कक्षा 12 संस्कृत पाठ 8 आश्चर्यमयं विज्ञानजगत् के लिए NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 संस्कृत के विद्यार्थियों के लिए 'आश्चर्यमयं विज्ञानजगत्' नामक पाठ पर आधारित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें पाठ के विभिन्न अभ्यासों के प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर शामिल हैं, जो विद्यार्थियों को वैज्ञानिक चमत्कारों और संस्कृत साहित्य में उनके उल्लेख को समझने में मदद करते हैं। समाधानों में शब्दावली, व्याकरणिक संरचनाओं (जैसे क्तान्त विशेषण, कर्तृ-क्रिया पद) और शब्द निर्माण (प्रकृति-प्रत्यय) पर ध्यान केंद्रित किया गया है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर सरल भाषा में समझाया गया है, जिससे जटिल अवधारणाओं को समझना आसान हो जाता है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | संस्कृत |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 8. आश्चर्यमयं विज्ञानजगत् |
Chapter summary
यह NCERT समाधान कक्षा 12 संस्कृत के पाठ 8 'आश्चर्यमयं विज्ञानजगत्' पर केंद्रित है। इसमें पाठ में दिए गए अभ्यासों के प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो शब्दावली के वर्णानुक्रम में व्यवस्था, क्तान्त विशेषणों से वाक्यों को पूरा करना, कर्तृ और क्रिया पदों का सही मेल, और प्रकृति-प्रत्यय से नए शब्दों का निर्माण जैसे व्याकरणिक पहलुओं पर जोर देते हैं। ये समाधान विद्यार्थियों को पाठ की सामग्री को बेहतर ढंग से समझने और संस्कृत भाषा के व्यावहारिक अनुप्रयोगों को सीखने में सहायता करते हैं।
Learning outcomes
- दिए गए शब्दों को संस्कृत वर्णमाला के अनुसार व्यवस्थित करना सीखना।
- वाक्यों को पूर्ण करने के लिए उपयुक्त क्तान्त विशेषणों का प्रयोग समझना।
- पाठ के आधार पर कर्तृ और क्रिया पदों का सही मेल करना सीखना।
- दिए गए प्रकृति और प्रत्यय से नए शब्दों का निर्माण करने का अभ्यास करना।
- वैज्ञानिक शब्दावली और संस्कृत भाषा के बीच संबंध को समझना।
Topics covered
Paper topics
- संस्कृत शब्दावली
- वर्णमाला क्रम (अकारादि क्रम)
- क्तान्त विशेषण
- वाक्य पूर्ति
- कर्तृ-क्रिया अन्वय
- प्रकृति-प्रत्यय
- शब्द निर्माण
- सुश्रुत संहिता
- शल्यक्रिया
- वैज्ञानिक आविष्कार
Important topics
- शब्दों का अकारादि क्रम में व्यवस्थापन
- वाक्यों में क्तान्त विशेषणों का प्रयोग
- कर्तृ और क्रिया पदों का सही मेल
- प्रकृति और प्रत्यय से नए शब्दों का निर्माण
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
दिए गए शब्दों को संस्कृत वर्णमाला के अनुसार (अकारादि क्रम में) व्यवस्थित करने के लिए, हमें प्रत्येक शब्द के पहले अक्षर और उसके बाद आने वाले अक्षरों के क्रम पर ध्यान देना होगा। संस्कृत वर्णमाला का क्रम इस प्रकार है: स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः), फिर व्यंजन (क वर्ग, च वर्ग, ट वर्ग, त वर्ग, प वर्ग), और अंत में अन्तःस्थ (य, र, ल, व) और ऊष्म (श, ष, स, ह)।
- अदृश्यताम् (यह 'अ' स्वर से शुरू होता है, जो वर्णमाला में सबसे पहले आता है। 'अं' से शुरू होने वाले शब्द भी 'अ' के बाद आते हैं, लेकिन यहाँ 'अं' से कोई शब्द नहीं है।)
- जलस्यान्तर्बहिः (यह 'ज' से शुरू होता है, जो 'च' वर्ग के बाद आता है।)
- त्वन्तरिक्षे (यह 'त' से शुरू होता है, जो 'ट' वर्ग के बाद आता है।)
- दक्षिण पाश्वे (यह भी 'द' से शुरू होता है, जो 'त' वर्ग में आता है। 'त' वर्ग के अक्षरों में, 'थ' के बाद 'द' आता है, इसलिए यह 'त्वन्तरिक्षे' के बाद आएगा यदि दोनों 'त' वर्ग से होते, पर यहाँ 'त्वन्तरिक्षे' 'त' से और 'दक्षिण पाश्वे' 'द' से है, और 'त' पहले आता है। हालाँकि, दिए गए उत्तर में इन्हें एक साथ रखा गया है, जो सामान्यतः 'त' वर्ग के अंतर्गत माना जाता है।)
- पुरुषद्वये (यह 'प' वर्ग से शुरू होता है।)
- भागत्रयम् (यह भी 'प' वर्ग से शुरू होता है। 'प' वर्ग में 'प' पहले आता है, फिर 'फ', 'ब', 'भ', 'म'। 'पुरुषद्वये' में 'प' है और 'भागत्रयम्' में 'भ' है, इसलिए 'पुरुषद्वये' पहले आएगा।)
- यथाक्रमम् (यह 'य' से शुरू होता है, जो अन्तःस्थ वर्ण है।)
- लाभप्रदः (यह 'ल' से शुरू होता है, जो अन्तःस्थ वर्ण है। 'य' के बाद 'र', 'ल', 'व' आते हैं।)
- विचित्रस्य (यह 'व' से शुरू होता है, जो अन्तःस्थ वर्ण है।)
- विज्ञप्तिः (यह भी 'व' से शुरू होता है। 'विचित्रस्य' और 'विज्ञप्तिः' दोनों 'व' से हैं, लेकिन यहाँ क्रम में 'विज्ञप्तिः' पहले दिया गया है, जो संभवतः शब्द के आंतरिक अक्षरों के आधार पर है या मूल स्रोत में यही क्रम है।)
- वैज्ञानिकैः (यह भी 'व' से शुरू होता है।)
- सञ्चारः (यह 'स' से शुरू होता है, जो ऊष्म वर्ण है।)
- सुश्रुतः (यह भी 'स' से शुरू होता है। 'सञ्चारः' और 'सुश्रुतः' दोनों 'स' से हैं। यहाँ 'सञ्चारः' पहले है।)
अतः, अकारादि क्रम में व्यवस्थित शब्द इस प्रकार हैं: अदृश्यताम्, जलस्यान्तर्बहिः, त्वन्तरिक्षे, दक्षिण पाश्वे, पुरुषद्वये, भागत्रयम्, यथाक्रमम्, लाभप्रदः, विचित्रस्य, विज्ञप्तिः, वैज्ञानिकैः, सञ्चारः, सुश्रुतः।
प्रश्न 2
इन वाक्यों को पूर्ण करने के लिए हमें उपयुक्त क्तान्त विशेषणों का चयन करना होगा जो वाक्य के अर्थ को स्पष्ट करें। क्तान्त विशेषण वे शब्द होते हैं जो क्रिया के भूतकाल के रूप से बने होते हैं और संज्ञा की विशेषता बताते हैं।
- बहुप्रसिद्धा खलु भगवतः सुश्रुतस्य शल्यक्रिया। (यहाँ 'बहुप्रसिद्धा' विशेषण 'शल्यक्रिया' (स्त्रीलिंग) की विशेषता बता रहा है, जिसका अर्थ है 'बहुत प्रसिद्ध'।)
- अतप्तं लोहं लोहेन सन्धत्ते। (यहाँ 'अतप्तं' विशेषण 'लोहं' (नपुंसक लिंग) की विशेषता बता रहा है, जिसका अर्थ है 'जो तपा हुआ न हो'। वाक्य का अर्थ है कि बिना तपा हुआ लोहा लोहे से नहीं जुड़ता।)
- अशुद्धं भवेत् तर्हि चतुर्गुणेन सीसेन शोधयितुं शक्यते। (यहाँ 'अशुद्धं' विशेषण 'स्वर्णम्' (नपुंसक लिंग) की विशेषता बता रहा है, जिसका अर्थ है 'यदि सोना अशुद्ध हो'।)
- उपलब्धानां विचित्रशिल्पकलाकृतीनां परिचयं प्रदास्यति। (यहाँ 'उपलब्धानां' विशेषण 'विचित्रशिल्पकलाकृतीनां' (बहुवचन, नपुंसक लिंग) की विशेषता बता रहा है, जिसका अर्थ है 'उपलब्ध' या 'पाई जाने वाली'।)
- स्थिताः ध्वनिवाहकाः स्तम्भाः सन्ति। (यहाँ 'स्थिताः' विशेषण 'स्तम्भाः' (पुल्लिंग, बहुवचन) की विशेषता बता रहा है, जिसका अर्थ है 'स्थित' या 'मौजूद'।)
इस प्रकार, उपयुक्त क्तान्त विशेषणों से वाक्य पूर्ण होते हैं।
प्रश्न 3
पाठ के आधार पर, हमें रिक्त स्थानों में उपयुक्त कर्तृ पद (कर्ता) और क्रिया पद (क्रिया) का मेल करना है ताकि वाक्य व्याकरणिक रूप से सही और अर्थपूर्ण बनें।
- त्रिपुरविमानस्य प्रथमः भागः पृथिव्याः तले सञ्चरति। (कर्ता: भागः, क्रिया: सञ्चरति)
- यदि वयम् उत्तमशल्यचिकित्सकाः भवितुम् इच्छामः, तर्हि सुश्रुतसंहिता अवश्यमेव पठनीया। (यहाँ कर्ता और क्रिया का एक समूह है जो एक शर्त बना रहा है।)
- सुश्रुतः प्रथमः त्वक्प्रत्यारोपकः आसीत्। (कर्ता: सुश्रुतः, क्रिया: आसीत्)
- भूमेः अधः कुत्र कुत्र जलम् भवति इति मिहिरः सूचनां प्रदास्यति। (कर्ता: जलम्, क्रिया: भवति; और मिहिरः सूचनां प्रदास्यति - कर्ता: मिहिरः, क्रिया: प्रदास्यति)
- तर्हि वृक्षस्य दक्षिणदिशि पुरुषद्वये स्वाद्सलिलम् भविष्यति। (कर्ता: सलिलम्, क्रिया: भविष्यति)
- वयम् वर्तमानकाले संगणकस्य प्रयोगं कुर्मः। (कर्ता: वयम्, क्रिया: कुर्मः)
- इदानीम् एषा गोष्ठी समाप्तिं याति। (कर्ता: गोष्ठी, क्रिया: याति)
इस प्रकार, पाठ के संदर्भ के अनुसार कर्तृ और क्रिया पदों का सही मेल किया गया है।
प्रश्न 4
दिए गए प्रकृति (धातु) और प्रत्यय को जोड़कर नए शब्दों की रचना करनी है। यहाँ 'यत्' प्रत्यय का प्रयोग किया गया है, जो सामान्यतः धातु के साथ जुड़कर विशेषण या भाववाचक संज्ञा बनाता है। 'यत्' प्रत्यय के लगने पर धातु के 'इ', 'ई', 'उ', 'ऊ', 'ऋ' को 'य' में परिवर्तित किया जाता है और धातु को गुण (जैसे 'इ' को 'ए', 'उ' को 'ओ') होता है, तथा अंत में 'य' जुड़ता है।
- छिद् + यत् = छेद्य
यहाँ 'छिद्' धातु है। 'इ' को 'ए' गुण हुआ और 'यत्' प्रत्यय जुड़कर 'छेद्य' बना। इसका अर्थ है 'काटने योग्य'।
- भिद् + यत् = भेद्य
यहाँ 'भिद्' धातु है। 'इ' को 'ए' गुण हुआ और 'यत्' प्रत्यय जुड़कर 'भेद्य' बना। इसका अर्थ है 'भेदने योग्य' या 'भेदा जा सकने वाला'।
- सिव् + यत् = सेव्य
यहाँ 'सिव्' धातु है। 'इ' को 'ए' गुण हुआ और 'यत्' प्रत्यय जुड़कर 'सेव्य' बना। इसका अर्थ है 'सेवा करने योग्य'।
- लिख् + यत् = लेख्य
यहाँ 'लिख्' धातु है। 'इ' को 'ए' गुण हुआ और 'यत्' प्रत्यय जुड़कर 'लेख्य' बना। इसका अर्थ है 'लिखने योग्य'।
इस प्रकार, दिए गए प्रकृति और प्रत्यय से नए शब्द 'छेद्य', 'भेद्य', 'सेव्य', और 'लेख्य' बनते हैं।
Common mistakes
- शब्दों को वर्णानुक्रम में व्यवस्थित करते समय संस्कृत वर्णमाला के क्रम को गलत समझना।
- वाक्यों में क्तान्त विशेषणों का सही रूप या अर्थ न समझ पाना।
- कर्तृ पद और क्रिया पद के बीच लिंग, वचन और पुरुष के अनुसार सामंजस्य बिठाने में त्रुटि करना।
- प्रकृति और प्रत्यय को सही ढंग से जोड़कर नया शब्द बनाने में कठिनाई।
Revision tips
- प्रत्येक अभ्यास के प्रश्नों को हल करने के बाद, पाठ में संबंधित सामग्री को पुनः पढ़ें।
- शब्दों को वर्णानुक्रम में व्यवस्थित करने के नियम को अच्छी तरह समझें और अभ्यास करें।
- वाक्य निर्माण में क्तान्त विशेषणों के प्रयोग पर विशेष ध्यान दें।
- कर्तृ-क्रिया अन्वय के नियमों को याद करें और वाक्यों में उनका पालन करें।
- प्रकृति-प्रत्यय से शब्द निर्माण का अभ्यास करें, यह व्याकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
Practice MCQs
Q1. दिए गए शब्दों को संस्कृत वर्णमाला के अनुसार व्यवस्थित करने का सही क्रम क्या है?
Explanation: संस्कृत वर्णमाला के अनुसार 'अ' से शुरू होने वाले शब्द पहले आते हैं, उसके बाद 'ज', 'त', 'द' आदि। 'अदृश्यताम्' 'अ' से शुरू होता है, इसलिए यह पहले आएगा।
Q2. वाक्य 'न..... लोहं लोहेन सन्धत्ते।' को पूर्ण करने के लिए सबसे उपयुक्त क्तान्त विशेषण कौन सा है?
Explanation: वाक्य का अर्थ है कि 'लोहा, जो तपा हुआ नहीं है, लोहे से नहीं जुड़ता'। इसलिए 'अतप्तं' (न तपा हुआ) सबसे उपयुक्त है।
Q3. यदि स्वर्णम्...... भवेत् तर्हि चतुर्गुणेन सीसेन शोधयितुं शक्यते। इस वाक्य में रिक्त स्थान के लिए सही शब्द क्या है?
Explanation: वाक्य का अर्थ है कि 'यदि सोना अशुद्ध हो, तो उसे चार गुने सीसे से शुद्ध किया जा सकता है'। इसलिए 'अशुद्धं' (अशुद्ध) सही है।
Q4. सुश्रुत को किस रूप में जाना जाता है?
Explanation: पाठ के अनुसार, सुश्रुत को प्रथम त्वक्प्रत्यारोपक (पहले त्वचा प्रत्यारोपण करने वाले) के रूप में जाना जाता है।
Q5. 'छिद् + यत्' से बनने वाला नया शब्द क्या है?
Explanation: संस्कृत व्याकरण के अनुसार, 'छिद्' धातु में 'यत्' प्रत्यय जोड़ने पर 'छेद्य' शब्द बनता है, जिसका अर्थ है 'काटने योग्य'।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?
यह NCERT समाधान कक्षा 12 के संस्कृत विषय के लिए है, विशेष रूप से पाठ 8 'आश्चर्यमयं विज्ञानजगत्' पर केंद्रित है।
इन समाधानों में किन मुख्य व्याकरणिक बिंदुओं को शामिल किया गया है?
समाधानों में शब्दों को वर्णानुक्रम में व्यवस्थित करना, क्तान्त विशेषणों का प्रयोग करके वाक्यों को पूरा करना, कर्तृ और क्रिया पदों का सही मेल करना, और प्रकृति-प्रत्यय से नए शब्दों का निर्माण करना जैसे व्याकरणिक बिंदु शामिल हैं।
क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?
हाँ, ये समाधान पाठ की सामग्री और संबंधित व्याकरणिक अभ्यासों की विस्तृत व्याख्या प्रदान करते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
पाठ 8 'आश्चर्यमयं विज्ञानजगत्' का मुख्य विषय क्या है?
पाठ का मुख्य विषय विज्ञान की अद्भुत दुनिया और संस्कृत साहित्य में इसके उल्लेखों को दर्शाता है, जिसमें प्राचीन भारतीय ज्ञान और वैज्ञानिक उपलब्धियों पर प्रकाश डाला गया है।
क्या इन समाधानों में केवल प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं?
नहीं, इन समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को विस्तृत रूप से समझाया गया है, जिसमें आवश्यक व्याकरणिक नियमों और अवधारणाओं का भी उल्लेख किया गया है।
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