कक्षा 8 संस्कृत रुचिरा: अध्याय 14 आर्यभट NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 8 के संस्कृत रुचिरा पाठ्यपुस्तक के अध्याय 14, 'आर्यभट' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय महान भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट के जीवन, कार्यों और वैज्ञानिक योगदानों पर केंद्रित है। समाधानों में आर्यभट के सिद्धांतों, जैसे कि पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना और ग्रहणों की वैज्ञानिक व्याख्या, को स्पष्ट किया गया है। इसमें एक-पद उत्तर, संधि-विच्छेद, विपरीतार्थक शब्द, वाक्य-रचना, रिक्त-स्थान पूर्ति, पद-परिचय और 'मति' शब्द के रूपों का अभ्यास शामिल है। ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को गहराई से समझने, संस्कृत व्याकरण के नियमों को लागू करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 8 |
| Subject | Sanskrit Ruchira |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 14 |
Chapter summary
कक्षा 8 संस्कृत रुचिरा के अध्याय 14 'आर्यभट' के ये NCERT समाधान छात्रों को प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान के एक महत्वपूर्ण स्तंभ से परिचित कराते हैं। समाधान आर्यभट के वैज्ञानिक योगदानों, जैसे पृथ्वी के घूर्णन और ग्रहणों की व्याख्या, पर प्रकाश डालते हैं। इसमें दिए गए अभ्यास संस्कृत व्याकरण के विभिन्न पहलुओं, जैसे संधि-विच्छेद, विपरीतार्थक शब्द, वाक्य-निर्माण, और शब्द-रूपों (विशेषकर 'मति' शब्द) पर केंद्रित हैं, जो छात्रों को भाषा पर अपनी पकड़ मजबूत करने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- आर्यभट के वैज्ञानिक योगदानों को समझना।
- पृथ्वी के घूर्णन और ग्रहणों की वैज्ञानिक व्याख्या को जानना।
- संस्कृत में संधि-विच्छेद करने का अभ्यास करना।
- विपरीतार्थक शब्दों की पहचान और प्रयोग सीखना।
- दिए गए शब्दों का प्रयोग करके वाक्य बनाना।
- रिक्त स्थानों को उचित शब्दों से भरना।
- शब्दों के लिंग, विभक्ति और वचन का परिचय प्राप्त करना।
- 'मति' शब्द के विभिन्न रूपों को पहचानना और प्रयोग करना।
Topics covered
Paper topics
- आर्यभट का जीवन परिचय
- आर्यभट का खगोल विज्ञान में योगदान
- पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना
- सूर्य और चंद्रमा ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या
- संस्कृत व्याकरण: संधि-विच्छेद
- संस्कृत व्याकरण: विपरीतार्थक शब्द
- संस्कृत व्याकरण: वाक्य-रचना
- संस्कृत व्याकरण: पद-परिचय (लिंग, विभक्ति, वचन)
- संस्कृत व्याकरण: 'मति' शब्द के रूप
Important topics
- आर्यभट का खगोल विज्ञान में योगदान
- पृथ्वी का अपनी धुरी पर घूमना
- सूर्य और चंद्रमा ग्रहण की वैज्ञानिक व्याख्या
- संस्कृत व्याकरण: संधि-विच्छेद
- संस्कृत व्याकरण: 'मति' शब्द के रूप
- संस्कृत व्याकरण: पद-परिचय
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Questions and Solutions
प्रश्न 1. एक पद में उत्तर दीजिए।
- (क) सूर्य: कस्यां दिशायाम् उदेति?
- (ख) आर्यभटस्य वेधशाला कुत्र आसीत्?
- (ग) महान् गणितज्ञ: ज्योतिर्विच्च क: अस्ति?
- (घ) आर्यभटेन क: ग्रन्थ: रचित:?
- (ङ) अस्माकं प्रथमोपग्रहस्य नाम किम् अस्ति?
इस प्रश्न में दिए गए प्रश्नों के उत्तर एक पद में देने हैं।
- (क) सूर्यः **पूर्विदशायाम्** (पूर्व दिशा में) उदय होता है।
- (ख) आर्यभट की वेधशाला **पाटलिपुत्रम्** (पाटलिपुत्र में) स्थित थी।
- (ग) महान गणितज्ञ और ज्योतिर्विद **आर्यभटः** (आर्यभट) हैं।
- (घ) आर्यभट ने **आर्यभटीयम्** नामक ग्रंथ की रचना की थी।
- (ङ) हमारे प्रथम उपग्रह का नाम **आर्यभटः** (आर्यभट) है।
प्रश्न 2. संधि-विच्छेद कीजिए।
ग्रन्थोऽयम् = ------+ + ---------------------------
सूर्याचल: = ..... + .....
तथैव = ''''' + '''''
कालातिगामिनी = ****** + *********
प्रथमोपग्रहस्य = ..... + .....
दिए गए शब्दों का संधि-विच्छेद इस प्रकार है:
- ग्रन्थोऽयम् = ग्रन्थः + अयम्
- सूर्याचल: = सूर्य + अचलः
- तथैव = तथा + एव
- कालातिगामिनी = काल + अतिगामिनी
- प्रथमोपग्रहस्य = प्रथम + उपग्रहस्य
प्रश्न 3. निम्नलिखित पदों के विपरीतार्थक पद लिखिए।
उदय: **************
अचल: .......
अन्धकार: ***************
स्थिर: ***************
समादर: ****************
दिए गए पदों के विपरीतार्थक पद निम्नलिखित हैं:
- उदयः का विपरीतार्थक **अस्तः** है।
- अचलः का विपरीतार्थक **गतिशीलः** (या चलः) है।
- अन्धकारः का विपरीतार्थक **प्रकाशः** है।
- स्थिरः का विपरीतार्थक **गतिशीलः** है।
- समादरः का विपरीतार्थक **निरादरः** (या उपहासः) है।
प्रश्न 4. निम्नलिखित पदों के आधार पर वाक्यों की रचना कीजिए।
साम्प्रतम् ***************************************
निकषा परित: उपविष्ट:
कर्मभूमि:
वैज्ञानिक: - ***************************************
दिए गए पदों का प्रयोग करके वाक्य इस प्रकार बनाए जा सकते हैं:
- साम्प्रतम् (इस समय): साम्प्रतं छात्राः कक्षायाम् पठन्ति। (इस समय छात्र कक्षा में पढ़ रहे हैं।)
- निकषा (निकट): जलम् निकषा जीवाः गच्छन्ति। (जल के निकट जीव जाते हैं।)
- परितः (चारों ओर): बाला: गृहम् परितः भ्रमन्ति। (बच्चे घर के चारों ओर घूमते हैं।)
- उपविष्टः (बैठा हुआ): मार्गे उपविष्टः बालकः रोदित। (मार्ग पर बैठा हुआ बालक रो रहा है।)
- कर्मभूमिः (कर्मभूमि): संसारः एव जीवानां कर्मभूमिः वर्तते। (यह संसार ही जीवों की कर्मभूमि है।)
- वैज्ञानिकः (वैज्ञानिक): आर्यभटः भारतस्य प्राचीनः वैज्ञानिकः आसीत्। (आर्यभट भारत के प्राचीन वैज्ञानिक थे।)
प्रश्न 5. मंजूषा से पदों को लेकर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
नौकाम् पृथिवी तदा चला अस्तं
- (क) सूर्य: पूर्विदशायाम् उदेति पश्चिमदिशि च ..... गच्छति।
- (ख) सूर्य: अचल: पृथिवी च """""""""।
- (ग) ……… स्वकीये अक्षे घूर्णति।
- (घ) यदा पृथिव्याः छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाशः अवरुध्यते ..... चन्द्रग्रहणं भवति।
- (ङ) नौकायाम् उपविष्ट: मानव: """"""""" स्थिरामनुभवति।
मंजूषा के पदों का प्रयोग करके रिक्त स्थान इस प्रकार भरे जाएंगे:
- (क) सूर्य: पूर्विदशायाम् उदेति पश्चिमदिशि च **अस्तं** गच्छति। (सूर्य पूर्व दिशा में उदय होता है और पश्चिम दिशा में अस्त होता है।)
- (ख) सूर्य: अचल: पृथिवी च **चला**। (सूर्य स्थिर है और पृथ्वी गतिशील है।)
- (ग) **पृथिवी** स्वकीये अक्षे घूर्णति। (पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।)
- (घ) यदा पृथिव्या: छायापातेन चन्द्रस्य प्रकाश: अवरुध्यते **तदा** चन्द्रग्रहणं भवति। (जब पृथ्वी की छाया पड़ने से चंद्रमा का प्रकाश रुक जाता है, तब चंद्र ग्रहण होता है।)
- (ङ) नौकायाम् उपविष्टः मानवः **नौकां** स्थिरामनुभवति। (नाव में बैठा हुआ मनुष्य नाव को स्थिर अनुभव करता है।)
प्रश्न 6. उदाहरणों के अनुसार पदों का परिचय दीजिए।
पदानि लिङ्गम् विभक्तिः वचनम्
यथा- चन्द्रस्य पुॅल्लिङ्ग: षष्ठी एकवचनम्
वेधशालायाम् ******* *************** ***************************************
पृथिवी ************** ................. ................
परम्परया ................. ................ ................
त्रीणि ................. छायापातेन *************** *************** .................
दिए गए पदों का लिंग, विभक्ति और वचन के अनुसार परिचय इस प्रकार है:
| पदानि | लिङ्गम् | विभक्तिः | वचनम् |
|---|---|---|---|
| वेधशालायाम् | स्त्रीलिङ्गम् | सप्तमी | एकवचनम् |
| पृथिवी | स्त्रीलिङ्गम् | प्रथमा | एकवचनम् |
| परम्परया | स्त्रीलिङ्गम् | तृतीया | एकवचनम् |
| त्रीणि | नपुंसकलिङ्गम् | प्रथमा/द्वितीया | बहुवचनम् |
| छायापातेन | पुंल्लिङ्गम् | तृतीया | एकवचनम् |
प्रश्न 7. 'मति' शब्द के रूप पूरे कीजिए।
विभक्तिः एकवचनम् द्विवचनम् बहुवचनम्
प्रथमा मति: मती मतय:
द्वितीया मतिम् ............... मती:
तृतीया मत्या मतिभ्याम् ...............
चतुर्थी मतिभ्याम् मतिभ्य:
पञ्चमी मत्याः, मतेः ................ ................
षष्ठी ************* मत्यो: मतीनाम्
सप्तमी मत्याम् मत्यो: मतिषु
सम्बोधनम् ••••••••• हे मती! हे मतय:!
'मति' शब्द (स्त्रीलिंग, अकारान्त) के रूप इस प्रकार हैं:
| विभक्तिः | एकवचनम् | द्विवचनम् | बहुवचनम् |
|---|---|---|---|
| प्रथमा | मतिः | मती | मतयः |
| द्वितीया | मतिम् | मती | मतीः |
| तृतीया | मत्या | मतिभ्याम् | मतिभिः |
| चतुर्थी | मत्यै, मतये | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| पञ्चमी | मत्याः, मतेः | मतिभ्याम् | मतिभ्यः |
| षष्ठी | मत्याः, मतेः | मत्योः | मतीनाम् |
| सप्तमी | मत्याम्, मतौ | मत्योः | मतिषु |
| सम्बोधनम् | हे मति! | हे मती! | हे मतयः! |
Common mistakes
- संधि-विच्छेद करते समय मूल शब्दों को सही ढंग से अलग न कर पाना।
- विपरीतार्थक शब्दों को गलत चुनना या उनका अर्थ न समझना।
- वाक्य-रचना में क्रिया और कर्ता के सामंजस्य में त्रुटि करना।
- शब्द-रूपों (जैसे 'मति') के विभिन्न विभक्तियों और वचनों में भ्रमित होना।
- रिक्त स्थानों में गलत पद का प्रयोग करना।
Revision tips
- आर्यभट के मुख्य वैज्ञानिक सिद्धांतों को संक्षेप में लिखें।
- संधि-विच्छेद और विपरीतार्थक शब्दों के अभ्यासों को बार-बार दोहराएं।
- 'मति' शब्द के रूप चार्ट को याद करें और उसका प्रयोग करके वाक्य बनाएं।
- रिक्त स्थानों की पूर्ति वाले प्रश्न को हल करते समय संदर्भ को ध्यान से समझें।
- वाक्य-रचना के अभ्यासों से अपनी रचनात्मकता और व्याकरणिक ज्ञान का परीक्षण करें।
Practice MCQs
Q1. आर्यभट के अनुसार, सूर्य किस दिशा में उदय होता है?
Explanation: पाठ के अनुसार, सूर्य पूर्व दिशा में उदय होता है और पश्चिम दिशा में अस्त होता है।
Q2. आर्यभट की वेधशाला कहाँ स्थित थी?
Explanation: पाठ में बताया गया है कि आर्यभट की वेधशाला पाटलिपुत्र में स्थित थी।
Q3. आर्यभट द्वारा रचित प्रसिद्ध ग्रंथ का नाम क्या है?
Explanation: आर्यभट ने 'आर्यभटीयम्' नामक ग्रंथ की रचना की थी।
Q4. आर्यभट के अनुसार, कौन सी वस्तु स्थिर है और कौन सी गतिशील?
Explanation: आर्यभट ने बताया कि सूर्य स्थिर है और पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है।
Q5. जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो क्या होता है?
Explanation: जब पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, तो चंद्र ग्रहण होता है।
Q6. 'अचलः' शब्द का विपरीतार्थक शब्द क्या है?
Explanation: पाठ में 'अचलः' का विपरीतार्थक 'गतिशीलः' या 'चलः' बताया गया है।
Q7. 'मति' शब्द का 'षष्ठी विभक्ति, बहुवचन' रूप क्या है?
Explanation: षष्ठी विभक्ति के बहुवचन में 'मति' शब्द का रूप 'मतीनाम्' होता है।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 8 के संस्कृत रुचिरा विषय के लिए है।
इस समाधान में कौन सा अध्याय शामिल है?
इसमें अध्याय 14, जिसका शीर्षक 'आर्यभट' है, शामिल है।
समाधान में किस प्रकार के प्रश्न शामिल हैं?
समाधान में एक-पद उत्तर, संधि-विच्छेद, विपरीतार्थक शब्द, वाक्य-रचना, रिक्त-स्थान पूर्ति, पद-परिचय और 'मति' शब्द के रूप जैसे अभ्यास शामिल हैं।
क्या यह समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेगा?
हाँ, यह समाधान अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने और संस्कृत व्याकरण के अभ्यासों के माध्यम से परीक्षा की तैयारी में बहुत सहायक है।
आर्यभट के बारे में इस अध्याय में मुख्य रूप से क्या बताया गया है?
यह अध्याय महान भारतीय गणितज्ञ और खगोलशास्त्री आर्यभट के वैज्ञानिक योगदानों, विशेष रूप से पृथ्वी के घूर्णन और ग्रहणों की उनकी व्याख्याओं पर केंद्रित है।
क्या समाधान में व्याकरणिक अभ्यास दिए गए हैं?
हाँ, इसमें संधि-विच्छेद, विपरीतार्थक शब्द, वाक्य-रचना, पद-परिचय और 'मति' शब्द के रूपों जैसे महत्वपूर्ण व्याकरणिक अभ्यासों को शामिल किया गया है।
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