कक्षा 6 हिंदी NCERT समाधान: पाठ 4 - चाँद से थोड़ी-सी गप्पें

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यह पृष्ठ कक्षा 6 हिंदी की पुस्तक 'बाल महाभारत कथा' के अध्याय 4, 'चाँद से थोड़ी-सी गप्पें' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय एक चंचल लड़की के दृष्टिकोण से चाँद के साथ एक काल्पनिक बातचीत का वर्णन करता है, जिसमें वह चाँद के बदलते आकार, उसकी पोशाक और उसके 'बीमार' होने के बारे में प्रश्न पूछती है। समाधानों में कविता की पंक्तियों के अर्थ स्पष्ट किए गए हैं, जैसे 'आप पहने हुए हैं कुल आकाश' का अर्थ चाँद का तारों से जड़ा हुआ दिखना है, और 'हमको बुद्धू ही निरा समझा है!' का अर्थ है कि लड़की जानती है कि चाँद का आकार क्यों बदलता है। इसमें 'मरज़ आपका अच्छा ही नहीं होने में आता है' जैसी पंक्तियों के आशय को भी समझाया गया है। साथ ही, कविता में प्रयुक्त बिंबों (visual imagery) और शब्दों को चित्र की तरह प्रस्तुत करने की कला पर भी चर्चा की गई है। भाषा की बात खंड में विशेषणों और प्रत्ययों के प्रयोग को समझाया गया है, और 'गोल-मटोल' जैसे शब्द युग्मों के अर्थ और प्रयोग बताए गए हैं। ये समाधान छात्रों को कविता की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 6
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. चाँद से थोड़ी-सी गप्पें

Chapter summary

कक्षा 6 हिंदी के अध्याय 4 'चाँद से थोड़ी-सी गप्पें' के ये NCERT समाधान छात्रों को कविता के मुख्य भावों को समझने में मदद करते हैं। इसमें लड़की के चाँद के प्रति जिज्ञासा और उसके बदलते स्वरूप पर आधारित प्रश्नों का विश्लेषण किया गया है। समाधान कविता की पंक्तियों के अर्थ, 'मरज़' के आशय, और बिंबों के प्रयोग को स्पष्ट करते हैं। भाषा के अभ्यास में विशेषणों के निर्माण और शब्द युग्मों के प्रयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया है। यह खंड छात्रों को काव्यात्मक भाषा की बारीकियों को समझने और अपनी अभिव्यक्ति को बेहतर बनाने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • कविता में 'आप पहने हुए हैं कुल आकाश' का अर्थ समझना।
  • लड़की के 'हमको बुद्धू ही निरा समझा है!' कहने के पीछे के भाव को पहचानना।
  • 'मरज़ आपका अच्छा ही नहीं होने में आता है' पंक्ति के आशय को स्पष्ट करना।
  • कविता में प्रयुक्त बिंबों और शब्दों की चित्रमय प्रस्तुति को समझना।
  • विशेषणों और प्रत्ययों के प्रयोग से नए शब्द बनाना सीखना।
  • दिए गए शब्द युग्मों के अर्थ समझना और वाक्यों में प्रयोग करना।

Topics covered

Paper topics

  • कविता का भावार्थ
  • चाँद का बदलता आकार
  • लड़की का दृष्टिकोण
  • काव्यात्मक भाषा
  • बिंब (Imagery)
  • शब्दों की चित्रमय प्रस्तुति
  • विशेषण और प्रत्यय
  • शब्द युग्म
  • संज्ञा और विशेषण में अंतर
  • आशय स्पष्टीकरण

Important topics

  • कविता का केंद्रीय भाव और संदेश
  • लड़की के प्रश्नों का विश्लेषण
  • बिंबों का प्रयोग और अर्थ
  • विशेषणों से संज्ञा निर्माण
  • शब्द युग्मों का प्रयोग

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कविता में 'आप पहने हुए हैं कुल आकाश' कहकर लड़की क्या कहना चाहती है?
Solution:

जब लड़की कहती है कि चाँद 'आप पहने हुए हैं कुल आकाश', तो उसका आशय यह है कि चाँद ने पूरे विशाल आकाश को एक चादर की तरह ओढ़ रखा है। इस आकाश में अनगिनत तारे जड़े हुए हैं, जो चाँद की पोशाक को और भी सुंदर बनाते हैं। यह लड़की की कल्पना है कि चाँद ने तारों से सजी हुई एक चादर ओढ़ ली है।

प्रश्न 2

'हमको बुद्धू ही निरा समझा है !' कहकर लड़की क्या कहना चाहती है?
Solution:

इस पंक्ति के माध्यम से लड़की यह बताना चाहती है कि वह चाँद को मूर्ख नहीं समझती। उसे पता है कि चाँद का आकार हर रात बदलता रहता है - कभी वह घटता है और कभी बढ़ते-बढ़ते पूरा गोल हो जाता है। लड़की यह कहना चाहती है कि वह जानती है कि यह आकार बदलना कोई बीमारी नहीं है, जैसा कि शायद चाँद सोच रहा हो कि वह उसे बुद्धू समझकर ऐसा कह रहा है।

प्रश्न 3

आशय बताओ - 'यह मरज़ आपका अच्छा ही नहीं होने में आता है।'
Solution:

कवि श्री शमशेर बहादुर सिंह इस पंक्ति के द्वारा यह बताना चाहते हैं कि लड़की को पता है कि चाँद को कोई 'बीमारी' है, जो कि वास्तव में उसके आकार का घटना-बढ़ना है। यह 'मरज़' (बीमारी) कभी ठीक नहीं होती, क्योंकि चाँद हमेशा घटता-बढ़ता रहता है। लड़की की यह बात चाँद के बदलते स्वरूप पर एक चंचल टिप्पणी है, जिसमें वह उसकी निरंतर परिवर्तनशील प्रकृति को एक बीमारी के रूप में देखती है जो ठीक होने का नाम नहीं लेती।

प्रश्न 4

कवि ने चाँद से गप्पें किस दिन लगाई होंगी? इस कविता में आई बातों की मदद से अनुमान लगाओ और इसके कारण भी बताओ।

दिन | कारण

पूर्णिमा .....

अष्टमी .....

अष्टमी से पूर्णिमा के बीच ......

प्रथमा से अष्टमी के बीच ......

Solution:

कविता में कहा गया है: 'गोल हैं खूब मगर आप तिरछे नजर आते हैं ज़रा।' इस पंक्ति से पता चलता है कि चाँद पूरा गोल नहीं है, बल्कि थोड़ा तिरछा दिख रहा है। इसका अर्थ है कि पूर्णिमा होने में अभी एक या दो दिन बाकी हैं। इसलिए, यह अनुमान लगाया जा सकता है कि कवि ने चाँद से गप्पें 'अष्टमी से पूर्णिमा के बीच' के दिनों में लगाई होंगी, जब चाँद लगभग गोल दिखने लगता है लेकिन पूरी तरह गोल नहीं होता।

अनुमानित कारण:

  • पूर्णिमा: इस दिन चाँद पूरा गोल होता है, तो 'तिरछे नजर आते हैं ज़रा' वाली बात लागू नहीं होगी।
  • अष्टमी: इस दिन चाँद आधा गोल (अर्धचंद्राकार) होता है, जो 'तिरछे नजर आते हैं ज़रा' से मेल नहीं खाता।
  • अष्टमी से पूर्णिमा के बीच: इस अवधि में चाँद धीरे-धीरे गोल होता जाता है और पूर्णिमा के करीब आने पर थोड़ा तिरछा दिख सकता है, जो कविता की पंक्ति से मेल खाता है।
  • प्रथमा से अष्टमी के बीच: इस समय चाँद का आकार छोटा होता है और वह बढ़ता हुआ प्रतीत होता है, जो 'तिरछे नजर आते हैं ज़रा' वाली स्थिति से भिन्न है।

प्रश्न 5

नई कविता में तुक या छंद की बजाय बिंब का प्रयोग अधिक होता है, बिंब वह तस्वीर होती है जो शब्दों को पढ़ते समय हमारे मन में उभरती है। कई बार कुछ कवि शब्दों की ध्विन की मदद से ऐसी तस्वीर बनाते हैं और कुछ कवि अक्षरों या शब्दों को इस तरह छापने पर बल देते हैं कि उनसे कई चित्र हमारे मन में बनें। इस कविता के अंतिम हिस्से में चाँद को एकदम गोल बताने के लिए कवि ने 'बिलकुल' शब्द के अक्षरों को अलग-अलग करके लिखा है। तुम इस कविता के और किन शब्दों को चित्र की आकृति देना चाहोगे? ऐसे शब्दों को अपने ढंग से लिखकर दिखाओ।
Solution:

कवि ने 'बिलकुल' शब्द के अक्षरों को अलग-अलग करके चाँद के गोल आकार को दर्शाने का प्रयास किया है। इसी तरह, हम कविता के अन्य शब्दों को भी चित्र की आकृति दे सकते हैं ताकि उनका अर्थ और स्पष्ट हो सके। यहाँ कुछ उदाहरण दिए गए हैं:

  • गो - ल (चाँद के गोल आकार को दर्शाने के लिए अक्षरों को फैलाकर लिखा जा सकता है)
  • ति - र - छे (तिरछेपन को दिखाने के लिए अक्षरों को टेढ़ा-मेढ़ा लिखा जा सकता है)
  • बढ़ - ता (आकार में वृद्धि दिखाने के लिए अक्षरों को ऊपर की ओर बढ़ाते हुए लिखा जा सकता है)
  • घ - ट - ता (आकार में कमी दिखाने के लिए अक्षरों को नीचे की ओर या छोटा करके लिखा जा सकता है)

यह अभ्यास छात्रों को काव्यात्मक भाषा की रचनात्मकता को समझने में मदद करता है, जहाँ शब्दों को केवल अर्थ के लिए ही नहीं, बल्कि दृश्य प्रभाव के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

प्रश्न 6

चाँद संज्ञा है। चाँदनी रात में चाँदनी विशेषण है। नीचे दिए गए विशेषणों को ध्यान से देखो और बताओ कि कौन-सा प्रत्यय जुड़ने पर विशेषण बन रहे हैं। इन विशेषणों के लिए एक- एक उपयुक्त संज्ञा भी लिखो - गुलाबी पगड़ी / मखमली घास / कीमती गहने / ठंडी रात / जंगली फूल / कश्मीरी भाषा
Solution:

दिए गए उदाहरणों में, विशेषण बनाने के लिए मूल शब्द में प्रत्यय जोड़ा गया है। यहाँ प्रत्येक विशेषण के लिए प्रत्यय और एक उपयुक्त संज्ञा का उदाहरण दिया गया है:

  • गुलाबी: प्रत्यय 'ई' (मूल शब्द 'गुलाब' से बना है)। उपयुक्त संज्ञा: गुलाबी साड़ी
  • मखमली: प्रत्यय 'ई' (मूल शब्द 'मखमल' से बना है)। उपयुक्त संज्ञा: मखमली कालीन
  • कीमती: प्रत्यय 'ई' (मूल शब्द 'कीमत' से बना है)। उपयुक्त संज्ञा: कीमती वस्त्र
  • ठंडी: प्रत्यय 'ई' (मूल शब्द 'ठंड' से बना है)। उपयुक्त संज्ञा: ठंडी हवा
  • जंगली: प्रत्यय 'ई' (मूल शब्द 'जंगल' से बना है)। उपयुक्त संज्ञा: जंगली जानवर
  • कश्मीरी: प्रत्यय 'ईरी' (मूल शब्द 'कश्मीर' से बना है)। उपयुक्त संज्ञा: कश्मीरी पोशाक

इन उदाहरणों से स्पष्ट होता है कि 'ई' या 'ईरी' जैसे प्रत्यय जोड़कर संज्ञा शब्दों से विशेषण बनाए जा सकते हैं, जो किसी वस्तु या व्यक्ति की विशेषता बताते हैं।

प्रश्न 7

गोल-मटोल गोरा-चिट्टा

कविता में आए शब्दों के इन जोड़ों में अंतर यह है कि चिट्टा का अर्थ सफ़ेद है और गोरा से मिलता-जुलता है जबकि मटोल अपने- आप में कोई शब्द नहीं है। यह शब्द 'मोटा' से बना है। ऐसे चार-चार शब्द युग्म सोचकर लिखो और उनका वाक्यों में प्रयोग करो।

Solution:

दिए गए उदाहरण 'गोल-मटोल' और 'गोरा-चिट्टा' की तरह, यहाँ कुछ अन्य शब्द युग्म दिए गए हैं जिनका वाक्यों में प्रयोग किया गया है:

  1. मेल-जोल: हमें सभी के साथ प्यार से मेल-जोल बनाए रखना चाहिए। (अर्थ: आपसी संबंध, घुलना-मिलना)
  2. अच्छा-बुरा: छोटे बच्चों को हमेशा अच्छा-बुरा समझाने की कोशिश करनी चाहिए। (अर्थ: सही-गलत, भले-बुरे का ज्ञान)
  3. आज-कल: आज-कल महंगाई बहुत बढ़ गई है। (अर्थ: वर्तमान समय में, आजकल)
  4. सुख-दुःख: जीवन में सुख-दुःख तो आते-जाते रहते हैं। (अर्थ: खुशी और गम, जीवन के उतार-चढ़ाव)
  5. ऊँच-नीच: हमें समाज में किसी भी प्रकार की ऊँच-नीच नहीं करनी चाहिए। (अर्थ: भेदभाव, सामाजिक स्तर का अंतर)

ये शब्द युग्म अक्सर दो मिलते-जुलते या विपरीत अर्थ वाले शब्दों को जोड़कर बनाए जाते हैं और भाषा को अधिक प्रभावशाली बनाते हैं।

प्रश्न 8

'बिलकुल गोल' - कविता में इसके दो अर्थ हैं -
  • (क) गोल आकार का
  • (ख) गायब होना !
Solution:

कविता में 'बिलकुल गोल' का प्रयोग दोहरे अर्थ में किया गया है। पहला अर्थ सीधा है कि चाँद का आकार पूर्णतः गोल है। दूसरा अर्थ, जो कि एक लाक्षणिक या व्यंग्यात्मक प्रयोग है, वह चाँद के पूरी तरह से गायब हो जाने की स्थिति को दर्शाता है, जैसे कि अमावस्या के आसपास जब चाँद दिखाई नहीं देता। यह लड़की की कल्पनाशीलता को दर्शाता है कि वह चाँद के आकार बदलने को सिर्फ गोल होने तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उसके अदृश्य होने की स्थिति को भी 'बिलकुल गोल' होने का एक और रूप मानती है।

Common mistakes

  • कविता की पंक्तियों के लाक्षणिक अर्थ को शाब्दिक रूप से लेना।
  • विशेषण और संज्ञा के बीच के अंतर को न समझना।
  • शब्द युग्मों के अर्थ को ठीक से न समझ पाना या उनका गलत प्रयोग करना।
  • बिंबों के प्रयोग को केवल शाब्दिक अर्थ तक सीमित रखना।

Revision tips

  • कविता को कई बार पढ़ें और हर पंक्ति के पीछे छिपे भाव को समझने का प्रयास करें।
  • लड़की के प्रश्नों और चाँद के बदलते आकार के बीच संबंध स्थापित करें।
  • भाषा की बात खंड में दिए गए विशेषणों और शब्द युग्मों का अभ्यास करें।
  • कविता में आए बिंबों को अपने शब्दों में चित्रित करने का प्रयास करें।

Practice MCQs

Q1. कविता में 'आप पहने हुए हैं कुल आकाश' कहकर लड़की का क्या तात्पर्य है?

Q2. 'हमको बुद्धू ही निरा समझा है!' - इस कथन से लड़की क्या जताना चाहती है?

Q3. कविता में 'मरज़' शब्द का क्या अर्थ है?

Q4. कवि ने 'बिलकुल' शब्द के अक्षरों को अलग-अलग क्यों लिखा है?

Q5. विशेषण 'गुलाबी' से बना एक उपयुक्त संज्ञा शब्द क्या हो सकता है?

Frequently asked questions

कक्षा 6 हिंदी के पाठ 4 'चाँद से थोड़ी-सी गप्पें' में मुख्य रूप से क्या सिखाया गया है?

इस पाठ में छात्रों को कविता के माध्यम से चाँद के बदलते आकार के प्रति एक बच्चे की जिज्ञासा और कल्पनाशीलता को समझने का अवसर मिलता है। साथ ही, काव्यात्मक भाषा, बिंबों के प्रयोग और विशेषणों के निर्माण जैसे भाषा के तत्वों का भी परिचय दिया गया है।

कविता में 'आप पहने हुए हैं कुल आकाश' का क्या अर्थ है?

इस पंक्ति का अर्थ है कि चाँद ने पूरे आकाश को एक चादर की तरह ओढ़ रखा है, जिसमें तारे जड़े हुए हैं। यह चाँद की विशालता और सुंदरता का काव्यात्मक वर्णन है।

लड़की चाँद को 'बुद्धू' क्यों नहीं समझती?

लड़की चाँद को बुद्धू नहीं समझती क्योंकि वह जानती है कि चाँद का आकार घटना-बढ़ना कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। वह अपनी समझदारी को दर्शाने के लिए ऐसा कहती है।

NCERT समाधान 'चाँद से थोड़ी-सी गप्पें' परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान कविता की पंक्तियों का विस्तृत अर्थ, कठिन शब्दों के मायने और भाषा के अभ्यासों को स्पष्ट करते हैं, जिससे छात्र परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर आसानी से दे सकते हैं।

क्या इस पाठ में कोई व्याकरणिक बिंदु भी शामिल हैं?

हाँ, इस पाठ के 'भाषा की बात' खंड में विशेषणों और प्रत्ययों के प्रयोग से संज्ञा शब्द बनाने का अभ्यास कराया गया है, और 'गोल-मटोल' जैसे शब्द युग्मों के अर्थ और प्रयोग भी समझाए गए हैं।

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