CBSE Class 5 आस-पास: Chapter 18 जाएँ तो जाएँ कहाँ NCERT Solutions
CBSE Class 5 आस-पास chapter 18, 'जाएँ तो जाएँ कहाँ' (Where to Go?), explores the profound impact of displacement on individuals and families. Through relatable narratives, it highlights the emotional toll of leaving one's home, the struggle to find belonging in unfamiliar surroundings, and the unfortunate reality of child labor. The chapter examines the reasons behind migration to urban centers, the exploitative work children often face, and the stark differences between life in villages and cities. It also emphasizes the significance of community support, the value of traditional skills, and the sensory experiences of different environments. These NCERT solutions aim to cultivate empathy and critical thinking in young students, helping them understand the complexities of societal issues and the human condition of being uprooted, while also reinforcing their learning for examinations.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 5 |
| Subject | आस-पास |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 18. जाएँ तो जाएँ कहाँ |
Chapter summary
Chapter 18, 'जाएँ तो जाएँ कहाँ', of CBSE Class 5 आस-पास NCERT Solutions focuses on the displacement of people from their native places, using Jathya's story as a narrative. It covers the feelings of isolation, the struggle to adjust to new cities, and the reasons behind child labor. The solutions also highlight the skills and knowledge gained from one's roots and contrast them with urban life, including the sounds and experiences unique to cities. This chapter encourages critical thinking about migration and its impact on individuals and communities.
Learning outcomes
- Understand the feeling of loneliness even in a crowd.
- Explore the challenges of adapting to a new environment after leaving one's home.
- Identify reasons why families migrate to large cities.
- Recognize the types of work children are often involved in.
- Compare the skills and knowledge learned in a village versus a city.
- Differentiate between the sounds and silences of rural and urban settings.
Topics covered
Paper topics
- Displacement and Migration
- Loneliness and Isolation
- Adaptation to New Environments
- Child Labor
- Rural vs. Urban Life
- Skills Learned in Villages
- Sounds of Nature vs. City Sounds
- Community and Family
- Impact of Development Projects (Dams)
Important topics
- Reasons for Migration
- Challenges of Displacement
- Child Labor and its Causes
- Rural Skills and Urban Life Contrast
- Emotional Impact of Leaving Home
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Questions and Solutions
सोचो और बताओ - प्रश्न 1
हाँ, ऐसा अनुभव हो सकता है, खासकर जब आप किसी नई जगह पर हों या अपने परिचितों से दूर हों। ट्रेनों, बसों या बड़े शहरों की भीड़ में भी हम अकेला महसूस कर सकते हैं यदि हम वहाँ किसी को नहीं जानते या अपनेपन का अहसास नहीं होता। यह तब होता है जब हम अपने आसपास के लोगों से भावनात्मक रूप से जुड़ाव महसूस नहीं करते।
सोचो और बताओ - प्रश्न 2
अपनी जगह छोड़कर दूर नई जगह जाकर रहना कई तरह की भावनाएँ पैदा कर सकता है। शुरुआत में, यह बहुत चुनौतीपूर्ण और डरावना लग सकता है क्योंकि सब कुछ नया और अपरिचित होता है। नई जगह के माहौल, लोगों और जीवनशैली के साथ तालमेल बिठाना पड़ता है। कभी-कभी अकेलापन महसूस हो सकता है, लेकिन धीरे-धीरे नई जगह के साथ घुलने-मिलने पर यह रोमांचक और सीखने का अनुभव भी बन सकता है।
सोचो और बताओ - प्रश्न 3
जात्र्या जैसे परिवार अक्सर बड़े शहरों में बेहतर अवसरों की तलाश में आते हैं। इन अवसरों में बेहतर रोज़गार, अधिक कमाई की संभावना, अच्छी शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएँ शामिल हो सकती हैं। ग्रामीण या छोटे शहरों में अक्सर इन सुविधाओं की कमी होती है, इसलिए लोग बेहतर जीवन जीने की उम्मीद में बड़े शहरों की ओर पलायन करते हैं।
सोचो और बताओ - प्रश्न 4
हाँ, यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमारे समाज में कई बच्चे ऐसे हैं जिन्हें अपनी पढ़ाई या बचपन छोड़कर काम करना पड़ता है। ये बच्चे अक्सर सड़कों पर, छोटी दुकानों में, ढाबों पर, या घरों में काम करते हुए देखे जा सकते हैं। उनकी परिस्थितियाँ उन्हें काम करने के लिए मजबूर करती हैं।
सोचो और बताओ - प्रश्न 5
ये बच्चे विभिन्न प्रकार के काम करते हैं, जैसे कि सड़कों पर सामान बेचना, कचरा बीनना, चाय की दुकानों या होटलों में बर्तन धोना या वेटर का काम करना, गाड़ियों को साफ करना, या खेतों में मजदूरी करना। उन्हें यह काम अक्सर गरीबी, परिवार की आर्थिक तंगी, या परिवार के सदस्यों की देखभाल के लिए करना पड़ता है। शिक्षा और बेहतर जीवन के अवसरों की कमी भी उन्हें काम करने पर मजबूर करती है।
बताओ - प्रश्न 1
खेड़ी गाँव में बच्चे प्रकृति और अपने आसपास के माहौल से जुड़े कई तरह के कौशल सीखते थे। वे मछली पकड़ना सीखते थे, पक्षियों की आवाज़ों को पहचानना और उनकी नकल करना सीखते थे। इसके अलावा, वे ढोल बजाना, नाचना और गाना भी सीखते थे, जो उनके सामुदायिक जीवन का हिस्सा था।
बताओ - प्रश्न 2
हम अपने बड़ों से जीवन के कई महत्वपूर्ण सबक सीखते हैं। इसमें ज्ञान और अनुभव की बातें शामिल हैं, जैसे कि किसी काम को कैसे करना है या जीवन की चुनौतियों का सामना कैसे करना है। हम उनसे दूसरों का सम्मान करना, किसी को छोटा या कमतर न समझना, और विनम्रता जैसे नैतिक मूल्य भी सीखते हैं। वे हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से भी जोड़ते हैं।
बताओ - प्रश्न 3
जात्र्या को खेड़ी में हासिल हुए ज्ञान में से कुछ चीजें मुंबई में उसके काम आ सकती थीं। जैसे, ढोल बजाना, गाना गाना या नाचना शायद उसे किसी सांस्कृतिक कार्यक्रम या मनोरंजन के अवसर में मदद कर सकता था। मछली पकड़ने का कौशल सीधे तौर पर मुंबई में काम न आए, लेकिन यह उसके ग्रामीण परिवेश और प्रकृति से जुड़ाव को दर्शाता है। हालांकि, शहर के जीवन की ज़रूरतों के हिसाब से ये कौशल शायद बहुत उपयोगी न हों।
बताओ - प्रश्न 4
हाँ, मैं लगभग हर रोज़ पक्षियों की आवाज़ें सुनता हूँ। हमारे आसपास अक्सर कौवे की 'काँव-काँव', गौरैया की 'चिड़ियों-चिड़ियों', और कभी-कभी कबूतर की 'गुटर गूँ' जैसी आवाज़ें सुनाई देती हैं। सुबह के समय चिड़ियों की चहचहाहट कानों को सुकून देती है।
बताओ - प्रश्न 5
हाँ, मैं कुछ पक्षियों की आवाज़ों की नकल करने की कोशिश कर सकता हूँ। उदाहरण के लिए, कौवे की 'काँव-काँव' या तोते की 'मीठा-मीठा' जैसी आवाज़ की नकल की जा सकती है। कोयल की मधुर कूक की नकल करना भी संभव है। यह एक मजेदार अभ्यास है जो हमें प्रकृति के करीब लाता है।
बताओ - प्रश्न 6
मैं रोज़ ऐसी कई आवाज़ें सुनता हूँ जो शायद खेड़ी जैसे शांत गाँव के लोग नहीं सुनते होंगे। इनमें सबसे प्रमुख है हवाई जहाज़ के उड़ने की गड़गड़ाहट, गाड़ियों और ट्रकों के हॉर्न का लगातार शोर, निर्माण स्थलों से आने वाली मशीनों की आवाज़ें, और मोबाइल फोन की रिंगटोन। ये आवाज़ें शहरी जीवन का हिस्सा हैं।
बताओ - प्रश्न 7
हाँ, मैंने सन्नाटा महसूस किया है। यह अक्सर देर रात को, जब पूरा मोहल्ला या घर सो रहा होता है, तब महसूस होता है। कभी-कभी बहुत सुबह, सूरज उगने से पहले भी एक गहरी शांति और सन्नाटा होता है। ऐसे क्षणों में केवल प्रकृति की हल्की आवाज़ें या बिल्कुल खामोशी का अनुभव होता है।
चर्चा करो और बताओ - प्रश्न 1
जात्र्या के गाँव के लोगों को अपनी जंगल-जमीन छोड़ना इसलिए मंजूर नहीं था क्योंकि वे वहाँ पीढ़ियों से रह रहे थे। वह ज़मीन उनकी पहचान, उनकी संस्कृति और उनके जीवन का आधार थी। उन्होंने वहीं जन्म लिया, खेला, बड़े हुए और उनके पूर्वज भी वहीं रहते थे। उस जगह से उनका गहरा भावनात्मक लगाव था। उन्हें अपना गाँव इसलिए छोड़ना पड़ा क्योंकि नदी पर बाँध बनाने के कारण उनका पूरा गाँव और ज़मीन पानी में डूब गई थी, जिससे उनके पास रहने या जीने का कोई और विकल्प नहीं बचा था।
चर्चा करो और बताओ - प्रश्न 2
जात्र्या के खेड़ी के परिवार में कुल तीन लोग थे: जात्र्या, उसकी माँ और उसके पिता। जब जात्र्या अपने भविष्य के परिवार के बारे में सोचता था, तो उसके मन में उसकी होने वाली पत्नी और उसके बच्चे आते थे। हालाँकि, उसका अपने पूरे गाँव से भी गहरा जुड़ाव था, जिसे वह अपने परिवार का ही एक हिस्सा मानता था।
चर्चा करो और बताओ - प्रश्न 3
जब मैं अपने परिवार के बारे में सोचता हूँ, तो मेरे मन में मेरे सबसे करीबी सदस्य आते हैं। इनमें मेरे माता-पिता, मेरे दादा-दादी, नाना-नानी, भाई-बहन और अन्य रिश्तेदार शामिल होते हैं। मैं उनके साथ बिताए पलों को याद करता हूँ और उनके भविष्य के बारे में भी सोचता हूँ। परिवार का मतलब सिर्फ खून के रिश्ते ही नहीं, बल्कि वे लोग भी होते हैं जिनसे हमें प्यार और अपनापन महसूस होता है।
चर्चा करो और बताओ - प्रश्न 4
हाँ, मैंने ऐसे कई लोगों के बारे में सुना है, और शायद अपने आसपास भी देखा है, जो अपनी पुरानी जगह को छोड़ना पसंद नहीं करते। मेरे दादा-दादी भी ऐसे ही हैं। वे अपने गाँव से बहुत जुड़ाव महसूस करते हैं। उन्हें शहर की भागदौड़, शोर और प्रदूषण पसंद नहीं आता। वे अपने गाँव की सादगी, ताज़ी हवा और अपने पुराने पड़ोसियों के साथ रहना ज़्यादा पसंद करते हैं। वे अक्सर कहते हैं कि उनकी जड़ें वहीं हैं और वे वहाँ ज़्यादा सुकून महसूस करते हैं।
चर्चा करो और बताओ - प्रश्न 5
हाँ, मैं ऐसी कई जगहों के बारे में जानता हूँ जहाँ स्कूल की सुविधा उपलब्ध नहीं है। अक्सर दूरदराज के गाँवों, आदिवासी इलाकों या बहुत पिछड़े क्षेत्रों में स्कूल नहीं होते। कभी-कभी, किसी गाँव में स्कूल तो होता है, लेकिन वह बहुत दूर होता है या उसकी हालत अच्छी नहीं होती, जिससे बच्चों का वहाँ जाना मुश्किल हो जाता है। मेरे अपने गाँव में भी शायद स्कूल की सुविधा उतनी अच्छी न हो या बहुत दूर हो, जिससे कुछ बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं।
Common mistakes
- Not understanding the emotional impact of displacement.
- Underestimating the difficulties of adapting to new surroundings.
- Failing to recognize the socio-economic reasons for child labor.
- Confusing the skills learned in different environments.
Revision tips
- Read Jathya's story carefully to understand his feelings and experiences.
- Discuss the reasons for migration and child labor with family or friends.
- Compare the sounds and activities of your village/town with those described in the chapter.
- Reflect on the skills you learn from your elders and how they might be useful elsewhere.
Practice MCQs
Q1. जात्र्या भीड़ में रहकर भी अकेला क्यों महसूस कर रहा था?
Explanation: जात्र्या भीड़ में भी अकेला महसूस कर रहा था क्योंकि वह अपनी जानी-पहचानी जगह छोड़कर एक नई और अपरिचित जगह, मुंबई में था, जहाँ वह अकेला था।
Q2. बड़े शहरों में जात्र्या जैसे परिवार क्यों आते हैं?
Explanation: जात्र्या जैसे परिवार अक्सर बड़े शहरों में बेहतर रोज़ी-रोटी कमाने और जीवन स्तर सुधारने की उम्मीद में आते हैं, क्योंकि उनके मूल स्थानों पर अवसर सीमित हो सकते हैं।
Q3. खेड़ी गाँव के बच्चे क्या-क्या सीखते थे?
Explanation: खेड़ी गाँव के बच्चे प्रकृति से जुड़े कई कौशल सीखते थे, जैसे मछली पकड़ना, पक्षियों की आवाज़ों की नकल करना, ढोल बजाना, नाचना और गाना।
Q4. नदीबंध बाँध बनने के कारण जात्र्या के गाँव का क्या हुआ?
Explanation: नदीबंध बाँध के निर्माण के कारण, जात्र्या के गाँव में पानी भर गया और पूरा गाँव डूब गया, जिससे वहाँ के लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा।
Q5. मुंबई जैसे बड़े शहर में जात्र्या को कौन सी आवाज़ें सुनने को मिलती होंगी जो खेड़ी में नहीं थीं?
Explanation: बड़े शहरों में लगातार वाहनों का शोर, लोगों की भीड़ और मशीनों की आवाज़ें होती हैं, जो खेड़ी जैसे शांत गाँव के माहौल से बिल्कुल अलग होती हैं।
Frequently asked questions
यह अध्याय 'जाएँ तो जाएँ कहाँ' किस बारे में है?
यह अध्याय उन लोगों की कहानी बताता है जिन्हें अपना घर और ज़मीन छोड़कर नई जगह जाना पड़ता है, जैसे जात्र्या। यह विस्थापन, नई जगह पर रहने की मुश्किलों और बाल श्रम जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।
जात्र्या को भीड़ में भी अकेला क्यों महसूस होता था?
जात्र्या को भीड़ में भी अकेला इसलिए महसूस होता था क्योंकि वह अपनी जानी-पहचानी जगह, अपने गाँव खेड़ी को छोड़कर मुंबई जैसे बड़े शहर में आया था, जहाँ वह किसी को नहीं जानता था।
बड़े शहरों में लोग क्यों जाते हैं?
लोग अक्सर बड़े शहरों में बेहतर रोज़गार, कमाई और जीवन जीने के अवसरों की तलाश में जाते हैं, क्योंकि उनके अपने गाँवों या छोटे शहरों में ये अवसर सीमित हो सकते हैं।
खेड़ी गाँव के बच्चों के जीवन और मुंबई के बच्चों के जीवन में क्या अंतर है?
खेड़ी के बच्चे प्रकृति से जुड़े कौशल सीखते थे जैसे मछली पकड़ना, पक्षियों की नकल करना। वहीं, मुंबई जैसे शहर में बच्चे अक्सर काम पर जाते हैं और उन्हें शहर के शोरगुल और मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।
नदीबंध बाँध बनने से जात्र्या के गाँव पर क्या असर पड़ा?
नदीबंध बाँध बनने के कारण जात्र्या का गाँव पानी में डूब गया, जिससे वहाँ के सभी लोगों को अपना घर और ज़मीन छोड़कर कहीं और जाना पड़ा।
यह अध्याय बच्चों को क्या सिखाता है?
यह अध्याय बच्चों को विस्थापन के दर्द, नई जगहों पर बसने की चुनौतियों, बाल श्रम की समस्या और समाज के विभिन्न वर्गों के जीवन के बारे में संवेदनशील बनाता है।
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