कक्षा 11 रसायन विज्ञान अध्याय 6: ऊष्मागतिकी NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 रसायन विज्ञान के अध्याय 6, ऊष्मागतिकी के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें ऊष्मागतिकी के मूल सिद्धांतों को शामिल किया गया है, जैसे कि अवस्था फलन की प्रकृति, रुद्धोष्म प्रक्रम की स्थितियाँ, तत्वों की मानक संदर्भ अवस्था एन्थेल्पी, और एन्थेल्पी व आंतरिक ऊर्जा के बीच संबंध। समाधानों में मेथेन के दहन और विरचन एन्थेल्पी की गणना जैसे उदाहरण भी शामिल हैं, जो छात्रों को इन अवधारणाओं को समझने में मदद करते हैं। यह अध्याय यह भी बताता है कि किस तापमान पर एक अभिक्रिया संभव होगी, जो एन्ट्रॉपी परिवर्तन पर निर्भर करती है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त मार्गदर्शिका प्रदान करते हैं, जिससे वे जटिल अवधारणाओं को आसानी से समझ सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectरसायन विज्ञान
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. ऊष्मागतिकी

Chapter summary

कक्षा 11 रसायन विज्ञान के अध्याय 6, ऊष्मागतिकी के लिए ये NCERT समाधान, ऊष्मागतिकी के मुख्य सिद्धांतों पर केंद्रित हैं। इसमें अवस्था फलन की परिभाषा, रुद्धोष्म प्रक्रम की विशेषताएँ (q=0), तत्वों की मानक एन्थेल्पी (शून्य), और दहन एन्थेल्पी से विरचन एन्थेल्पी की गणना जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में अभिक्रियाओं की स्वतःप्रवर्तितता को समझने के लिए एन्ट्रॉपी परिवर्तन और तापमान के प्रभाव पर भी प्रकाश डाला गया है। यह खंड छात्रों को ऊष्मागतिकी की मूलभूत अवधारणाओं को स्पष्ट करने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • ऊष्मागतिकी अवस्था फलन की प्रकृति को समझना।
  • रुद्धोष्म प्रक्रम की शर्तों को पहचानना।
  • तत्वों की संदर्भ अवस्था में एन्थेल्पी के मान को जानना।
  • आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन और एन्थेल्पी परिवर्तन के बीच संबंध स्थापित करना।
  • दहन एन्थेल्पी का उपयोग करके विरचन एन्थेल्पी की गणना करना।
  • अभिक्रिया की स्वतःप्रवर्तितता पर तापमान के प्रभाव का विश्लेषण करना।

Topics covered

Paper topics

  • ऊष्मागतिकी अवस्था फलन
  • पथ फलन
  • रुद्धोष्म प्रक्रम
  • मानक एन्थेल्पी
  • मानक संदर्भ अवस्था
  • दहन एन्थेल्पी
  • विरचन एन्थेल्पी
  • आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन
  • एन्थेल्पी परिवर्तन
  • एन्ट्रॉपी परिवर्तन
  • अभिक्रिया की स्वतःप्रवर्तितता
  • तापमान का प्रभाव

Important topics

  • ऊष्मागतिकी अवस्था फलन की प्रकृति
  • रुद्धोष्म प्रक्रम की शर्तें (q=0)
  • तत्वों की संदर्भ अवस्था में एन्थेल्पी का मान
  • दहन एन्थेल्पी से विरचन एन्थेल्पी की गणना
  • एन्ट्रॉपी परिवर्तन और अभिक्रिया की स्वतःप्रवर्तितता

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Questions and Solutions

प्रश्न 6.1

सही उत्तर चुनिए—ऊष्मागतिकी अवस्था फलन एक राशि है—
  1. जो ऊष्मा-परिवर्तनों के लिए प्रयुक्त होती है।
  2. जिसका मान पथ पर निर्भः नहीं करता है।
  3. जो दाब-आयतन कार्य की गणना करने में प्रयुक्त होर्तः है।
  4. जिसका मान केवल ताप पर निर्भर करता है।
Solution: ऊष्मागतिकी में, अवस्था फलन (state function) वह राशि होती है जिसका मान केवल निकाय की वर्तमान अवस्था पर निर्भर करता है, न कि उस पथ पर जिससे वह अवस्था प्राप्त हुई है। उदाहरण के लिए, दाब (P), आयतन (V), तापमान (T), और आंतरिक ऊर्जा (U) अवस्था फलन हैं। पथ फलन (path function) वे होते हैं जो पथ पर निर्भर करते हैं, जैसे ऊष्मा (q) और कार्य (w)। इसलिए, सही विकल्प वह है जो बताता है कि अवस्था फलन का मान पथ पर निर्भर नहीं करता है।

उत्तर—(ii) जिसका मान पथ पर निर्भर नहीं करता है।

प्रश्न 6.2

एक प्रक्रम के रुद्धोध्य परिस्थितियों में होने के लिए---
  1. <math>\Delta T = 0</math>
  2. <math>\Delta p = 0</math>
  3. <math>q = 0</math>
  4. <math>w = 0</math>
Solution: रुद्धोष्म (adiabatic) प्रक्रम वह होता है जिसमें निकाय और उसके परिवेश के बीच ऊष्मा (heat) का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है। इसका अर्थ है कि निकाय पूरी तरह से विलगित (isolated) होता है जहाँ तक ऊष्मा का संबंध है। गणितीय रूप से, रुद्धोष्म प्रक्रम के लिए ऊष्मा परिवर्तन (<math>q</math>) शून्य होता है। अन्य विकल्प रुद्धोष्म प्रक्रम की आवश्यक शर्त नहीं हैं: <math>\Delta T = 0</math> समतापी (isothermal) प्रक्रम में होता है, <math>\Delta p = 0</math> समदाबी (isobaric) प्रक्रम में होता है, और <math>w = 0</math> का अर्थ है कि कोई कार्य नहीं किया गया है, जो रुद्धोष्म प्रक्रम में हो भी सकता है और नहीं भी।

उत्तर—(iii) <math>q = 0</math>

प्रश्न 6.3

सभी तत्वों की एन्धेल्पी उनकी संदर्भ-अवस्था में होती है---
  1. इकाई
  2. शून्य
  3. < 0
  4. सभी तत्वों के लिए भिन्न होती है।
Solution: ऊष्मागतिकी में, किसी भी तत्व की उसकी सबसे स्थिर अवस्था में, एक निश्चित तापमान (आमतौर पर 298 K) और दाब (1 bar) पर, एन्थेल्पी को मानक एन्थेल्पी (<math>H^{\circ}</math>) कहा जाता है। परिपाटी के अनुसार, सभी तत्वों की उनकी मानक संदर्भ-अवस्था में मानक एन्थेल्पी का मान शून्य (<math>H^{\circ} = 0</math>) माना जाता है। उदाहरण के लिए, कार्बन के लिए ग्रेफाइट रूप (graphite form) उसकी संदर्भ अवस्था है, और ऑक्सीजन के लिए द्विपरमाणुक गैस (<math>O_2(g)</math>) उसकी संदर्भ अवस्था है।

उत्तर—(ii) शून्य

प्रश्न 6.4

मेथेन के दहन के लिए <math>\Delta U^{\circ}</math> का मान -X kJ mol <sup>-1</sup> है इसके लिए <math>\Delta H^{\circ}</math> का मान होगा—
  1. = <math>\Delta U^{\circ}</math>
  2. < <math>\Delta U^{\circ}</math>
  3. > <math>\Delta U^{\circ}</math>
  4. = 0
Solution: ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, एन्थेल्पी परिवर्तन (<math>\Delta H^{\circ}</math>) और आंतरिक ऊर्जा परिवर्तन (<math>\Delta U^{\circ}</math>) के बीच संबंध इस प्रकार दिया जाता है:

<math display="block">\Delta H^{\circ} = \Delta U^{\circ} + \Delta (PV)^{\circ}</math>

स्थिर तापमान और दाब पर, यह संबंध बन जाता है:

<math display="block">\Delta H^{\circ} = \Delta U^{\circ} + \Delta n_g RT</math>

जहाँ <math>\Delta n_g</math> गैसीय उत्पादों के मोलों की संख्या और गैसीय अभिकारकों के मोलों की संख्या के बीच का अंतर है, R सार्वत्रिक गैस स्थिरांक है, और T केल्विन में तापमान है। मेथेन के दहन की अभिक्रिया है:

<math>CH_4(g) + 2O_2(g) \longrightarrow CO_2(g) + 2H_2O(l)</math>

इस अभिक्रिया में, गैसीय अभिकारकों के मोलों की संख्या = 1 (CH<sub>4</sub>) + 2 (O<sub>2</sub>) = 3। गैसीय उत्पादों के मोलों की संख्या = 1 (CO<sub>2</sub>)। (जल को द्रव माना गया है)। इसलिए, <math>\Delta n_g = 1 - 3 = -2</math>। चूंकि <math>\Delta n_g</math> ऋणात्मक है, और R तथा T धनात्मक हैं, इसलिए <math>\Delta n_g RT</math> ऋणात्मक होगा। अतः, <math>\Delta H^{\circ} = \Delta U^{\circ} + (\text{एक ऋणात्मक मान})</math>। इसका मतलब है कि <math>\Delta H^{\circ}</math> का मान <math>\Delta U^{\circ}</math> के मान से कम होगा (अर्थात, अधिक ऋणात्मक होगा)। यदि <math>\Delta U^{\circ}</math> ऋणात्मक है, तो <math>\Delta H^{\circ}</math> उससे भी अधिक ऋणात्मक होगा, इसलिए <math>\Delta H^{\circ} < \Delta U^{\circ}</math>।

उत्तर—(iii) > <math>\Delta U^{\circ}</math>

प्रश्न 6.5

मेथेन, ग्रेफाइट एवं डाइड्रोजन के लिए 298 K पर दहन एन्थेल्पी के मान क्रमशः -890.3 kJ mol <sup>-1</sup>, -393.5 kJ mol <sup>-1</sup> एवं -285.8 kJ mol <sup>-1</sup> है। CH<sub>4</sub>(g) की विरचन एन्थैल्पी क्या होगी-
  1. <math>-74.8 \text{ kJ mol}^{-1}</math>
  2. <math>-52 \cdot 27 \text{ kJ mol}^{-1}</math>
  3. <math>+ 74.8 \text{ kJ mol}^{-1}</math>
  4. <math>+ 52 \cdot 26 \text{ kJ mol}^{-1}</math>
Solution: हमें मेथेन (<math>CH_4(g)</math>) की विरचन एन्थेल्पी (<math>\Delta H_f^{\circ}</math>) ज्ञात करनी है। विरचन एन्थेल्पी वह एन्थेल्पी परिवर्तन है जो 1 मोल यौगिक के उसके तत्वों की मानक अवस्थाओं से बनने पर होता है। मेथेन के लिए विरचन अभिक्रिया है:

<math>C(\text{ग्रेफाइट}) + 2H_2(g) \longrightarrow CH_4(g)</math>

हमें निम्नलिखित दहन एन्थेल्पी दी गई हैं:
  1. मेथेन का दहन: <math>CH_4(g) + 2O_2(g) \longrightarrow CO_2(g) + 2H_2O(l)</math>, <math>\Delta H_1 = -890.3 \text{ kJ mol}^{-1}</math>
  2. कार्बन (ग्रेफाइट) का दहन: <math>C(\text{ग्रेफाइट}) + O_2(g) \longrightarrow CO_2(g)</math>, <math>\Delta H_2 = -393.5 \text{ kJ mol}^{-1}</math>
  3. डाइहाइड्रोजन का दहन: <math>H_2(g) + \frac{1}{2}O_2(g) \longrightarrow H_2O(l)</math>, <math>\Delta H_3 = -285.8 \text{ kJ mol}^{-1}</math>
हम हेस के नियम (Hess's Law) का उपयोग करके मेथेन की विरचन एन्थेल्पी ज्ञात कर सकते हैं। हमें समीकरण (2) को 1 से गुणा करना होगा, समीकरण (3) को 2 से गुणा करना होगा, और समीकरण (1) को घटाना होगा ताकि हमें वांछित विरचन अभिक्रिया प्राप्त हो सके।

<math>C(\text{ग्रेफाइट}) \longrightarrow C(\text{ग्रेफाइट})</math> \quad (\Delta H_2 = -393.5 \text{ kJ mol}^{-1})

<math>2H_2(g) \longrightarrow 2H_2O(l)</math> \quad (2 \times \Delta H_3 = 2 \times (-285.8) = -571.6 \text{ kJ mol}^{-1})

<math>CO_2(g) + 2H_2O(l) \longrightarrow CH_4(g) + 2O_2(g)</math> \quad (-\Delta H_1 = -(-890.3) = +890.3 \text{ kJ mol}^{-1})

इन तीनों को जोड़ने पर, हमें प्राप्त होता है:

<math>C(\text{ग्रेफाइट}) + 2H_2(g) \longrightarrow CH_4(g)</math>

इस अभिक्रिया के लिए एन्थेल्पी परिवर्तन होगा:

<math>\Delta H_f^{\circ}(CH_4) = \Delta H_2 + 2\Delta H_3 - \Delta H_1</math>

<math>\Delta H_f^{\circ}(CH_4) = (-393.5) + (-571.6) - (-890.3) \text{ kJ mol}^{-1}</math>

<math>\Delta H_f^{\circ}(CH_4) = -393.5 - 571.6 + 890.3 \text{ kJ mol}^{-1}</math>

<math>\Delta H_f^{\circ}(CH_4) = -965.1 + 890.3 \text{ kJ mol}^{-1}</math>

<math>\Delta H_f^{\circ}(CH_4) = -74.8 \text{ kJ mol}^{-1}</math>

अतः, मेथेन की विरचन एन्थेल्पी -74.8 kJ mol<sup>-1</sup> है।

उत्तर—(i) <math>-74.8 \text{ kJ mol}^{-1}</math>

प्रश्न 6.6

एक अभिक्रिया <math>A + B \rightarrow C + D + q</math> के लिए एन्ट्रांपी परिवर्तन धनात्मक पाया गया। यह अभिक्रिया संभव होगी---
  1. उच्च ताप पर
  2. केवल निम्न ताप पर
  3. सभी तापों पर
  4. यह अभिक्रिया संभव नहीं होगी।
Solution: किसी अभिक्रिया की स्वतःप्रवर्तितता (spontaneity) का निर्धारण गिब्स मुक्त ऊर्जा परिवर्तन (<math>\Delta G</math>) द्वारा किया जाता है। गिब्स मुक्त ऊर्जा समीकरण है:

<math display="block">\Delta G = \Delta H - T\Delta S</math>

जहाँ <math>\Delta H</math> एन्थेल्पी परिवर्तन है, T केल्विन में तापमान है, और <math>\Delta S</math> एन्ट्रॉपी परिवर्तन है। एक अभिक्रिया स्वतःप्रवर्तित तब होती है जब <math>\Delta G</math> ऋणात्मक हो। प्रश्न में दिया गया है कि अभिक्रिया के लिए एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक है (<math>\Delta S > 0</math>)। अभिक्रिया <math>A + B \rightarrow C + D + q</math> में, '+ q' इंगित करता है कि अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (exothermic) है, जिसका अर्थ है कि एन्थेल्पी परिवर्तन ऋणात्मक है (<math>\Delta H < 0</math>)। अब, गिब्स मुक्त ऊर्जा समीकरण में इन मानों को रखें: <math>\Delta G = (\text{ऋणात्मक मान}) - T(\text{धनात्मक मान})</math> <math>\Delta G = (\text{ऋणात्मक मान}) - (\text{धनात्मक मान})</math> यहाँ, <math>\Delta H</math> ऋणात्मक है और <math>T\Delta S</math> भी ऋणात्मक होगा क्योंकि T धनात्मक है और <math>\Delta S</math> धनात्मक है, इसलिए <math>T\Delta S</math> का गुणनफल धनात्मक होगा, और समीकरण में यह पद ऋणात्मक के रूप में है। <math>\Delta G = \Delta H - T\Delta S</math> चूंकि <math>\Delta H</math> ऋणात्मक है और <math>\Delta S</math> धनात्मक है, तो <math>-T\Delta S</math> पद हमेशा ऋणात्मक होगा। इसलिए, <math>\Delta G = (\text{ऋणात्मक}) + (\text{ऋणात्मक})</math>। इस प्रकार, <math>\Delta G</math> हमेशा ऋणात्मक होगा, चाहे तापमान कुछ भी हो। अतः, यह अभिक्रिया सभी तापों पर संभव होगी।

उत्तर—(iii) सभी तापों पर

Common mistakes

  • अवस्था फलन और पथ फलन के बीच अंतर को समझने में भ्रम।
  • रुद्धोष्म प्रक्रम में ऊष्मा (q) के शून्य होने की शर्त को गलत समझना।
  • दहन एन्थेल्पी से विरचन एन्थेल्पी की गणना करते समय समीकरणों को संतुलित करने में त्रुटियाँ।
  • अभिक्रिया की स्वतःप्रवर्तितता के लिए एन्ट्रॉपी और तापमान के प्रभाव को गलत लागू करना।

Revision tips

  • प्रत्येक अवस्था फलन की परिभाषा और उसके गुणों को स्पष्ट रूप से समझें।
  • रुद्धोष्म प्रक्रम की मुख्य शर्त (q=0) को याद रखें और संबंधित प्रश्नों का अभ्यास करें।
  • दहन और विरचन एन्थेल्पी से संबंधित गणनाओं के लिए समीकरणों को सही ढंग से लिखना और संतुलित करना सीखें।
  • अभिक्रियाओं की स्वतःप्रवर्तितता के लिए गिब्स मुक्त ऊर्जा (हालांकि इस खंड में सीधे उल्लेखित नहीं है, यह संबंधित है) और एन्ट्रॉपी-तापमान संबंध के महत्व को समझें।

Practice MCQs

Q1. ऊष्मागतिकी में, एक अवस्था फलन (state function) की क्या विशेषता होती है?

Q2. एक प्रक्रम को रुद्धोष्म (adiabatic) कब कहा जाता है?

Q3. सभी तत्वों की उनकी संदर्भ-अवस्था में मानक एन्थेल्पी का मान कितना होता है?

Q4. यदि किसी अभिक्रिया के लिए &lt;math&gt;\Delta U^{\circ}&lt;/math&gt; ऋणात्मक है, तो &lt;math&gt;\Delta H^{\circ}&lt;/math&gt; का मान क्या होगा (मान लें कि गैसें शामिल हैं)?

Q5. एक अभिक्रिया के लिए एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक है। यह अभिक्रिया किस तापमान पर सबसे अधिक संभव होगी?

Frequently asked questions

ऊष्मागतिकी में अवस्था फलन क्या होता है?

ऊष्मागतिकी में अवस्था फलन एक ऐसी राशि है जिसका मान केवल निकाय की वर्तमान अवस्था पर निर्भर करता है, न कि उस पथ पर जिससे वह अवस्था प्राप्त हुई है। उदाहरण के लिए, दाब, आयतन, तापमान और आंतरिक ऊर्जा अवस्था फलन हैं।

रुद्धोष्म प्रक्रम की मुख्य विशेषता क्या है?

रुद्धोष्म प्रक्रम की मुख्य विशेषता यह है कि इसमें निकाय और उसके परिवेश के बीच ऊष्मा (heat) का कोई आदान-प्रदान नहीं होता है। गणितीय रूप से, इसे &lt;math&gt;q = 0&lt;/math&gt; द्वारा दर्शाया जाता है।

सभी तत्वों की मानक संदर्भ अवस्था में एन्थेल्पी का मान शून्य क्यों माना जाता है?

यह एक परिपाटी (convention) है। किसी भी तत्व की सबसे स्थिर अवस्था को मानक संदर्भ अवस्था माना जाता है और उसकी एन्थेल्पी को शून्य के बराबर निर्धारित किया जाता है। यह अन्य यौगिकों की विरचन एन्थेल्पी की गणना को सरल बनाता है।

मेथेन (CH4) की विरचन एन्थेल्पी की गणना कैसे की जाती है?

मेथेन की विरचन एन्थेल्पी की गणना उसके तत्वों (कार्बन ग्रेफाइट और हाइड्रोजन गैस) से मेथेन बनने की अभिक्रिया की एन्थेल्पी परिवर्तन को मापकर की जाती है। इसके लिए दहन एन्थेल्पी के मानों का उपयोग करके हेस के नियम के अनुसार गणना की जाती है।

क्या उच्च तापमान पर सभी अभिक्रियाएँ संभव होती हैं?

नहीं, सभी अभिक्रियाएँ उच्च तापमान पर संभव नहीं होतीं। अभिक्रिया की स्वतःप्रवर्तितता एन्थेल्पी परिवर्तन (&lt;math&gt;\Delta H&lt;/math&gt;) और एन्ट्रॉपी परिवर्तन (&lt;math&gt;\Delta S&lt;/math&gt;) दोनों पर निर्भर करती है। यदि एन्ट्रॉपी परिवर्तन धनात्मक है, तो उच्च तापमान पर अभिक्रिया के संभव होने की संभावना बढ़ जाती है।

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