कक्षा 7 हिंदी वसंत पाठ 4: कठपुतली NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी वसंत पुस्तक के पाठ 4, 'कठपुतली' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह कविता कठपुतलियों की स्वतंत्रता की तीव्र इच्छा और उनकी विवशताओं के इर्द-गिर्द घूमती है। समाधानों में कठपुतली के गुस्से के कारणों, स्वतंत्रता की चाहत के बावजूद उसके कदम उठाने में हिचकिचाहट, और अन्य कठपुतलियों पर उसके विचारों के प्रभाव जैसे विषयों पर गहन चर्चा शामिल है। इसमें भाषा की बात के अंतर्गत शब्दों के संयोजन और कविता में लय के लिए शब्दों के प्रयोग पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को कविता के मूल भाव को समझने, पात्रों की भावनाओं का विश्लेषण करने और भाषा के रचनात्मक उपयोग को पहचानने में मदद करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectवसंत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. कठपुतली

Chapter summary

कक्षा 7 हिंदी वसंत के पाठ 4 'कठपुतली' के ये NCERT समाधान कविता के केंद्रीय भाव को स्पष्ट करते हैं। इसमें कठपुतली की स्वतंत्रता की लालसा, उसके मन में जगी इच्छाओं पर उसका चिंतन, और अन्य कठपुतलियों के प्रति उसकी जिम्मेदारी की भावना का विश्लेषण किया गया है। समाधान भाषा की बात के अंतर्गत 'कठपुतली' जैसे यौगिक शब्दों के निर्माण और कविता में लय के लिए शब्दों के क्रम में परिवर्तन जैसे भाषाई पहलुओं पर भी प्रकाश डालते हैं। यह छात्रों को कविता के अर्थ, पात्रों की मनोदशा और भाषा के प्रयोग को गहराई से समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • कठपुतली के गुस्से और स्वतंत्रता की इच्छा के कारणों को समझना।
  • स्वतंत्रता की चाहत और उसे प्राप्त करने की चुनौतियों का विश्लेषण करना।
  • कविता में व्यक्त भावनाओं और विचारों को पहचानना।
  • भाषा की बात के अंतर्गत शब्दों के निर्माण और प्रयोग को समझना।
  • कविता के माध्यम से स्वतंत्रता और जिम्मेदारी के महत्व पर विचार करना।

Topics covered

Paper topics

  • कठपुतली का गुस्सा
  • स्वतंत्रता की इच्छा
  • पराधीनता का अनुभव
  • जिम्मेदारी का एहसास
  • कथनी और करनी में अंतर
  • मन के भाव (छंद छुए)
  • स्वतंत्रता आंदोलन के सेनानी (संदर्भित)
  • शब्द निर्माण (यौगिक शब्द)
  • कविता में लय और तालमेल
  • शब्दों के क्रम में परिवर्तन

Important topics

  • कठपुतली का गुस्सा और स्वतंत्रता की चाह
  • स्वतंत्रता की इच्छा और उसकी चुनौतियाँ
  • जिम्मेदारी का एहसास और निर्णय लेना
  • मन के भावों की अभिव्यक्ति
  • शब्द निर्माण और कविता में भाषा का प्रयोग

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?
Solution: कठपुतली को इसलिए गुस्सा आया क्योंकि वह सदा दूसरों के इशारों पर नाचने के लिए विवश थी। उसे चारों ओर से धागों से बाँध रखा गया था, जो उसकी पराधीनता का प्रतीक था। इस बंधन और दूसरों के आदेशों का पालन करते-करते वह थक गई थी और अपनी स्वतंत्रता चाहती थी। अपनी इस लाचारी और विवशता पर उसे क्रोध आ रहा था।

प्रश्न 2

कठपुतली को अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा है, लेकिन वह क्यों नहीं खड़ी होती?
Solution: कठपुतली अपने पाँवों पर खड़ी होना चाहती है, जिसका अर्थ है कि वह पराधीनता से मुक्त होकर स्वतंत्र जीवन जीना चाहती है। लेकिन वह ऐसा इसलिए नहीं कर पाती क्योंकि स्वतंत्रता के लिए केवल इच्छा ही पर्याप्त नहीं होती, उसके लिए आवश्यक शक्ति, क्षमता और साहस की भी आवश्यकता होती है। साथ ही, उसे यह चिंता भी सताती है कि उसके इस कदम का अन्य कठपुतलियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और क्या वह स्वतंत्रता को बनाए रख पाएगी।

प्रश्न 3

पहली कठपुतली की बात दूसरी कठपुतलियों को क्यों अच्छी नहीं लगी?
Solution: जब पहली कठपुतली ने स्वतंत्र होने की बात कही और विद्रोह करने का संकेत दिया, तो दूसरी कठपुतलियों को यह बात बहुत अच्छी और प्रेरक लगी। ऐसा इसलिए था क्योंकि वे सभी भी बंधनों में जीकर थक चुकी थीं और अपनी इच्छानुसार जीना चाहती थीं। वे भी गुलामी के बंधनों से मुक्त होकर आजादी चाहती थीं, इसलिए पहली कठपुतली की बात उन्हें अपने मन की बात जैसी लगी।

प्रश्न 4

पहली कठपुतली ने स्वयं कहा कि -'ये धागे/क्यों हैं मेरे पीछे-आगे?/ इन्हें तोड़ दो;/मुझे मेरे पाँवों पर छोड़ दो।' -तो फिर वह चिंतित क्यों हुई कि - 'ये कैसी इच्छा/मेरे मन में जगी?' नीचे दिए वाक्यों की सहायता से अपने विचार व्यक्त कीजिए -
  • उसे दूसरी कठपुतलियों की जिम्मेदारी महसूस होने लगी।
  • उसे शीघ्र स्वतंत्र होने की चिंता होने लगी।
  • वह स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने और स्वतंत्रता को हमेशा बनाए रखने के उपाय सोचने लगी।
  • वह डर गई, क्योंकि उसकी उम्र कम थी।
Solution: कठपुतली के मन में यह चिंता इसलिए जगी क्योंकि जब उसने स्वतंत्र होने की बात कही, तो उसे अचानक यह एहसास हुआ कि केवल स्वयं स्वतंत्र हो जाना ही काफी नहीं है। उसे अन्य सभी कठपुतलियों की स्वतंत्रता की जिम्मेदारी भी महसूस होने लगी। उसे यह भी चिंता हुई कि क्या वह स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद उसे हमेशा बनाए रख पाएगी। साथ ही, उसकी उम्र कम होने के कारण उसका सोचने का दायरा सीमित था, जिससे वह डर गई। यह दर्शाता है कि कथनी सरल होती है, पर करनी मुश्किल, खासकर जब हमारे निर्णय दूसरों को भी प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5

'बहुत दिन हुए/हमें अपने मन के छंद छुए।' - इस पंक्ति का अर्थ और क्या हो सकता है? अगले पृष्ठ पर दिए हुए वाक्यों की सहायता से सोचिए और अर्थ लिखिए -
  • बहुत दिन हो गए, मन में कोई उमंग नही आई।
  • बहुत दिन हो गए, मन के भीतर कविता-सी कोई बात नहीं उठी, जिसमें छंद हो, लय हो।
  • बहुत दिन हो गए, गाने-गुनगुनाने का मन नहीं हुआ।
  • बहुत दिन हो गए, मन का दुख दूर नहीं हुआ और न मन में खुशी आई।
Solution: 'बहुत दिन हुए हमें अपने मन के छंद छुए' पंक्ति का सबसे उपयुक्त अर्थ यह है कि बहुत दिन हो गए हैं, मन का दुख दूर नहीं हुआ है और न ही मन में कोई खुशी या उमंग आई है। इसका तात्पर्य यह भी है कि मन में कोई नई, लयबद्ध या काव्यात्मक बात उत्पन्न नहीं हुई है, जिससे जीवन नीरस और उदास महसूस हो रहा है।

प्रश्न 6

नीचे दो स्वतंत्रता आंदोलनों के वर्ष दिए गए हैं। इन दोनों आंदोलनों के दो-दो स्वतंत्रता सेनानियों के नाम लिखिए -
  1. सन् 1857
  2. सन् 1942
Solution:
  1. सन् 1857 के स्वतंत्रता आंदोलन के दो सेनानी थे: कुँवरसिंह और तात्या टोपे।
  2. सन् 1942 के स्वतंत्रता आंदोलन (भारत छोड़ो आंदोलन) के दो प्रमुख सेनानी थे: महात्मा गाँधी और जवाहरलाल नेहरू।

प्रश्न 7

कई बार जब दो शब्द आपस में जुड़ते हैं तो उनके मूल रूप में परिवर्तन हो जाता है। कठपुतली शब्द में भी इस प्रकार का सामान्य परिवर्तन हुआ है। जब काठ और पुतली दो शब्द एक साथ हुए कठपुतली शब्द बन गया और इससे बोलने में सरलता आ गई। इस प्रकार के कुछ शब्द बनाइए -

जैसे - काठ (कठ) से बना - कठगुलाब, कठफोड़ा

हाथ-हथ सोना-सोन मिट्टी-मट

Solution:

दिए गए उदाहरणों के अनुसार, अन्य शब्दों के उदाहरण इस प्रकार हैं:

हाथ-हथ: हथकरघा, हथकड़ी, हथौड़ा

सोना-सोन: सोननदी, सोनभद्रा, सोनजूही

मिट्टी-मट: मटमैला, मटका, मटकी

प्रश्न 8

कविता की भाषा में लय या तालमेल बनाने के लिए प्रचलित शब्दों और वाक्यों में बदलाव होता है। जैसे -आगे-पीछे अधिक प्रचलित शब्दों की जोड़ी है,लेकिन कविता में 'पीछे-आगे' का प्रयोग हुआ है। यहाँ 'आगे' का '...बोली ये धागे' से ध्विन का तालमेल है। इस प्रकार के शब्दों की जोड़ियों में आप भी परिवर्तन कीजिए - दुबला-पतला, इधर-उधर, ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ, गोरा-काला, लाल-पीला आदि।
Solution:

कविता में लय बनाने के लिए शब्दों के क्रम में परिवर्तन के उदाहरण इस प्रकार हैं:

पतला-दुबला (प्रचलित: दुबला-पतला)

उधर-इधर (प्रचलित: इधर-उधर)

नीचे-ऊपर (प्रचलित: ऊपर-नीचे)

बाएँ-दाएँ (प्रचलित: दाएँ-बाएँ)

काला-गोरा (प्रचलित: गोरा-काला)

पीला-लाल (प्रचलित: लाल-पीला)

Common mistakes

  • स्वतंत्रता की इच्छा को केवल एक भावना मानना, न कि एक क्रिया।
  • कठपुतली की झिझक को केवल डर समझना, न कि जिम्मेदारी का एहसास।
  • भाषा की बात में शब्दों के परिवर्तन के पीछे के कारण को न समझना।
  • कविता के प्रतीकात्मक अर्थ को सतही तौर पर लेना।

Revision tips

  • कविता को बार-बार पढ़ें और कठपुतली के मन की स्थिति को समझने का प्रयास करें।
  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए कारणों और स्पष्टीकरणों पर ध्यान दें।
  • भाषा की बात वाले प्रश्नों का अभ्यास करें ताकि शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया समझ सकें।
  • स्वतंत्रता, इच्छा और जिम्मेदारी जैसे मुख्य विषयों पर अपने विचार स्पष्ट करें।

Practice MCQs

Q1. कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?

Q2. कठपुतली अपने पाँवों पर खड़ी होने की इच्छा क्यों रखती है?

Q3. पहली कठपुतली की स्वतंत्रता की बात दूसरी कठपुतलियों को अच्छी क्यों लगी?

Q4. कठपुतली स्वतंत्रता की इच्छा को साकार करने से पहले क्यों चिंतित हुई?

Q5. 'बहुत दिन हुए हमें अपने मन के छंद छुए' पंक्ति का क्या अर्थ है?

Frequently asked questions

कक्षा 7 हिंदी के पाठ 4 'कठपुतली' में मुख्य विषय क्या है?

पाठ 4 'कठपुतली' का मुख्य विषय स्वतंत्रता की तीव्र इच्छा, पराधीनता से मुक्ति की चाहत और स्वतंत्रता प्राप्त करने की चुनौतियों के साथ-साथ दूसरों के प्रति जिम्मेदारी का एहसास है।

कठपुतली को गुस्सा क्यों आया?

कठपुतली को गुस्सा इसलिए आया क्योंकि वह धागों से बंधी हुई थी और दूसरों के इशारों पर नाचने से थक गई थी, जिससे उसे अपनी पराधीनता का अनुभव हुआ।

क्या कठपुतली सचमुच स्वतंत्र होना चाहती थी या सिर्फ़ कह रही थी?

कठपुतली सचमुच स्वतंत्र होना चाहती थी, लेकिन जब उसे अन्य कठपुतलियों की जिम्मेदारी का एहसास हुआ और स्वतंत्रता को बनाए रखने की चुनौती समझी, तो वह थोड़ी चिंतित और झिझक गई। यह कथनी और करनी के अंतर को दर्शाता है।

NCERT समाधान 'कठपुतली' पाठ के भाषा की बात वाले प्रश्नों में क्या सिखाते हैं?

ये समाधान 'कठपुतली' जैसे यौगिक शब्दों के निर्माण की प्रक्रिया को समझाते हैं, जहाँ दो शब्द मिलकर एक नया शब्द बनाते हैं। साथ ही, यह भी बताते हैं कि कविता में लय बनाए रखने के लिए शब्दों के क्रम में कैसे परिवर्तन किया जा सकता है।

ये समाधान कक्षा 7 के छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान छात्रों को कविता के गहरे अर्थ को समझने, पात्रों की भावनाओं का विश्लेषण करने, भाषा के प्रयोग को सीखने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करते हैं।

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