कक्षा 8 हिंदी NCERT समाधान: कबीर की साखियाँ
यह पृष्ठ कक्षा 8 हिंदी के छात्रों के लिए 'कबीर की साखियाँ' (पाठ 9) पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कबीर के प्रसिद्ध दोहों का गहन विश्लेषण शामिल है, जो जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों जैसे कि आडंबर का त्याग, सच्ची भक्ति का महत्व, विनम्रता और आपसी सम्मान पर जोर देते हैं। समाधान प्रत्येक दोहे के मूल भाव को स्पष्ट करते हैं, यह समझाते हुए कि कबीर क्यों घास जैसी तुच्छ वस्तु की निंदा करने से मना करते हैं, और कैसे अहंकार (आपा) को त्यागकर हम सबके प्रिय बन सकते हैं। ये समाधान छात्रों को दोहों के अर्थ को गहराई से समझने, उनकी भाषा की बारीकियों को पहचानने और परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करने में मदद करेंगे।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 9. कबीर की साखियाँ - कबीर |
Chapter summary
कक्षा 8 हिंदी के लिए 'कबीर की साखियाँ' के NCERT समाधानों का यह संग्रह कबीर के चुने हुए दोहों पर केंद्रित है। इसमें दोहों के अर्थ, उनके निहितार्थ और व्यावहारिक जीवन में उनकी प्रासंगिकता का विस्तृत स्पष्टीकरण दिया गया है। समाधान छात्रों को यह समझने में मदद करते हैं कि कबीर क्यों दिखावटी भक्ति और अहंकार की निंदा करते हैं, और कैसे विनम्रता व आपसी सम्मान का भाव रखना चाहिए। यह खंड छात्रों को दोहों की भाषा, जैसे 'साखी' शब्द का अर्थ, और क्षेत्रीय बोलियों के प्रभाव से शब्दों के बदलते रूपों को समझने में भी सहायता करता है।
Learning outcomes
- कबीर के दोहों के माध्यम से जीवन के व्यावहारिक ज्ञान को समझना।
- साखी शब्द का अर्थ और कबीर के दोहों को साखी क्यों कहा जाता है, यह जानना।
- अहंकार (आपा) और आत्मविश्वास के बीच अंतर को स्पष्ट करना।
- किसी भी व्यक्ति या वस्तु को तुच्छ न समझने के महत्व को समझना।
- सच्ची भक्ति और दिखावटी आडंबर के बीच अंतर को पहचानना।
- भाषा में क्षेत्रीय प्रभाव और वर्तनी परिवर्तन के उदाहरणों को समझना।
Topics covered
Paper topics
- कबीर के दोहे
- साखी का अर्थ
- अहंकार (आपा) का त्याग
- विनम्रता और दया का महत्व
- सच्ची भक्ति बनाम आडंबर
- तुच्छ समझे जाने वाले का महत्व
- वाणी का प्रभाव
- क्षेत्रीय भाषा का प्रभाव
- कबीर की शिक्षाएँ
- दोहों का भावार्थ
Important topics
- कबीर के दोहों का भावार्थ और शिक्षाएँ
- अहंकार (आपा) का त्याग और विनम्रता का महत्व
- सच्ची भक्ति और आडंबर के बीच अंतर
- किसी को भी तुच्छ न समझने का संदेश
- साखी शब्द का अर्थ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रश्न 3
प्रश्न 4
प्रश्न 5
प्रश्न 6
प्रश्न 7
प्रश्न 8
भाषा की बात
ग्यान, जीभि, पाऊँ, तलि, आंखि, बरी।
- ग्यान - ज्ञान
- जीभि - जीभ
- पाऊँ - पाँव
- तलि - तले
- आंखि - आँख
- बरी - बड़ी
Common mistakes
- दोहों के शाब्दिक अर्थ पर अटक जाना और गहरे भाव को न समझना।
- 'आपा' शब्द का अर्थ केवल स्वार्थ समझना, जबकि यह अहंकार का भी प्रतीक है।
- कबीर की शिक्षाओं को केवल धार्मिक संदर्भ में देखना, न कि व्यावहारिक जीवन के लिए।
- तुच्छ समझे जाने वाले तत्वों (जैसे घास) के महत्व को अनदेखा करना।
Revision tips
- प्रत्येक दोहे को जोर से पढ़ें और उसके मुख्य संदेश को अपने शब्दों में लिखें।
- कठिन शब्दों और 'आपा' जैसे प्रतीकात्मक शब्दों के अर्थ को समझें।
- दोहों से संबंधित प्रश्नों के उत्तर लिखते समय कबीर के दृष्टिकोण को ध्यान में रखें।
- भाषा की बात वाले खंड में दिए गए शब्दों के बदलते रूपों का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. कबीर के अनुसार, 'तलवार का महत्त्व होता है, म्यान का नहीं' इस उदाहरण से क्या तात्पर्य है?
Explanation: यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि कबीर के अनुसार किसी व्यक्ति या वस्तु की असली पहचान उसके गुण या क्षमता में होती है, न कि उसके बाहरी आवरण या दिखावे में।
Q2. कबीरदास जी 'मनुवाँ तो दहुँ दिसि फिरै, यह तो सुमिरन नाहिं' पंक्ति में किस प्रकार की भक्ति को व्यर्थ बताते हैं?
Explanation: कबीर इस पंक्ति के माध्यम से उस भक्ति पर व्यंग्य करते हैं जहाँ व्यक्ति माला तो फेरता है, पर उसका मन एकाग्र नहीं होता और इधर-उधर भटकता रहता है, जिसे वे सच्ची भक्ति नहीं मानते।
Q3. कबीर घास की निंदा करने से क्यों मना करते हैं?
Explanation: कबीर घास को दबे-कुचले या तुच्छ समझे जाने वाले व्यक्तियों का प्रतीक मानते हैं और सिखाते हैं कि किसी को भी छोटा समझकर उसकी निंदा नहीं करनी चाहिए।
Q4. दोहे 'जग में बैरी कोइ नहीं, जो मन सीतल होय। या आपा को डारि दे, दया करै सब कोय।।' के अनुसार शत्रुता का अभाव किस स्थिति में संभव है?
Explanation: यह दोहा बताता है कि यदि मन शांत और शीतल हो जाए तथा व्यक्ति अपने अहंकार को त्याग दे, तो संसार में कोई उसका शत्रु नहीं रहता।
Q5. 'आपा' शब्द का प्रयोग कबीर के दोहों में मुख्य रूप से किस अर्थ में हुआ है?
Explanation: कबीर के दोहों में 'आपा' शब्द का प्रयोग मुख्य रूप से अहंकार, घमंड या अपनेपन के उस भाव के लिए किया गया है जो दूसरों को हीन समझने पर विवश करता है।
Q6. कबीर के दोहों को 'साखी' क्यों कहा जाता है?
Explanation: 'साखी' शब्द का अर्थ है प्रत्यक्षदर्शी या गवाह। कबीर के दोहे ऐसे ज्ञान देते हैं मानो वे स्वयं गवाह हों, इसलिए उन्हें साखी कहा जाता है।
Frequently asked questions
कक्षा 8 हिंदी के लिए 'कबीर की साखियाँ' पाठ के मुख्य विषय क्या हैं?
इस पाठ के मुख्य विषय हैं - आडंबर का त्याग, सच्ची भक्ति का महत्व, अहंकार को छोड़कर विनम्रता अपनाना, किसी भी प्राणी को तुच्छ न समझना, और वाणी का मधुर प्रयोग।
'आपा' शब्द का क्या अर्थ है और यह क्यों त्याज्य है?
'आपा' का अर्थ है अहंकार या घमंड। कबीर के अनुसार, यह अहंकार मनुष्य को दूसरों से दूर कर देता है और उसे सच्चा सुख प्राप्त नहीं करने देता, इसलिए इसे त्याग देना चाहिए।
कबीर घास की निंदा करने से क्यों मना करते हैं?
कबीर घास को तुच्छ या दबे-कुचले व्यक्ति का प्रतीक मानते हैं। वे सिखाते हैं कि किसी को भी छोटा समझकर उसकी निंदा या उपेक्षा नहीं करनी चाहिए, क्योंकि वही कभी-कभी बड़ी पीड़ा का कारण बन सकता है।
कबीर के दोहों को 'साखी' क्यों कहा जाता है?
'साखी' शब्द 'साक्षी' का तद्भव रूप है, जिसका अर्थ है प्रत्यक्ष ज्ञान या गवाही। कबीर के दोहे ऐसे ज्ञान देते हैं जो प्रत्यक्ष अनुभव पर आधारित होते हैं, इसलिए उन्हें साखी कहा जाता है।
इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान दोहों के अर्थ को स्पष्ट करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझाते हैं, और अभ्यास प्रश्नों के उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद मिलती है।
भाषा की बात खंड में क्या सिखाया गया है?
भाषा की बात खंड में क्षेत्रीय बोलियों के प्रभाव से शब्दों के उच्चारण और वर्तनी में होने वाले परिवर्तनों को समझाया गया है, जैसे 'ज्ञान' का 'ग्यान' या 'जीभ' का 'जीभि' बनना।
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