कक्षा 12 भौतिकी NCERT समाधान: किरण प्रकाशिकी और प्रकाशिक यंत्र
यह पृष्ठ कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 1, 'किरण प्रकाशिकी और प्रकाशिक यंत्र' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें अवतल और उत्तल दर्पणों से संबंधित प्रश्नों को हल किया गया है, जिसमें प्रतिबिम्बों की स्थिति, प्रकृति और आकार का निर्धारण शामिल है। साथ ही, अपवर्तन के सिद्धांतों का उपयोग करके जल और अन्य द्रवों में गहराई की गणना और सूक्ष्मदर्शी के समायोजन से संबंधित समस्याओं का भी समाधान किया गया है। स्नेल के नियम का उपयोग करके विभिन्न माध्यमों में प्रकाश के अपवर्तन कोणों की गणना भी शामिल है। ये समाधान छात्रों को इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं को समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | भौतिकी विज्ञान-II |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 1 |
Chapter summary
कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 1, 'किरण प्रकाशिकी और प्रकाशिक यंत्र' के लिए NCERT समाधानों का यह संग्रह प्रकाशिकी के मूल सिद्धांतों पर केंद्रित है। इसमें दर्पण सूत्र, आवर्धन, और अपवर्तन के नियमों का उपयोग करके विभिन्न परिदृश्यों का विश्लेषण शामिल है। छात्र वास्तविक और आभासी प्रतिबिम्बों की गणना करना सीखेंगे, साथ ही विभिन्न माध्यमों में प्रकाश के व्यवहार को समझना सीखेंगे। यह खंड परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, जो छात्रों को इन अवधारणाओं पर आधारित समस्याओं को हल करने के लिए आवश्यक उपकरण प्रदान करता है।
Learning outcomes
- अवतल और उत्तल दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र का उपयोग करके प्रतिबिम्ब की स्थिति और प्रकृति का निर्धारण करना।
- दर्पणों के लिए आवर्धन की गणना करना और प्रतिबिम्ब के आकार और प्रकृति का वर्णन करना।
- अपवर्तन के सिद्धांत का उपयोग करके जल और अन्य द्रवों में आभासी गहराई की गणना करना।
- स्नेल के नियम का उपयोग करके विभिन्न माध्यमों में अपवर्तन कोणों की गणना करना।
- प्रकाशिक यंत्रों से संबंधित समस्याओं को हल करने के लिए भौतिकी के सिद्धांतों को लागू करना।
Topics covered
Paper topics
- किरण प्रकाशिकी
- प्रकाशिक यंत्र
- अवतल दर्पण
- उत्तल दर्पण
- दर्पण सूत्र
- आवर्धन
- अपवर्तन
- आभासी गहराई
- स्नेल का नियम
- अपवर्तनांक
Important topics
- दर्पण सूत्र और आवर्धन
- अपवर्तन और आभासी गहराई
- स्नेल का नियम और अपवर्तनांक
- अवतल और उत्तल दर्पणों के अनुप्रयोग
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
दिया गया है:
- मोमबत्ती का आकार (वस्तु की ऊँचाई), सेमी
- अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या, सेमी
- वस्तु की दर्पण से दूरी, सेमी (चिह्न परिपाटी के अनुसार)
अवतल दर्पण के लिए, फोकस दूरी वक्रता त्रिज्या की आधी होती है। चूँकि यह अवतल दर्पण है, फोकस दूरी ऋणात्मक होगी:
सेमी
दर्पण सूत्र का उपयोग करके प्रतिबिम्ब की दूरी () ज्ञात करते हैं:
मान रखने पर:
लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) 54 है:
अतः, प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी सेमी है। ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने बनेगा। इसलिए, परदे को दर्पण से 54 सेमी की दूरी पर रखना होगा।
अब, प्रतिबिम्ब का आकार (ऊँचाई ) ज्ञात करते हैं:
सेमी
प्रतिबिम्ब का आकार 5.0 सेमी है। ऋणात्मक चिन्ह दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब उल्टा है। चूँकि प्रतिबिम्ब दर्पण के सामने बन रहा है, यह वास्तविक है।
निष्कर्ष: प्रतिबिम्ब वास्तविक, उल्टा और 5.0 सेमी आकार का है।
मोमबत्ती को दर्पण की ओर ले जाने पर: यदि मोमबत्ती को दर्पण के करीब (27 सेमी से 18 सेमी की ओर) ले जाया जाता है, तो दर्पण से वस्तु की दूरी कम होती है। ऐसे में, प्रतिबिम्ब दर्पण से दूर बनता जाएगा और उसका आकार बढ़ता जाएगा। इसलिए, परदे को दर्पण से दूर हटाना पड़ेगा। यदि मोमबत्ती को फोकस ( सेमी) के अंदर ले जाया जाता है, तो प्रतिबिम्ब आभासी, सीधा और बड़ा बनेगा, जो परदे पर प्राप्त नहीं होगा।
प्रश्न 2
दिया गया है:
- सुई का आकार (वस्तु की ऊँचाई), सेमी
- उत्तल दर्पण की फोकस दूरी, सेमी (उत्तल दर्पण के लिए धनात्मक)
- वस्तु की दर्पण से दूरी, सेमी (चिह्न परिपाटी के अनुसार)
दर्पण सूत्र का उपयोग करके प्रतिबिम्ब की दूरी () ज्ञात करते हैं:
मान रखने पर:
लघुत्तम समापवर्त्य (LCM) 60 है:
अतः, प्रतिबिम्ब की दर्पण से दूरी सेमी ≈ 6.67 सेमी है। धनात्मक चिन्ह दर्शाता है कि प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे बनेगा।
अब, आवर्धन () और प्रतिबिम्ब का आकार () ज्ञात करते हैं:
प्रतिबिम्ब का आकार:
सेमी
निष्कर्ष: प्रतिबिम्ब दर्पण के पीछे 6.67 सेमी की दूरी पर बनेगा। आवर्धन है, और प्रतिबिम्ब सीधा (धनात्मक आवर्धन) तथा 2.5 सेमी लंबा (ऊँचा) होगा। चूँकि यह दर्पण के पीछे बन रहा है, यह आभासी है।
जब सुई को दर्पण से दूर ले जाते हैं: जैसे-जैसे सुई को उत्तल दर्पण से दूर ले जाया जाता है (अर्थात का ऋणात्मक मान बढ़ता है), प्रतिबिम्ब दर्पण के करीब (ध्रुव की ओर) खिसकता है और उसका आकार घटता जाता है। अनंत पर रखी वस्तु का प्रतिबिम्ब ध्रुव और फोकस के बीच अत्यंत छोटा बनता है।
प्रश्न 3
दिया गया है:
- जल की वास्तविक गहराई, सेमी
- जल में सुई की आभासी गहराई, सेमी
जब कोई वस्तु सघन माध्यम (जैसे जल) में होती है और उसे विरल माध्यम (जैसे वायु) से देखा जाता है, तो आभासी गहराई और वास्तविक गहराई का संबंध अपवर्तनांक से दिया जाता है:
जल का अपवर्तनांक ज्ञात करने के लिए मान रखने पर:
अतः, जल का अपवर्तनांक लगभग 1.33 है।
अब, जल के स्थान पर 1.63 अपवर्तनांक वाले अन्य द्रव का उपयोग किया जाता है। वास्तविक गहराई वही रहती है ( सेमी)।
नए द्रव में सुई की आभासी गहराई () की गणना करते हैं:
मान रखने पर:
पहले सूक्ष्मदर्शी 9.4 सेमी की आभासी गहराई पर केंद्रित था। अब नई आभासी गहराई 7.7 सेमी है। इसका मतलब है कि सुई अब सतह के करीब दिखाई देगी। सूक्ष्मदर्शी को सुई पर पुनः केंद्रित करने के लिए, उसे ऊपर ले जाना होगा।
सूक्ष्मदर्शी का विस्थापन (ऊपर की ओर) = पुरानी आभासी गहराई - नई आभासी गहराई
विस्थापन = सेमी - सेमी = सेमी
उत्तर: जल का अपवर्तनांक लगभग 1.33 है। सुई को पुनः फोकसित करने के लिए सूक्ष्मदर्शी को 1.7 सेमी ऊपर ले जाना होगा।
प्रश्न 4



चित्र 9.1
हम स्नेल के नियम का उपयोग करेंगे, जो बताता है कि दो माध्यमों के अंतरापृष्ठ पर आपतन कोण () और अपवर्तन कोण () के साइन का अनुपात दूसरे माध्यम के पहले माध्यम के सापेक्ष अपवर्तनांक के बराबर होता है:
जहाँ माध्यम 1 के सापेक्ष माध्यम 2 का अपवर्तनांक है। यदि माध्यम 1 वायु है, तो (माध्यम 2 का निरपेक्ष अपवर्तनांक)।
चित्र 9.1 (a) से (काँच-वायु अंतरापृष्ठ):
आपतन कोण, (वायु से काँच में)
अपवर्तन कोण, (काँच से वायु में)
स्नेल के नियम से (काँच से वायु में अपवर्तन):
हम जानते हैं कि . इसलिए, वायु से काँच में अपवर्तन के लिए:
(नोट: स्रोत में दिए गए मान काँच के निरपेक्ष अपवर्तनांक के लिए हैं, जो वायु से काँच में आपतन के लिए के रूप में होना चाहिए। हम स्रोत के मान का उपयोग करेंगे।)
स्रोत के अनुसार, चित्र 9.1 (a) से काँच का वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक:
चित्र 9.1 (b) से (जल-वायु अंतरापृष्ठ):
आपतन कोण, (वायु से जल में)
अपवर्तन कोण, (जल से वायु में)
स्नेल के नियम से (जल से वायु में अपवर्तन):
वायु से जल में अपवर्तन के लिए:
(नोट: स्रोत में दिए गए मान जल के निरपेक्ष अपवर्तनांक के लिए हैं, जो वायु से जल में आपतन के लिए के रूप में होना चाहिए। हम स्रोत के मान का उपयोग करेंगे।)
स्रोत के अनुसार, चित्र 9.1 (b) से जल का वायु के सापेक्ष अपवर्तनांक:
चित्र 9.1 (c) के लिए (जल-काँच अंतरापृष्ठ):
हमें जल-काँच अंतरापृष्ठ पर अपवर्तन कोण ज्ञात करना है, जब आपतित किरण जल में है और अभिलम्ब से का कोण बनाती है। यहाँ, आपतन माध्यम जल है और दूसरा माध्यम काँच है।
आपतन कोण, (जल से काँच में)
हमें जल के सापेक्ष काँच का अपवर्तनांक () ज्ञात करना है।
हम जानते हैं कि .
स्रोत से प्राप्त मानों का उपयोग करते हुए:
अब, स्नेल के नियम का उपयोग करके अपवर्तन कोण () ज्ञात करते हैं:
अब के लिए का मान ज्ञात करते हैं:
उत्तर: आपतित किरण का अपवर्तन कोण लगभग होगा।
Common mistakes
- चिह्न परिपाटी (sign convention) को लागू करने में त्रुटियाँ।
- दर्पण सूत्र और अपवर्तन सूत्रों के बीच भ्रम।
- आवर्धन की गणना में ऋणात्मक चिन्ह की व्याख्या करने में कठिनाई।
- वास्तविक और आभासी गहराई के बीच अंतर को समझने में चूक।
Revision tips
- सभी दर्पणों और लेंसों के लिए चिह्न परिपाटी को अच्छी तरह से समझें।
- दर्पण सूत्र और आवर्धन सूत्र के अनुप्रयोग का अभ्यास करें।
- अपवर्तन से संबंधित समस्याओं के लिए स्नेल के नियम के अनुप्रयोग को समझें।
- प्रत्येक प्रश्न के हल में दिए गए चरणों का पालन करें और मुख्य सूत्रों को नोट करें।
Practice MCQs
Q1. एक अवतल दर्पण के लिए, जब वस्तु वक्रता त्रिज्या के दोगुने से अधिक दूरी पर रखी जाती है, तो प्रतिबिम्ब की प्रकृति कैसी होती है?
Explanation: जब वस्तु अवतल दर्पण की वक्रता त्रिज्या (2f) से अधिक दूरी पर होती है, तो प्रतिबिम्ब फोकस (f) और वक्रता केंद्र (2f) के बीच वास्तविक, उल्टा और छोटा बनता है।
Q2. जल का अपवर्तनांक लगभग कितना होता है?
Explanation: जल का अपवर्तनांक लगभग 1.33 होता है, जो दर्शाता है कि प्रकाश जल में प्रवेश करते समय थोड़ा धीमा हो जाता है।
Q3. उत्तल दर्पण द्वारा बनाया गया प्रतिबिम्ब हमेशा होता है:
Explanation: उत्तल दर्पण हमेशा वस्तु के सापेक्ष आभासी, सीधे और छोटे आकार का प्रतिबिम्ब बनाता है।
Q4. स्नेल का नियम किस घटना से संबंधित है?
Explanation: स्नेल का नियम दो माध्यमों के अंतरापृष्ठ पर प्रकाश के अपवर्तन का वर्णन करता है, जो आपतन कोण और अपवर्तन कोण के बीच संबंध स्थापित करता है।
Frequently asked questions
कक्षा 12 भौतिकी के अध्याय 1 में कौन से मुख्य विषय शामिल हैं?
अध्याय 1, 'किरण प्रकाशिकी और प्रकाशिक यंत्र', में मुख्य रूप से दर्पणों द्वारा परावर्तन, प्रतिबिम्ब निर्माण, दर्पण सूत्र, आवर्धन, और विभिन्न माध्यमों में प्रकाश का अपवर्तन, आभासी गहराई और स्नेल का नियम जैसे विषय शामिल हैं।
इन NCERT समाधानों का उपयोग कैसे करें?
इन समाधानों का उपयोग अध्याय के प्रश्नों को समझने और हल करने के लिए करें। प्रत्येक प्रश्न के हल में दिए गए चरणों का पालन करें और मुख्य सूत्रों को नोट करें। यह परीक्षा की तैयारी में सहायक होगा।
क्या ये समाधान कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान विशेष रूप से CBSE कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षा के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित हैं, जिससे ये परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं।
प्रतिबिम्ब की प्रकृति (वास्तविक/आभासी, सीधा/उल्टा) कैसे निर्धारित की जाती है?
प्रतिबिम्ब की प्रकृति आवर्धन (m) के चिन्ह और मान से निर्धारित होती है। ऋणात्मक m वास्तविक और उल्टा प्रतिबिम्ब दर्शाता है, जबकि धनात्मक m आभासी और सीधा प्रतिबिम्ब दर्शाता है। m का मान 1 से कम होने पर प्रतिबिम्ब छोटा, 1 होने पर समान आकार का और 1 से अधिक होने पर बड़ा होता है।
आभासी गहराई और वास्तविक गहराई में क्या अंतर है?
वास्तविक गहराई वह वास्तविक दूरी है जो द्रव की सतह से किसी वस्तु तक होती है, जबकि आभासी गहराई वह गहराई है जो प्रेक्षक को द्रव के अंदर वस्तु की दिखाई देती है। यह अपवर्तन के कारण होती है और हमेशा वास्तविक गहराई से कम होती है।
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