कक्षा 12 भूगोल: जल-संसाधन NCERT समाधान
यह खंड कक्षा 12 के भूगोल के छात्रों के लिए 'जल-संसाधन' अध्याय पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें जल को एक अचक्रीय संसाधन के रूप में वर्गीकृत करने, भारत में विभिन्न राज्यों में भौमजल उपयोग की दर का विश्लेषण करने और सिंचाई क्षेत्र में जल के सबसे बड़े हिस्से के उपयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधान जल संसाधनों की कमी के कारणों, जैसे जनसंख्या वृद्धि और प्रदूषण, और पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में उच्च भौमजल विकास के कारकों की भी पड़ताल करते हैं। इसके अतिरिक्त, यह औद्योगिकीकरण के कारण कृषि में जल के घटते हिस्से की संभावना और संदूषित जल के उपयोग से होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं पर चर्चा करता है। ये समाधान छात्रों को जल संसाधनों की उपलब्धता, स्थानिक वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों और भारत में जल प्रबंधन की चुनौतियों की गहन समझ प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अमूल्य हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | भारत लोग और अर्थव्यवस्था (भूगोल) |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. जल-संसाधन |
Chapter summary
कक्षा 12 के भूगोल के लिए 'जल-संसाधन' अध्याय के ये NCERT समाधान जल को एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में समझने पर केंद्रित हैं। इसमें जल के वर्गीकरण, भारत में भौमजल उपयोग के पैटर्न, और विभिन्न क्षेत्रों, विशेषकर कृषि में जल की खपत का विश्लेषण शामिल है। समाधान जल की कमी के कारणों और पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु जैसे राज्यों में उच्च विकास के कारकों की भी व्याख्या करते हैं। छात्रों को संदूषित जल के स्वास्थ्य प्रभावों और भविष्य में जल उपयोग के रुझानों की भी जानकारी मिलती है।
Learning outcomes
- जल को एक अचक्रीय संसाधन के रूप में वर्गीकृत करना सीखें।
- भारत में भौमजल उपयोग के स्थानिक पैटर्न का विश्लेषण करें।
- विभिन्न क्षेत्रों में जल के उपयोग के महत्व को समझें।
- भारत में जल संसाधनों की कमी के कारणों की पहचान करें।
- संदूषित जल के उपयोग से जुड़े स्वास्थ्य जोखिमों का वर्णन करें।
- जल संसाधनों के स्थानिक वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों की व्याख्या करें।
Topics covered
Paper topics
- जल संसाधन का वर्गीकरण
- भौमजल उपयोग
- जल का क्षेत्रीय वितरण
- जल की कमी के कारण
- कृषि में जल का उपयोग
- औद्योगिकीकरण और जल
- संदूषित जल के स्वास्थ्य प्रभाव
- नदी घाटियों में जल उपलब्धता
- भारत में जल संसाधन
Important topics
- जल संसाधनों की कमी के कारण
- भौमजल विकास के कारक
- विभिन्न क्षेत्रों में जल का उपयोग
- जल संसाधनों का स्थानिक वितरण
- संदूषित जल के प्रभाव
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Questions and Solutions
प्रश्न 1 (i)
- (क) अजैव संसाधन
- (ख) अनवीकरणीय संसाधन
- (ग) जैव संसाधन
- (घ) अचक्रीय संसाधन
प्रश्न 1 (ii)
- (क) तमिलनाडु
- (ख) कर्नाटक
- (ग) आंध्र प्रदेश
- (घ) केरल
प्रश्न 1 (iii)
- (क) सिंचाई
- (ख) उद्योग
- (ग) घरेलू उपयोग
- (घ) इनमें से कोई नहीं
प्रश्न 2 (i)
प्रश्न 2 (ii)
प्रश्न 2 (iii)
प्रश्न 2 (iv)
प्रश्न 3 (i)
जल संसाधनों के स्थानिक वितरण के लिए मुख्य कारक हैं:
- वर्षा की मात्रा और वितरण: भारत में वर्षा में अत्यधिक सामयिक और स्थानिक भिन्नता पाई जाती है। अधिकांश वर्षा मानसूनी मौसम तक सीमित है। गंगा, ब्रह्मपुत्र और बराक नदी घाटियों में, जो देश के एक-तिहाई क्षेत्रफल को कवर करती हैं, कुल धरातलीय जल संसाधनों का 60% पाया जाता है।
- नदी घाटियों का आकार और वर्षा: नदियों में जल प्रवाह उनके जल ग्रहण क्षेत्र के आकार और उस क्षेत्र में होने वाली वर्षा पर निर्भर करता है। दक्षिण की नदियाँ जैसे गोदावरी, कृष्णा और कावेरी में जल प्रवाह का अधिकांश भाग उपयोग में लाया जा रहा है, जबकि गंगा और ब्रह्मपुत्र घाटियों में यह अभी भी संभव नहीं हो पाया है।
भारत में लगभग 10,360 नदियाँ और उनकी सहायक नदियाँ हैं, जो जल संसाधनों के वितरण को प्रभावित करती हैं।
Common mistakes
- जल को नवीकरणीय संसाधन मानने की गलती।
- भौमजल विकास के कारकों को केवल कृषि तक सीमित समझना।
- जल की कमी के कारणों को केवल जनसंख्या वृद्धि से जोड़ना, प्रदूषण की उपेक्षा करना।
- औद्योगिकीकरण के प्रभाव को जल उपयोग पर कम आंकना।
Revision tips
- प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए मुख्य कारकों को सूचीबद्ध करें।
- भारत के मानचित्र पर उच्च भौमजल विकास वाले राज्यों को चिह्नित करें।
- जल की कमी और उसके समाधानों पर एक संक्षिप्त नोट तैयार करें।
- कृषि, उद्योग और घरेलू उपयोग में जल के प्रतिशत वितरण को याद करें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से जल किस प्रकार का संसाधन है?
Explanation: जल एक अचक्रीय संसाधन है क्योंकि यह पृथ्वी पर सीमित मात्रा में उपलब्ध है और इसका पुनर्चक्रण एक लंबी भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जो इसे अनवीकरणीय के समान बनाती है।
Q2. किस दक्षिण भारतीय राज्य में भौमजल उपयोग, कुल भौमजल संभाव्य से अधिक है?
Explanation: तमिलनाडु में भौमजल का उपयोग इसके कुल संभाव्य से अधिक है, जो अत्यधिक दोहन का संकेत देता है।
Q3. भारत में कुल प्रयुक्त जल का सबसे बड़ा हिस्सा किस सेक्टर में उपयोग होता है?
Explanation: भारत में कुल जल का अधिकांश भाग कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए उपयोग किया जाता है।
Q4. भारत में जल संसाधनों की कमी का एक प्रमुख कारण क्या है?
Explanation: बढ़ती जनसंख्या के कारण प्रति व्यक्ति जल की उपलब्धता कम हो रही है, और औद्योगिक व घरेलू प्रदूषण उपलब्ध जल को अनुपयोगी बना रहा है।
Q5. पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु में उच्च भौमजल विकास के लिए कौन-सा कारक महत्वपूर्ण है?
Explanation: इन राज्यों में हरित क्रांति के कारण गहन कृषि और फसलों की सिंचाई की आवश्यकता ने भौमजल के अत्यधिक उपयोग को बढ़ावा दिया है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 भूगोल में जल-संसाधन अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अध्याय छात्रों को भारत में जल की उपलब्धता, उपयोग, कमी के कारणों और विभिन्न क्षेत्रों पर इसके प्रभाव को समझने में मदद करता है, जो परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है।
जल को अचक्रीय संसाधन क्यों कहा जाता है?
जल को अचक्रीय संसाधन इसलिए कहा जाता है क्योंकि पृथ्वी पर इसकी कुल मात्रा सीमित है और इसका प्राकृतिक पुनर्चक्रण एक बहुत लंबी भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है, जिससे यह अनवीकरणीय संसाधनों की श्रेणी में आता है।
भारत में जल की कमी के मुख्य कारण क्या हैं?
भारत में जल की कमी के मुख्य कारण बढ़ती जनसंख्या, जल का अत्यधिक प्रदूषण (औद्योगिक, कृषि और घरेलू), और वर्षा के स्थानिक व सामयिक वितरण में असमानता हैं।
किन राज्यों में भौमजल का उपयोग सबसे अधिक है और क्यों?
पंजाब, हरियाणा और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भौमजल का उपयोग सर्वाधिक है। इसका मुख्य कारण हरित क्रांति के बाद इन क्षेत्रों में गहन कृषि और सिंचाई की उच्च आवश्यकता है।
संदूषित जल पीने से कौन सी बीमारियाँ हो सकती हैं?
संदूषित जल के सेवन से अतिसार, पीलिया, हैजा, रोहा और आंतों के कृमि जैसी जल-जनित बीमारियाँ हो सकती हैं।
क्या भविष्य में कृषि में जल का उपयोग कम हो जाएगा?
हाँ, औद्योगिकीकरण और शहरीकरण बढ़ने के साथ-साथ भूमि का अन्य आर्थिक गतिविधियों में उपयोग बढ़ने की संभावना है, जिससे भविष्य में कृषि की अपेक्षा अन्य क्षेत्रों में जल का उपयोग बढ़ने की उम्मीद है।
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