कक्षा 8 विज्ञान अध्याय 16: प्रकाश - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 8 के विज्ञान अध्याय 16, 'प्रकाश' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें प्रकाश के परावर्तन के नियमों, नियमित और विसरित परावर्तन के बीच अंतर, और विभिन्न सतहों पर परावर्तन के प्रकारों की व्याख्या शामिल है। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे प्रकाश सात रंगों से मिलकर बनता है और इंद्रधनुष कैसे बनता है। मानव नेत्र के विभिन्न भागों और सामान्य दृष्टि के लिए उनकी भूमिका पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को प्रकाशिकी की मूल बातें समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectविज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter16. प्रकाश

Chapter summary

कक्षा 8 विज्ञान के अध्याय 16 'प्रकाश' के लिए NCERT समाधान प्रकाश के मूलभूत सिद्धांतों पर केंद्रित हैं। इसमें प्रकाश के परावर्तन के नियम, चिकनी सतहों से नियमित परावर्तन और खुरदरी सतहों से विसरित परावर्तन के बीच अंतर को स्पष्ट किया गया है। समाधान यह भी बताते हैं कि कैसे सूर्य का प्रकाश सात रंगों से मिलकर बनता है और प्रकाश का विक्षेपण क्या है। मानव नेत्र के महत्वपूर्ण भागों और सामान्य दृष्टि की कार्यप्रणाली की भी व्याख्या की गई है।

Learning outcomes

  • प्रकाश के परावर्तन के नियमों को समझना।
  • नियमित और विसरित परावर्तन के बीच अंतर करना।
  • विभिन्न सतहों पर परावर्तन के प्रकारों की पहचान करना।
  • श्वेत प्रकाश के सात रंगों से मिलकर बनने की प्रक्रिया को समझना।
  • मानव नेत्र के मुख्य भागों और उनके कार्यों को जानना।

Topics covered

Paper topics

  • प्रकाश का परावर्तन
  • नियमित परावर्तन
  • विसरित परावर्तन
  • परावर्तन के नियम
  • श्वेत प्रकाश के रंग
  • प्रकाश का विक्षेपण
  • मानव नेत्र के भाग
  • सामान्य दृष्टि

Important topics

  • परावर्तन के नियम
  • नियमित बनाम विसरित परावर्तन
  • प्रकाश का विक्षेपण
  • मानव नेत्र की संरचना और कार्य

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

मान लीजिए आप एक अंधेरे कमरे में हैं। क्या आप कमरे में वस्तुओं को देख सकते हैं? क्या आप कमरे के बाहर वस्तुओं को देख सकते हैं? व्याख्या कीजिए।
Solution:

यदि आप एक अंधेरे कमरे में हैं, तो आप कमरे के अंदर किसी भी वस्तु को नहीं देख पाएंगे। इसका कारण यह है कि वस्तुओं को देखने के लिए प्रकाश की आवश्यकता होती है। हम वस्तुओं को इसलिए देख पाते हैं क्योंकि वे प्रकाश को परावर्तित करती हैं, और यह परावर्तित प्रकाश हमारी आँखों तक पहुँचता है। अंधेरे कमरे में, कोई प्रकाश स्रोत नहीं होता है जो वस्तुओं से टकराकर परावर्तित हो सके।

इसी तरह, आप कमरे के बाहर की वस्तुओं को भी केवल तभी देख सकते हैं जब वहाँ पर्याप्त प्रकाश हो। यदि बाहर भी अंधेरा है, तो आप बाहर की वस्तुओं को भी नहीं देख पाएंगे। प्रकाश की अनुपस्थिति में, वस्तुओं से कोई प्रकाश परावर्तित नहीं होगा और हमारी आँखें कुछ भी ग्रहण नहीं कर पाएंगी।

प्रश्न 2

नियमित तथा विसरित परावर्तन में अंतर बताइए। क्या विसरित परावर्तन का अर्थ है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं?
Solution:

नियमित परावर्तन (Regular Reflection): यह तब होता है जब प्रकाश की समानांतर किरणें किसी चिकनी और पॉलिश की हुई सतह (जैसे दर्पण) से टकराती हैं। परावर्तन के बाद, ये किरणें भी समानांतर रहती हैं और एक ही दिशा में परावर्तित होती हैं।

विसरित परावर्तन (Diffused Reflection): यह तब होता है जब प्रकाश की समानांतर किरणें किसी खुरदरी या अनियमित सतह (जैसे कागज, दीवार) से टकराती हैं। परावर्तन के बाद, ये किरणें विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं और समानांतर नहीं रहतीं।

क्या विसरित परावर्तन का अर्थ है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं?

नहीं, विसरित परावर्तन का अर्थ यह नहीं है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं। विसरित परावर्तन में भी परावर्तन के दोनों नियम पूरी तरह से लागू होते हैं। आपतन कोण हमेशा परावर्तन कोण के बराबर होता है, और आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा अभिलंब एक ही तल में होते हैं। सतह की अनियमितताओं के कारण, प्रत्येक आपतित किरण अपने आपतन बिंदु पर परावर्तन के नियमों का पालन करती है, लेकिन सतह की भिन्न-भिन्न दिशाओं के कारण परावर्तित किरणें अलग-अलग दिशाओं में चली जाती हैं, जिससे हमें वस्तुएँ दिखाई देती हैं।

प्रश्न 3

निम्न में से प्रत्येक के स्थान के सामने लिखिए, यदि प्रकाश की एक समान्तर किरण-पुंज इनसे टकराए तो नियमित परावर्तन होगा या विसरित परावर्तन होगा। प्रत्येक स्थिति में अपने उत्तर का औचित्य बताइए।

(क) पॉलिश युक्त लकड़ी की मेज

(ख) चॉक पाउडर

(ग) गत्ते का पृष्ठ

(घ) संगमरमर के फर्श पर फैला जल

(ङ) दर्पण

(च) कागज का टुकड़ा

Solution:

प्रकाश की समानांतर किरण-पुंज के टकराने पर परावर्तन का प्रकार सतह की प्रकृति पर निर्भर करता है:

(क) पॉलिश युक्त लकड़ी की मेज: नियमित परावर्तन। पॉलिश की हुई सतह चिकनी होती है, जिससे प्रकाश की किरणें एक निश्चित दिशा में परावर्तित होती हैं।

(ख) चॉक पाउडर: विसरित परावर्तन। चॉक पाउडर की सतह खुरदरी और अनियमित होती है, जिससे प्रकाश की किरणें विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं।

(ग) गत्ते का पृष्ठ: विसरित परावर्तन। गत्ते की सतह आमतौर पर खुरदरी होती है, जिसके कारण प्रकाश की किरणें अनियमित रूप से परावर्तित होती हैं।

(घ) संगमरमर के फर्श पर फैला जल: नियमित परावर्तन। जब जल की एक पतली परत फर्श पर फैलती है, तो यह एक चिकनी सतह बनाती है, जिससे प्रकाश का नियमित परावर्तन होता है।

(ङ) दर्पण: नियमित परावर्तन। दर्पण एक अत्यंत चिकनी और पॉलिश की हुई सतह होती है, जो प्रकाश का नियमित परावर्तन करती है।

(च) कागज का टुकड़ा: विसरित परावर्तन। सामान्य कागज की सतह थोड़ी खुरदरी होती है, जिसके कारण प्रकाश का विसरित परावर्तन होता है, हालाँकि बहुत चिकना कागज नियमित परावर्तन के करीब हो सकता है।

प्रश्न 4

परावर्तन के नियम बताइए?
Solution:

परावर्तन के दो मुख्य नियम हैं, जो प्रकाश के किसी भी परावर्तक सतह से टकराने पर लागू होते हैं:

  1. आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है।

    अर्थात्, आपतन कोण (\angle i) और परावर्तन कोण (\angle r) का मान हमेशा समान होता है।

    \angle i = \angle r

  2. आपतित किरण, परावर्तित किरण तथा आपतन बिंदु पर अभिलंब एक ही तल में होते हैं।

    इसका अर्थ है कि आपतित किरण, परावर्तित किरण और उस बिंदु पर खींचा गया अभिलंब (जो सतह पर लंबवत होता है) सभी एक ही समतल सतह पर स्थित होते हैं।

यहाँ, आपतन बिंदु वह बिंदु है जहाँ आपतित किरण परावर्तक सतह से टकराती है। अभिलंब उस आपतन बिंदु पर सतह के लंबवत खींची गई काल्पनिक रेखा है।

Common mistakes

  • विसरित परावर्तन को परावर्तन के नियमों की विफलता समझना।
  • विभिन्न सतहों पर परावर्तन के प्रकारों को गलत वर्गीकृत करना।
  • प्रकाश के विक्षेपण की अवधारणा को न समझना।

Revision tips

  • परावर्तन के नियमों को याद करें और उन्हें विभिन्न उदाहरणों से जोड़ें।
  • नियमित और विसरित परावर्तन के बीच मुख्य अंतरों को सारणीबद्ध करें।
  • मानव नेत्र के विभिन्न भागों के कार्यों को समझने के लिए चित्र का अभ्यास करें।
  • प्रकाश के विक्षेपण से संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. जब प्रकाश किसी चिकनी, पॉलिश की हुई सतह से टकराता है, तो किस प्रकार का परावर्तन होता है?

Q2. परावर्तन के नियमों के अनुसार, आपतन कोण का मान किसके बराबर होता है?

Q3. निम्नलिखित में से कौन सा मानव नेत्र का एक महत्वपूर्ण भाग है?

Q4. प्रकाश के अपने घटक रंगों में विभक्त होने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

Q5. चॉक पाउडर जैसी खुरदरी सतह से किस प्रकार का परावर्तन होता है?

Frequently asked questions

कक्षा 8 विज्ञान के अध्याय 16 में किन मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में प्रकाश के परावर्तन के नियम, नियमित और विसरित परावर्तन के बीच अंतर, श्वेत प्रकाश का सात रंगों से मिलकर बनना (विक्षेपण), और मानव नेत्र के विभिन्न भागों तथा उनकी कार्यप्रणाली जैसी मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है।

नियमित परावर्तन और विसरित परावर्तन में क्या अंतर है?

नियमित परावर्तन चिकनी सतहों (जैसे दर्पण) से होता है जहाँ आपतित समानांतर किरणें परावर्तन के बाद भी समानांतर रहती हैं। विसरित परावर्तन खुरदरी सतहों (जैसे कागज) से होता है जहाँ आपतित समानांतर किरणें परावर्तन के बाद विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं।

परावर्तन के नियम क्या हैं?

परावर्तन के दो नियम हैं: 1. आपतन कोण परावर्तन कोण के बराबर होता है। 2. आपतित किरण, परावर्तित किरण और आपतन बिंदु पर अभिलंब सभी एक ही तल में होते हैं।

प्रकाश का विक्षेपण क्या है?

प्रकाश का विक्षेपण वह प्रक्रिया है जिसमें श्वेत प्रकाश अपने घटक सात रंगों (बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी, लाल) में विभाजित हो जाता है, जैसा कि इंद्रधनुष में देखा जाता है।

मानव नेत्र के कौन से भाग प्रकाश को ग्रहण करने और प्रतिबिंब बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं?

मानव नेत्र के महत्वपूर्ण भाग कॉर्निया, आइरिस, पुतली, लेंस और रेटिना हैं। रेटिना पर प्रकाश का प्रतिबिंब बनता है, जिसे दृक् तंत्रिकाएँ मस्तिष्क तक पहुँचाती हैं।

क्या विसरित परावर्तन का मतलब है कि परावर्तन के नियम लागू नहीं होते?

नहीं, विसरित परावर्तन का अर्थ यह नहीं है कि परावर्तन के नियम विफल हो गए हैं। खुरदरी सतहों पर भी, प्रत्येक बिंदु पर प्रकाश परावर्तन के नियमों का पालन करता है, लेकिन सतह की अनियमितताओं के कारण परावर्तित किरणें विभिन्न दिशाओं में फैल जाती हैं।

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