि अंडों से बच्चे निकल आए हैं। इस पर उन्हें बच्चों पर दया आ गई और उन्होंने घोंसला वापस रख दिया। जब उन्होंने देखा कि गौरैया अपने बच्चों को दाना खिला रही है, तो वे मुस्कुराए। उन्हें यह देखकर खुशी हुई कि बच्चे अब बड़े हो रहे हैं और कुछ दिनों में वे उड़ जाएँगे, जिससे समस्या अपने आप हल हो जाएगी।
अभ्यास 2: पश्-पक्षी और हम
इस कहानी के श्रू में कई पश्-पक्षियों की चर्चा की गई है। कहानी में वे ऐसे कुछ काम करते हैं जैसे मन्ष्य करते हैं। उनको टुँढ़कर तालिका पुरी करो...
पक्षी घर का पता लिखवाकर लाए हैं। (됍) बुदा चूहा अंगीठी के पीछे बैठता है शायद सदीं लग रही है। बिल्ली फिर आऊँगी कह कर चली जाती है। चमगादड् पंख फौज़ ही छावनी डाले हए हैं। चींटियाँ इनकी फौज़ ही छावनी डाले हुए है।
यह अभ्यास कहानी में वर्णित विभिन्न पशु-पक्षियों के मानवीयकरण पर आधारित है। कहानी में कुछ पशु-पक्षी ऐसे कार्य करते हैं जो मनुष्य करते हैं। तालिका को पूरा करने के लिए, हमें कहानी से ऐसे उदाहरण खोजने होंगे:
- पक्षी: घर का पता लिखवाकर लाए हैं। (यह दर्शाता है कि वे मनुष्यों की तरह पते की जानकारी रखते हैं या उसे याद रखते हैं।)
- चूहा: अंगीठी के पीछे बैठता है, शायद सर्दी लग रही है। (यह दर्शाता है कि चूहा सर्दी महसूस कर सकता है और मनुष्यों की तरह गर्मी की तलाश में है।)
- बिल्ली: "फिर आऊँगी" कह कर चली जाती है। (यह दर्शाता है कि बिल्ली मनुष्यों की तरह संवाद कर सकती है और भविष्य की योजना बना सकती है।)
- चमगादड़: पंख फौज़ ही छावनी डाले हुए हैं। (यह दर्शाता है कि चमगादड़ संगठित रूप से रहते हैं, जैसे मनुष्य सेना या समूह में रहते हैं।)
- चींटियाँ: इनकी फौज़ ही छावनी डाले हुए है। (यह दर्शाता है कि चींटियाँ भी संगठित होकर रहती हैं, जैसे मनुष्य सेना या समूह में रहते हैं।)
अभ्यास 7: किससे-क्यॉ-कैसे
"पिताजी बोले, क्या मतलब? मैं कालीन बरबाद करवा लें?" ऊपर दिए गए वाक्य पर ध्यान दो और बताओ कि...
(क) पिताजी ने यह बात किससे कही?
(ख) उन्होंने यह बात क्यों कही?
(ग) गॉरैयॉ के आने से कालीन कैसे बरबाद होता?
(क) पिताजी ने यह बात माँ से कही।
(ख) पिताजी ने यह बात इसलिए कही क्योंकि गौरैया घोंसला बनाने के लिए तिनके ला रही थी और वे तिनके कालीन पर गिर रहे थे, जिससे कालीन गंदा हो रहा था। पिताजी कालीन को साफ-सुथरा रखना चाहते थे।
(ग) गौरैया जब तिनके लाती थी, तो वे कालीन पर गिर जाते थे। इसके अलावा, गौरैया की बीट (मल) भी कालीन पर गिर सकती थी। इन सब कारणों से कालीन गंदा हो जाता और खराब दिखने लगता, जिसे पिताजी 'बरबाद होना' कह रहे थे।
अभ्यास 8: सराय
"पिताजी कहते हैं कि यह घर सराय बना हुआ है।" ऊपर के वाक्य को पढ़ो और बताओ कि...
(क) सराय और घर में क्या अंतर होता है? आपस में इस पर चर्चा करो।
(ख) पिताजी को अपना घर सराय क्यों लगता है?
(क) सराय और घर में मुख्य अंतर यह है कि सराय एक ऐसी जगह होती है जहाँ लोग कुछ समय के लिए, अक्सर किराया देकर, ठहरते हैं और फिर चले जाते हैं। सराय से लोगों का भावनात्मक लगाव नहीं होता। इसके विपरीत, घर एक स्थायी निवास स्थान होता है जहाँ एक परिवार रहता है, एक-दूसरे से जुड़ा होता है और जीवन बिताता है। घर में अपनेपन और लगाव की भावना होती है, जबकि सराय में लोग आते-जाते रहते हैं और उनका ठहराव अस्थायी होता है।
(ख) पिताजी को अपना घर सराय इसलिए लगता है क्योंकि उनके घर में कोई भी जीव-जंतु बिना किसी रोक-टोक के आ जाता था। जैसे कि चिड़िया, कबूतर, चमगादड़, बिल्ली, चूहा, चींटियाँ आदि। इन सबके आने-जाने से उन्हें ऐसा महसूस होता था जैसे यह कोई सार्वजनिक स्थान है जहाँ कोई भी कभी भी आ सकता है, न कि एक निजी घर।
अभ्यास 11: माँ की बात
नीचे माँ द्वारा कही गई कुछ बातें लिखी हुई हैं। उन्हें पदो।
"अब तो ये नहीं उड़ेंगी। पहले इन्हें उड़ा देतें, तो उड़ जातीं।"
"एक दरवाज़ा खुला छोड़ो, बाकी दरवाज़े बंद कर दो। तभी ये निकलेंगी।"
"देखों जी, चिड़ियों को मत निकालो। अब तो इन्होंने अंडे भी दे दिए होंगे। अब ये यहाँ से नहीं जाएँगी।"
अब बताओ कि-
(क) क्या माँ सचम्च चिड़ियाँ को घर से निकालना चाहती थीं?
(ख) माँ बार-बार क्यों कह रही थीं कि ये चिड़ियाँ नहीं जाएँगी?
(क) नहीं, माँ सचमुच चिड़ियों को घर से निकालना नहीं चाहती थीं। उनकी बातों से यह स्पष्ट होता है कि वह चिड़ियों के प्रति सहानुभूति रखती थीं और उनके अंडों व बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित थीं।
(ख) माँ बार-बार यह कह रही थीं कि चिड़ियाँ नहीं जाएँगी क्योंकि उन्हें लग रहा था कि चिड़ियों ने अपने घोंसले में अंडे दे दिए हैं। माँ जानती थीं कि जब तक अंडे से बच्चे नहीं निकल आते या बच्चे उड़ने लायक नहीं हो जाते, तब तक चिड़िया अपने अंडों या बच्चों को छोड़कर कहीं नहीं जाएगी। इसलिए, वह पिताजी को समझा रही थीं कि अब चिड़ियों को निकालना मुश्किल है।
Common mistakes
- पिताजी के गुस्से के पीछे के वास्तविक कारण को न समझना।
- माँ की भावनाओं और चिंताओं को अनदेखा करना।
- पशु-पक्षियों के प्रति सहानुभूति की कमी को दर्शाना।
- कहानी के पात्रों के संवादों का शाब्दिक अर्थ लेना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को ध्यान से पढ़ें और पात्रों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करें।
- माँ और पिताजी के बीच के संवादों पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि वे कहानी के मुख्य संदेश को दर्शाते हैं।
- कहानी में पशु-पक्षियों के प्रति दिखाई गई संवेदनशीलता के उदाहरणों को नोट करें।
- अभ्यास 8 में 'सराय' के रूपक को समझें और अपने शब्दों में व्यक्त करें।
Practice MCQs
Q1. पिताजी गौरैयों को घर से निकालने के लिए क्या-क्या कर रहे थे?
Explanation: पिताजी गौरैयों को उड़ाने के लिए ताली बजा रहे थे, बाहें झला रहे थे और श-शू की आवाज़ निकाल रहे थे। अंत में उन्होंने घोंसला तोड़ने की भी कोशिश की।
Q2. माँ ने पिताजी को चिड़ियों को निकालने से मना क्यों किया?
Explanation: माँ ने गंभीरता से कहा क्योंकि उन्हें चिंता थी कि अगर चिड़ियों ने अंडे दे दिए होंगे तो उनके बच्चों का नुकसान हो सकता है, और कोई भी माँ अपने बच्चों को तकलीफ में नहीं देखना चाहेगी।
Q3. पिताजी ने "किसी को सचमुच बाहर निकालना हो तो उसका घर तोड़ देना चाहिए" ऐसा क्यों कहा?
Explanation: पिताजी चिड़ियों के बार-बार आने और तिनके बिखेरने से तंग आ चुके थे, इसलिए उन्होंने गुस्से में यह बात कही थी।
Q4. पिताजी को अपना घर 'सराय' क्यों लगता था?
Explanation: पिताजी को घर सराय इसलिए लगता था क्योंकि वहाँ चिड़िया, कबूतर, चमगादड़, बिल्ली, चूहा, चींटियाँ जैसे विभिन्न जीव-जंतु बिना किसी रोक-टोक के आते-जाते रहते थे।
Q5. माँ ने अंत में चिड़ियों को घर से निकालने के लिए क्या सुझाव दिया?
Explanation: माँ ने सुझाव दिया कि चिड़ियों को निकालने के लिए एक दरवाज़ा खुला छोड़ दें और बाकी सभी दरवाज़े बंद कर दें, ताकि वे उसी रास्ते से बाहर निकल जाएँ।
Frequently asked questions
कक्षा 8 हिंदी के पाठ 'दो गौरेया' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?
इस पाठ में पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता, करुणा और उनके प्रति मानवीय व्यवहार के महत्व को सिखाया गया है। यह कहानी माँ और पिताजी के अलग-अलग दृष्टिकोणों के माध्यम से इन मूल्यों को दर्शाती है।
पाठ में पिताजी को अपना घर 'सराय' क्यों लगता है?
पिताजी को अपना घर सराय इसलिए लगता है क्योंकि वहाँ विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु (जैसे चिड़िया, चूहा, बिल्ली, चींटी आदि) बिना किसी रोक-टोक के आते-जाते रहते हैं, जिससे उन्हें घर पर नियंत्रण का अभाव महसूस होता है।
माँ ने गौरैयों को घर से निकालने में पिताजी की मदद क्यों नहीं की?
माँ ने गौरैयों को घर से निकालने में पिताजी की मदद इसलिए नहीं की क्योंकि उन्हें चिंता थी कि चिड़ियों के अंडों या बच्चों को नुकसान पहुँच सकता है। वे उनकी करुणा और ममता को समझती थीं।
क्या पिताजी सचमुच चिड़ियों को घर से निकालना चाहते थे?
शुरुआत में, तिनके बिखेरने और परेशानी के कारण पिताजी चिड़ियों को घर से निकालना चाहते थे, लेकिन जब उन्हें अंडों और बच्चों का पता चला, तो उनका हृदय पिघल गया और वे मुस्कुराने लगे।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को पाठ के प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करता है, जिससे उन्हें कहानी की गहरी समझ विकसित करने, पात्रों के इरादों को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद मिलती है।
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