कक्षा 7 हिंदी NCERT समाधान: पाठ-15 नीलकंठ

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यह पृष्ठ कक्षा 7 के हिंदी विषय के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है, जो 'पाठ-15 नीलकंठ' पर केंद्रित है। इसमें मोर और मोरनी के नामकरण, जालीघर में नए पक्षियों का स्वागत, नीलकंठ की मनमोहक चेष्टाएँ, कुब्जा मोरनी के आगमन से उत्पन्न घटनाएँ, और वसंत ऋतु में नीलकंठ की असहनीयता जैसे विषयों को विस्तार से समझाया गया है। समाधान नीलकंठ द्वारा खरगोश के बच्चे को साँप से बचाने की साहसी घटना का भी वर्णन करते हैं, जिससे नीलकंठ के सजग, साहसी, रक्षक और दयालु स्वभाव पर प्रकाश पड़ता है। भाषा की बात खंड में 'रूप' शब्द से बनने वाले अन्य शब्दों की तरह 'गंध', 'रंग', 'फल', और 'ज्ञान' शब्दों से बनने वाले अन्य शब्दों का अभ्यास भी शामिल है। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 7
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter15. नीलकंठ

Chapter summary

कक्षा 7 के हिंदी पाठ 'नीलकंठ' के लिए यह NCERT समाधान पाठ के मुख्य बिंदुओं को कवर करता है। इसमें नीलकंठ और राधा के नामकरण के पीछे के कारणों, जालीघर में नए मेहमानों के स्वागत के तरीके, नीलकंठ की नृत्य और खान-पान की आदतों, कुब्जा मोरनी के आगमन से उत्पन्न ईर्ष्या और उसके परिणाम, और वसंत ऋतु में नीलकंठ की बेचैनी का विस्तृत विवरण है। साथ ही, नीलकंठ के साहसी और दयालु स्वभाव को दर्शाने वाली घटना का भी विश्लेषण किया गया है। भाषा अभ्यास खंड में दिए गए शब्दों से नए शब्द बनाने का तरीका भी समझाया गया है।

Learning outcomes

  • मोर और मोरनी के नामकरण के आधार को समझना।
  • पशु-पक्षियों के व्यवहार और स्वागत के तरीकों का विश्लेषण करना।
  • नीलकंठ की विभिन्न चेष्टाओं और उसके स्वभाव की विशेषताओं को पहचानना।
  • कुब्जा मोरनी के आगमन से उत्पन्न घटनाओं और उनके परिणामों को समझना।
  • नीलकंठ के साहसी और दयालु स्वभाव को उदाहरण सहित स्पष्ट करना।
  • दिए गए शब्दों से नए शब्द बनाने का अभ्यास करना।

Topics covered

Paper topics

  • मोर और मोरनी का नामकरण
  • जालीघर में पशु-पक्षियों का जीवन
  • नीलकंठ की चेष्टाएँ और नृत्य
  • कुब्जा मोरनी का आगमन
  • ईर्ष्या और उसके परिणाम
  • वसंत ऋतु का प्रभाव
  • नीलकंठ का साहसी स्वभाव
  • नीलकंठ का दयालु स्वभाव
  • साँप से खरगोश के बच्चे की रक्षा
  • भाषा की बात: शब्द निर्माण

Important topics

  • नीलकंठ की चेष्टाएँ और नृत्य
  • कुब्जा मोरनी का आगमन और उसके परिणाम
  • नीलकंठ द्वारा खरगोश के बच्चे को साँप से बचाना
  • नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताएँ (सजगता, साहस, दयालुता)
  • शब्द निर्माण का अभ्यास

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Questions and Solutions

1. मोर-मोरनी के नाम किस आधार पर रखे गए?

मोर-मोरनी के नाम किस आधार पर रखे गए?
Solution: मोर का नाम 'नीलकंठ' उसकी नीली गर्दन (नीलाभ ग्रीवा) के कारण रखा गया था। मोरनी का नाम 'राधा' इसलिए रखा गया क्योंकि वह सदा नीलकंठ की छाया के समान उसके साथ रहती थी, मानो उसकी प्रेयसी हो।

2. जाली के बड़े घर में पहुँचने पर मोर के बच्चों का किस प्रकार स्वागत हुआ?

जाली के बड़े घर में पहुँचने पर मोर के बच्चों का किस प्रकार स्वागत हुआ?
Solution: जब नीलकंठ और राधा जाली के बड़े घर में पहुँचे, तो वहाँ पहले से रहने वाले पशु-पक्षियों ने उनका स्वागत ऐसे किया जैसे किसी परिवार में नववधू के आने पर उत्सुकता और प्रसन्नता होती है। लक्का कबूतरों ने नाचना छोड़कर उनके चारों ओर घूम-घूम कर गुटरगूं की ध्वनि निकाली। बड़े खरगोश सभ्य सभासदों की तरह क्रम से बैठकर उनका निरीक्षण करने लगे, जबकि छोटे खरगोश उनके आसपास उछल-कूद मचाने लगे। तोते भी एक आँख बंद करके उन्हें ध्यान से देखने लगे।

3. लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन सी चेष्टाएँ बहुत भाती थीं?

लेखिका को नीलकंठ की कौन-कौन सी चेष्टाएँ बहुत भाती थीं?
Solution: नीलकंठ अत्यंत सुंदर था और उसकी हर चेष्टा आकर्षक थी। लेखिका को उसकी दो चेष्टाएँ विशेष रूप से भाती थीं:
  1. मेघों के गर्जन की ताल पर उसका इंद्रधनुष के गुच्छे जैसे पंखों को गोल घुमाकर तन्मय होकर नृत्य करना।
  2. लेखिका के हाथों से हौले-हौले चने उठाते समय उसकी वह चेष्टा जो हँसी और विस्मय उत्पन्न करती थी।

4. 'इस आनंदोंत्सव की रागिनी में बेमेल स्वर कैसे बज उठा' - वाक्य किस घटना की ओर संकेत कर रहा है?

'इस आनंदोंत्सव की रागिनी में बेमेल स्वर कैसे बज उठा' - वाक्य किस घटना की ओर संकेत कर रहा है?
Solution: यह वाक्य कुब्जा नामक एक नई मोरनी के आगमन की ओर संकेत कर रहा है, जिसने नीलकंठ और राधा के सुखमय जीवन में खलल डाल दिया था। लेखिका महादेवी वर्मा ने एक घायल मोरनी को 'नखासकोने' से खरीदा और उसकी देखभाल की, जिसका नाम उन्होंने 'कुब्जा' रखा। कुब्जा का स्वभाव ईर्ष्यालु था। वह नीलकंठ और राधा को साथ-साथ नहीं देख पाती थी। जब भी वह उन्हें साथ देखती, वह राधा को नोंच डालती थी। उसने राधा के अंडे भी तोड़ दिए थे। कुब्जा के इस व्यवहार और राधा से उसकी दूरी के कारण नीलकंठ अप्रसन्न रहने लगा, जो अंततः उसकी मृत्यु का कारण बना।

5. वसंत ऋतु में नीलकंठ के लिए जालीघर में बंद रहना असहनीय क्यों हो जाता था?

वसंत ऋतु में नीलकंठ के लिए जालीघर में बंद रहना असहनीय क्यों हो जाता था?
Solution: नीलकंठ को फलों के वृक्षों से भी अधिक पुष्पित व पल्लवित (सुगन्धित व खिले पत्तों वाले) वृक्ष पसंद थे। वसंत ऋतु में जब आम के वृक्ष मंजरियों से लद जाते और अशोक के पेड़ लाल पत्तों से ढक जाते, तो नीलकंठ को प्रकृति की यह छटा जालीघर के अंदर से देखना असहनीय लगता था। उसे बाहर की खुली हवा और वृक्षों की सुंदरता का अनुभव करने की तीव्र इच्छा होती थी, इसलिए उसे जालीघर से बाहर छोड़ देना पड़ता था।

6. जालीघर में रहनेवाले सभी जीव एक-दूसरे के मित्र बन गए थे, पर कुब्जा के साथ ऐसा संभव क्यों नहीं हो पाया?

जालीघर में रहनेवाले सभी जीव एक-दूसरे के मित्र बन गए थे, पर कुब्जा के साथ ऐसा संभव क्यों नहीं हो पाया?
Solution: जालीघर में रहने वाले अन्य सभी जीव-जंतु, जैसे खरगोश, तोते और नीलकंठ-राधा, आपस में मिल-जुलकर मित्रवत व्यवहार करते थे। इसके विपरीत, कुब्जा का स्वभाव ईर्ष्यालु और झगड़ालू था। वह किसी को भी नीलकंठ के पास नहीं आने देती थी और अपनी चोंच से नोंच डालती थी। वह राधा से भी ईर्ष्या करती थी और उसने राधा के अंडे भी तोड़ दिए थे। उसके इसी नकारात्मक और आक्रामक व्यवहार के कारण वह जालीघर के अन्य जीवों के साथ मित्रता नहीं कर सकी।

7. नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप से किस तरह बचाया? इस घटना के आधार पर नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप से किस तरह बचाया? इस घटना के आधार पर नीलकंठ के स्वभाव की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
Solution: एक बार एक साँप जालीघर के भीतर घुस आया और उसने एक शिशु खरगोश का आधा पिछला शरीर अपने मुँह में दबा लिया। खरगोश की चीं-चीं सुनकर सोये हुए नीलकंठ की नींद खुल गई। वह तुरंत झूले से नीचे उतरा, उसने सतर्कता से साँप के फन को अपने पंजों से दबाया और अपनी चोंच से उस पर तब तक प्रहार किए जब तक वह अधमरा न हो गया। साँप के फन की पकड़ ढीली होते ही खरगोश का बच्चा उसके मुँह से निकल आया। इस प्रकार नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को साँप से बचाया। इस घटना से नीलकंठ के स्वभाव की निम्नलिखित विशेषताएँ उभर कर आती हैं:
  1. सजगता और सतर्कता: खरगोश की करुण आवाज सुनकर नीलकंठ तुरंत संकट को समझ गया और मदद के लिए तत्पर हो गया।
  2. साहसी: उसने अकेले ही एक खतरनाक साँप का सामना किया और उसे मारकर खरगोश के बच्चे की जान बचाई।
  3. दक्ष रक्षक: उसने कुशलतापूर्वक खरगोश को मौत के मुँह से बचाया, यह सिद्ध करते हुए कि उसके रहते किसी को भय नहीं था।
  4. दयालु: खरगोश के बच्चे को बचाने के बाद, नीलकंठ ने उसे सारी रात अपने पंखों में छिपाकर ऊष्मा दी, जो उसकी दयालु प्रवृत्ति को दर्शाता है।

भाषा की बात

'रूप' शब्द से 'कुरूप', 'स्वरूप', 'बहुरूप' आदि शब्द बनते हैं। इसी प्रकार नीचे लिखे शब्दों से अन्य शब्द बनाओ -

गंध, रंग, फल, ज्ञान

Solution:

गंध से बनने वाले शब्द: गंधहीन, गंधक, सुगंध, दुर्गंध

रंग से बनने वाले शब्द: रंगहीन, बेरंग, बदरंग, रंगरोगन

फल से बनने वाले शब्द: सफल, कुफल, असफल, फलदार, फलित

ज्ञान से बनने वाले शब्द: अज्ञान, विज्ञान, ज्ञानी

Common mistakes

  • मोर-मोरनी के नामकरण के पीछे के तार्किक कारणों को समझने में चूक।
  • कुब्जा मोरनी के ईर्ष्यालु स्वभाव और उसके परिणामों को ठीक से न जोड़ पाना।
  • नीलकंठ द्वारा खरगोश के बच्चे को बचाने की घटना के सभी पहलुओं को न समझना।
  • भाषा अभ्यास में शब्दों के सही उपसर्ग या प्रत्यय लगाकर नए शब्द बनाने में कठिनाई।

Revision tips

  • नीलकंठ और राधा के नामकरण के पीछे के कारणों को याद करें।
  • कुब्जा मोरनी के आगमन से कहानी में आए मोड़ और उसके प्रभाव को समझें।
  • नीलकंठ के साहसी और दयालु स्वभाव को दर्शाने वाली घटना पर विशेष ध्यान दें।
  • भाषा की बात अभ्यास में दिए गए शब्दों से नए शब्द बनाने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. मोर का नाम नीलकंठ किस आधार पर रखा गया?

Q2. जालीघर में पहुँचने पर मोर के बच्चों का स्वागत किसने और कैसे किया?

Q3. लेखिका को नीलकंठ की कौन सी चेष्टा सबसे अधिक भाती थी?

Q4. कुब्जा मोरनी के स्वभाव की मुख्य विशेषता क्या थी?

Q5. नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को किससे बचाया?

Frequently asked questions

कक्षा 7 के हिंदी पाठ 'नीलकंठ' में मोर का नाम नीलकंठ क्यों रखा गया?

मोर का नाम 'नीलकंठ' उसकी नीली गर्दन (नीलाभ ग्रीवा) के कारण रखा गया था।

मोरनी का नाम राधा क्यों रखा गया?

मोरनी का नाम राधा इसलिए रखा गया क्योंकि वह सदा नीलकंठ की छाया के समान उसके साथ रहती थी।

कुब्जा मोरनी के आने से नीलकंठ और राधा के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा?

कुब्जा मोरनी स्वभाव से ईर्ष्यालु थी और वह नीलकंठ व राधा को साथ नहीं देख पाती थी। वह राधा को नोंचती थी और उसने राधा के अंडे भी तोड़ दिए थे, जिससे नीलकंठ अप्रसन्न रहने लगा।

नीलकंठ ने खरगोश के बच्चे को किस प्रकार बचाया?

नीलकंठ ने सोते हुए खरगोश के बच्चे की करुण पुकार सुनकर साँप पर हमला किया, उसे पंजों से दबाया और चोंच से मारकर अधमरा कर दिया, जिससे साँप ने बच्चे को छोड़ दिया।

इस पाठ से नीलकंठ के स्वभाव के बारे में क्या पता चलता है?

इस पाठ से नीलकंठ के सजग, साहसी, दक्ष रक्षक और दयालु स्वभाव का पता चलता है।

भाषा की बात खंड में किस प्रकार के प्रश्न पूछे गए हैं?

भाषा की बात खंड में 'रूप' शब्द से बनने वाले शब्दों की तरह 'गंध', 'रंग', 'फल', और 'ज्ञान' जैसे शब्दों से अन्य शब्द बनाने का अभ्यास कराया गया है।

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