कक्षा 11 भौतिकी NCERT समाधान: अध्याय 6 - कार्य, ऊर्जा और शक्ति
यह पृष्ठ कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 6, 'कार्य, ऊर्जा और शक्ति' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें कार्य की अवधारणा, ऊर्जा के विभिन्न रूप और शक्ति की गणना से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों के हल शामिल हैं। समाधानों में प्रत्येक प्रश्न के लिए चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण दिया गया है, जिसमें भौतिकी के सिद्धांतों का अनुप्रयोग शामिल है। यह छात्रों को कार्य, ऊर्जा और शक्ति के बीच संबंध को समझने में मदद करता है, साथ ही विभिन्न प्रकार की ऊर्जाओं और उनके रूपांतरणों की व्याख्या करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने और इन महत्वपूर्ण अवधारणाओं की अपनी समझ को मजबूत करने में सहायता करते हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | भौतिकी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 6. कार्य, ऊर्जा तथा शक्ति |
Chapter summary
कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 6, 'कार्य, ऊर्जा और शक्ति' के लिए NCERT समाधानों का यह संग्रह छात्रों को कार्य की परिभाषा, ऊर्जा के संरक्षण के सिद्धांत और शक्ति की गणना जैसी प्रमुख अवधारणाओं को समझने में मदद करता है। इसमें विभिन्न परिदृश्यों में कार्य के चिह्न (धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य) का निर्धारण और गतिज ऊर्जा में परिवर्तन जैसे विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में दिए गए उदाहरण और प्रश्न छात्रों को इन सिद्धांतों को व्यावहारिक रूप से लागू करने का अभ्यास प्रदान करते हैं।
Learning outcomes
- कार्य की अवधारणा को समझना और बल तथा विस्थापन के बीच कोण के आधार पर इसके चिह्न (धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य) का निर्धारण करना।
- गुरुत्वाकर्षण, घर्षण और अन्य बलों द्वारा किए गए कार्य की गणना करना।
- गतिज ऊर्जा और कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुप्रयोगों को समझना।
- किसी वस्तु पर कुल बल द्वारा किए गए कार्य की गणना करना।
- दिए गए समय में किए गए कार्य और ऊर्जा में परिवर्तन के बीच संबंध स्थापित करना।
Topics covered
Paper topics
- कार्य की परिभाषा
- कार्य का चिह्न (धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य)
- बल द्वारा किया गया कार्य
- गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य
- घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य
- गतिज ऊर्जा
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय
- कुल बल द्वारा किया गया कार्य
- ऊर्जा में परिवर्तन
Important topics
- कार्य की अवधारणा और उसके चिह्न का निर्धारण
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय का अनुप्रयोग
- विभिन्न बलों (गुरुत्वाकर्षण, घर्षण) द्वारा किया गया कार्य
- गतिज ऊर्जा में परिवर्तन की गणना
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
(a) किसी व्यक्ति द्वारा किसी कुएँ में से रस्सी में बँधी बाल्टी को रस्सी द्वारा बाहर निकालने में किया गया कार्य।
(b) उपर्युक्त स्थिति में गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य।
(c) किसी आनत तल पर फिसलती हुई किसी वस्तु पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य।
(d) किसी खुरदरे क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान किसी वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य।
(e) किसी दोलायमान लोलक को विरामावस्था में लाने के लिए वायु के प्रतिरोधी बल द्वारा किया गया कार्य।
कार्य की गणना सूत्र द्वारा की जाती है, जहाँ आरोपित बल है, विस्थापन है, और बल तथा विस्थापन के बीच का कोण है।
- यदि , तो धनात्मक होता है, और किया गया कार्य धनात्मक होता है।
- यदि , तो , और किया गया कार्य शून्य होता है।
- यदि , तो ऋणात्मक होता है, और किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
(a) व्यक्ति द्वारा बाल्टी को कुएँ से बाहर निकालने में किया गया कार्य:
व्यक्ति बाल्टी को ऊपर की ओर खींचता है, और बाल्टी का विस्थापन भी ऊपर की ओर होता है। चूँकि बल और विस्थापन एक ही दिशा में हैं, उनके बीच का कोण है। इसलिए, व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य धनात्मक है।
(b) गुरुत्वीय बल द्वारा बाल्टी पर किया गया कार्य:
गुरुत्वीय बल हमेशा नीचे की ओर कार्य करता है, जबकि बाल्टी को ऊपर की ओर खींचा जा रहा है (विस्थापन ऊपर की ओर है)। अतः गुरुत्वीय बल और विस्थापन के बीच का कोण है। चूँकि , गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक है।
(c) आनत तल पर घर्षण द्वारा किया गया कार्य:
जब कोई वस्तु आनत तल पर नीचे की ओर फिसलती है, तो घर्षण बल गति की दिशा के विपरीत, अर्थात ऊपर की ओर कार्य करता है। विस्थापन नीचे की ओर होता है। इसलिए, घर्षण बल और विस्थापन के बीच का कोण है। अतः घर्षण द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक है।
(d) क्षैतिज तल पर एकसमान वेग से गतिमान वस्तु पर लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य:
वस्तु एकसमान वेग से गति कर रही है, जिसका अर्थ है कि उस पर लगने वाला कुल बल शून्य है। हालाँकि, प्रश्न में 'लगाए गए बल' द्वारा किए गए कार्य के बारे में पूछा गया है। यदि वस्तु को एकसमान वेग से गतिमान रखने के लिए एक बल लगाया जा रहा है (जो घर्षण और अन्य प्रतिरोध बलों के बराबर और विपरीत है), तो यह लगाया गया बल विस्थापन की दिशा में ही होगा। इसलिए, बल और विस्थापन के बीच का कोण है, और इस लगाए गए बल द्वारा किया गया कार्य धनात्मक है।
(e) दोलायमान लोलक पर वायु प्रतिरोधक बल द्वारा किया गया कार्य:
वायु प्रतिरोधक बल हमेशा वस्तु की गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है। लोलक के दोलन के दौरान, वायु प्रतिरोधक बल हमेशा लोलक की गति की दिशा के विपरीत होता है। इसलिए, वायु प्रतिरोधक बल और विस्थापन के बीच का कोण है। अतः वायु प्रतिरोधक बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक है।
प्रश्न 2
(a) लगाए गए बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य
(b) घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य
(c) वस्तु पर कुल बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य
(d) वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10 s में परिवर्तन।
दिया गया है:
द्रव्यमान, m = 2 \text{ kg}
प्रारंभिक वेग, u = 0 \text{ m/s} (विरामावस्था में)
लगाया गया क्षैतिज बल, F_{\text{applied}} = 7 \text{ N}
गतिज घर्षण गुणांक, \mu_k = 0.1
समय, t = 10 \text{ s}
गुरुत्वीय त्वरण, g = 9.8 \text{ m/s}^2
सबसे पहले, हम घर्षण बल की गणना करेंगे। मेज पर वस्तु पर लगने वाला अभिलंब बल (R) वस्तु के भार के बराबर होगा:
R = mg = 2 \text{ kg} \times 9.8 \text{ m/s}^2 = 19.6 \text{ N}
गतिज घर्षण बल (f_k) की गणना इस प्रकार की जाती है:
f_k = \mu_k R = 0.1 \times 19.6 \text{ N} = 1.96 \text{ N}
यह घर्षण बल लगाए गए बल की दिशा के विपरीत कार्य करता है।
(a) लगाए गए बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य:
लगाए गए बल के कारण वस्तु में त्वरण उत्पन्न होगा। पहले हम त्वरण (a) की गणना करते हैं। वस्तु पर लगने वाला कुल क्षैतिज बल (F_{\text{net}}) है:
F_{\text{net}} = F_{\text{applied}} - f_k = 7 \text{ N} - 1.96 \text{ N} = 5.04 \text{ N}
न्यूटन के गति के दूसरे नियम (F_{\text{net}} = ma) का उपयोग करके त्वरण ज्ञात करते हैं:
a = \frac{F_{\text{net}}}{m} = \frac{5.04 \text{ N}}{2 \text{ kg}} = 2.52 \text{ m/s}^2
अब, 10 सेकंड में वस्तु द्वारा तय की गई दूरी (s) की गणना करते हैं, गति के दूसरे समीकरण (s = ut + \frac{1}{2}at^2) का उपयोग करके:
s = (0 \text{ m/s})(10 \text{ s}) + \frac{1}{2}(2.52 \text{ m/s}^2)(10 \text{ s})^2
s = 0 + \frac{1}{2}(2.52)(100) \text{ m}
s = 1.26 \times 100 \text{ m} = 126 \text{ m}
चूंकि लगाया गया बल (F_{\text{applied}}) और विस्थापन (s) एक ही दिशा में हैं (\theta = 0^\circ), लगाए गए बल द्वारा 10 सेकंड में किया गया कार्य है:
W_{\text{applied}} = F_{\text{applied}} \times s \times \cos 0^\circ
W_{\text{applied}} = 7 \text{ N} \times 126 \text{ m} \times 1 = 882 \text{ J}
व्याख्या: लगाए गए बल ने वस्तु को 10 सेकंड में 126 मीटर तक विस्थापित किया, जिससे 882 जूल कार्य हुआ।
(b) घर्षण द्वारा 10 s में किया गया कार्य:
घर्षण बल (f_k = 1.96 \text{ N}) गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है। इसलिए, घर्षण बल और विस्थापन के बीच का कोण \theta = 180^\circ है। घर्षण द्वारा 10 सेकंड में किया गया कार्य है:
W_{\text{friction}} = f_k \times s \times \cos 180^\circ
W_{\text{friction}} = 1.96 \text{ N} \times 126 \text{ m} \times (-1)
W_{\text{friction}} = -246.96 \text{ J}
व्याख्या: घर्षण बल ने वस्तु की गति का विरोध किया, जिससे 246.96 जूल का ऋणात्मक कार्य हुआ।
(c) वस्तु पर कुल बल द्वारा 10 s में किया गया कार्य:
वस्तु पर कुल बल (F_{\text{net}} = 5.04 \text{ N}) विस्थापन की दिशा में कार्य करता है (\theta = 0^\circ)। कुल बल द्वारा 10 सेकंड में किया गया कार्य है:
W_{\text{net}} = F_{\text{net}} \times s \times \cos 0^\circ
W_{\text{net}} = 5.04 \text{ N} \times 126 \text{ m} \times 1
W_{\text{net}} = 635.04 \text{ J}
वैकल्पिक रूप से, कुल कार्य लगाए गए बल द्वारा किए गए कार्य और घर्षण द्वारा किए गए कार्य का योग है:
W_{\text{net}} = W_{\text{applied}} + W_{\text{friction}} = 882 \text{ J} + (-246.96 \text{ J}) = 635.04 \text{ J}
व्याख्या: वस्तु पर लगने वाले सभी बलों का शुद्ध प्रभाव 635.04 जूल कार्य करना है।
(d) वस्तु की गतिज ऊर्जा में 10 s में परिवर्तन:
कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर कुल बल द्वारा किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
\Delta KE = W_{\text{net}}
\Delta KE = 635.04 \text{ J}
हम इसे वस्तु के अंतिम वेग (v) की गणना करके भी सत्यापित कर सकते हैं। गति के अंतिम समीकरण (v = u + at) का उपयोग करके:
v = 0 \text{ m/s} + (2.52 \text{ m/s}^2)(10 \text{ s}) = 25.2 \text{ m/s}
प्रारंभिक गतिज ऊर्जा (KE_i) है:
KE_i = \frac{1}{2}mu^2 = \frac{1}{2}(2 \text{ kg})(0 \text{ m/s})^2 = 0 \text{ J}
अंतिम गतिज ऊर्जा (KE_f) है:
KE_f = \frac{1}{2}mv^2 = \frac{1}{2}(2 \text{ kg})(25.2 \text{ m/s})^2
KE_f = 1 \times (25.2)^2 \text{ J} = 635.04 \text{ J}
गतिज ऊर्जा में परिवर्तन है:
\Delta KE = KE_f - KE_i = 635.04 \text{ J} - 0 \text{ J} = 635.04 \text{ J}
व्याख्या: 10 सेकंड के बाद वस्तु की गतिज ऊर्जा में 635.04 जूल की वृद्धि हुई है, जो कुल कार्य के बराबर है।
Common mistakes
- कार्य की गणना करते समय बल और विस्थापन के बीच कोण को गलत समझना।
- घर्षण बल की दिशा को ध्यान में न रखना, जिससे कार्य का चिह्न गलत हो जाता है।
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय को लागू करते समय सभी बलों द्वारा किए गए कुल कार्य पर विचार करने में विफलता।
- गतिज ऊर्जा में परिवर्तन की गणना करते समय प्रारंभिक और अंतिम वेगों को सही ढंग से न पहचानना।
Revision tips
- कार्य की परिभाषा और कार्य के चिह्न को निर्धारित करने वाले कारकों को अच्छी तरह समझें।
- विभिन्न प्रकार के बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण, घर्षण) द्वारा किए गए कार्य के उदाहरणों का अभ्यास करें।
- कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुप्रयोग पर विशेष ध्यान दें और इसे विभिन्न समस्याओं पर लागू करें।
- प्रश्न में दिए गए सभी डेटा और शर्तों को ध्यान से पढ़ें ताकि कोई भी महत्वपूर्ण जानकारी छूट न जाए।
Practice MCQs
Q1. किसी वस्तु पर किए गए कार्य का चिह्न धनात्मक कब होता है?
Explanation: जब आरोपित बल और विस्थापन के बीच का कोण 0° और 90° के बीच होता है (अर्थात 90° से कम), तो cos θ धनात्मक होता है, जिससे किया गया कार्य धनात्मक होता है।
Q2. गुरुत्वीय बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक कब होता है?
Explanation: जब कोई वस्तु ऊपर की ओर गति करती है, तो गुरुत्वीय बल नीचे की ओर कार्य करता है, जबकि विस्थापन ऊपर की ओर होता है। इन दोनों के बीच का कोण 180° होता है, जिससे कार्य ऋणात्मक होता है।
Q3. किसी वस्तु पर 10 सेकंड में कुल बल द्वारा किया गया कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। यह किस प्रमेय का कथन है?
Explanation: कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार, किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है।
Q4. यदि किसी वस्तु पर लगने वाला बल और उसका विस्थापन एक-दूसरे के लंबवत (90°) हों, तो बल द्वारा किया गया कार्य कितना होगा?
Explanation: जब बल और विस्थापन के बीच का कोण 90° होता है, तो कार्य W = Fs cos(90°) = Fs * 0 = 0 होता है।
Q5. घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य सामान्यतः कैसा होता है?
Explanation: घर्षण बल हमेशा वस्तु की गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है। इसलिए, घर्षण बल और विस्थापन के बीच का कोण 180° होता है, जिससे घर्षण द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है।
Frequently asked questions
कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय 6 में मुख्य रूप से किन अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
अध्याय 6, 'कार्य, ऊर्जा और शक्ति', में मुख्य रूप से कार्य की परिभाषा, कार्य का चिह्न (धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य), गतिज ऊर्जा, कार्य-ऊर्जा प्रमेय और शक्ति जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
कार्य-ऊर्जा प्रमेय क्या है और यह कैसे उपयोगी है?
कार्य-ऊर्जा प्रमेय कहता है कि किसी वस्तु पर सभी बलों द्वारा किया गया कुल कार्य उसकी गतिज ऊर्जा में परिवर्तन के बराबर होता है। यह प्रमेय बल, विस्थापन और गति के बीच संबंध को समझने में मदद करता है।
इन NCERT समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?
ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत, चरण-दर-चरण स्पष्टीकरण प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और उन्हें विभिन्न प्रकार की समस्याओं पर लागू करने का अभ्यास करने में मदद मिलती है। यह परीक्षा के दौरान आने वाले प्रश्नों को हल करने में आत्मविश्वास बढ़ाता है।
कार्य की गणना करते समय बल और विस्थापन के बीच कोण का क्या महत्व है?
कार्य की गणना सूत्र W = Fs cos θ पर आधारित है। यहाँ θ बल और विस्थापन के बीच का कोण है। कोण के मान (0°, 90°, 180°, या अन्य) के आधार पर कार्य धनात्मक, शून्य या ऋणात्मक हो सकता है।
घर्षण बल द्वारा किया गया कार्य हमेशा ऋणात्मक क्यों होता है?
घर्षण बल हमेशा वस्तु की गति की दिशा के विपरीत कार्य करता है। इसलिए, घर्षण बल और विस्थापन के बीच का कोण हमेशा 180° होता है, जिसके कारण cos(180°) = -1 होता है और कार्य ऋणात्मक होता है।
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