CBSE Class 4 Hindi NCERT Solutions: Chapter 14 - मुफ़्त ही मुफ़्त
CBSE कक्षा 4 हिंदी पाठ्यपुस्तक के अध्याय 'मुफ़्त ही मुफ़्त' में, हम भिक्षुभाई की कहानी के माध्यम से मोलभाव, मेहनत के मूल्य और 'मुफ़्त' की अवधारणा को समझते हैं। यह अध्याय बताता है कि कैसे किसी वस्तु का मूल्य स्थान और प्रयास के आधार पर बदल सकता है। छात्र सीखेंगे कि कीमतें क्यों भिन्न होती हैं, सामान प्राप्त करने की वास्तविक लागत क्या है, और 'मुफ़्त' हमेशा वास्तव में मुफ़्त क्यों नहीं होता। समाधान वर्णनात्मक भाषा, चरित्र विश्लेषण और मात्रा या मूल्य में परिवर्तन को समझने पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। ये समाधान छात्रों को कहानी की बारीकियों को समझने, उनकी समझ को बेहतर बनाने और पाठ के अंतर्निहित संदेशों से जुड़कर उनकी हिंदी परीक्षाओं की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 4 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 14. मुफ्त ही मुफ्त - बजओ खुद क बनाय़ा बाजा, आँधी |
Chapter summary
Chapter 14, 'मुफ़्त ही मुफ़्त', focuses on the story of Bhikhubhai's coconut purchase. The NCERT Solutions cover comprehension questions about why Bhikhubhai wanted a lower price, why coconut prices varied, and whether he truly got them for free. It also explores descriptive elements like the 'old' banyan tree and character traits of Bhikhubhai. The chapter emphasizes the concepts of increasing and decreasing values, such as the falling price of coconuts versus rising greed and fatigue. Additionally, it includes exercises on storytelling, local dialects, and word formation, along with a section on market descriptions.
Learning outcomes
- Understand the concept of bargaining and its motivations.
- Analyze the reasons for price variations in different locations.
- Evaluate the true cost of an item considering effort and time.
- Describe character traits and motivations from a story.
- Identify and explain changes in quantities and values within a narrative.
- Imagine and narrate alternative story progressions.
- Understand and use descriptive language for markets and sounds.
Topics covered
Paper topics
- Bargaining and Price Negotiation
- Value of Goods and Effort
- Character Analysis (Bhikhubhai)
- Descriptive Language
- Vocabulary and Word Formation
- Market Scenes and Sounds
- Storytelling and Narrative Development
- Understanding Price Variations
Important topics
- Understanding the true cost beyond monetary price
- Analyzing character motivations
- Describing market environments
- Vocabulary and gender-based word changes
- The concept of 'free' vs. effort
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Questions and Solutions
(क) हर बार भीखुभाई कम दाम देना चाहते थे। क्यों?
भीखुभाई हर बार नारियल का कम दाम देना चाहते थे क्योंकि वे बहुत कंजूस थे। वे किसी भी चीज़ के लिए ज़्यादा पैसे खर्च नहीं करना चाहते थे और हमेशा मोलभाव करके दाम कम करवाने की कोशिश करते थे।
(ख) हर जगह नारियल के दाम में फर्क क्यों था?
नारियल के दाम हर जगह अलग-अलग थे क्योंकि नारियल जहाँ पैदा होता है (नारियल के बगीचे में), वहाँ उसका दाम सबसे कम होता है। जैसे-जैसे नारियल बाज़ार में आगे पहुँचता है, रास्ते में कई लोग (जैसे व्यापारी, दुकानदार) उसमें अपनी कमाई जोड़ते जाते हैं। इस वजह से हर अगले पड़ाव पर उसका दाम बढ़ता जाता है।
(ग) क्या भीखुभाई को नारियल सच में मुफ़्त में ही मिला? क्यों?
नहीं, भीखुभाई को नारियल सचमुच मुफ़्त में नहीं मिले। हालाँकि उन्होंने अंत में कुछ पैसे दिए, लेकिन नारियल को प्राप्त करने के लिए उन्हें बहुत दूर तक चलना पड़ा और काफी मेहनत करनी पड़ी। उनकी यात्रा और मेहनत की लागत, नारियल के दाम से कहीं ज़्यादा थी। इसलिए, यह कहना गलत होगा कि उन्हें नारियल मुफ़्त में मिले।
(घ) वे खेत में बूढ़े बरगद के नीचे बैठ गए | तुम्हारे विचार से कहा नी बरगद को बुढ़ा क्यों कहा गया होगा?
बरगद के पेड़ को 'बूढ़ा' इसलिए कहा गया होगा क्योंकि वह बहुत पुराना और विशाल पेड़ रहा होगा। पुराने पेड़ों की जड़ें गहरी होती हैं, तना मोटा होता है, और उनकी शाखाएँ दूर-दूर तक फैली होती हैं। समय के साथ, पेड़ की कुछ शाखाएँ कमजोर हो सकती हैं या सूख सकती हैं, जो उसे एक बूढ़े व्यक्ति का रूप देते हैं।
भीखुभाई के बारे में कुछ बाते बताओं।
कहानी पढ़कर भीखुभाई के बारे में निम्नलिखित बातें पता चलती हैं:
- खाने-पीने का शौकीन: उन्हें खाने-पीने की चीज़ों का शौक था, जैसा कि नारियल खरीदने की उनकी इच्छा से पता चलता है।
- कंजूस: वे बहुत कंजूस थे और हर चीज़ का दाम कम करवाना चाहते थे।
- लालची: वे ज़्यादा चीज़ें कम दाम में पाने की कोशिश करते थे, जो उनके लालच को दर्शाता है।
- बातें बनाने में चतुर: वे अपनी बात मनवाने के लिए अच्छी तरह से बातें करना जानते थे।
- खुशी में होश खो देना: जब उन्हें बहुत ज़्यादा खुशी मिलती थी, तो वे अपना आपा खो देते थे।
क्या बढ़ा, क्या घटा?
कहानी के आगे बढ़ने के साथ निम्नलिखित चीज़ों में बदलाव आया:
- नारियल का दाम: घटा (जैसे-जैसे भीखुभाई बाज़ार में आगे बढ़ते गए, दाम कम होता गया)।
- भीखुभाई का लालच: बढ़ा (वे और भी कम दाम में या मुफ्त में नारियल पाना चाहते थे)।
- रास्ते की लम्बाई: बढ़ी (भीखुभाई को नारियल खरीदने के लिए ज़्यादा दूर चलना पड़ा)।
- भीखुभाई की थकान: बढ़ी (लंबे रास्ते और मेहनत से वे थक गए)।
कहो कहानी: यदि इस कहानी में भीखुभाई को नारियल नहीं बल्कि आम खाने की इच्छा होती तो कहानी आगे कैसे बढ़ती? बताओ?
अगर भीखुभाई को नारियल की जगह आम खाने की इच्छा होती, तो कहानी कुछ इस तरह आगे बढ़ सकती थी:
भीखुभाई बाज़ार में आम खरीदने जाते। वे सबसे सस्ते आम की तलाश करते। हो सकता है कि वे आम के बगीचे के पास सबसे सस्ते आम पाते, या फिर बाज़ार में घूमते-घूमते उन्हें आमों के दाम कम मिलते जाते। रास्ते में वे आमों की कीमत पर मोलभाव करते, और शायद अंत में उन्हें आम भी उतने ही महंगे पड़ते जितने नारियल पड़े थे, क्योंकि उनकी मेहनत और समय की लागत भी जुड़ जाती। कहानी का अंत यह दिखाता कि 'मुफ़्त' या बहुत सस्ता मिलना हमेशा आसान नहीं होता, और उसमें मेहनत का मूल्य भी शामिल होता है।
बात की बात: कहानी में नारियल वाले और भीख़ुभाई की बातचीत फिर से पढ़ो | अब इसे अपने घर की बोली में लिखो |
यह अभ्यास छात्रों को अपनी स्थानीय भाषा या बोली में संवाद लिखने का अवसर देता है। विद्यार्थी कहानी में नारियल वाले और भीखुभाई के बीच हुई बातचीत को अपनी क्षेत्रीय बोली के शब्दों और लहजे का प्रयोग करके फिर से लिख सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई छात्र अवधी बोली बोलता है, तो वह उस बोली के शब्दों का प्रयोग करके बातचीत को फिर से लिख सकता है।
शब्दों की बात: नाना-नानी, पतीली-पतीला की तरह सही शब्द लिखो।
दिए गए उदाहरणों के आधार पर, शब्दों के लिंग बदलकर सही शब्द लिखने हैं:
- काका - काकी
- दर्जी - दर्जिन
- माली - मालिन (यहाँ स्रोत में 'मलिन' दिया है, जो संभवतः 'माली' का स्त्रीलिंग रूप 'मालिन' होना चाहिए)
- टोकर - टोकरी
- मटका - मटकी
- गद्दा - गद्दी
(क) मंडी में क्या-क्या बिक रहा होगा?
मंडी में तरह-तरह की चीज़ें बिक रही होंगी, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- सब्जियां: आलू, टमाटर, गाजर, बंदगोभी, फूलगोभी, बैंगन, सीताफल, पालक, लौकी, शलगम, चुकंदर, भिंडी, करेला, टिंडा, मिर्च, लहसुन, अदरक, नींबू आदि।
- फल: केला, संतरा, अंगूर, सेब, चीकू, पपीता, अमरूद आदि।
- अनाज और दालें: चावल, गेहूँ, दालें आदि।
- अन्य खाद्य पदार्थ: मसाले, तेल, आदि।
(ख) मंडी में तरह-तरह की आवाजें सुनाई देती हैं| जैसे- ताजा टमाटर! बीस रूपया! बीस रूपया! बीस रूपया!
मंडी में व्यापारियों की ऊँची और ज़ोरदार आवाज़ें गूँजती रहती हैं। वे अपने सामान को बेचने के लिए पुकारते हैं। कुछ ऐसी ही आवाज़ें हो सकती हैं:
- आलू! आलू! दस का किलो! दस का किलो!
- मीठी गाजर! मीठी गाजर! चार का पाव! चार का पाव!
- अदरक-मिर्च! अदरक-मिर्च! पाँच के पाव!
- मीठे सेब! ताजे सेब! तीस रूपया! तीस रूपया!
- ताज़ा पालक! ताज़ा पालक! पाँच का गुच्छा!
(ग) क्या तुम अपने आसपास की ऐसी जगह सोच सकते हो जहाँ बहुत शोर होता है| उस जगह के बारे में लिखो|
हाँ, मेरे घर के पास एक बाज़ार है जहाँ बहुत शोर होता है। यह बाज़ार सड़क के दोनों ओर फैला हुआ है और यहाँ हर तरह की दुकानें हैं, जैसे किराने की दुकान, कपड़ों की दुकान, बिजली के सामान की दुकान, और किताबों की दुकान। दुकानदार ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए ज़ोर-ज़ोर से पुकारते हैं। गाड़ियों के हॉर्न, लोगों की बातचीत और सामान की आवाज़ें मिलकर एक कोलाहल पैदा करती हैं। खासकर शाम के समय यह बाज़ार बहुत व्यस्त हो जाता है और शोर और भी बढ़ जाता है।
Common mistakes
- Assuming 'free' means no cost or effort.
- Not considering the effort involved in obtaining goods.
- Confusing the literal meaning of words with their contextual meaning.
- Difficulty in describing market scenes and sounds vividly.
Revision tips
- Reread the story 'मुफ़्त ही मुफ़्त' to recall Bhikhubhai's journey and motivations.
- Focus on the 'तुम्हारी समझ' section to analyze the core themes of price and value.
- Practice rewriting dialogues in your local dialect to improve language fluency.
- Use the 'मंडी' section to practice descriptive writing about busy places.
- Review the 'क्या बढ़ा, क्या घटा' exercise to understand how values can change in a story.
Practice MCQs
Q1. भीखुभाई हर बार नारियल का कम दाम क्यों देना चाहते थे?
Explanation: कहानी के अनुसार, भीखुभाई कंजूस थे, इसलिए वे हर बार कम दाम देना चाहते थे।
Q2. नारियल के बगीचे में नारियल का दाम सबसे कम क्यों था?
Explanation: नारियल जहाँ पैदा होता है, वहाँ उसकी कीमत सबसे कम होती है क्योंकि उसमें बिचौलियों का मुनाफा नहीं जुड़ा होता।
Q3. क्या भीखुभाई को नारियल सचमुच मुफ़्त में मिले?
Explanation: नारियल मुफ्त में नहीं मिले, क्योंकि उन्हें प्राप्त करने में भीखुभाई को बहुत अधिक मेहनत करनी पड़ी, जो उसकी कीमत से कहीं ज्यादा थी।
Q4. कहानी में 'बूढ़ा बरगद' किसे कहा गया है?
Explanation: बरगद के पेड़ को 'बूढ़ा' इसलिए कहा गया है क्योंकि वह बहुत पुराना था और शायद उसकी डालियाँ भी कमजोर हो गई थीं।
Q5. कहानी के अनुसार, भीखुभाई का कौन सा गुण बढ़ा?
Explanation: जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ी, भीखुभाई का लालच बढ़ता गया, जबकि नारियल का दाम घटता गया।
Q6. मंडी में किस चीज़ की आवाज़ सुनाई दे सकती है?
Explanation: मंडी में व्यापारियों की ऊँची आवाजें गूँजती हैं, जो ताज़े माल के दाम पुकारते हैं।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह समाधान CBSE कक्षा 4 के हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से पाठ 14 'मुफ़्त ही मुफ़्त' पर केंद्रित हैं।
पाठ 'मुफ़्त ही मुफ़्त' का मुख्य विषय क्या है?
पाठ का मुख्य विषय मोलभाव, किसी वस्तु का वास्तविक मूल्य (सिर्फ पैसे नहीं, बल्कि मेहनत भी) और 'मुफ़्त' होने की धारणा की पड़ताल करना है।
क्या इन समाधानों में कहानी के प्रश्न शामिल हैं?
हाँ, इन समाधानों में पाठ 'मुफ़्त ही मुफ़्त' के सभी प्रश्न शामिल हैं, जिनमें कहानी की समझ, चरित्र विश्लेषण और भाषा-आधारित अभ्यास शामिल हैं।
यह समाधान छात्रों की मदद कैसे करेंगे?
ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों, घटनाओं और मुख्य संदेशों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेंगे, जिससे उनकी समझ और भाषा कौशल में सुधार होगा।
क्या समाधान में बाजार के वर्णन से संबंधित प्रश्न हैं?
हाँ, समाधान में एक प्रश्न शामिल है जो छात्रों को मंडी जैसे शोरगुल वाले स्थानों का वर्णन करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
शब्दों के खेल से संबंधित कौन से अभ्यास दिए गए हैं?
समाधान में 'नाना-नानी' जैसे उदाहरणों का उपयोग करके लिंग परिवर्तन (जैसे काका-काकी, दर्जी-दर्जिन) से संबंधित अभ्यास शामिल हैं।
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