कक्षा 11 रसायन विज्ञान: अध्याय 3 - तत्वों का वर्गीकरण तथा गुणधर्मों में आवर्तिता NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 11 रसायन विज्ञान के अध्याय 3, 'तत्वों का वर्गीकरण तथा गुणधर्मों में आवर्तिता' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें आवर्त सारणी के विकास, मेंडलीव के आवर्त नियम, आधुनिक आवर्त नियम और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर तत्वों की व्यवस्था को समझाया गया है। समाधानों में परमाणु त्रिज्या, आयनिक त्रिज्या, क्वांटम संख्याओं के अनुप्रयोग और विभिन्न तत्वों की आवर्त सारणी में स्थिति का विश्लेषण शामिल है। यह सामग्री छात्रों को आवर्ती गुणों की समझ विकसित करने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | रसायन विज्ञान |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. तत्वों का वर्गीकरण तथा गुणधर्मो में आवर्तिता |
Chapter summary
कक्षा 11 रसायन विज्ञान के अध्याय 3 के ये NCERT समाधान तत्वों के वर्गीकरण के ऐतिहासिक विकास और आधुनिक आवर्त सारणी की संरचना पर केंद्रित हैं। इसमें मेंडलीव के परमाणु भार पर आधारित वर्गीकरण से लेकर आधुनिक आवर्त नियम के परमाणु संख्या पर आधारित वर्गीकरण तक के अंतर को स्पष्ट किया गया है। समाधानों में क्वांटम संख्याओं के आधार पर तत्वों की संख्या का निर्धारण, आवर्त और वर्ग में तत्वों की स्थिति और परमाणु व आयनिक त्रिज्या जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को शामिल किया गया है।
Learning outcomes
- आवर्त सारणी में तत्वों की व्यवस्था के भौतिक आधार को समझना।
- मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम के बीच मुख्य अंतरों को पहचानना।
- क्वांटम संख्याओं का उपयोग करके आवर्त में तत्वों की संख्या का निर्धारण करना।
- परमाणु क्रमांक के आधार पर आवर्त सारणी में किसी तत्व की स्थिति (आवर्त और वर्ग) का पता लगाना।
- परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या की अवधारणाओं को परिभाषित करना और समझना।
Topics covered
Paper topics
- आवर्त सारणी का विकास
- मेंडलीव का आवर्त नियम
- आधुनिक आवर्त नियम
- परमाणु संख्या का महत्व
- इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
- क्वांटम संख्याएँ
- आवर्त में तत्वों की संख्या
- परमाणु त्रिज्या
- आयनिक त्रिज्या
- वर्ग में समान गुणधर्म
- तत्वों का वर्गीकरण
- आवर्ती गुणधर्म
Important topics
- आधुनिक आवर्त नियम और परमाणु संख्या का महत्व
- क्वांटम संख्याओं के आधार पर आवर्त में तत्वों की संख्या का निर्धारण
- परमाणु क्रमांक से आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति ज्ञात करना
- परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या की परिभाषाएँ
- मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम के बीच अंतर
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Questions and Solutions
प्रश्न 3.1. आवर्त सारणी में व्यवस्था का भौतिक आधार क्या है?
आवर्त सारणी में तत्वों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर व्यवस्थित किया गया है। तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास उनके रासायनिक गुणों को निर्धारित करते हैं, और समान इलेक्ट्रॉनिक विन्यास वाले तत्वों को एक साथ समूहीकृत किया जाता है।
प्रश्न 3.2. मेंडलीव ने किस महत्त्वपूर्ण गुणधर्म को अपनी आवर्त सारणी में तत्त्वों के वर्गीकरण का आधार बनाया? क्या वे उस पर दढ रह पाए?
मेंडलीव ने तत्वों के वर्गीकरण का मुख्य आधार उनके परमाणु भार को बनाया था। उन्होंने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया और समान गुणधर्म वाले तत्वों को एक ही ऊर्ध्वाधर स्तंभ (समूह) में रखा।
हालांकि, मेंडलीव अपने इस सिद्धांत पर पूरी तरह से दढ नहीं रह पाए। कुछ स्थानों पर, उन्होंने अधिक क्रियाशील तत्व को कम क्रियाशील तत्व से पहले रखा ताकि समान गुणधर्म वाले तत्व एक ही समूह में आ सकें (जैसे, टेल्यूरियम का परमाणु भार आयोडीन से अधिक है, फिर भी उसे पहले रखा गया)। इसके अतिरिक्त, समस्थानिकों (isotopes) के लिए आवर्त सारणी में कोई स्थान नहीं था, क्योंकि उनके परमाणु भार भिन्न होते हैं।
प्रश्न 3.3. मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में मौलिक अंतर क्या है?
मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम के बीच मौलिक अंतर उनके द्वारा तत्वों के गुणधर्मों को संबंधित करने वाले आधार में है:
- मेंडलीव का आवर्त नियम: इस नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु भारों के आवर्ती फलन होते हैं।
- आधुनिक आवर्त नियम: इस नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक तथा रासायनिक गुणधर्म उनके परमाणु क्रमांकों (अर्थात् प्रोटॉनों की संख्या) के आवर्ती फलन होते हैं।
यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि परमाणु संख्या एक अधिक मौलिक गुण है और यह तत्वों के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास को सीधे तौर पर निर्धारित करती है, जो उनके रासायनिक व्यवहार की कुंजी है।
प्रश्न 3.4. क्वांटम संख्याओं के आधार पर यह सिद्ध कीजिए कि आवर्त सारणी के छठवें आवर्त में 32 तत्त्व होने चाहिए।
किसी आवर्त में तत्वों की संख्या उस आवर्त में भरे जाने वाले विभिन्न उपकोशों (subshells) में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या द्वारा निर्धारित होती है। छठवें आवर्त के लिए मुख्य क्वांटम संख्या है।
जब , तो दिगंशी क्वांटम संख्या के संभावित मान 0, 1, 2, 3, 4, 5 हो सकते हैं। ये मान क्रमशः 6s, 6p, 6d, 6f, 6g, और 6h उपकोशों को दर्शाते हैं।
विभिन्न उपकोशों में कक्षकों की संख्या होती है, और प्रत्येक कक्षक में अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। इसलिए, उपकोश में अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या होती है।
- l=0 (6s उपकोश): 1 कक्षक, अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन।
- l=1 (6p उपकोश): 3 कक्षक, अधिकतम 6 इलेक्ट्रॉन।
- l=2 (6d उपकोश): 5 कक्षक, अधिकतम 10 इलेक्ट्रॉन।
- l=3 (6f उपकोश): 7 कक्षक, अधिकतम 14 इलेक्ट्रॉन।
- l=4 (6g उपकोश): 9 कक्षक, अधिकतम 18 इलेक्ट्रॉन।
- l=5 (6h उपकोश): 11 कक्षक, अधिकतम 22 इलेक्ट्रॉन।
हालांकि, छठवें आवर्त में, ऊर्जा के बढ़ते क्रम के अनुसार, इलेक्ट्रॉन पहले 6s, फिर 4f, 5d और अंत में 6p उपकोशों में भरे जाते हैं। 6g और 6h उपकोशों में इलेक्ट्रॉन भरने से पहले ही छठवां आवर्त पूरा हो जाता है।
अतः, छठवें आवर्त में भरे जाने वाले उपकोश और उनमें अधिकतम इलेक्ट्रॉनों की संख्या इस प्रकार है:
- 6s: 2 इलेक्ट्रॉन
- 4f: 14 इलेक्ट्रॉन
- 5d: 10 इलेक्ट्रॉन
- 6p: 6 इलेक्ट्रॉन
छठवें आवर्त में कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 2 + 14 + 10 + 6 = 32 इलेक्ट्रॉन।
चूंकि प्रत्येक इलेक्ट्रॉन एक तत्व का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए छठवें आवर्त में 32 तत्व होते हैं।
प्रश्न 3.5. आवर्त और वर्ग के पदों में यह बताइए कि Z = 14 कहाँ स्थित होगा?
परमाणु क्रमांक (Z) = 14 वाला तत्व सिलिकॉन (Si) है।
इस तत्व की आवर्त सारणी में स्थिति ज्ञात करने के लिए, हम इसका इलेक्ट्रॉनिक विन्यास लिखते हैं:
Z = 14 का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास है:
आवर्त (Period): आवर्त की संख्या तत्व के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास में मुख्य क्वांटम संख्या (n) के उच्चतम मान द्वारा निर्धारित होती है। यहाँ, उच्चतम n का मान 3 है (3s और 3p उपकोशों में)। इसलिए, यह तत्व तीसरे आवर्त में स्थित है।
वर्ग (Group): वर्ग की संख्या बाहरी कोश के इलेक्ट्रॉनों की संख्या पर निर्भर करती है। यदि बाहरी कोश में p उपकोश में इलेक्ट्रॉन भरे जा रहे हैं, तो वर्ग संख्या = (s उपकोश के इलेक्ट्रॉन + p उपकोश के इलेक्ट्रॉन) + 10 (d ब्लॉक के लिए)।
यहाँ, बाहरी कोश (n=3) में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 3s² (2 इलेक्ट्रॉन) + 3p² (2 इलेक्ट्रॉन) = 4 इलेक्ट्रॉन।
चूंकि यह p-ब्लॉक तत्व है, वर्ग संख्या = (s इलेक्ट्रॉनों की संख्या + p इलेक्ट्रॉनों की संख्या) + 10 = (2 + 2) + 10 = 14।
अतः, परमाणु क्रमांक 14 वाला तत्व (Si) आवर्त सारणी के तीसरे आवर्त और वर्ग संख्या 14 में स्थित है।
प्रश्न 3.6. उस तत्त्व का परमाणु क्रमांक लिखिए, जो आवर्त सारणी में तीसरे आवर्त और 17 वें वर्ग में स्थित होता है?
तीसरे आवर्त में मुख्य क्वांटम संख्या होती है। 17वें वर्ग में स्थित तत्व हैलोजन समूह से संबंधित होते हैं और उनके बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन होते हैं।
तीसरे आवर्त में पहले दो आवर्तों के सभी तत्व (2 + 8 = 10 तत्व) और तीसरे आवर्त के पहले दो तत्व (3s² विन्यास वाले) भरे जा चुके होते हैं। इसके बाद p-ब्लॉक के तत्व आते हैं।
17वें वर्ग के तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास इस प्रकार होता है कि उसके बाह्यतम कोश में 7 इलेक्ट्रॉन हों। तीसरे आवर्त के लिए, यह विन्यास होगा।
इस तत्व का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास होगा:
कुल इलेक्ट्रॉनों की संख्या (परमाणु क्रमांक) = 2 + 2 + 6 + 2 + 5 = 17।
अतः, तीसरे आवर्त और 17वें वर्ग में स्थित तत्व का परमाणु क्रमांक 17 है, जो क्लोरीन (Cl) है।
प्रश्न 3.7. कौन से तत्त्व का नाम निम्नलिखित द्वारा दिया गया है?
- लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा
- सी बोर्ग समूह द्वारा
- लॉरेन्स बर्कले प्रयोगशाला द्वारा: इस प्रयोगशाला के नाम पर बर्कलियम (Bk) तत्व का नाम रखा गया है, जिसका परमाणु क्रमांक 97 है।
- सी बोर्ग समूह द्वारा: प्रसिद्ध वैज्ञानिक ग्लेन टी. सीबोर्ग के नेतृत्व वाले समूह के सम्मान में सीबोर्गियम (Sg) तत्व का नाम रखा गया है, जिसका परमाणु क्रमांक 106 है।
प्रश्न 3.8. एक ही वर्ग में उपस्थित तत्त्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
एक ही वर्ग में उपस्थित तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म समान होने का मुख्य कारण उनके बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनिक विन्यास का समान होना है।
आवर्त सारणी में, एक वर्ग के सभी तत्वों के बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। उदाहरण के लिए, वर्ग 1 के सभी तत्वों (क्षार धातुएँ) के बाह्यतम कोश में एक इलेक्ट्रॉन () होता है, वर्ग 2 के तत्वों (क्षारीय मृदा धातुएँ) के बाह्यतम कोश में दो इलेक्ट्रॉन () होते हैं, और इसी प्रकार अन्य वर्गों के लिए भी।
चूंकि रासायनिक अभिक्रियाएँ मुख्य रूप से बाह्यतम कोश के इलेक्ट्रॉनों द्वारा ही नियंत्रित होती हैं, इसलिए समान बाह्यतम कोश विन्यास वाले तत्वों के रासायनिक गुणधर्म भी समान होते हैं। भौतिक गुणधर्मों में भी समानता देखी जाती है, हालांकि यह समानता रासायनिक गुणधर्मों जितनी पूर्ण नहीं होती।
प्रश्न 3.9. परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या से आप क्या समझते हैं?
परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius):
परमाणु त्रिज्या को किसी तत्व के परमाणु के नाभिक और उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी के रूप में परिभाषित किया जाता है। इसे मापने की विधि तत्व के प्रकार पर निर्भर करती है:
- सहसंयोजक त्रिज्या (Covalent Radius): अधातुओं के लिए, यह दो समान परमाणुओं के बीच सहसंयोजक बंध की लंबाई की आधी होती है। उदाहरण के लिए, क्लोरीन अणु () में दो क्लोरीन परमाणुओं के बीच की दूरी 198 pm है। अतः, क्लोरीन की सहसंयोजक त्रिज्या pm होगी।
- धात्विक त्रिज्या (Metallic Radius): धातुओं के लिए, यह धातु क्रिस्टल में दो निकटतम परमाणुओं के नाभिकों के बीच की दूरी की आधी होती है। उदाहरण के लिए, तांबे (Cu) के परमाणुओं के बीच की दूरी 256 pm होती है। अतः, तांबे की धात्विक त्रिज्या pm होगी।
आयनिक त्रिज्या (Ionic Radius):
आयनिक त्रिज्या किसी आयन (धनायन या ऋणायन) के नाभिक और उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी की आधी होती है। यह आयन के आकार को दर्शाती है।
- धनायन की त्रिज्या: धनायन (cation) बनने पर, परमाणु इलेक्ट्रॉन खो देता है, जिससे नाभिकीय आवेश प्रति इलेक्ट्रॉन बढ़ जाता है और त्रिज्या मूल परमाणु से कम हो जाती है।
- ऋणायन की त्रिज्या: ऋणायन (anion) बनने पर, परमाणु इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, जिससे इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षण बढ़ता है और प्रभावी नाभिकीय आवेश कम हो जाता है, जिससे त्रिज्या मूल परमाणु से अधिक हो जाती है।
उदाहरण के लिए, सोडियम परमाणु (Na) की त्रिज्या लगभग 186 pm होती है, जबकि सोडियम आयन () की त्रिज्या केवल 95 pm होती है। इसके विपरीत, क्लोरीन परमाणु (Cl) की त्रिज्या लगभग 99 pm होती है, जबकि क्लोराइड आयन () की त्रिज्या लगभग 181 pm होती है।
Common mistakes
- मेंडलीव के परमाणु भार आधारित नियम और आधुनिक आवर्त नियम के बीच भ्रमित होना।
- क्वांटम संख्याओं और विभिन्न उपकोशों (s, p, d, f) में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या को गलत समझना।
- परमाणु क्रमांक, आवर्त और वर्ग के बीच संबंध को ठीक से न समझ पाना।
- परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या की परिभाषाओं में अंतर स्पष्ट न कर पाना।
Revision tips
- मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम के बीच के अंतर को एक तालिका बनाकर याद करें।
- क्वांटम संख्याओं (n, l) के आधार पर विभिन्न आवर्तों में तत्वों की संख्या की गणना का अभ्यास करें।
- दिए गए परमाणु क्रमांक के लिए आवर्त सारणी में तत्व की स्थिति (आवर्त और वर्ग) ज्ञात करने का अभ्यास करें।
- परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या की परिभाषाओं और उनके मापन की विधियों को समझें।
Practice MCQs
Q1. आवर्त सारणी में तत्वों को किस आधार पर व्यवस्थित किया गया है?
Explanation: आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के अनुसार व्यवस्थित किया गया है, जो उनके रासायनिक गुणों को निर्धारित करता है।
Q2. मेंडलीव ने अपने आवर्त सारणी के वर्गीकरण का मुख्य आधार किसे बनाया था?
Explanation: मेंडलीव ने तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु भार के क्रम में व्यवस्थित किया था।
Q3. आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार, तत्वों के भौतिक और रासायनिक गुणधर्म किसके आवर्ती फलन होते हैं?
Explanation: आधुनिक आवर्त नियम कहता है कि तत्वों के गुणधर्म उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन होते हैं।
Q4. यदि n=6 हो, तो छठवें आवर्त में कितने विभिन्न प्रकार के उपकोश (l के मान) संभव हैं?
Explanation: जब n=6, तो l के मान 0, 1, 2, 3, 4, 5 हो सकते हैं, जो क्रमशः 6s, 6p, 6d, 6f, 6g, 6h उपकोशों को दर्शाते हैं।
Q5. परमाणु क्रमांक 14 वाले तत्व (Si) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास क्या है?
Explanation: परमाणु क्रमांक 14 वाले तत्व सिलिकॉन (Si) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p² होता है, जो तीसरे आवर्त और 14वें वर्ग में स्थित है।
Frequently asked questions
आवर्त सारणी में तत्वों को व्यवस्थित करने का मुख्य आधार क्या है?
आधुनिक आवर्त सारणी में तत्वों को उनके बढ़ते हुए परमाणु संख्या (प्रोटॉन की संख्या) के क्रम में व्यवस्थित किया गया है। यह व्यवस्था उनके इलेक्ट्रॉनिक विन्यास पर आधारित है।
मेंडलीव के आवर्त नियम और आधुनिक आवर्त नियम में क्या अंतर है?
मेंडलीव का नियम कहता है कि तत्वों के गुणधर्म उनके परमाणु भार के आवर्ती फलन होते हैं, जबकि आधुनिक नियम के अनुसार, तत्वों के गुणधर्म उनकी परमाणु संख्या के आवर्ती फलन होते हैं।
छठवें आवर्त में 32 तत्व क्यों होते हैं?
छठवें आवर्त में n=6 के लिए, l के मान 0, 1, 2, 3, 4, 5 (अर्थात् 6s, 6p, 6d, 6f, 6g, 6h उपकोश) संभव हैं। इन उपकोशों में कुल 1+3+5+7+9+11 = 36 कक्षक होते हैं, जिनमें अधिकतम 2 इलेक्ट्रॉन प्रति कक्षक के अनुसार 72 इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं। हालाँकि, छठवें आवर्त में केवल 6s, 6p, 6d, 6f उपकोशों में इलेक्ट्रॉन भरे जाते हैं, जो कुल 2+6+10+14 = 32 इलेक्ट्रॉन देते हैं।
परमाणु क्रमांक 14 वाला तत्व आवर्त सारणी में कहाँ स्थित होगा?
परमाणु क्रमांक 14 वाले तत्व सिलिकॉन (Si) का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 1s² 2s² 2p⁶ 3s² 3p² है। इसमें मुख्य क्वांटम संख्या (n) का अधिकतम मान 3 है, इसलिए यह तीसरे आवर्त में स्थित है। बाहरी उपकोश 3p है और इसमें 2 इलेक्ट्रॉन हैं, जो इसे वर्ग 14 (2 + 10 + 2 = 14) में रखता है।
एक ही वर्ग के तत्वों के गुणधर्म समान क्यों होते हैं?
एक ही वर्ग के तत्वों के बाह्यतम कोश का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, अर्थात् उनके बाह्यतम कोश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या समान होती है। यही समानता उनके रासायनिक गुणधर्मों में समानता का कारण बनती है।
परमाणु त्रिज्या और आयनिक त्रिज्या में क्या अंतर है?
परमाणु त्रिज्या किसी तत्व के परमाणु के नाभिक और उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी की आधी होती है। आयनिक त्रिज्या किसी आयन (धनायन या ऋणायन) के नाभिक और उसके सबसे बाहरी इलेक्ट्रॉन के बीच की दूरी की आधी होती है।
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