कक्षा 4 पर्यावरण अध्ययन: अध्याय 12 कैसे-कैसे बदले घर NCERT समाधान
यह खंड कक्षा 4 के पर्यावरण अध्ययन (EVS) के अध्याय 12 "कैसे-कैसे बदले घर" के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय समय के साथ घरों के निर्माण में हुए बदलावों पर केंद्रित है, जिसमें विभिन्न निर्माण सामग्री, वास्तुकला शैलियों और सामाजिक प्रथाओं की पड़ताल की गई है। छात्र सीखेंगे कि विभिन्न युगों और स्थानों में घर कैसे बनाए जाते थे, आज के आधुनिक घरों से उनकी तुलना कैसे की जाती है, और निर्माण में उपयोग की जाने वाली विभिन्न सामग्रियों और औजारों के बारे में जानेंगे। समाधान छात्रों को घरों के विकास को समझने, विभिन्न निर्माण व्यवसायों की सराहना करने और अपने आसपास की दुनिया के बारे में उनकी समझ को व्यापक बनाने में मदद करते हैं। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 4 |
| Subject | Environmental Studies |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 12 कैसे -कैसे बदले घर |
Chapter summary
अध्याय 12 "कैसे-कैसे बदले घर" कक्षा 4 के पर्यावरण अध्ययन के लिए घरों के विकास और निर्माण सामग्री पर केंद्रित है। यह अध्याय छात्रों को विभिन्न पीढ़ियों के घरों की तुलना करने, निर्माण में उपयोग की जाने वाली सामग्रियों (जैसे मिट्टी, ईंट, सीमेंट, लकड़ी) की पहचान करने और विभिन्न निर्माण व्यवसायों (जैसे राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर) और उनके औजारों के बारे में जानने के लिए प्रोत्साहित करता है। समाधान छात्रों को इन अवधारणाओं को समझने और याद रखने में मदद करते हैं।
Learning outcomes
- विभिन्न कालों में घरों के निर्माण में प्रयुक्त सामग्री की पहचान करना।
- समय के साथ घरों के डिजाइन और निर्माण में आए बदलावों को समझना।
- विभिन्न निर्माण व्यवसायों और उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले औजारों के बारे में जानना।
- अपने घर और दोस्तों के घरों की निर्माण सामग्री की तुलना करना।
- घरों के निर्माण में मिट्टी, ईंट, सीमेंट और लकड़ी जैसी सामग्रियों के उपयोग के कारणों को समझना।
Topics covered
Paper topics
- घरों का विकास
- निर्माण सामग्री (मिट्टी, ईंट, सीमेंट, लकड़ी, फूस)
- पुराने और नए घर
- निर्माण व्यवसाय (राजमिस्त्री, बढ़ई, प्लंबर, बिजली मिस्त्री)
- निर्माण औजार
- घर बनाने की प्रक्रिया
- समय के साथ बदलाव
- आधुनिक भवन निर्माण
Important topics
- घरों का विकास और विभिन्न निर्माण सामग्री
- निर्माण व्यवसाय और उनके औजार
- पुराने बनाम नए घरों की तुलना
- घर बनाने की प्रक्रिया को समझना
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Questions and Solutions
पता करो और लिखो
जब दादा-दादी या परिवार के बड़े सदस्य 8-9 साल के थे, तब वे अक्सर अपने पैतृक गाँव में रहते थे। उस समय शहरों का विकास इतना नहीं हुआ था और ज़्यादातर लोग गाँवों में ही बसते थे।
उस समय के घर ज़्यादातर स्थानीय रूप से उपलब्ध प्राकृतिक सामग्री से बनाए जाते थे। यह सामग्री इस प्रकार हो सकती है:
- मिट्टी (दीवारों के लिए)
- बाँस (ढांचे या दीवारों के लिए)
- फूस या घास-फूस (छत के लिए)
- लकड़ी (दरवाजे, खिड़कियाँ या छत के सहारे के लिए)
- कुछ जगहों पर ईंटों का भी प्रयोग होता था, लेकिन वे आज की तरह पक्की ईंटें नहीं होती थीं।
उस समय के ज़्यादातर घरों में आज की तरह घर के अंदर बने हुए आधुनिक टॉयलेट नहीं होते थे। टॉयलेट की सुविधा या तो घर के बाहर एक अलग छोटी सी जगह में होती थी या फिर गाँव के सामूहिक शौचालयों का इस्तेमाल किया जाता था।
खाना बनाने के लिए एक अलग से रसोईघर होता था। यह रसोईघर घर के अंदर भी हो सकता था या कभी-कभी घर से थोड़ा हटकर भी बनाया जाता था। इसमें चूल्हा होता था, जो मिट्टी या ईंटों से बना होता था।
चेतनदास के घर में मिट्टी का भरपूर इस्तेमाल इसलिए हुआ क्योंकि उस समय मिट्टी एक आसानी से उपलब्ध और सस्ता निर्माण सामग्री थी। मिट्टी की दीवारें, जिन्हें लकड़ी के फ्रेम पर कई परतों में लगाया जाता था, घर को बाहरी गर्मी और ठंड से बचाने में बहुत प्रभावी होती थीं। यह घर के अंदर एक आरामदायक तापमान बनाए रखने में मदद करती थी।
उस समय टॉयलेट की सफाई को एक बहुत ही गंदा और नीचा काम माना जाता था। सामाजिक मान्यताओं के अनुसार, यह काम कुछ खास जातियों या लोगों द्वारा ही किया जाता था, जिन्हें इस काम के लिए नियुक्त किया जाता था। इस वजह से, जो लोग टॉयलेट का उपयोग करते थे, वे स्वयं उसकी सफाई नहीं करते थे, बल्कि वे उन नियुक्त किए गए लोगों पर निर्भर रहते थे।
हाँ, मेरे घर में टॉयलेट की सुविधा उपलब्ध है। इसकी सफाई की ज़िम्मेदारी घर के सदस्यों द्वारा ही निभाई जाती है। हम सब मिलकर बारी-बारी से या आवश्यकतानुसार टॉयलेट की सफाई करते हैं।
मेरा मकान आधुनिक निर्माण सामग्री से बना है। इसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित चीजें शामिल हैं:
- सीमेंट (जो ईंटों और अन्य सामग्री को जोड़ने का काम करता है)
- बालू (रेत) (सीमेंट के साथ मिलाकर मसाले के रूप में प्रयोग होता है)
- लोहे की छड़ें (कॉलम और बीम को मजबूती देने के लिए)
- लकड़ी (दरवाजे, खिड़कियाँ और अलमारियों के लिए)
- ईंटें (दीवारें बनाने के लिए)
मेरे दोस्त का मकान भी मेरे मकान की तरह ही सीमेंट, बालू, लोहे की छड़ों और लकड़ी जैसी आधुनिक सामग्रियों से बना है। हमारे मकानों की निर्माण सामग्री में कोई खास अंतर नहीं है। हालाँकि, हो सकता है कि हमारे मकानों के आकार, डिज़ाइन या कुछ अतिरिक्त सुविधाओं में थोड़ा अंतर हो, जैसे कि मेरे दोस्त का मकान मेरे मकान से थोड़ा छोटा या बड़ा हो सकता है, या उसमें अलग तरह की सजावट हो सकती है।
चेतनदास जी के पोता-पोती बड़े होकर संभवतः शहरों में रहने वाले लोगों की तरह आधुनिक मकानों में रहेंगे। ये मकान आमतौर पर सीमेंट, ईंट और लोहे से बने होते हैं और अक्सर बहुमंजिली इमारतों (अपार्टमेंट्स) के रूप में होते हैं, जिनमें सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होती हैं।
मैं बड़ा होकर एक ऐसे शहर में रहना पसंद करूँगा जहाँ अच्छी सुविधाएँ हों। मैं एक बहुमंजिली इमारत में एक फ्लैट में रहना चाहूँगा, जहाँ सुरक्षा हो और आस-पास स्कूल, बाज़ार और अन्य ज़रूरी चीज़ें आसानी से उपलब्ध हों।
हाँ, मेरे दादा-दादी के समय के घरों में इस्तेमाल होने वाली कुछ सामग्रियाँ आज मेरे घर बनाने में भी इस्तेमाल हुई हैं। इनमें मुख्य रूप से ईंटें, सीमेंट और लकड़ी शामिल हैं। ईंटों का उपयोग दीवारों के निर्माण में, सीमेंट का उपयोग ईंटों को जोड़ने और प्लास्टर करने में, और लकड़ी का उपयोग दरवाजे, खिड़कियाँ और फर्नीचर बनाने में किया गया है।
मेरे यहाँ भी लकड़ी का काम करने वाले कारीगर को 'बढ़ई' ही कहा जाता है। वे लकड़ी से फर्नीचर, दरवाजे, खिड़कियाँ और अन्य आवश्यक वस्तुएँ बनाते हैं।
चित्र में दिखाए गए लोगों के काम और उनके औजारों के बारे में जानकारी इस प्रकार है:
| काम | औजार | किस नाम से बुलाया जाता है? |
| सीमेंट तथा बालू मिलाना | कुदाल, फावड़ा | राजमिस्त्री |
| पाईप लगाना | पाईप कटर, रिंच, हथौड़ी | प्लंबर |
| बिजली के तारों तथा उपकरणों को लगाना | तार कटर, पेंचकस, प्लास | बिजली मिस्त्री |
| लकड़ी का काम करना | आरी, हथौड़ी, छेनी, रंदा | बढ़ई |
हाँ, मैं अपने आस-पास ऐसे कई लोगों को जानता हूँ जो निर्माण से जुड़े विभिन्न कामों में लगे हुए हैं। मेरे पड़ोस में एक राजमिस्त्री रहते हैं जो घर बनाने का काम करते हैं, एक बढ़ई हैं जो फर्नीचर बनाते हैं, और एक बिजली मिस्त्री भी हैं जो बिजली का काम संभालते हैं।
मैंने एक राजमिस्त्री से बात की। उन्होंने बताया कि वे सुबह 8 बजे से काम शुरू करते हैं और दिन भर कड़ी मेहनत करते हैं। उन्हें अपने काम के बदले प्रतिदिन मजदूरी मिलती है। जब काम नहीं होता है तो उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ता है। यह काम शारीरिक रूप से काफी थकाने वाला होता है, लेकिन वे इसे लगन से करते हैं।
मैं अपनी अध्यापिका के साथ एक निर्माणाधीन स्थल पर गया। वहाँ एक बहुत बड़ा बाज़ार बन रहा था, जिसे 'मॉल' कहा जा रहा था। यह एक बहुमंजिला इमारत थी जिसमें कई दुकानें और अन्य सुविधाएं होंगी। वहाँ कई मजदूर, राजमिस्त्री और अन्य कारीगर काम कर रहे थे।
Common mistakes
- विभिन्न निर्माण व्यवसायों और उनके औजारों के बीच भ्रमित होना।
- पुरानी और नई निर्माण तकनीकों के बीच अंतर को ठीक से न समझना।
- घरों के निर्माण में प्रयुक्त विभिन्न सामग्रियों के गुणों को याद रखने में कठिनाई।
Revision tips
- अपने दादा-दादी से उनके बचपन के घरों के बारे में पूछें और उनकी तुलना अपने घर से करें।
- विभिन्न निर्माण व्यवसायों और उनके औजारों की एक सूची बनाएं।
- घर बनाने में उपयोग की जाने वाली विभिन्न सामग्रियों के बारे में चर्चा करें और उनके फायदे-नुकसान जानें।
- चित्रों और वास्तविक जीवन के उदाहरणों का उपयोग करके विभिन्न प्रकार के घरों को समझें।
Practice MCQs
Q1. चेतनदास का घर बनाने में मिट्टी का भरपूर इस्तेमाल क्यों किया गया था?
Explanation: मिट्टी की मोटी परतें घर को बाहरी तापमान से बचाती हैं, जिससे वह अंदर से ठंडा या गर्म रहता है।
Q2. पुराने समय में टॉयलेट की सफाई का काम कौन करता था?
Explanation: उस समय टॉयलेट की सफाई को एक गंदा काम माना जाता था और इसके लिए बस्ती के कुछ विशेष लोगों को नियुक्त किया जाता था।
Q3. लकड़ी का काम करने वाले कारीगर को क्या कहते हैं?
Explanation: लकड़ी से संबंधित सभी प्रकार के काम करने वाले कारीगर को बढ़ई कहा जाता है।
Q4. घर बनाने में सीमेंट, बालू और लोहे की छड़ों का उपयोग क्यों किया जाता है?
Explanation: सीमेंट, बालू और लोहे की छड़ें आधुनिक निर्माण में घर की संरचना को मजबूती और स्थायित्व प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं।
Q5. पाईप लगाने का काम करने वाले कारीगर को क्या कहते हैं?
Explanation: प्लंबर वह व्यक्ति होता है जो घरों और इमारतों में पानी की आपूर्ति और निकासी के लिए पाइपलाइन का काम करता है।
Frequently asked questions
कक्षा 4 के पर्यावरण अध्ययन के अध्याय 12 का मुख्य विषय क्या है?
अध्याय 12 "कैसे-कैसे बदले घर" का मुख्य विषय समय के साथ घरों के निर्माण में हुए बदलावों, उपयोग की जाने वाली विभिन्न सामग्रियों और निर्माण से जुड़े व्यवसायों को समझना है।
इस अध्याय के समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान छात्रों को घरों के विकास, निर्माण सामग्री और विभिन्न कारीगरों के काम को सरल और स्पष्ट तरीके से समझने में मदद करते हैं, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी बेहतर होती है।
घर बनाने में किन-किन चीजों का इस्तेमाल होता है?
घर बनाने में मिट्टी, ईंट, सीमेंट, बालू, लकड़ी, फूस, लोहे की छड़ें और प्लास्टिक जैसी विभिन्न सामग्रियों का उपयोग होता है, जो घर के प्रकार और स्थान पर निर्भर करता है।
निर्माण से जुड़े कुछ प्रमुख व्यवसाय कौन से हैं?
निर्माण से जुड़े कुछ प्रमुख व्यवसाय राजमिस्त्री (जो ईंट और सीमेंट का काम करते हैं), बढ़ई (जो लकड़ी का काम करते हैं), प्लंबर (जो पाइपलाइन का काम करते हैं) और बिजली मिस्त्री (जो बिजली के तारों का काम करते हैं) हैं।
पुराने समय के घरों और आज के घरों में क्या मुख्य अंतर हैं?
पुराने समय के घर अक्सर स्थानीय रूप से उपलब्ध सामग्री जैसे मिट्टी, बांस, फूस से बनते थे, जबकि आज के घर सीमेंट, ईंट, लोहे और कंक्रीट जैसी मजबूत और टिकाऊ सामग्री से बनते हैं, और उनमें आधुनिक सुविधाएं होती हैं।
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