कक्षा 12 भूगोल: भू-संसाधन तथा कृषि के NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 12 भूगोल के अध्याय 'भू-संसाधन तथा कृषि' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें भूमि के विभिन्न उपयोगों, जैसे परती भूमि, निवल बोया क्षेत्र और कृषि योग्य व्यर्थ भूमि के बीच अंतर को समझाया गया है। समाधान यह भी बताते हैं कि वनों का अनुपात क्यों बढ़ रहा है और सिंचित क्षेत्रों में मृदा लवणता जैसी भूमि निम्नीकरण की समस्याओं पर प्रकाश डालते हैं। इसके अतिरिक्त, शुष्क और आर्द्र कृषि के बीच के अंतर, गहन कृषि की आवश्यकता और गेहूं व चावल की उच्च उत्पादकता वाली किस्मों के विकास पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने और याद रखने में मदद करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 12
Subjectभारत लोग और अर्थव्यवस्था (भूगोल)
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. भू-संसाधन तथा कृषि

Chapter summary

यह अध्याय भू-संसाधन और कृषि के मूलभूत सिद्धांतों पर केंद्रित है। इसमें भूमि उपयोग के विभिन्न वर्गीकरणों, जैसे परती भूमि, निवल बोया क्षेत्र और कृषि योग्य व्यर्थ भूमि के बीच अंतर स्पष्ट किया गया है। समाधान भूमि निम्नीकरण के कारणों, विशेषकर सिंचित क्षेत्रों में मृदा लवणता, और वनों के अनुपात में वृद्धि के कारणों की भी व्याख्या करते हैं। शुष्क और आर्द्र कृषि के बीच तुलना और भारत जैसे देश में गहन कृषि की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला गया है।

Learning outcomes

  • भूमि उपयोग के विभिन्न संवर्गों को पहचानना और उनमें अंतर करना।
  • भूमि निम्नीकरण के कारणों और प्रकारों को समझना।
  • शुष्क और आर्द्र कृषि के बीच मुख्य अंतरों को स्पष्ट करना।
  • गहन कृषि नीति की आवश्यकता को समझना।
  • कृषि में हरित क्रांति से संबंधित महत्वपूर्ण विकासों को जानना।

Topics covered

Paper topics

  • भू-संसाधन
  • कृषि
  • भूमि उपयोग वर्गीकरण
  • परती भूमि
  • निवल बोया क्षेत्र
  • सकल बोया क्षेत्र
  • कृषि योग्य व्यर्थ भूमि
  • भूमि निम्नीकरण
  • मृदा लवणता
  • शुष्क कृषि
  • आर्द्र कृषि
  • गहन कृषि

Important topics

  • भूमि उपयोग के विभिन्न संवर्ग
  • भूमि निम्नीकरण के कारण और प्रकार
  • शुष्क बनाम आर्द्र कृषि
  • गहन कृषि की आवश्यकता
  • कृषि उत्पादकता बढ़ाने की रणनीतियाँ

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Questions and Solutions

प्रश्न 1 (i)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए। निम्न में से कौन-सा भू-उपयोग संवर्ग नहीं है?
  • (क) परती भूमि
  • (ख) सीमांत भूमि
  • (ग) निवल बोया क्षेत्र
  • (घ) कृषि योग्य व्यर्थ भूमि
Solution: सही उत्तर विकल्प (ख) सीमांत भूमि है। भू-उपयोग संवर्गों में सामान्यतः परती भूमि (जो खेती के लिए छोड़ी गई है), निवल बोया क्षेत्र (जिस पर वास्तव में फसलें उगाई जाती हैं), और कृषि योग्य व्यर्थ भूमि (जो लंबे समय से परती है लेकिन सुधारी जा सकती है) शामिल होते हैं। सीमांत भूमि एक भू-उपयोग संवर्ग के बजाय भूमि की गुणवत्ता या उत्पादकता का वर्णन करने वाला एक शब्द है।

प्रश्न 1 (ii)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए। पिछले 40 वर्षों में वनों का अनुपात बढ़ने का निम्न में से कौन-सा कारण है?
  • (क) वनीकरण के विस्तृत व सक्षम प्रयास
  • (ख) सामुदायिक वनों के अधीन क्षेत्र में वृद्धि
  • (ग) वन बढ़ोतरी हेतु निर्धारित अधिसूचित क्षेत्र में वृद्धि
  • (घ) वन क्षेत्र प्रबंधन में लोगों की बेहतर भागीदारी
Solution: सही उत्तर विकल्प (क) वनीकरण के विस्तृत व सक्षम प्रयास है। सरकार और विभिन्न संगठनों द्वारा वनों के संरक्षण और विस्तार के लिए किए गए सचेत और प्रभावी प्रयासों के कारण पिछले कुछ दशकों में वनों का अनुपात बढ़ा है। अन्य विकल्प भी योगदान दे सकते हैं, लेकिन वनीकरण के प्रत्यक्ष प्रयास सबसे प्रमुख कारण हैं।

प्रश्न 1 (iii)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए। निम्न में से कौन-सा सिंचित क्षेत्रों में भू-निम्नीकरण का मुख्य प्रकार है?
  • (क) अवनालिका अपरदन
  • (ख) वायु अपरदन
  • (ग) मृदा लवणता
  • (घ) भूमि पर सिल्ट का जमाव
Solution: सही उत्तर विकल्प (ग) मृदा लवणता है। सिंचित क्षेत्रों में, विशेष रूप से जहाँ जल निकासी की उचित व्यवस्था नहीं होती, सिंचाई के पानी में घुले लवण भूमि की सतह पर जमा हो जाते हैं। यह मृदा लवणता को बढ़ाता है, जिससे भूमि की उर्वरता कम हो जाती है और यह भू-निम्नीकरण का एक प्रमुख कारण बनता है।

प्रश्न 1 (iv)

नीचे दिए गए चार विकल्पों में से सही उत्तर चुनिए। शुष्क कृषि में निम्न में से कौन-सी फसल नहीं बोई जाती?
  • (क) रागी
  • (ख) ज्वार
  • (ग) मूंगफली
  • (घ) गन्ना
Solution: सही उत्तर विकल्प (घ) गन्ना है। शुष्क कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ वर्षा कम होती है और पानी की उपलब्धता सीमित होती है। रागी, ज्वार और मूंगफली जैसी फसलें कम पानी में उगने वाली या सूखा-सहिष्णु फसलें हैं। गन्ना एक नकदी फसल है जिसे अधिक मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, इसलिए यह सामान्यतः आर्द्र या सिंचित क्षेत्रों में उगाई जाती है, न कि शुष्क कृषि में।

प्रश्न 1 (v)

निम्न में से कौन से देशों में गेहूं व चावल की अधिक उत्पादकता की किस्में विकसित की गई थीं?
  • (क) जापान तथा आस्ट्रेलिया
  • (ख) संयुक्त राज्य अमेरिका तथा जापान
  • (ग) मैक्सिको तथा फिलीपींस
  • (घ) मैक्सिको तथा सिंगापुर
Solution: सही उत्तर विकल्प (ग) मैक्सिको तथा फिलीपींस है। मैक्सिको और फिलीपींस वे देश हैं जहाँ हरित क्रांति के दौरान गेहूं और चावल की उच्च उत्पादकता वाली किस्मों को विकसित करने में महत्वपूर्ण अनुसंधान हुए थे। इन किस्मों ने विश्व स्तर पर खाद्य उत्पादन बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

प्रश्न 2 (i)

बंजर भूमि तथा कृषियोग्य व्यर्थ भूमि में अंतर स्पष्ट करो।
Solution: बंजर भूमि और कृषियोग्य व्यर्थ भूमि के बीच मुख्य अंतर उनकी वर्तमान उपयोगिता और सुधार की संभावनाओं में है:
  1. बंजर भूमि: यह वह भूमि है जो वर्तमान में उपलब्ध प्रौद्योगिकी और संसाधनों की मदद से कृषि योग्य नहीं बनाई जा सकती। इसमें प्राकृतिक रूप से अनुपयोगी क्षेत्र जैसे मरुस्थल, खड़ी चट्टानें, दलदली भूमि, या अत्यधिक क्षारीय/अम्लीय भूमि शामिल हो सकती है।
  2. कृषियोग्य व्यर्थ भूमि: यह वह भूमि है जो पिछले पाँच या उससे अधिक वर्षों से खेती के अंतर्गत नहीं है और इसे भूमि सुधार तकनीकों (जैसे समतलीकरण, सिंचाई व्यवस्था, या मृदा उपचार) द्वारा पुनः कृषि योग्य बनाया जा सकता है। यह भूमि परती या अनुपयोगी पड़ी हो सकती है।
संक्षेप में, बंजर भूमि को सुधारना अत्यंत कठिन या असंभव है, जबकि कृषियोग्य व्यर्थ भूमि को प्रयास द्वारा खेती के लायक बनाया जा सकता है।

प्रश्न 2 (ii)

निवल बोया गया क्षेत्र तथा सकल बोया गया क्षेत्र में अंतर बताएँ।
Solution: निवल बोया गया क्षेत्र और सकल बोया गया क्षेत्र कृषि भूमि के मापन की दो अलग-अलग विधियाँ हैं:
  1. निवल बोया गया क्षेत्र (Net Sown Area): यह वह कुल भौगोलिक क्षेत्र है जिस पर एक वर्ष में कम से कम एक बार फसलें उगाई और काटी जाती हैं। यह शुद्ध कृषि भूमि का प्रतिनिधित्व करता है।
  2. सकल बोया गया क्षेत्र (Gross Sown Area): यह कुल बोया गया क्षेत्र है, जिसमें एक ही भूमि पर एक वर्ष में एक से अधिक बार उगाई गई फसलों के क्षेत्रफल को भी गिना जाता है। यदि एक ही खेत में एक वर्ष में दो फसलें उगाई जाती हैं, तो उस क्षेत्र को दो बार गिना जाएगा।
इसलिए, सकल बोया गया क्षेत्र हमेशा निवल बोए गए क्षेत्र से अधिक या उसके बराबर होता है। यह कृषि के सघनता के स्तर को दर्शाता है।

प्रश्न 2 (iii)

भारत जैसे देश में गहन कृषि नीति अपनाने की आवश्यकता क्यों है?
Solution: भारत जैसे सघन जनसंख्या वाले देश में गहन कृषि नीति अपनाने की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है:
  1. सीमित भूमि उपलब्धता: भारत में प्रति व्यक्ति कृषि भूमि का क्षेत्रफल लगातार घट रहा है। निवल बोए गए क्षेत्र में वृद्धि की संभावनाएँ बहुत सीमित हैं।
  2. खाद्य सुरक्षा की मांग: बढ़ती जनसंख्या की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा कृषि भूमि से अधिक उत्पादन प्राप्त करना आवश्यक है।
  3. उत्पादकता में वृद्धि: गहन कृषि, जिसमें भूमि बचत प्रौद्योगिकी का उपयोग किया जाता है, प्रति इकाई भूमि में फसल उत्पादकता को बढ़ाती है।
  4. सघन भू-उपयोग: यह नीति एक वर्ष में एक ही भूमि पर अधिकतम संभव फसलें उगाने पर जोर देती है, जिससे भूमि का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित होता है।
अतः, सीमित भूमि पर अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए गहन कृषि नीति अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रश्न 2 (iv)

शुष्क कृषि तथा आर्द्र कृषि में क्या अंतर है?
Solution: शुष्क कृषि और आर्द्र कृषि वर्षा की मात्रा और फसल चयन के आधार पर भिन्न होती हैं:
  1. शुष्क कृषि (Dry Farming): यह उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ वार्षिक वर्षा 75 सेंटीमीटर से कम होती है। इन क्षेत्रों में शुष्कता को सहने वाली फसलें जैसे रागी, बाजरा, मूंग, चना, ग्वार आदि उगाई जाती हैं। इसका मुख्य उद्देश्य कम पानी में अधिकतम उपज प्राप्त करना होता है।
  2. आर्द्र कृषि (Wet Farming): यह उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ वर्षा पर्याप्त मात्रा में होती है या सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होती है। इन क्षेत्रों में उन फसलों को उगाया जाता है जिन्हें अधिक पानी की आवश्यकता होती है, जैसे चावल, जूट, गन्ना, तथा विभिन्न प्रकार की सब्जियाँ और फल। इन क्षेत्रों में कभी-कभी अधिक वर्षा के कारण बाढ़ और मृदा अपरदन जैसी समस्याएँ भी उत्पन्न हो सकती हैं।
मुख्य अंतर वर्षा की मात्रा और उसके अनुसार चुनी जाने वाली फसलों में है।

Common mistakes

  • बंजर भूमि और कृषि योग्य व्यर्थ भूमि के बीच अंतर को गलत समझना।
  • निवल बोया गया क्षेत्र और सकल बोया गया क्षेत्र के बीच के अंतर को भ्रमित करना।
  • शुष्क और आर्द्र कृषि के लिए उपयुक्त फसलों को गलत पहचानना।
  • भूमि निम्नीकरण के कारणों को सतही तौर पर समझना।

Revision tips

  • भूमि उपयोग के विभिन्न प्रकारों को सारणीबद्ध करें और उनके बीच के अंतर को याद करें।
  • भूमि निम्नीकरण के कारणों और समाधानों पर विशेष ध्यान दें।
  • शुष्क और आर्द्र कृषि की विशेषताओं और उनमें उगाई जाने वाली फसलों की सूची बनाएं।
  • गहन कृषि की आवश्यकता को भारत के संदर्भ में समझें।

Practice MCQs

Q1. निम्नलिखित में से कौन-सा भू-उपयोग संवर्ग नहीं है?

Q2. सिंचित क्षेत्रों में भू-निम्नीकरण का मुख्य कारण क्या है?

Q3. शुष्क कृषि में सामान्यतः कौन-सी फसल नहीं उगाई जाती है?

Q4. गेहूं और चावल की अधिक उत्पादकता वाली किस्में किन देशों में विकसित की गईं?

Q5. भारत में गहन कृषि नीति अपनाने की मुख्य आवश्यकता क्यों है?

Frequently asked questions

भू-संसाधन और कृषि अध्याय में मुख्य रूप से किन विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में भूमि के विभिन्न उपयोगों, जैसे परती भूमि, निवल बोया क्षेत्र और कृषि योग्य व्यर्थ भूमि के बीच अंतर, भूमि निम्नीकरण के कारण (जैसे मृदा लवणता), शुष्क और आर्द्र कृषि के बीच भिन्नता, और भारत जैसे देश में गहन कृषि की आवश्यकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।

बंजर भूमि और कृषि योग्य व्यर्थ भूमि में क्या अंतर है?

बंजर भूमि वह है जिसे वर्तमान तकनीक से कृषि योग्य नहीं बनाया जा सकता (जैसे मरुस्थल, पहाड़ी भूभाग)। कृषि योग्य व्यर्थ भूमि वह है जिसे भूमि उद्धार तकनीकों से कृषि योग्य बनाया जा सकता है और जो पिछले पाँच वर्षों या उससे अधिक समय से खाली पड़ी है।

भारत में गहन कृषि नीति क्यों आवश्यक है?

भारत में निवल बोए गए क्षेत्र में वृद्धि की संभावनाएँ सीमित हैं। इसलिए, प्रति इकाई भूमि में फसलों की उत्पादकता बढ़ाने और एक वर्ष में अधिकतम फसलें उगाने के लिए गहन कृषि नीति अपनाना आवश्यक है।

शुष्क कृषि और आर्द्र कृषि में क्या मुख्य अंतर हैं?

शुष्क कृषि उन क्षेत्रों में की जाती है जहाँ वार्षिक वर्षा 75 सेमी से कम होती है और इसमें रागी, बाजरा जैसी सूखा-सहिष्णु फसलें उगाई जाती हैं। आर्द्र कृषि उन क्षेत्रों में होती है जहाँ अधिक वर्षा होती है और चावल, गन्ना जैसी अधिक पानी वाली फसलें उगाई जाती हैं।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को स्पष्ट और विस्तृत तरीके से समझाते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलती है।

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