कक्षा 11 इतिहास: इस्लाम का उदय और विस्तार (लगभग 570-1200 ई.) - NCERT समाधान

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यह खंड कक्षा 11 के लिए 'विश्व इतिहास के कुछ विषय' पुस्तक के अध्याय 4, 'इस्लाम का उदय और विस्तार (लगभग 570-1200 ई.)' पर केंद्रित है। इसमें सातवीं शताब्दी की शुरुआत में अरब के खानाबदोश बेदुइनों के जीवन की विशेषताओं, अब्बासी क्रांति के कारणों और परिणामों, तथा अरबों, ईरानियों और तुर्कों द्वारा स्थापित राज्यों में बहुसंस्कृतिवाद के उदाहरणों पर विस्तृत समाधान प्रदान किए गए हैं। ये समाधान छात्रों को इस्लामी इतिहास के प्रारंभिक काल की सामाजिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक गतिशीलता को समझने में मदद करते हैं। परीक्षा की तैयारी के लिए, ये समाधान प्रमुख अवधारणाओं की गहन समझ और महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के विश्लेषण के लिए एक मूल्यवान संसाधन के रूप में काम करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectविश्व इतिहास के कुछ विषय
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter4. इस्लाम का उदय और विस्तार लगभग 570 - 1200 ई.

Chapter summary

यह अध्याय इस्लाम के प्रारंभिक काल में उदय और विस्तार की पड़ताल करता है, जिसमें लगभग 570 से 1200 ईस्वी तक की अवधि शामिल है। इसमें सातवीं शताब्दी के अरब समाज, विशेष रूप से बेदुइनों के जीवन की विशेषताओं पर प्रकाश डाला गया है। यह अब्बासी क्रांति के कारणों और इसके परिणामस्वरूप हुए राजनीतिक और सांस्कृतिक परिवर्तनों की भी व्याख्या करता है। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय अरबों, ईरानियों और तुर्कों द्वारा स्थापित राज्यों में बहुसंस्कृतिवाद के उदाहरण प्रस्तुत करता है, जो इस्लामी दुनिया के विकास में महत्वपूर्ण थे।

Learning outcomes

  • सातवीं शताब्दी के आरंभ में बेदुइनों के जीवन की विशेषताओं को समझना।
  • अब्बासी क्रांति के कारणों और परिणामों का विश्लेषण करना।
  • इस्लामी राज्यों में बहुसंस्कृतिवाद के उदाहरणों की पहचान करना।
  • इस्लाम के प्रारंभिक विस्तार के सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं का वर्णन करना।
  • विभिन्न संस्कृतियों के बीच अंतःक्रिया और प्रभाव को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • सातवीं शताब्दी में अरब समाज
  • बेदुइनों का जीवन
  • कबीलाई व्यवस्था
  • इस्लाम का उदय
  • अब्बासी क्रांति
  • उमय्यद वंश का पतन
  • ईरानी संस्कृति का प्रभाव
  • बगदाद की स्थापना
  • बहुसंस्कृतिवाद
  • अरब, ईरानी और तुर्क राज्य
  • इस्लामी विस्तार
  • धार्मिक और सांस्कृतिक परिवर्तन

Important topics

  • सातवीं शताब्दी में बेदुइनों का जीवन
  • अब्बासी क्रांति के कारण और परिणाम
  • इस्लामी राज्यों में बहुसंस्कृतिवाद
  • इस्लाम का प्रारंभिक विस्तार

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

सातवीं शताब्दी के आरम्भिक दशकों में बेदुइओं के जीवन की क्या विशेषताएँ थीं?
Solution: सातवीं शताब्दी की शुरुआत में, अरब समाज अनेक कबीलों में बंटा हुआ था, जिनमें से कई खानाबदोश या बेदुइन थे। इन बेदुइनों का जीवन मुख्य रूप से रेगिस्तान के कठोर वातावरण पर निर्भर था। उनकी प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार थीं:
  1. खानाबदोशी जीवन: वे पानी और चारे की तलाश में रेगिस्तान के सूखे क्षेत्रों से हरे-भरे नखलिस्तानों की ओर निरंतर प्रवास करते थे।
  2. आर्थिक निर्भरता: उनका जीवन खजूर की खेती और ऊँटों पर अत्यधिक निर्भर था। ऊँट परिवहन, दूध और अन्य आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण थे, और उनके बिना रेगिस्तान में जीवित रहना असंभव था। वे नखलिस्तानों में थोड़ी बहुत खेती करके अनाज भी उगा लेते थे।
  3. कबीलाई संरचना: प्रत्येक कबीले का नेतृत्व एक 'शेख' करता था, जिसका चुनाव व्यक्तिगत साहस, बुद्धिमत्ता, उदारता (मुरव्वा) और कुछ हद तक पारिवारिक संबंधों के आधार पर होता था।
  4. धार्मिक विश्वास: बहुत से अरब कबीलों के अपने अलग-अलग देवी-देवता होते थे, जिनकी पूजा बुतों (सनम) के रूप में मस्जिदों में की जाती थी। मक्का और काबा उनके महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र थे।
  5. संघर्षपूर्ण जीवन: कबीलों के बीच वर्चस्व के लिए निरंतर झगड़े और युद्ध होते रहते थे, जिससे उनका जीवन संघर्षशील और युद्धों में उलझा हुआ था।
  6. जलवायु का प्रभाव: रेगिस्तान की शुष्क और कठोर जलवायु ने उन्हें शारीरिक रूप से कठोर और मानसिक रूप से बर्बर बना दिया था।
संक्षेप में, बेदुइनों का जीवन प्रकृति पर अत्यधिक निर्भर, कबीलाई संरचना वाला, संघर्षपूर्ण और कठोर जलवायु से प्रभावित था।

प्रश्न 2

'अब्बासी क्रांति' से आपका क्या तात्पर्य है?
Solution: 'अब्बासी क्रांति' से तात्पर्य सातवीं शताब्दी के मध्य में उमय्यद वंश के पतन और अब्बासी वंश के सत्ता में आने की उस महत्वपूर्ण घटना से है, जिसने इस्लामी दुनिया की राजनीतिक व्यवस्था और संस्कृति में गहरा परिवर्तन लाया। इस क्रांति की मुख्य बातें निम्नलिखित हैं:
  1. उमय्यद शासन का अंत: उमय्यद वंश ने अपने शासनकाल में राजनीतिक व्यवस्था के केंद्रीकरण के लिए भारी कीमत चुकाई थी। 'दवा' नामक एक सुनियोजित आंदोलन के माध्यम से उमय्यदों को उखाड़ फेंका गया।
  2. अब्बासियों का उदय: सन् 750 ईस्वी में, पैगंबर मुहम्मद के चाचा अब्बास के वंशजों, अब्बासियों ने सत्ता संभाली। उन्होंने उमय्यद शासन को 'दुष्ट' बताते हुए पैगंबर मुहम्मद के मूल इस्लाम की पुनर्स्थापना का वादा किया।
  3. क्रांति का केंद्र: यह विद्रोह पूर्वी ईरान (खुरासान) क्षेत्र से शुरू हुआ, जहाँ अरब और ईरानी आबादी का मिश्रण था। यहाँ के सैनिक सीरियाई वर्चस्व से असंतुष्ट थे और खुरासान के अरब नागरिक उमय्यद शासन से घृणा करते थे क्योंकि उन्हें दिए गए कर रियायतों के वचन पूरे नहीं हुए थे।
  4. ईरानी मुसलमानों (मवालियों) की भूमिका: ईरानी मुसलमान (मवाली) भी उमय्यदों द्वारा उपेक्षित महसूस करते थे और वे उमय्यदों को सत्ता से हटाने के किसी भी अभियान में शामिल होना चाहते थे।
  5. नेतृत्व और विजय: एक ईरानी गुलाम, अबू मुस्लिम ने अब्बासी सेना का नेतृत्व किया और उमय्यदों के अंतिम खलीफा मारवान को एक निर्णायक लड़ाई में पराजित किया।
  6. सांस्कृतिक और राजनीतिक परिवर्तन: अब्बासी शासन के तहत, अरबों का प्रभाव कम हुआ और ईरानी संस्कृति का वर्चस्व बढ़ा। उन्होंने अपनी राजधानी बगदाद में स्थापित की और सेना व नौकरशाही का पुनर्गठन गैर-कबीलाई आधार पर किया। उन्होंने खिलाफत की धार्मिक स्थिति को मजबूत किया और इस्लामी संस्थाओं व विद्वानों को संरक्षण दिया।
इस प्रकार, अब्बासी क्रांति केवल एक वंश परिवर्तन नहीं थी, बल्कि इसने इस्लामी समाज की राजनीतिक संरचना, सांस्कृतिक पहचान और प्रशासनिक व्यवस्था में मौलिक बदलाव लाए।

प्रश्न 3

अरबों, ईरानियों व तुर्कों द्वारा स्थापित राज्यों की बहुसंस्कृतियों के उदाहरण दीजिए।
Solution: अब्बासी शासनकाल के दौरान और उसके बाद, इस्लामी दुनिया में अरबों, ईरानियों और तुर्कों द्वारा स्थापित राज्यों ने बहुसंस्कृतिवाद के उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किए। इन राज्यों में विभिन्न संस्कृतियों का संगम और प्रभाव देखा गया, जिसके कुछ प्रमुख उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. सांस्कृतिक प्रभाव का मिश्रण: अब्बासी शासन के तहत, अरबों का प्रभाव कम हुआ और ईरानी संस्कृति का प्रभाव काफी बढ़ गया। अब्बासियों ने अपनी राजधानी बगदाद को प्राचीन ईरानी महानगर टेसीफोन के पास स्थापित किया, जो ईरानी संस्कृति के महत्व को दर्शाता है।
  2. गैर-कबीलाई पुनर्गठन: इराक और खुरासान जैसे क्षेत्रों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सेना और नौकरशाही का पुनर्गठन गैर-कबीलाई आधार पर किया गया, जिससे विभिन्न जातीय समूहों को अवसर मिले।
  3. धार्मिक और बौद्धिक संरक्षण: अब्बासी शासकों ने खिलाफत की धार्मिक स्थिति को मजबूत किया और इस्लामी संस्थाओं तथा विद्वानों को संरक्षण प्रदान किया। उन्होंने विभिन्न बौद्धिक परंपराओं के बीच संवाद को बढ़ावा दिया।
  4. क्षेत्रीय प्रभुत्व और विविधता: अरबों का प्रभुत्व अरब और सीरिया जैसे क्षेत्रों में था, ईरानियों का इराक और ईरान में, और तुर्कों का खुरासान और ऑक्सस क्षेत्र में। प्रत्येक क्षेत्र की अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान थी।
  5. गैर-मुस्लिमों के प्रति व्यवहार: इन राज्यों में गैर-मुस्लिम लोगों से कर (जि़ज़िया) वसूलने के बाद भी उनके साथ उचित व्यवहार किया जाता था। उन्हें अपनी संपत्ति रखने और आर्थिक गतिविधियों को जारी रखने का अधिकार प्राप्त था।
  6. फ़ारसी भाषा का विकास: इस्लामी संस्कृति की एक उच्च भाषा के रूप में फ़ारसी का विकास हुआ, जो ईरानी सांस्कृतिक प्रभाव का एक महत्वपूर्ण प्रमाण है।
  7. व्यापारी और विद्वान वर्ग की भूमिका: विद्वान और व्यापारी वर्ग इस्लामी राज्यों में स्वतंत्र रूप से भ्रमण कर सकते थे, जिससे विचारों और तौर-तरीकों का आदान-प्रदान होता था और विभिन्न संस्कृतियों के बीच एकता को बढ़ावा मिलता था।
  8. सामान्यताएँ: दसवीं से बारहवीं शताब्दी के मध्य तक, इस्लामी समाज किसी एकल राजनीतिक व्यवस्था या एकल भाषा (अरबी) से एकजुट नहीं रहा, बल्कि सामान्य आर्थिक और सांस्कृतिक प्रतिरूपों द्वारा उनमें एकजुटता बनी रही।
ये उदाहरण दर्शाते हैं कि अरबों, ईरानियों और तुर्कों द्वारा स्थापित राज्यों ने न केवल राजनीतिक विस्तार किया, बल्कि विभिन्न संस्कृतियों के सह-अस्तित्व और आदान-प्रदान को भी बढ़ावा दिया, जिससे एक समृद्ध बहुसांस्कृतिक इस्लामी दुनिया का निर्माण हुआ।

Common mistakes

  • अब्बासी क्रांति के कारणों और प्रभावों को गलत समझना।
  • बेदुइनों के जीवन की जटिलताओं को सरलीकृत करना।
  • इस्लामी राज्यों में बहुसंस्कृतिवाद के उदाहरणों को पहचानने में चूकना।
  • इस्लाम के विस्तार के सामाजिक और सांस्कृतिक पहलुओं को अनदेखा करना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर को मुख्य बिंदुओं में सारांशित करें।
  • अब्बासी क्रांति से संबंधित प्रमुख घटनाओं और तिथियों को याद करें।
  • विभिन्न संस्कृतियों के बीच संबंधों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • बेदुइनों के जीवन की विशेषताओं को समझने के लिए मानचित्र का उपयोग करें।

Practice MCQs

Q1. सातवीं शताब्दी में अरब समाज की मुख्य विशेषता क्या थी?

Q2. बेदुइनों का जीवन मुख्य रूप से किस पर निर्भर था?

Q3. अब्बासी क्रांति का मुख्य परिणाम क्या था?

Q4. अब्बासियों ने अपनी राजधानी कहाँ स्थापित की?

Q5. इस्लामी समाज में बहुसंस्कृतिवाद का एक उदाहरण क्या है?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह समाधान कक्षा 11 के लिए 'विश्व इतिहास के कुछ विषय' पुस्तक के अध्याय 4, 'इस्लाम का उदय और विस्तार (लगभग 570-1200 ई.)' के लिए है।

अब्बासी क्रांति से क्या तात्पर्य है?

अब्बासी क्रांति से तात्पर्य उमय्यद वंश के पतन और अब्बासियों के सत्ता में आने की घटना है, जिसने इस्लाम के राजनीतिक ढांचे और संस्कृति में महत्वपूर्ण बदलाव लाए।

बेदुइनों के जीवन की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं?

बेदुइनों का जीवन खानाबदोश था, जो खजूर और ऊँटों पर निर्भर थे। वे पानी और चारे की तलाश में रेगिस्तान में घूमते थे और उनका जीवन संघर्षशील और कबीलाई व्यवस्था पर आधारित था।

इस्लामी राज्यों में बहुसंस्कृतिवाद के क्या उदाहरण हैं?

अरबों, ईरानियों और तुर्कों द्वारा स्थापित राज्यों में बहुसंस्कृतिवाद देखा गया, जहाँ विभिन्न संस्कृतियों का प्रभाव और आदान-प्रदान हुआ, और गैर-मुस्लिमों के साथ उचित व्यवहार किया जाता था।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करते हैं?

ये समाधान प्रमुख अवधारणाओं की गहन समझ, महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं के विश्लेषण और परीक्षा के लिए आवश्यक जानकारी को व्यवस्थित करने में मदद करते हैं।

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