CBSE Class 8 Hindi NCERT Solutions: पाठ 7 - क्या निराश हुआ जाए
सीबीएसई कक्षा 8 हिंदी पाठ 7 'क्या निराश हुआ जाए' के लिए विस्तृत समाधान प्रस्तुत हैं। यह पाठ मानवीय व्यवहार की जटिलताओं, छल और ईमानदारी जैसे विषयों की पड़ताल करता है। लेखक अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा करते हैं, जहाँ उन्हें विश्वासघात का सामना करना पड़ा, फिर भी वे मानवता में विश्वास बनाए रखने के महत्व पर जोर देते हैं। समाधान बताते हैं कि लेखक नकारात्मक अनुभवों से हतोत्साहित क्यों नहीं होते, अच्छे लोगों और दयालुता के कार्यों के अस्तित्व को उजागर करते हुए। इसके अतिरिक्त, पाठ में द्वंद्व समास और संज्ञाओं के विभिन्न प्रकारों (व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, भाववाचक) की पहचान जैसे व्याकरणिक अवधारणाओं को भी समझाया गया है। ये समाधान छात्रों को पाठ के मुख्य संदेशों को समझने और परीक्षाओं की प्रभावी तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | पाठ 7 - क्या निराश हुआ जाए |
Chapter summary
NCERT Solutions for Class 8 Hindi, पाठ 7 'क्या निराश हुआ जाए', focuses on the author's reflections on deceit and honesty in society. The solutions explain the author's optimistic outlook despite facing betrayal, emphasizing the presence of good people. They also cover grammatical aspects, including the formation and examples of Dvandva Samas and the identification of proper, common, and abstract nouns within the context of the chapter's themes.
Learning outcomes
- Understand the author's perspective on hope amidst disappointment.
- Analyze the balance between negative and positive human experiences.
- Identify and explain the concept of Dvandva Samas.
- Differentiate between proper, common, and abstract nouns.
- Appreciate the importance of maintaining faith in humanity.
Topics covered
Paper topics
- Honesty and Deceit
- Hope and Disappointment
- Human Nature
- Author's Experiences
- Dvandva Samas
- Proper Nouns
- Common Nouns
- Abstract Nouns
- Moral Reflections
- Positive Outlook
Important topics
- Author's perspective on hope
- Dvandva Samas examples
- Identifying different types of nouns
- Moral lessons from the chapter
- Balancing negative and positive experiences
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
लेखक ने अपने व्यक्तिगत जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए यह स्वीकार किया है कि उन्हें भी लोगों ने धोखा दिया है। इसके बावजूद, वह निराश नहीं हैं क्योंकि उनका मानना है कि यदि वह केवल धोखे और नकारात्मक अनुभवों पर ही ध्यान केंद्रित करेंगे, तो उनके लिए लोगों पर विश्वास करना अत्यंत कठिन हो जाएगा। यह उन ईमानदार और नेक इंसानों के प्रति अन्याय होगा जो आज भी दुनिया में मौजूद हैं। लेखक आशावादी दृष्टिकोण रखता है और उन लोगों का सम्मान करता है जिन्होंने कठिन समय में उनकी निस्वार्थ भाव से सहायता की है। इन्हीं सकारात्मक अनुभवों के कारण वह निराश होने के बजाय आशा बनाए रखते हैं।
प्रश्न 2
किसी व्यक्ति के दोषों का पर्दाफ़ाश करना तब बुरा रूप ले सकता है जब हम केवल उसके गलत पक्ष को उजागर करने में ही रुचि लेते हैं और उसमें आनंद पाते हैं। दूसरों के दोषों को सार्वजनिक करना या उन्हें अपना कर्तव्य मान लेना उचित नहीं है। हमें यह समझना चाहिए कि बुराई या कमियाँ हम सभी में किसी न किसी रूप में मौजूद होती हैं। यदि हम केवल दूसरों की बुराइयों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उन्हें उजागर करके अपना मनोरंजन करते हैं, तो यह एक नकारात्मक और हानिकारक व्यवहार बन जाता है। इसके बजाय, हमें लोगों की अच्छाइयों की सराहना करनी चाहिए और उन्हें प्रोत्साहित करना चाहिए।
प्रश्न 3
लेखक ने इस लेख का शीर्षक 'क्या निराश हुआ जाए' इसलिए रखा है क्योंकि यह शीर्षक सीधे तौर पर उस केंद्रीय भाव को व्यक्त करता है जिस पर पूरा लेख आधारित है। यह शीर्षक पाठक को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हमें केवल कुछ नकारात्मक अनुभवों के आधार पर निराश हो जाना चाहिए। लेखक यह बताना चाहते हैं कि यद्यपि संसार में धोखा और बुराई मौजूद है, फिर भी अच्छाई और ईमानदारी की भी कमी नहीं है। उन्होंने स्वयं के अनुभवों का उल्लेख किया है जहाँ उन्हें धोखा मिला, लेकिन साथ ही यह भी कहा है कि उन्हें अकारण ही सहायता भी मिली है। यह शीर्षक इस आशावादी दृष्टिकोण को दर्शाता है कि हमें निराशा को हावी नहीं होने देना चाहिए।
एक वैकल्पिक शीर्षक जो लेखक के विचार को और अधिक बल दे सकता है, वह है "आशा की किरण" या "उजाले की ओर"। ये शीर्षक सकारात्मकता और अच्छाई की खोज पर अधिक जोर देते हैं।
प्रश्न 4
द्वंद्व समास के बारह उदाहरण निम्नलिखित हैं:
- सुख और दुख = सुख-दुख
- भूख और प्यास = भूख-प्यास
- हँसना और रोना = हँसना-रोना
- आते और जाते = आते-जाते
- राजा और रानी = राजा-रानी
- चाचा और चाची = चाचा-चाची
- सच्चा और झूठा = सच्चा-झूठा
- पाना और खोना = पाना-खोना
- पाप और पुण्य = पाप-पुण्य
- स्त्री और पुरुष = स्त्री-पुरुष
- राम और सीता = राम-सीता
- आना और जाना = आना-जाना
प्रश्न 5
पाठ से तीनों प्रकार की संज्ञाओं के उदाहरण इस प्रकार हैं:
व्यक्तिवाचक संज्ञा: ये किसी विशेष व्यक्ति, स्थान, वस्तु या भाव के नाम होते हैं।
रबीन्द्रनाथ टैगोर
मदनमोहन मालवीय
तिलक
महात्मा गाँधी
जातिवाचक संज्ञा: ये किसी संपूर्ण जाति या वर्ग का बोध कराते हैं। बस यात्री
मनुष्य
ड्राइवर
कंडक्टर
हिन्दू
मुस्लिम
आर्य
द्रविड़ पति पत्नी
भाववाचक संज्ञा: ये किसी गुण, भाव, अवस्था या क्रिया के नाम होते हैं, जिन्हें हम केवल महसूस कर सकते हैं।
ईमानदारी
सच्चाई झूठ चोर (यह अवस्था या गुण बता सकता है)
डकैत (यह अवस्था या गुण बता सकता है)
Common mistakes
- Confusing the author's personal experiences with a general view of society.
- Difficulty in applying grammatical rules for Dvandva Samas.
- Incorrectly classifying nouns.
- Overlooking the positive examples of human behavior mentioned.
Revision tips
- Reread the chapter to understand the author's emotional journey.
- Focus on the examples of honesty and kindness provided in the text.
- Practice identifying Dvandva Samas with new examples.
- Review the definitions and examples of different noun types.
- Discuss the chapter's themes with classmates to gain different perspectives.
Practice MCQs
Q1. लेखक ने धोखे खाने के बावजूद निराश न होने का क्या कारण बताया है?
Explanation: लेखक का मानना है कि धोखे के बावजूद, दुनिया में ऐसे लोग भी हैं जिन्होंने बिना किसी कारण के मदद की है, जो उन्हें आशावादी बनाए रखता है।
Q2. दोषों का पर्दाफ़ाश करना कब बुरा रूप ले सकता है?
Explanation: दोषों का पर्दाफ़ाश तब बुरा हो जाता है जब हम दूसरों के गलत पक्ष को दिखाकर उसमें आनंद लेने लगते हैं, बजाय इसके कि हम उनकी अच्छाइयों को भी देखें।
Q3. 'क्या निराश हुआ जाए' शीर्षक के बारे में लेखक का क्या विचार है?
Explanation: लेखक ने यह शीर्षक इसलिए चुना क्योंकि यह इस बात पर जोर देता है कि कुछ धोखे के बावजूद, दुनिया में अभी भी ईमानदार लोग मौजूद हैं।
Q4. द्वंद्व समास में क्या प्रधान होता है?
Explanation: द्वंद्व समास में दोनों ही पद प्रधान होते हैं, जिसका अर्थ है कि दोनों शब्दों का अपना महत्व होता है और वे एक-दूसरे के पूरक या विरोधी हो सकते हैं।
Q5. निम्नलिखित में से कौन सा भाववाचक संज्ञा का उदाहरण है?
Explanation: ईमानदारी एक भाववाचक संज्ञा है क्योंकि यह एक गुण या अवस्था को दर्शाती है, जिसे छुआ या देखा नहीं जा सकता।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 8 हिंदी के लिए हैं, विशेष रूप से पाठ 7 'क्या निराश हुआ जाए' पर केंद्रित हैं।
पाठ 'क्या निराश हुआ जाए' के मुख्य विषय क्या हैं?
पाठ के मुख्य विषय निराशा के बीच आशा बनाए रखना, मानवीय धोखे और ईमानदारी के बीच संतुलन, और दुनिया में अच्छाई की उपस्थिति पर विश्वास करना है।
क्या इन समाधानों में व्याकरण के प्रश्न शामिल हैं?
हाँ, इन समाधानों में द्वंद्व समास के उदाहरण और व्यक्तिवाचक, जातिवाचक, तथा भाववाचक संज्ञाओं की पहचान जैसे व्याकरणिक विषयों को शामिल किया गया है।
लेखक धोखे खाने के बावजूद निराश क्यों नहीं है?
लेखक इसलिए निराश नहीं है क्योंकि उसका मानना है कि दुनिया में अभी भी बहुत से ईमानदार और अच्छे लोग हैं, जिन्होंने कठिन समय में उसकी मदद की है, और वह उन लोगों की उपेक्षा नहीं करना चाहता।
द्वंद्व समास को कैसे पहचाना जा सकता है?
द्वंद्व समास में दोनों पद प्रधान होते हैं और अक्सर उन्हें 'और' से जोड़ा जाता है, जिसे हटाकर योजक चिह्न (-) लगाया जाता है, जैसे 'सुख-दुख' (सुख और दुख)।
ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?
ये समाधान पाठ की गहरी समझ प्रदान करते हैं, महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं, और व्याकरणिक अभ्यासों के माध्यम से छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार करने में मदद करते हैं।
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