कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 9: हाइड्रोजन NCERT समाधान

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यह खंड कक्षा 11 रसायन विज्ञान के अध्याय 9, 'हाइड्रोजन' के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। इसमें हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में इसके स्थान की तर्कसंगत व्याख्या, इसके समस्थानिकों (प्रोटियम, ड्यूटेरियम, ट्रिटियम) के नाम और उनके द्रव्यमान अनुपात, और सामान्य परिस्थितियों में इसके द्विपरमाण्विक रूप में पाए जाने के कारण शामिल हैं। समाधान 'कोल गैसीकरण' और विद्युत-अपघटन विधियों द्वारा डाइहाइड्रोजन के उत्पादन की प्रक्रियाओं पर भी प्रकाश डालते हैं, जिसमें संबंधित रासायनिक समीकरण दिए गए हैं। अंत में, यह कुछ महत्वपूर्ण रासायनिक समीकरणों को पूरा करने के तरीके बताता है। ये समाधान छात्रों को हाइड्रोजन से संबंधित प्रमुख अवधारणाओं को समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectरसायन विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. हाइड्रोजन

Chapter summary

कक्षा 11 रसायन विज्ञान के अध्याय 9 के ये NCERT समाधान हाइड्रोजन के मौलिक पहलुओं पर केंद्रित हैं। इसमें हाइड्रोजन की आवर्त सारणी में स्थिति, इसके तीन समस्थानिकों और उनके द्रव्यमान अनुपात का वर्णन है। अध्याय यह भी बताता है कि हाइड्रोजन सामान्यतः द्विपरमाण्विक अणु के रूप में क्यों मौजूद होता है। उत्पादन विधियों जैसे कोल गैसीकरण और जल के विद्युत अपघटन की व्याख्या की गई है। समाधान छात्रों को रासायनिक समीकरणों को संतुलित करने और पूरा करने का अभ्यास भी कराते हैं, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

Learning outcomes

  • हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में इसकी स्थिति को समझना।
  • हाइड्रोजन के विभिन्न समस्थानिकों (प्रोटियम, ड्यूटेरियम, ट्रिटियम) को पहचानना और उनके द्रव्यमान अनुपात की गणना करना।
  • सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन के द्विपरमाण्विक अणु के रूप में अस्तित्व के कारण को स्पष्ट करना।
  • कोल गैसीकरण और जल के विद्युत अपघटन द्वारा डाइहाइड्रोजन के उत्पादन की विधियों का वर्णन करना।
  • दिए गए रासायनिक समीकरणों को पूरा करना और संतुलित करना।

Topics covered

Paper topics

  • हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
  • आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान
  • हाइड्रोजन के समस्थानिक (प्रोटियम, ड्यूटेरियम, ट्रिटियम)
  • समस्थानिकों का द्रव्यमान अनुपात
  • हाइड्रोजन का द्विपरमाण्विक रूप
  • कोल गैसीकरण द्वारा डाइहाइड्रोजन का उत्पादन
  • वाटर गैस शिफ्ट अभिक्रिया
  • जल का विद्युत अपघटन द्वारा डाइहाइड्रोजन का उत्पादन
  • रासायनिक समीकरणों को पूरा करना

Important topics

  • आवर्त सारणी में हाइड्रोजन का स्थान
  • हाइड्रोजन के समस्थानिक और उनके गुण
  • कोल गैसीकरण और जल विद्युत अपघटन द्वारा उत्पादन
  • रासायनिक समीकरणों का अभ्यास

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Questions and Solutions

प्रश्न 9.1.

हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर आवर्त सारणी में इसकी स्थिति को युक्तिसंगत ठहराइए।
Solution:

हाइड्रोजन आवर्त सारणी का प्रथम तत्व है और इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s^1 है। यह इलेक्ट्रॉनिक विन्यास आवर्त सारणी के वर्ग 1 के तत्वों (क्षार धातुओं) के समान है, जिनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns^1 होता है। क्षार धातुओं की तरह, हाइड्रोजन भी एक इलेक्ट्रॉन खोकर धनावेशित आयन (H^+) बना सकता है।

दूसरी ओर, हाइड्रोजन का विन्यास हैलोजनों (वर्ग 17) के समान भी है, जिनका सामान्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns^2np^5 होता है। हैलोजनों की तरह, हाइड्रोजन भी एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके ऋणावेशित आयन (H^-) बना सकता है और सहसंयोजी बंध भी बना सकता है। इन समानताओं के कारण, आवर्त सारणी में हाइड्रोजन के स्थान को लेकर हमेशा विवेचना का विषय रहा है। इसके अद्वितीय गुणों के कारण, इसे अक्सर आवर्त सारणी में एक विशेष स्थान दिया जाता है।

प्रश्न 9.2.

हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम लिखिए तथा बताइए कि इन समस्थानिकों का द्रव्यामान अनुगात क्या है?
Solution:

हाइड्रोजन के तीन मुख्य समस्थानिक हैं:

  1. प्रोटियम (¹H): यह सबसे सामान्य समस्थानिक है और इसमें एक प्रोटॉन होता है।
  2. ड्यूटेरियम (²H या D): इसमें एक प्रोटॉन और एक न्यूट्रॉन होता है।
  3. ट्रिटियम (³H या T): इसमें एक प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन होते हैं।

इन समस्थानिकों के द्रव्यमान अनुपात लगभग इस प्रकार हैं:

द्रव्यमान अनुपात = प्रोटियम : ड्यूटेरियम : ट्रिटियम ≈ 1 : 2 : 3

(अधिक सटीक मान 1.008 : 2.014 : 3.016 है, जो लगभग 1:2:3 के अनुपात में होता है।)

प्रश्न 9.3.

सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन एक परमाण्विक की अपेक्षा द्विपरमाण्विक रूप में क्यों माना जाता है?
Solution:

सामान्य परिस्थितियों में हाइड्रोजन द्विपरमाण्विक अणु (H_2) के रूप में पाया जाता है क्योंकि दो हाइड्रोजन परमाणुओं के बीच बनने वाला सहसंयोजी बंध (H-H) काफी मजबूत होता है। इस H-H आबंध को तोड़ने के लिए उच्च ऊर्जा की आवश्यकता होती है। लगभग 2000 K तापमान पर भी, डाइहाइड्रोजन (H_2) का केवल लगभग 0.081% ही वियोजित होकर एक-परमाणु हाइड्रोजन (H) में बदल पाता है। इस उच्च आबंध ऊर्जा के कारण, हाइड्रोजन सामान्य तापमान और दबाव पर द्विपरमाण्विक अणु के रूप में स्थिर रहता है।

प्रश्न 9.4.

'कोल गैसीकरण' से प्राप्त डाइहाइड्रोजन का उत्पादन कैसे बढ़ाया जा सकता है?
Solution:

कोल गैसीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें कोयले (कार्बन) की भाप के साथ उच्च तापमान पर अभिक्रिया कराकर सिनगैस (कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण) का उत्पादन किया जाता है। इसका समीकरण इस प्रकार है:

C(s) + H_2O(g) \xrightarrow{\Delta} CO(g) + H_2(g)

इस प्रक्रिया से प्राप्त सिनगैस में कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) भी होती है। डाइहाइड्रोजन (H_2) का उत्पादन बढ़ाने के लिए, सिनगैस में उपस्थित कार्बन मोनोऑक्साइड की भाप के साथ आयरन क्रोमेट जैसे उत्प्रेरक की उपस्थिति में उच्च तापमान पर अभिक्रिया कराई जाती है। इस अभिक्रिया को 'वाटर गैस शिफ्ट अभिक्रिया' कहते हैं:

CO(g) + H_2O(g) \xrightarrow{\text{उत्प्रेरक} \Delta} CO_2(g) + H_2(g)

इस अभिक्रिया में, कार्बन मोनोऑक्साइड का ऑक्सीकरण होकर कार्बन डाइऑक्साइड बन जाता है और अतिरिक्त हाइड्रोजन गैस उत्पन्न होती है, जिससे डाइहाइड्रोजन का कुल उत्पादन बढ़ जाता है।

प्रश्न 9.5.

विद्युत-अपघटन विधि द्वारा डाइहाइड्रोजन बृहद् स्तर पर किस प्रकार बनाई जा सकती है? इस प्रक्रम में वैद्युत अपघद्य की क्या भूमिका है?
Solution:

बृहद् स्तर पर डाइहाइड्रोजन का उत्पादन जल के विद्युत अपघटन द्वारा किया जा सकता है। शुद्ध जल विद्युत का कुचालक होता है, इसलिए विद्युत अपघटन प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए जल में थोड़ी मात्रा में अम्ल (जैसे H_2SO_4) या क्षार (जैसे KOH) मिलाया जाता है। यह अम्ल या क्षार जल में घुलकर आयन उत्पन्न करते हैं, जिससे जल की चालकता बढ़ जाती है और विद्युत धारा का प्रवाह संभव हो पाता है।

विद्युत अपघटन के दौरान, प्लैटिनम जैसे निष्क्रिय इलेक्ट्रोड का उपयोग किया जाता है। कैथोड पर जल के अणु अपचयित होकर हाइड्रोजन गैस (H_2) बनाते हैं, जबकि एनोड पर जल के अणु ऑक्सीकृत होकर ऑक्सीजन गैस (O_2) बनाते हैं। अभिक्रिया इस प्रकार है:

2H_2O(l) \xrightarrow{\text{विद्युत अपघटन}} 2H_2(g) + O_2(g)

इस प्रक्रम में वैद्युत अपघद्य (अम्ल या क्षार) की भूमिका जल की चालकता को बढ़ाना है, जिससे विद्युत धारा प्रवाहित हो सके और जल का अपघटन होकर हाइड्रोजन और ऑक्सीजन गैसें उत्पन्न हो सकें।

प्रश्न 9.6.

निम्न समीकरणों को पूरा कीजिए-
  1. H_2(g) + M_m O_o(s) \xrightarrow{\Delta}
  2. CO(g) + H_2(g) \xrightarrow{\Delta}
Solution:

दिए गए समीकरणों को पूरा करने पर निम्नलिखित उत्पाद प्राप्त होते हैं:

  1. H_2(g) + M_m O_o(s) \xrightarrow{\Delta} m M(s) + o H_2O(g)

यह अभिक्रिया हाइड्रोजन द्वारा धातु ऑक्साइड के अपचयन को दर्शाती है। हाइड्रोजन एक अपचायक के रूप में कार्य करता है और धातु ऑक्साइड (M_m O_o) से ऑक्सीजन को हटाकर संबंधित धातु (M) और जल (H_2O) बनाता है।

  1. CO(g) + H_2(g) \xrightarrow{\Delta} CH_3OH(l)

यह अभिक्रिया सिनगैस (कार्बन मोनोऑक्साइड और हाइड्रोजन का मिश्रण) से मेथनॉल (CH_3OH) के संश्लेषण को दर्शाती है। यह अभिक्रिया सामान्यतः उच्च दाब और उत्प्रेरक (जैसे कॉपर-जिंक ऑक्साइड) की उपस्थिति में की जाती है।

Common mistakes

  • आवर्त सारणी में हाइड्रोजन के स्थान को लेकर भ्रमित होना।
  • समस्थानिकों के द्रव्यमान अनुपात की गणना में त्रुटियाँ करना।
  • रासायनिक समीकरणों को लिखने या संतुलित करने में गलतियाँ करना।
  • उत्पादन विधियों के लिए आवश्यक परिस्थितियों को याद रखने में कठिनाई।

Revision tips

  • हाइड्रोजन के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास और आवर्त सारणी में इसकी स्थिति के बीच संबंध को समझें।
  • सभी समस्थानिकों के नाम, प्रतीक और द्रव्यमान अनुपात को सारणीबद्ध करें।
  • हाइड्रोजन उत्पादन की विभिन्न विधियों के लिए रासायनिक समीकरणों का अभ्यास करें।
  • अध्याय में दिए गए सभी समीकरणों को पूरा करने का अभ्यास करें।

Practice MCQs

Q1. हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?

Q2. हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों के नाम क्या हैं?

Q3. कोल गैसीकरण में मुख्य उत्पाद क्या हैं?

Q4. जल के विद्युत अपघटन से एनोड पर कौन सी गैस प्राप्त होती है?

Q5. हाइड्रोजन के समस्थानिकों का द्रव्यमान अनुपात लगभग कितना होता है?

Frequently asked questions

कक्षा 11 रसायन विज्ञान के अध्याय 9 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

अध्याय 9 'हाइड्रोजन' में हाइड्रोजन का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास, आवर्त सारणी में इसका स्थान, इसके समस्थानिक (प्रोटियम, ड्यूटेरियम, ट्रिटियम), सामान्य परिस्थितियों में इसका द्विपरमाण्विक रूप में अस्तित्व, और कोल गैसीकरण व विद्युत अपघटन जैसी उत्पादन विधियों को शामिल किया गया है।

हाइड्रोजन के समस्थानिकों के नाम और उनके द्रव्यमान अनुपात क्या हैं?

हाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं: प्रोटियम (¹H), ड्यूटेरियम (²H या D), और ट्रिटियम (³H या T)। इनका द्रव्यमान अनुपात लगभग 1:2:3 होता है।

कोल गैसीकरण विधि से हाइड्रोजन का उत्पादन कैसे होता है?

कोल गैसीकरण में, गर्म कोक (कार्बन) पर भाप प्रवाहित करके कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और डाइहाइड्रोजन (H₂) का मिश्रण (वाटर गैस) बनाया जाता है। इस मिश्रण में CO को भाप के साथ अभिक्रिया कराकर अधिक H₂ प्राप्त किया जा सकता है।

जल के विद्युत अपघटन से हाइड्रोजन प्राप्त करने के लिए क्या आवश्यक है?

जल के विद्युत अपघटन से हाइड्रोजन प्राप्त करने के लिए, जल में थोड़ी मात्रा में अम्ल या क्षार मिलाकर उसकी चालकता बढ़ाई जाती है, और फिर प्लैटिनम इलेक्ट्रोड का उपयोग करके विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है।

क्या हाइड्रोजन को आवर्त सारणी में एक निश्चित स्थान देना आसान है?

नहीं, हाइड्रोजन के गुण क्षार धातुओं और हैलोजनों दोनों से मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण आवर्त सारणी में इसका स्थान हमेशा चर्चा का विषय रहा है। इसे अक्सर अलग से दर्शाया जाता है।

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