कक्षा 4 हिंदी NCERT समाधान: दान का हिसाब
यह पृष्ठ कक्षा 4 के हिंदी विषय के अध्याय 'दान का हिसाब' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय राजा की कंजूसी, दान के महत्व, और जरूरतमंदों की मदद करने की आवश्यकता पर केंद्रित है। समाधानों में कहानी के पात्रों के विचारों, राजा के कंजूस स्वभाव के कारणों, और संन्यासी द्वारा राजा को सबक सिखाने की युक्ति को स्पष्ट किया गया है। इसमें अकाल पीड़ितों की मदद करने, राजदरबार की जिम्मेदारियों को समझने और कर्ण जैसे दानी के बारे में जानने जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के दृष्टिकोण को समझने, दान के सामाजिक और नैतिक मूल्यों को पहचानने और अपनी जिम्मेदारियों को समझने में मदद करते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए यह एक उत्कृष्ट संसाधन है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 4 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 7. दान का हिसाब |
Chapter summary
कक्षा 4 के हिंदी अध्याय 'दान का हिसाब' के ये NCERT समाधान छात्रों को कहानी के मुख्य पात्रों, विशेषकर कंजूस राजा और चतुर संन्यासी के बीच के संवाद को समझने में मदद करते हैं। समाधान कहानी के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं, जैसे राजा का दान न देने का कारण, राजदरबारियों की मजबूरी, संन्यासी की युक्ति, और दान का वास्तविक अर्थ। इसमें अकाल सहायता, जिम्मेदारियाँ और कर्ण जैसे महान दानी के उदाहरण भी शामिल हैं। यह छात्रों को कहानी के नैतिक संदेशों को आत्मसात करने और अपनी समझ को बेहतर बनाने में सहायता करता है।
Learning outcomes
- राजा के कंजूस स्वभाव और उसके कारणों को समझना।
- संन्यासी की चतुराई भरी युक्ति का विश्लेषण करना।
- दान के महत्व और विभिन्न कारणों को पहचानना।
- अकाल जैसी आपदाओं में मदद करने के तरीकों पर विचार करना।
- राजदरबार में विभिन्न पदों की जिम्मेदारियों को समझना।
- कर्ण जैसे महान दानी के चरित्र से प्रेरणा लेना।
Topics covered
Paper topics
- कंजूस राजा का चरित्र चित्रण
- दान का महत्व
- संन्यासी की चतुराई
- राजकोष और उसका प्रबंधन
- अकाल और सहायता
- जिम्मेदारियाँ (मंत्री, भंडारी)
- कर्ण जैसे दानी का उदाहरण
- शब्दों के दोहरे अर्थ (पूर्व, जल, मन, मगर)
- दिशाओं का ज्ञान
- घर और स्कूल के आसपास की जानकारी
Important topics
- राजा का कंजूस स्वभाव और उसके परिणाम
- संन्यासी की दान मांगने की अनोखी विधि
- दान का वास्तविक अर्थ और महत्व
- राजदरबारियों की भूमिकाएँ और जिम्मेदारियाँ
- कर्ण की दानवीरता
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Questions and Solutions
कहानी से
(क) राजा किसी को भी दान क्यों नहीं देना चाहता था?
(ख) राजदरबार के लोग मन ही मन राजा को बुरा कहते थे लेकिन राजा का विरोध क्यों नहीं कर पाते थे?
(ग) राज्यसभा में सज्जन और विद्वान लोग क्यों नहीं जाते थे?
(घ) संन्यासी ने सीधे-सीधे शब्दों में भिक्षा क्यों नहीं माँग ली?
(ङ) राजा को संन्यासी के आगे गिड़गिड़ाने की जरूरत क्यों पड़ी?
अंदाज़ अपना-अपना
तुम नीचे दिए गए वाक्यों को किस तरह से कहोगे?
(क) दान के वक्त उनकी मुड़ी बंद हो जाती थी।
(ख) हिसाब देखकर मंत्री का चेहरा फीका पड़ गया।
(ग) संन्यासी की बात सुनकर सभी की जान में जान आई।
(घ) लाखों रुपए राजकोष में मौजूद हैं। जैसे धन का सागर हो।
साथी हाथ बढ़ाना
कभी-कभी कुछ इलाकों में बारिश बिल्कुल भी नहीं होती। नदी-नाले, तालाब, सब सूख जाते हैं। फ सलों के लिए पानी नहीं मिलता। खेत सूख जाते हैं। पशु-पक्षी, जानवर, लोग भूखे मरने लगते हैं। ऐसे समय में वहाँ रहने वाले लोगों को मदद की ज़रूरत होती है। तुम भी लोगों की मदद ज़रूर कर सकते हो। सोचकर बताओ तुम अकाल में परेशान लोगों की मदद कैसे करोगे?
जिम्मेदारी अपनी-अपनी
तुम्हारे विचार से राजदरबार में किसकी क्या-क्या जिम्मेदारियाँ होंगी।
(क) मंत्री
(ख) भंडारी
कर्ण जैसा दानी
सभी ने कहा, "हमारे महाराज कर्ण जैसे ही दानी हैं।"
पता करो कि-
(क) कर्ण कौन थे?
(ख) कर्ण जैसे दानी का क्या मतलब है?
(ग) दान क्या होता है?
(घ) किन-किन कारणों से लोग दान करते हैं?
कहानी और तुम
(क) राजा राजकोष के धन का उपयोग किन-किन कामों में करता था?
तुम्हारे घर में जो पैसा आता है वह कहाँ-कहाँ खर्च होता है? पता करके लिखो।
मेरे घर में जो पैसा आता है, वह कई आवश्यक चीज़ों पर खर्च होता है। इसमें भोजन, कपड़े, बच्चों की पढ़ाई-लिखाई का खर्च, बिजली, पानी, गैस, टेलीफोन का बिल, और घर की अन्य जरूरतें शामिल हैं।
(ख) अकाल के समय लोग राजा से कौन-कौन से काम करवाना चाहते थे?
तुम अपने स्कूल या इलाके में क्या-क्या काम करवाना चाहते हो?
मैं अपने स्कूल या इलाके में कुछ सुधार करवाना चाहूँगा, जैसे कि स्कूल के खेल के मैदान को बेहतर बनाना, पुस्तकालय में नई और रोचक किताबें मंगवाना, या इलाके में अधिक पेड़-पौधे लगवाना ताकि पर्यावरण स्वच्छ रहे।
कैसा राजा!
(क) राजा किसी को दान देना पसंद नहीं करता था। तुम्हारे विचार से राजा सही था या गलत? अपने उत्तर का कारण भी बताओ।
(ख) राजा दान देने के अलावा और किन-किन तरीकों से लोगों की सहायता कर सकता था?
पूर्व और पूर्व
(क) 'पूर्व' शब्द के दो अर्थ हैं
- पूर्व-एक दिशा
- पूर्व-पहले
नीचे ऐसे ही कुछ और शब्द दिए गए हैं जिनके दो-दो अर्थ हैं। इनका प्रयोग करते हुए दो-दो वाक्य बनाओ। जल
जल
- पीने के लिए स्वच्छ जल बहुत आवश्यक है। (अर्थ: पानी)
- सब्जी जल गई, अब वह खाने लायक नहीं रही। (अर्थ: जलना, आग लगना)
मन
मन
- आज मेरा मन बहुत खुश है। (अर्थ: हृदय, इच्छा)
- तौलकर बताओ कि इस बोरे में कितना मन चावल है। (अर्थ: एक माप, लगभग 37.3 किलोग्राम)
मगर
मगर
- वह आया मगर तुरंत चला गया। (अर्थ: लेकिन, परन्तु)
- पानी में रहकर मगर से बैर नहीं करना चाहिए। (अर्थ: एक प्रकार का सरीसृप जीव)
(ख) नीचे चार दिशाओं के नाम लिखे हैं।
तुम्हारे घर और स्कूल के आसपास इन दिशाओं में क्या-क्या है? तालिका भरो-
यहाँ एक उदाहरण तालिका दी गई है, जिसे छात्र अपने घर और स्कूल के आसपास की वास्तविक जानकारी के अनुसार भर सकते हैं।
| दिशा | घर के पास | स्कूल के पास |
|---|---|---|
| पूर्व | मदर डेरी की दुकान | सड़क |
| पश्चिम | पार्क | राशन की दुकान |
| उत्तर | सड़क | फल की दुकान |
| दक्षिण | घर | दवा की दुकान |
Common mistakes
- राजा के कंजूस होने के कारणों को सतही तौर पर समझना।
- संन्यासी की युक्ति के पीछे के गहरे अर्थ को न समझ पाना।
- दान को केवल धन देने तक सीमित समझना।
- राजदरबारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों में भ्रमित होना।
Revision tips
- कहानी के मुख्य पात्रों - राजा और संन्यासी - के संवादों पर विशेष ध्यान दें।
- राजा के कंजूस होने के कारणों और संन्यासी की युक्ति के पीछे की सोच को समझें।
- 'अंदाज़ अपना-अपना' और 'जिम्मेदारी अपनी-अपनी' जैसे खंडों में दिए गए उदाहरणों को अपने शब्दों में दोहराएँ।
- कर्ण जैसे दानी के बारे में दी गई जानकारी को याद करें और दान के महत्व पर विचार करें।
- कहानी से जुड़े प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में लिखने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. राजा किसी को भी दान क्यों नहीं देना चाहता था?
Explanation: राजा बहुत कंजूस था और उसे डर था कि दान देने से राजकोष खाली हो जाएगा, इसलिए वह किसी को दान नहीं देना चाहता था।
Q2. राजदरबार के लोग राजा का विरोध क्यों नहीं कर पाते थे?
Explanation: राजदरबार के लोग राजा के क्रोध से डरते थे और उन्हें आशंका थी कि विरोध करने पर राजा उन्हें दंडित करेगा, इसलिए वे उसका विरोध नहीं कर पाते थे।
Q3. संन्यासी ने सीधे-सीधे भिक्षा क्यों नहीं माँगी?
Explanation: संन्यासी जानता था कि राजा बहुत कंजूस है और एक बार में बड़ी रकम नहीं देगा, इसलिए उसने धीरे-धीरे करके दान की राशि बढ़ाई।
Q4. भंडारी की मुख्य जिम्मेदारी क्या थी?
Explanation: भंडारी का मुख्य काम राजकोष को सुरक्षित रखना और राज्य के सभी खर्चों का हिसाब-किताब रखना होता है।
Q5. कर्ण जैसे दानी का क्या मतलब है?
Explanation: कर्ण जैसे दानी का अर्थ है वह व्यक्ति जो अपनी जान की परवाह किए बिना, अपना सब कुछ दान कर दे, जैसा कर्ण ने अपना कवच-कुण्डल दान करके किया था।
Frequently asked questions
कक्षा 4 के हिंदी अध्याय 'दान का हिसाब' में मुख्य विषय क्या हैं?
इस अध्याय में मुख्य रूप से एक कंजूस राजा, दान का महत्व, संन्यासी की चतुराई से राजा को सबक सिखाने की कहानी, अकाल पीड़ितों की मदद, और राजदरबार की जिम्मेदारियों जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।
यह NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के विचारों को समझने, दान के नैतिक मूल्यों को पहचानने, और पाठ में दिए गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर स्पष्ट रूप से लिखने में मदद करते हैं।
राजा दान क्यों नहीं देना चाहता था?
राजा दान इसलिए नहीं देना चाहता था क्योंकि वह बहुत कंजूस था और उसे डर था कि दान देने से राजकोष खाली हो जाएगा।
संन्यासी ने राजा को दान देने के लिए कैसे मजबूर किया?
संन्यासी ने सीधे-सीधे भिक्षा माँगने के बजाय, हर दिन दान की राशि दोगुनी करने की शर्त रखी, जिससे धीरे-धीरे राजकोष खाली होने लगा और राजा को गिड़गिड़ाना पड़ा।
'कर्ण जैसे दानी' का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि कर्ण बहुत बड़े दानी थे जिन्होंने अपना सब कुछ दान कर दिया था। 'कर्ण जैसे दानी' का मतलब है ऐसा व्यक्ति जो बिना किसी संकोच के अपना सर्वस्व दान कर दे।
इस अध्याय में किन-किन जिम्मेदारियों का उल्लेख है?
इस अध्याय में मंत्री की जिम्मेदारी (राज्य की देखभाल और राजा को सलाह देना) और भंडारी की जिम्मेदारी (राजकोष की सुरक्षा और खर्च का हिसाब रखना) का उल्लेख है।
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