CBSE Class 8 Hindi Vasant Chapter 7: क्या निराश हुआ जाए - NCERT Solutions

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This chapter, 'Kya Nirash Hua Jaye' by Hazari Prasad Dwivedi, delves into the human tendency to focus on negative aspects of society while overlooking the good. The NCERT Solutions for Class 8 Hindi 'Vasant' Chapter 7 provide a detailed analysis of the text, helping students understand the author's perspective on maintaining hope amidst widespread corruption and deceit. The solutions explore the reasons behind the author's optimism, the consequences of exposing faults, and the importance of recognizing positive human qualities. They also touch upon the challenges of upholding ideals and the nuances of language, specifically the concept of 'Dvandva Samas'. These solutions are designed to aid students in comprehending the chapter's themes, practicing critical thinking, and preparing effectively for their examinations by offering clear explanations and thought-provoking insights.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
Subjectवसंत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. क्या निराश हुआ जाए - हजारी प्रसाद द्विवेदी

Chapter summary

Chapter 7, 'Kya Nirash Hua Jaye' from the CBSE Class 8 Hindi 'Vasant' textbook, addresses the prevalent feeling of disappointment due to societal ills. The NCERT Solutions offer a deep dive into the author's arguments for retaining faith in humanity by highlighting positive human actions. The solutions cover the potential negative outcomes of exposing faults, the significance of truth, and the challenges of adhering to ideals. They also include an explanation of 'Dvandva Samas' with examples, reinforcing language concepts.

Learning outcomes

  • Understand the author's perspective on maintaining hope despite societal negativity.
  • Analyze the consequences of exposing faults in society.
  • Evaluate the importance of truth and honesty in personal and public life.
  • Discuss the challenges of living up to ideals.
  • Identify and understand the concept of 'Dvandva Samas' in Hindi grammar.

Topics covered

Paper topics

  • Human nature and societal issues
  • Optimism vs. pessimism
  • The role of media in exposing faults
  • Consequences of dishonesty and corruption
  • The importance of truth and goodness
  • Challenges in upholding ideals
  • Hindi Grammar: Dvandva Samas

Important topics

  • Author's perspective on hope
  • Impact of exposing societal faults
  • Consequences of dishonesty
  • Upholding ideals
  • Dvandva Samas

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

लेखक ने स्वीकार किया है कि लोगों ने उन्हें भी धोखा दिया है फिर भी वह निराश नहीं हैं। आपके विचार से इस बात का क्या कारण हो सकता है?
Solution: लेखक के निराश न होने का मुख्य कारण यह है कि उन्होंने अपने जीवन में केवल धोखे और विश्वासघात का ही अनुभव नहीं किया है, बल्कि ऐसे अनेक अवसर भी देखे हैं जब लोगों ने बिना किसी स्वार्थ के उनकी सहायता की है और उनके मन को ढाँढस बंधाया है। लेखक का मानना है कि यदि वह केवल धोखे की घटनाओं को याद रखेगा तो उसके लिए किसी पर भी विश्वास करना अत्यंत कठिन हो जाएगा। वह जीवन में सकारात्मकता और मानवीय मूल्यों को अधिक महत्व देते हैं। टिकट बाबू द्वारा बचे हुए पैसे लौटाना और बस कंडक्टर द्वारा बच्चों के लिए दूध का प्रबंध करना जैसी घटनाएँ उन्हें विश्वास दिलाती हैं कि समाज में अभी भी अच्छाई, प्रेम और आपसी सहयोग जीवित है।

प्रश्न 2

दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?
Solution: दोषों का पर्दाफ़ाश करना तब बुरा रूप ले सकता है जब लोग किसी व्यक्ति के आचरण के नकारात्मक पहलुओं को उजागर करने में ही आनंद लेने लगते हैं। इसका उद्देश्य सुधार करना न होकर केवल बदनामी करना, ईर्ष्यावश किसी को नीचा दिखाना या आपसी दुश्मनी निकालना हो सकता है। जब पर्दाफ़ाश का उद्देश्य व्यक्तिगत लाभ, जैसे टी.आर.पी. बढ़ाना या प्रसिद्धि पाना हो, तो यह एक नकारात्मक और हानिकारक प्रवृत्ति बन जाती है।

प्रश्न 3

आजकल के बहुत से समाचार पत्र या समाचार चैनल 'दोषों का पर्दाफ़ाश' कर रहे हैं। इस प्रकार के समाचारों और कार्यक्रमों की सार्थकता पर तर्क सहित विचार लिखिए?
Solution: आजकल समाचार पत्र और चैनल समाज में व्याप्त बुराइयों और दोषों का पर्दाफ़ाश करके जनता को जागरूक करने का कार्य करते हैं। इससे समाज में व्याप्त समस्याओं के प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित होता है और वे सचेत हो जाते हैं। यह एक हद तक सार्थक है क्योंकि यह समाज को आईना दिखाता है। हालाँकि, इनकी सार्थकता तभी है जब ये समाचार निष्पक्ष, सत्य और जनकल्याण की भावना से प्रेरित हों। यदि इनका उद्देश्य केवल टी.आर.पी. बढ़ाना, सनसनी फैलाना या किसी को व्यक्तिगत रूप से हानि पहुँचाना हो, तो ऐसे कार्यक्रमों की कोई सार्थकता नहीं रह जाती और यह समाज के लिए हानिकारक सिद्ध हो सकता है।

प्रश्न 4

निम्नलिखित के संभावित परिणाम क्या-क्या हो सकते हैं? आपस में चर्चा कीजिए, जैसे - 'ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय समझा जाने लगा है।' परिणाम-भ्रष्टाचार बढ़ेगा।
Solution:
  1. 'सच्चाई केवल भीरु और बेबस लोगों के हिस्से पड़ी है।' - यदि ऐसा होने लगे तो समाज में शक्तिशाली लोग सच्चाई को दबाने लगेंगे और आम लोग सच बोलने से डरेंगे। इससे अन्याय बढ़ेगा और लोगों का न्याय व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा। तानाशाही प्रवृत्ति को बढ़ावा मिलेगा।
  2. 'झूठ और फरेब का रोज़गार करनेवाले फल-फूल रहे हैं।' - यदि झूठ और फरेब से लोग सफल होने लगें, तो ईमानदारी और मेहनत का महत्व कम हो जाएगा। समाज में अनैतिकता बढ़ेगी, लोग एक-दूसरे पर विश्वास करना बंद कर देंगे और व्यवस्था पूरी तरह से भ्रष्ट हो जाएगी।
  3. 'हर आदमी दोषी अधिक दिख रहा है, गुणी कम।' - यदि हर व्यक्ति में केवल दोष ही नजर आएँगे और गुण नहीं, तो लोगों के बीच आपसी अविश्वास और संदेह बढ़ेगा। इससे सामाजिक संबंध बिगड़ेंगे और लोग एक-दूसरे से कतराने लगेंगे। सकारात्मकता की कमी होगी।

प्रश्न 5

लेखक ने लेख का शीर्षक 'क्या निराश हुआ जाए' क्यों रखा होगा? क्या आप इससे भी बेहतर शीर्षक सुझा सकते हैं?
Solution: लेखक ने लेख का शीर्षक 'क्या निराश हुआ जाए' इसलिए रखा है क्योंकि आजकल समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, अन्याय और झूठ जैसी घटनाओं को देखकर मन में निराशा उत्पन्न होना स्वाभाविक है। लेखक इस शीर्षक के माध्यम से पाठकों से प्रश्न करते हुए उन्हें यह सोचने पर मजबूर करते हैं कि क्या इन नकारात्मकताओं के बावजूद हमें पूरी तरह निराश हो जाना चाहिए? वह पाठकों को समाज की अच्छाइयों और मानवीय गुणों की ओर भी ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं ताकि निराशा के स्थान पर आशा का संचार हो। एक वैकल्पिक शीर्षक सुझाया जा सकता है: 'आशा की किरण' या 'मानवता की जीत'। ये शीर्षक भी पाठ के मूल भाव को व्यक्त करते हैं, जो कि निराशा के बीच आशा की खोज है।

प्रश्न 6

यदि 'क्या निराश हुआ जाए' के बाद कोई विराम चिह्न लगाने के लिए कहा जाए तो आप दिए गए चिह्नों में से कौन-सा चिह्न लगाएँगे? अपने चुनाव का कारण भी बताइए - , । . । ? ; - , .... ।
Solution: यदि 'क्या निराश हुआ जाए' के बाद कोई विराम चिह्न लगाना हो, तो प्रश्नवाचक चिह्न (?) लगाना सबसे उपयुक्त होगा। इसका कारण यह है कि यह वाक्य स्वयं एक प्रश्न है, जो समाज की वर्तमान स्थिति को देखते हुए पाठक के मन में उठने वाले संदेह और निराशा के भाव को व्यक्त करता है। प्रश्नवाचक चिह्न लगाने से यह शीर्षक पाठक को सोचने और आत्म-विश्लेषण करने के लिए प्रेरित करेगा कि क्या सचमुच निराश होने का कोई कारण है, या हमें सकारात्मक पहलुओं पर भी ध्यान देना चाहिए।

प्रश्न 7

'आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है पर उन पर चलना बहुत कठिन है।' क्या आप इस बात से सहमत हैं? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Solution: मैं इस कथन से पूरी तरह सहमत हूँ कि 'आदर्शों की बातें करना तो बहुत आसान है पर उन पर चलना बहुत कठिन है।' आदर्श वे उच्च नैतिक सिद्धांत होते हैं जिन्हें हम अपने जीवन में अपनाना चाहते हैं, जैसे - सत्य बोलना, ईमानदारी, परोपकार आदि। इन आदर्शों की बातें करना या इनके बारे में सोचना सरल है। परन्तु, जब इन्हें अपने जीवन में उतारने का समय आता है, तो हमें अनेक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अक्सर हमें स्वार्थ, लोभ, भय और सामाजिक दबाव जैसी बाधाओं से जूझना पड़ता है। असामाजिक तत्वों का सामना करना पड़ सकता है या हमें अपने आदर्शों पर टिके रहने के लिए त्याग करना पड़ सकता है। इसलिए, आदर्शों पर चलना केवल कहने की बात नहीं, बल्कि एक चुनौतीपूर्ण कार्य है जिसके लिए दृढ़ संकल्प और साहस की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 8 (भाषा की बात)

दो शब्दों के मिलने से समास बनता है। समास का एक प्रकार है - द्वंद्व समास। इसमें दोनों शब्द प्रधान होते हैं। जब दोनों भाग प्रधान होंगे तो एक-दूसरे में द्वंद्व (स्पर्धा, होड़) की संभावना होती है। कोई किसी से पीछे रहना नहीं चाहता, जैसे - चरम और परम = चरम-परम, भीरु और बेबस = भीरू-बेबस। दिन और रात = दिन-रात। 'और' के साथ आए शब्दों के जोड़े को 'और' हटाकर (-) योजक चिह्न भी लगाया जाता है। कभी-कभी एक साथ भी लिखा जाता है। द्वंद्व समास के बारह उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
Solution: द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और उनका अर्थ समान महत्व रखता है। 'और', 'तथा', 'या' जैसे योजक शब्दों से जुड़े दो शब्दों को मिलाकर 'और' हटाकर योजक चिह्न (-) लगाकर या कभी-कभी दोनों शब्दों को मिलाकर द्वंद्व समास बनाया जाता है। द्वंद्व समास के बारह उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. सुख और दुख = सुख-दुख
  2. भूख और प्यास = भूख-प्यास
  3. राजा और रानी = राजा-रानी
  4. अपना और पराया = अपना-पराया
  5. ऊँच और नीच = ऊँच-नीच
  6. भाई और बहन = भाई-बहन
  7. माता और पिता = माता-पिता
  8. लाभ और हानि = लाभ-हानि
  9. दिन और रात = दिन-रात
  10. अच्छा और बुरा = अच्छा-बुरा
  11. सच और झूठ = सच-झूठ
  12. हार और जीत = हार-जीत

Common mistakes

  • Focusing solely on negative societal aspects and overlooking positive actions.
  • Misinterpreting the purpose and impact of exposing societal faults.
  • Underestimating the difficulty of upholding moral ideals in practice.
  • Confusing the grammatical rules of 'Dvandva Samas'.

Revision tips

  • Reread the chapter, paying close attention to the examples of positive human behavior mentioned by the author.
  • Reflect on the questions about the consequences of dishonesty and the difficulty of following ideals.
  • Review the explanation and examples of 'Dvandva Samas' to solidify grammar understanding.
  • Discuss the chapter's themes with classmates to gain different perspectives.

Practice MCQs

Q1. लेखक के अनुसार, समाज में धोखा खाने के बावजूद वह निराश क्यों नहीं हैं?

Q2. दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?

Q3. समाचार पत्र और चैनल द्वारा 'दोषों का पर्दाफ़ाश' तभी सार्थक है जब:

Q4. यदि 'ईमानदारी को मूर्खता का पर्याय' समझा जाने लगे, तो इसका संभावित परिणाम क्या होगा?

Q5. लेखक ने 'क्या निराश हुआ जाए' शीर्षक क्यों चुना?

Q6. द्वंद्व समास में प्रधान होते हैं:

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह समाधान CBSE कक्षा 8 की हिंदी 'वसंत' पुस्तक के अध्याय 7 'क्या निराश हुआ जाए' के लिए हैं।

लेखक हजारी प्रसाद द्विवेदी इस पाठ में क्या मुख्य संदेश देना चाहते हैं?

लेखक यह संदेश देना चाहते हैं कि समाज में बुराइयाँ होने के बावजूद अच्छाई और मानवता अभी भी मौजूद है, इसलिए हमें निराश नहीं होना चाहिए।

पाठ में 'दोषों का पर्दाफ़ाश' करने के बारे में क्या कहा गया है?

पाठ में बताया गया है कि दोषों का पर्दाफ़ाश तब बुरा रूप ले लेता है जब लोग केवल निंदा में रस लेते हैं, लेकिन यह तभी सार्थक है जब इसमें सच्चाई और जनकल्याण की भावना हो।

क्या पाठ में व्याकरण का कोई भाग शामिल है?

हाँ, पाठ में 'द्वंद्व समास' के बारे में समझाया गया है और उसके उदाहरण दिए गए हैं।

यह समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ की गहरी समझ, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर और व्याकरण की स्पष्टता प्रदान करके परीक्षा की तैयारी में मदद करते हैं।

लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख क्यों किया है?

लेखक ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों का उल्लेख यह दर्शाने के लिए किया है कि उन्होंने भी धोखा खाया है, लेकिन अच्छाई और मदद करने वाले लोगों के उदाहरणों से उनका विश्वास बना रहता है।

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