CBSE Class 11 Hindi गलता लोहा NCERT Solutions
This section provides comprehensive NCERT Solutions for Class 11 Hindi, Chapter 15, 'गलता लोहा'. The chapter delves into the societal commentary on the caste system, exploring how circumstances can challenge deeply ingrained social hierarchies. It highlights the protagonist Mohan's journey, a bright but impoverished Brahmin boy, who finds his caste pride becoming irrelevant as he engages with the world of labor. The solutions explain how Mohan's actions, like working with the blacksmith Dhanram, challenge the false notions of caste-based brotherhood and propose a more genuine camaraderie among working people. The narrative emphasizes the transformation of societal norms, akin to 'iron melting and taking new shape'. These solutions are designed to help students understand the nuances of the story, its characters, and its underlying social critique, aiding in their exam preparation.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 15. गलता लोहा |
Chapter summary
NCERT Solutions for 'गलता लोहा' (Chapter 15) for Class 11 Hindi offers an in-depth analysis of the story. It focuses on the critique of the caste system and the emergence of a new social order based on mutual respect among laborers. The solutions explain Mohan's character arc, his intellectual prowess, and how his circumstances lead him to question caste-based prejudices. It also covers the relationship between Mohan and Dhanram, highlighting the social conditioning that perpetuates caste divisions and the potential for change. The exercises help students grasp the story's themes and literary significance.
Learning outcomes
- Understand the social commentary on the caste system in the story 'गलता लोहा'.
- Analyze the character development of Mohan and Dhanram.
- Explain the theme of changing social hierarchies and the rise of labor-based camaraderie.
- Identify the author's subtle critique of societal norms and prejudices.
- Appreciate the story's narrative style and language.
Topics covered
Paper topics
- शेखर जोशी का जीवन परिचय
- शेखर जोशी की रचनाएँ
- शेखर जोशी का साहित्यिक परिचय
- गलता लोहा पाठ का सारांश
- जातिगत विभाजन और सामाजिक टिप्पणी
- मोहन का चरित्र चित्रण
- धनराम का चरित्र चित्रण
- पुरोहिती और श्रम का महत्व
- नई कहानी आंदोलन
- सामाजिक यथार्थ और विडंबनाएँ
- मेहनतकशों का भाईचारा
- सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक
Important topics
- जातिगत विभाजन और सामाजिक टिप्पणी
- मोहन का चरित्र चित्रण
- धनराम का चरित्र चित्रण
- मेहनतकशों का भाईचारा
- सामाजिक परिवर्तन के प्रतीक ('गलता लोहा')
- शेखर जोशी का साहित्यिक परिचय
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Questions and Solutions
लेखक परिचय
शेखर जोशी का जन्म सन 1932 में उत्तरांचल के अल्मोड़ा में हुआ था। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा भी अल्मोड़ा से ही प्राप्त की। बीसवीं सदी के छठे दशक में हिंदी कहानी में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया, जिसे 'नई कहानी आंदोलन' के नाम से जाना गया। इस आंदोलन में शेखर जोशी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उनकी साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें 'पहल सम्मान' से भी नवाजा गया है।
उनकी प्रमुख रचनाओं में कहानी-संग्रह जैसे 'कोसी का घटवार', 'साथ के लोग', 'दाज्यू', 'हलवाहा', और 'नौरंगी बीमार है' शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने 'एक पेड़ की याद' नामक शब्दचित्र संग्रह भी लिखा है। उनकी कहानियाँ न केवल कई भारतीय भाषाओं में अनूदित हुई हैं, बल्कि अंग्रेजी, पोलिश और रूसी भाषाओं में भी प्रकाशित हो चुकी हैं। उनकी प्रसिद्ध कहानी 'दाज्यू' पर चिल्ड्रन्स फिल्म सोसाइटी द्वारा एक फिल्म का भी निर्माण किया गया है।
शेखर जोशी की कहानियाँ 'नई कहानी आंदोलन' के प्रगतिशील पक्ष का प्रतिनिधित्व करती हैं। वे समाज के मेहनतकश और सुविधाहीन वर्ग को अपनी कहानियों का केंद्र बनाते हैं। उनकी भाषा-शैली अत्यंत सहज और आडंबरहीन होती है, जिसमें वे सामाजिक यथार्थ के सूक्ष्म पहलुओं को बड़ी कुशलता से प्रस्तुत करते हैं। उनकी रचनाओं के माध्यम से समकालीन जनजीवन की विभिन्न विडंबनाओं को महसूस किया जा सकता है, जो उनकी प्रगतिशील जीवन-दृष्टि और यथार्थ-बोध का परिणाम है।
पाठ का सारांश
'गलता लोहा' कहानी समाज में व्याप्त जातिगत विभाजन पर एक सूक्ष्म टिप्पणी प्रस्तुत करती है। यह कहानी लेखक शेखर जोशी की लेखन क्षमता को दर्शाती है, जहाँ वे बिना किसी मुखर टिप्पणी के गहरी सामाजिक सच्चाइयों को उजागर करते हैं। कहानी का मुख्य पात्र मोहन, एक मेधावी किंतु निर्धन ब्राह्मण युवक है, जो परिस्थितियों के चलते उस मनोदशा तक पहुँच जाता है जहाँ उसके लिए जातीय अभिमान का कोई अर्थ नहीं रह जाता।
कहानी की शुरुआत मोहन के पिता वंशीधर की दुविधा से होती है। वंशीधर, जो वृद्धावस्था के कारण अब कठिन श्रम और व्रत-उपवास नहीं कर सकते, को चंद्रदत्त के यहाँ रुद्री पाठ करने जाना है। मोहन अपने पिता की असमर्थता को समझता है, लेकिन वह स्वयं अनुष्ठान करने में कुशल नहीं है। पिता का भार हल्का करने के उद्देश्य से वह खेतों की ओर जाता है, लेकिन हँसुवे की धार कुंद होने के कारण उसे उसे धार लगवाने के लिए धनराम लोहार की दुकान पर जाना पड़ता है।
धनराम, मोहन का बचपन का सहपाठी है। दोनों मित्र मिलते हैं और पुरानी यादों में खो जाते हैं। वे मास्टर त्रिलोक सिंह के बारे में बात करते हैं, जिनका निधन हो चुका था। मोहन पढ़ाई और गायन में अत्यंत निपुण था और मास्टर त्रिलोक सिंह का प्रिय शिष्य था, जिसे उन्होंने पूरे स्कूल का मॉनीटर भी बनाया था। मास्टर जी मोहन को कमजोर छात्रों को दंडित करने का अधिकार भी देते थे, और धनराम ने भी मास्टर के आदेश पर मोहन से डंडे खाए थे। धनराम, जातिगत हीनता की भावना के कारण मोहन के प्रति स्नेह और आदर का भाव रखता था और उसे कभी अपना प्रतिद्वंद्वी नहीं समझा।
धनराम, गाँव के अन्य खेतिहर मजदूरों की तरह केवल तीसरी कक्षा तक ही पढ़ पाया था। मास्टर जी उस पर विशेष ध्यान देते थे, लेकिन उसे तेरह का पहाड़ा कभी याद नहीं हुआ, जिसके कारण उसे अक्सर पिटाई का सामना करना पड़ता था। मास्टर जी का एक नियम था कि सजा पाने वाले को अपने लिए हथियार भी जुटाना पड़ता था। धनराम, या तो डर के कारण या अपनी मंदबुद्धि के चलते, तेरह का पहाड़ा याद नहीं कर पाता था। इसी संदर्भ में मास्टर जी ने उस पर व्यंग्य किया था, "तेरे दिमाग में तो लोहा भरा है रे। विद्या का ताप कहाँ लगेगा इसमें?"
कहानी का शीर्षक 'गलता लोहा' प्रतीकात्मक है। यह दर्शाता है कि कैसे सामाजिक बाधाएं और पूर्वाग्रह पिघल सकते हैं और एक नए, अधिक न्यायसंगत समाज का निर्माण हो सकता है, जहाँ मेहनतकशों के बीच सच्चा भाईचारा स्थापित हो, न कि जातिगत आधार पर बना झूठा भाईचारा। मोहन का धनराम के काम में हाथ बँटाना और उसकी कुशलता दिखाना इसी परिवर्तन का संकेत है।
Common mistakes
- Overlooking the subtle social critique in favor of a surface-level plot summary.
- Misinterpreting the relationship between Mohan and Dhanram as purely antagonistic.
- Failing to connect the title 'गलता लोहा' (Melting Iron) to the story's central themes of transformation.
- Not recognizing the significance of the 'new story' movement in relation to the author's style.
Revision tips
- Reread the story focusing on the interactions between Mohan and Dhanram to understand their evolving relationship.
- Pay close attention to the author's descriptions of social customs and their impact on the characters.
- Consider how the story challenges traditional notions of caste and status.
- Reflect on the symbolism of 'melting iron' and its connection to social change.
Practice MCQs
Q1. कहानी 'गलता लोहा' में लेखक किस सामाजिक विभाजन पर टिप्पणी करता है?
Explanation: कहानी स्पष्ट रूप से समाज में व्याप्त जातिगत भेदभाव और उसके प्रभाव पर केंद्रित है।
Q2. मोहन के पिता वंशीधर वृद्धावस्था में क्या करने में असमर्थ थे?
Explanation: वंशीधर की वृद्धावस्था के कारण उनसे पुरोहिती से जुड़े कठिन श्रम और व्रत-उपवास नहीं हो पाते थे।
Q3. धनराम लोहार का सहपाठी कौन था?
Explanation: धनराम और मोहन बचपन के सहपाठी थे, जिन्होंने एक साथ पढ़ाई की थी।
Q4. मास्टर त्रिलोक सिंह के अनुसार धनराम के दिमाग में क्या भरा था?
Explanation: मास्टर जी ने व्यंग्य करते हुए कहा था कि धनराम के दिमाग में विद्या का ताप नहीं, बल्कि लोहा भरा है, क्योंकि उसे तेरह का पहाड़ा याद नहीं होता था।
Q5. कहानी में 'गलता लोहा' प्रतीक है:
Explanation: यह शीर्षक सामाजिक विधि-निषेधों को ताक पर रखकर मेहनतकशों के बीच विकसित होने वाले सच्चे भाईचारे और सामाजिक परिवर्तन का प्रतीक है।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 11 हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 15 'गलता लोहा' पर केंद्रित हैं।
'गलता लोहा' कहानी का मुख्य विषय क्या है?
कहानी का मुख्य विषय समाज में व्याप्त जातिगत विभाजन पर टिप्पणी करना और यह दिखाना है कि कैसे परिस्थितियाँ व्यक्ति को पारंपरिक जातिगत अभिमान से ऊपर उठने पर मजबूर कर सकती हैं, जिससे मेहनतकशों के बीच एक सच्चे भाईचारे का उदय होता है।
कहानी में मोहन और धनराम के बीच का संबंध कैसे दर्शाया गया है?
मोहन और धनराम बचपन के सहपाठी थे। कहानी दर्शाती है कि कैसे जातिगत हीनता की भावना धनराम को मोहन के प्रति स्नेह और आदर रखने पर विवश करती है, भले ही मोहन उससे कहीं अधिक योग्य हो।
लेखक शेखर जोशी की लेखन शैली की क्या विशेषता है?
शेखर जोशी की लेखन शैली अत्यंत सहज और आडंबरहीन है। वे सामाजिक यथार्थ के बारीक पहलुओं को पकड़ते हैं और सुविधाहीन तबके के जीवन को अपनी कहानियों में स्थान देते हैं।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी हैं?
ये समाधान छात्रों को 'गलता लोहा' कहानी के सारांश, पात्रों, सामाजिक संदेश और साहित्यिक महत्व को गहराई से समझने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा की तैयारी बेहतर ढंग से कर सकें।
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