कक्षा 12 रसायन विज्ञान अध्याय 1: ठोस अवस्था - NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 1, 'ठोस अवस्था' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें ठोसों की कठोरता और निश्चित आयतन के कारणों, क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोसों के बीच अंतर, और काँच को अतिशीतित द्रव मानने की व्याख्या शामिल है। समाधान विभिन्न प्रकार के ठोसों जैसे आयनिक, सहसंयोजक, आणविक और धात्विक ठोसों के वर्गीकरण पर भी प्रकाश डालते हैं, साथ ही आयनिक ठोसों के विद्युत चालकता गुणों की व्याख्या करते हैं। ये समाधान छात्रों को ठोस अवस्था की मूलभूत अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | रसायन विज्ञान-I |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 1. ठोस अवस्था |
Chapter summary
कक्षा 12 रसायन विज्ञान के अध्याय 1, 'ठोस अवस्था' के ये NCERT समाधान ठोसों के मौलिक गुणों की पड़ताल करते हैं। इसमें ठोसों की कठोरता और निश्चित आयतन के कारणों की व्याख्या, क्रिस्टलीय बनाम अक्रिस्टलीय ठोसों का वर्गीकरण, और काँच जैसे पदार्थों की अनूठी प्रकृति पर चर्चा शामिल है। समाधान विभिन्न प्रकार के ठोसों (आयनिक, सहसंयोजक, आणविक, धात्विक) के वर्गीकरण और उनके गुणों, विशेष रूप से विद्युत चालकता पर भी ध्यान केंद्रित करते हैं। यह अध्याय छात्रों को ठोस पदार्थों की संरचना और व्यवहार की व्यापक समझ प्रदान करता है।
Learning outcomes
- ठोसों की कठोरता और निश्चित आयतन के कारणों को समझना।
- क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोसों के बीच अंतर करना।
- काँच को अतिशीतित द्रव के रूप में वर्गीकृत करने के कारण को समझाना।
- अन्तराण्विक बलों के आधार पर विभिन्न प्रकार के ठोसों (आयनिक, सहसंयोजक, आणविक, धात्विक) को वर्गीकृत करना।
- ठोस और गलित अवस्थाओं में आयनिक ठोसों की विद्युत चालकता की व्याख्या करना।
- समदैशिक और विषमदैशिक गुणों के बीच संबंध को समझना।
Topics covered
Paper topics
- ठोसों की प्रकृति
- ठोसों की कठोरता
- ठोसों का निश्चित आयतन
- क्रिस्टलीय ठोस
- अक्रिस्टलीय ठोस
- काँच को अतिशीतित द्रव मानना
- समदैशिकता और विषमदैशिकता
- आयनिक ठोस
- सहसंयोजक ठोस
- आणविक ठोस
- धात्विक ठोस
- ठोसों की विद्युत चालकता
Important topics
- क्रिस्टलीय बनाम अक्रिस्टलीय ठोस
- विभिन्न प्रकार के ठोसों का वर्गीकरण (आयनिक, सहसंयोजक, आणविक, धात्विक)
- समदैशिक और विषमदैशिक गुण
- आयनिक ठोसों की विद्युत चालकता
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
प्रश्न 3
ठोसों को उनकी अवयवी कणों की व्यवस्था के आधार पर क्रिस्टलीय या अक्रिस्टलीय के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है।
- क्रिस्टलीय ठोस: इनमें अवयवी कणों की एक नियमित, त्रि-आयामी व्यवस्था होती है।
- अक्रिस्टलीय ठोस: इनमें अवयवी कणों की कोई नियमित व्यवस्था नहीं होती है; वे अव्यवस्थित होते हैं।
दिए गए पदार्थों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
अक्रिस्टलीय ठोस:
- पॉलियूरिथेन
- टेफ्लॉन
- सेलोफेन
- पॉलिवाइनिल क्लोराइड
- रेशा काँच (Fiber glass)
क्रिस्टलीय ठोस:
- नैफ्थैलीन
- बेन्जोइक अम्ल
- पोटैशियम नाइट्रेट
- ताँबा
प्रश्न 4
प्रश्न 5
यदि किसी ठोस के अपवर्तनांक का मान सभी दिशाओं में समान होता है, तो यह इंगित करता है कि ठोस समदैशिक (isotropic) प्रकृति का है। समदैशिक गुण अक्रिस्टलीय ठोसों की एक विशेषता है, क्योंकि उनमें अवयवी कणों की व्यवस्था सभी दिशाओं में समान नहीं होती है, लेकिन भौतिक गुण सभी दिशाओं में समान होते हैं।
यह ठोस विदलन (cleavage) गुण प्रदर्शित नहीं करेगा। जब क्रिस्टलीय ठोसों को तेज धार वाले औजार से काटा जाता है, तो वे चिकनी सतहों के साथ टूट जाते हैं क्योंकि वे क्रिस्टल के तल के साथ टूटते हैं। इसके विपरीत, अक्रिस्टलीय ठोसों को काटने पर वे अनियमित सतहों वाले टुकड़ों में टूट जाते हैं, क्योंकि उनकी अव्यवस्थित संरचना में कोई निश्चित तल नहीं होता है जिस पर वे आसानी से टूट सकें।
प्रश्न 6
ठोसों को उनके बीच कार्य करने वाले अन्तराण्विक बलों की प्रकृति के आधार पर चार मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है: आयनिक, सहसंयोजक (नेटवर्क), आणविक और धात्विक।
दिए गए पदार्थों का वर्गीकरण इस प्रकार है:
- आयनिक ठोस: ये ठोस आयनों के बीच स्थिरवैद्युत आकर्षण बलों (ionic bonds) द्वारा बने होते हैं।
- पोटैशियम सल्फेट (K₂SO₄)
- जिंक सल्फाइड (ZnS)
- सहसंयोजक ठोस (Network Covalent Solids): इनमें परमाणु विशाल नेटवर्क संरचना बनाने के लिए सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़े होते हैं।
- ग्रेफाइट (C)
- सिलिकॉन कार्बाइड (SiC)
- आणविक ठोस: ये ठोस अणुओं से बने होते हैं जो दुर्बल अंतराण्विक बलों (जैसे वैन डेर वाल्स बल या हाइड्रोजन बंध) द्वारा एक साथ रखे जाते हैं।
- बेन्जीन (C₆H₆)
- यूरिया (CO(NH₂)₂)
- अमोनिया (NH₃)
- जल (H₂O)
- ऑर्गन (Ar)
- धात्विक ठोस: ये धातु परमाणुओं से बने होते हैं जो धनात्मक आयनों के एक जालक (lattice) के रूप में व्यवस्थित होते हैं, जो इलेक्ट्रॉनों के एक 'समुद्र' में डूबे रहते हैं।
- रूबिडियम (Rb)
- टिन (Sn)
प्रश्न 7
ठोस 'A' के गुणों का विश्लेषण इस प्रकार है:
- अत्यधिक कठोर: यह गुण आयनिक और सहसंयोजक ठोसों में पाया जाता है।
- ठोस एवं गलित दोनों अवस्थाओं में विद्युतरोधी: इसका मतलब है कि इसमें मुक्त आयन या मुक्त इलेक्ट्रॉन नहीं हैं जो विद्युत का संचालन कर सकें। आयनिक ठोस गलित अवस्था में विद्युत का संचालन करते हैं, इसलिए यह आयनिक ठोस नहीं हो सकता। धात्विक ठोस भी विद्युत का संचालन करते हैं। आणविक ठोस आमतौर पर विद्युतरोधी होते हैं, लेकिन वे कठोर नहीं होते और कम तापमान पर पिघलते हैं।
- अत्यन्त उच्च ताप पर पिघलता है: यह गुण सहसंयोजक ठोसों की विशेषता है, जिनमें परमाणुओं के बीच मजबूत सहसंयोजक बंधों का एक विशाल नेटवर्क होता है।
इन सभी गुणों को मिलाकर, ठोस 'A' एक सहसंयोजक ठोस (covalent solid) है, जिसे नेटवर्क सहसंयोजक ठोस भी कहा जाता है। इन ठोसों में, परमाणु विशाल त्रि-आयामी नेटवर्क बनाने के लिए सहसंयोजक बंधों द्वारा एक साथ जुड़े होते हैं, जिससे वे अत्यधिक कठोर होते हैं और बहुत उच्च गलनांक रखते हैं।
प्रश्न 8
आयनिक ठोस धनात्मक और ऋणात्मक आयनों के बीच प्रबल स्थिरवैद्युत आकर्षण बलों द्वारा निर्मित होते हैं।
- ठोस अवस्था में: इन आयनों को क्रिस्टल जालक में उनकी निश्चित स्थितियों पर मजबूती से बांधा जाता है। वे अपनी माध्य स्थितियों के चारों ओर केवल कंपन कर सकते हैं, लेकिन वे गति करने के लिए स्वतंत्र नहीं होते हैं। चूंकि विद्युत चालन के लिए आवेश वाहकों (आयन या इलेक्ट्रॉन) की गति आवश्यक है, इसलिए ठोस अवस्था में आयनिक ठोस विद्युत के कुचालक होते हैं।
- गलित अवस्था में: जब आयनिक ठोस को पिघलाया जाता है, तो आयनों के बीच के स्थिरवैद्युत आकर्षण बल कमजोर पड़ जाते हैं, और आयन मुक्त होकर गति करने के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं। ये स्वतंत्र रूप से घूमने वाले आयन विद्युत आवेश ले जा सकते हैं और विद्युत धारा का संचालन कर सकते हैं। इसलिए, गलित अवस्था में आयनिक ठोस विद्युत के सुचालक बन जाते हैं।
Common mistakes
- क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोसों के बीच अंतर करने में भ्रमित होना।
- विभिन्न प्रकार के ठोसों के वर्गीकरण के लिए सही मापदंड लागू करने में कठिनाई।
- आयनिक ठोसों की विद्युत चालकता को ठोस और गलित अवस्थाओं में सही ढंग से न समझा पाना।
- समदैशिक और विषमदैशिक गुणों के बीच संबंध को गलत समझना।
Revision tips
- ठोसों के कठोरता और निश्चित आयतन के पीछे के कारणों को याद करें।
- क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोसों के उदाहरणों और उनके गुणों की एक सूची बनाएं।
- विभिन्न प्रकार के ठोसों (आयनिक, सहसंयोजक, आणविक, धात्विक) के वर्गीकरण के लिए मुख्य बिंदुओं को समझें।
- आयनिक ठोसों की विद्युत चालकता के बारे में स्पष्टीकरण को दोहराएं।
Practice MCQs
Q1. ठोस कठोर क्यों होते हैं?
Explanation: ठोसों में अवयवी कणों के मध्य प्रबल आकर्षण बल उन्हें अपनी माध्य स्थिति के चारों ओर केवल दोलन करने की अनुमति देते हैं, जिससे वे कठोर होते हैं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन एक क्रिस्टलीय ठोस का उदाहरण है?
Explanation: नैफ्थैलीन एक क्रिस्टलीय ठोस है, जबकि पॉलियूरिथेन, टेफ्लॉन और सेलोफेन अक्रिस्टलीय ठोस हैं।
Q3. काँच को अतिशीतित द्रव क्यों माना जाता है?
Explanation: काँच में बहने की प्रवृत्ति होती है, यद्यपि बहुत धीमी गति से, जिसके कारण पुरानी खिड़कियों में नीचे का हिस्सा थोड़ा मोटा हो जाता है, इसलिए इसे अतिशीतित द्रव माना जाता है।
Q4. एक ठोस जो सभी दिशाओं में समान अपवर्तनांक प्रदर्शित करता है, वह किस प्रकार का होता है?
Explanation: सभी दिशाओं में समान भौतिक गुण (जैसे अपवर्तनांक) प्रदर्शित करने वाले ठोस समदैशिक होते हैं, जो अक्रिस्टलीय ठोसों की विशेषता है।
Q5. ग्रेफाइट किस प्रकार का ठोस है?
Explanation: ग्रेफाइट एक विशाल सहसंयोजक अणु है जिसमें कार्बन परमाणु सहसंयोजक बंधों द्वारा जुड़े होते हैं, इसलिए इसे सहसंयोजक ठोस के रूप में वर्गीकृत किया जाता है।
Q6. आयनिक ठोस गलित अवस्था में विद्युत का संचालन क्यों करते हैं?
Explanation: गलित अवस्था में, आयनिक ठोसों के आयन मुक्त रूप से गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, जिससे वे विद्युत का संचालन कर पाते हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 12 रसायन विज्ञान में ठोस अवस्था अध्याय क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अध्याय ठोस पदार्थों की मौलिक संरचना और गुणों को समझने के लिए आधार प्रदान करता है, जो रसायन विज्ञान के कई अन्य क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय ठोसों में मुख्य अंतर क्या है?
क्रिस्टलीय ठोसों में अवयवी कणों की एक नियमित और निश्चित व्यवस्था होती है, जबकि अक्रिस्टलीय ठोसों में यह व्यवस्था अनियमित होती है।
क्या काँच वास्तव में एक अतिशीतित द्रव है?
हाँ, काँच को अतिशीतित द्रव माना जाता है क्योंकि यह बहुत धीमी गति से बहने की प्रवृत्ति रखता है, जैसा कि पुरानी इमारतों की खिड़कियों में देखे गए मोटाई में अंतर से पता चलता है।
आयनिक ठोस गलित अवस्था में विद्युत का संचालन क्यों करते हैं?
गलित अवस्था में, आयनिक ठोसों के आयन मुक्त रूप से गति करने के लिए स्वतंत्र होते हैं, जिससे वे विद्युत आवेश ले जा सकते हैं और संचालन कर सकते हैं।
यह समाधान किस बोर्ड और कक्षा के लिए है?
यह समाधान CBSE बोर्ड की कक्षा 12 के रसायन विज्ञान विषय के लिए है।
इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के प्रकारों का अभ्यास करने में मदद मिलती है।
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