CBSE Class 10 Hindi Chapter 13: तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र NCERT Solutions
This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 13 of the CBSE Class 10 Hindi textbook, 'Teesri Kasam Ke Shilpkar Shailendra'. It delves into the life, contributions, and artistic philosophy of the renowned lyricist and filmmaker Shailendra. The solutions cover key aspects of the film 'Teesri Kasam', its awards, the roles played by its actors, and Shailendra's vision as a filmmaker and artist. Students will find explanations regarding the film's critical reception, its unique narrative, and Shailendra's perspective on art and its purpose. These solutions are designed to help students grasp the nuances of the chapter, understand Shailendra's creative genius, and prepare effectively for their Hindi examinations by offering clear and concise answers to all textbook questions.
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 13 |
Chapter summary
Chapter 13, 'Teesri Kasam Ke Shilpkar Shailendra', focuses on the life and cinematic contributions of Shailendra, a celebrated lyricist and producer. The NCERT Solutions for this chapter address questions about the film 'Teesri Kasam', its accolades, the actors' performances, and Shailendra's directorial and production insights. It also explores Shailendra's artistic philosophy and his views on cinema's role in society, providing students with a comprehensive understanding of the chapter's content.
Learning outcomes
- Understand the significance of the film 'Teesri Kasam' and its awards.
- Identify the main actors and their roles in 'Teesri Kasam'.
- Learn about Shailendra's career as a filmmaker and lyricist.
- Analyze Shailendra's philosophy on art and its societal impact.
- Comprehend the reasons behind the film's initial lack of buyers.
- Recognize Shailendra's perspective on the responsibility of an artist.
Topics covered
Paper topics
- शैलेंद्र का जीवन और कार्य
- फिल्म 'तीसरी कसम'
- फिल्म के पुरस्कार
- राज कपूर का निर्देशन
- राज कपूर और वहीदा रहमान की भूमिकाएं
- शैलेंद्र का फिल्म निर्माण
- कलाकार का कर्तव्य
- कला और समाज
- साहित्यिक रचना का फिल्म रूपांतरण
- भावना प्रधान फिल्में
Important topics
- शैलेंद्र का कलात्मक दृष्टिकोण
- फिल्म 'तीसरी कसम' का महत्व
- कलाकार की सामाजिक जिम्मेदारी
- राज कपूर का अभिनय और निर्देशन
- फिल्म का साहित्यिक मूल्य
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
फिल्म 'तीसरी कसम' को कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया था। इसे राष्ट्रपति द्वारा स्वर्णपदक प्रदान किया गया था। इसके अतिरिक्त, बंगाल फ़िल्म जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने इसे सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का पुरस्कार दिया। इस फिल्म को मास्को फ़िल्म फेस्टिवल में भी पुरस्कृत किया गया था, जो इसकी अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को दर्शाता है।
प्रश्न 2
महान गीतकार और निर्माता शैलेंद्र ने अपने जीवनकाल में केवल एक ही फिल्म का निर्माण किया था, जिसका नाम 'तीसरी कसम' था। यह फिल्म उनकी एकमात्र निर्मित फिल्म के रूप में जानी जाती है।
प्रश्न 3
राजकपूर एक प्रसिद्ध अभिनेता और निर्देशक थे। उन्होंने कई सफल फिल्मों का निर्देशन किया है। उनके द्वारा निर्देशित कुछ प्रमुख फ़िल्में हैं: 'संगम', 'मेरा नाम जोकर', 'बॉबी', 'श्री 420', और 'सत्यम् शिवम् सुन्दरम्'।
प्रश्न 4
फिल्म 'तीसरी कसम' में मुख्य भूमिकाओं में राज कपूर और वहीदा रहमान थे। राज कपूर ने फिल्म में 'हीरामन' नामक नायक का किरदार निभाया था, जो एक गाड़ीवान था। वहीदा रहमान ने 'हीराबाई' की भूमिका निभाई थी, जो एक लोकनर्तकी थी।
प्रश्न 5
प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र ने फिल्म 'तीसरी कसम' का निर्माण किया था। यह उनकी एकमात्र निर्मित फिल्म थी, जिसे उन्होंने अपने कलात्मक दृष्टिकोण को व्यक्त करने के लिए बनाया था।
प्रश्न 6
राजकपूर ने जब 'मेरा नाम जोकर' फिल्म का निर्माण शुरू किया था, तब उन्होंने यह बिल्कुल भी कल्पना नहीं की थी कि इस फिल्म के एक ही भाग को पूरा करने में लगभग छह साल का लंबा समय लग जाएगा। यह उनके लिए एक अप्रत्याशित विलंब था।
प्रश्न 7
जब शैलेंद्र ने राज कपूर को 'तीसरी कसम' की कहानी सुनाई और उसके बाद राज कपूर ने फिल्म के लिए मेहनताना (पारिश्रमिक) माँगा, तो शैलेंद्र का चेहरा मुरझा गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि शैलेंद्र ने यह फिल्म पूरी तरह से कला के प्रति अपने प्रेम और राज कपूर के प्रति सम्मान के कारण बनाई थी, और उन्हें उम्मीद नहीं थी कि राज कपूर इसके लिए पैसे मांगेंगे।
प्रश्न 8
फिल्म समीक्षक राज कपूर को एक अत्यंत उत्कृष्ट कलाकार मानते थे। वे विशेष रूप से उनकी अभिनय क्षमता की प्रशंसा करते थे, जिसमें वे अपनी आँखों के माध्यम से ही भावनाओं को व्यक्त करने में सक्षम थे। उन्हें 'आँखों से बात करने वाले कलाकार' के रूप में भी देखा जाता था।
प्रश्न 9
'तीसरी कसम' फिल्म को 'सेल्यूलाइट पर लिखी कविता' इसलिए कहा गया है क्योंकि यह फणीश्वरनाथ रेनू की एक साहित्यिक रचना पर आधारित थी और इसे फिल्म के रूप में बड़े ही संवेदनात्मक, भावुक और मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया था। 'सेल्यूलाइट' का अर्थ है कैमरे द्वारा दृश्य को हूबहू उतारना। फिल्म की प्रस्तुति इतनी सजीव और काव्यात्मक थी कि उसे कैमरे की रील पर उतरी हुई एक कविता का रूप दिया गया।
प्रश्न 10
'तीसरी कसम' फिल्म को खरीददार मिलने में कठिनाई हो रही थी क्योंकि यह एक अत्यंत भावना प्रधान और संवेदनशील फिल्म थी। इसकी गहरी संवेदनाओं को आम दर्शक या व्यावसायिक वितरक आसानी से नहीं समझ पा रहे थे। लाभ कमाने की व्यावसायिक दृष्टि से, ऐसी फिल्मों में जोखिम अधिक माना जाता था, इसलिए इसे खरीदने में लोग हिचकिचा रहे थे।
प्रश्न 11
शैलेंद्र के विचार में, एक कलाकार का मुख्य कर्तव्य दर्शकों की पसंद के नाम पर निम्न-स्तरीय या उथले मनोरंजन को थोपना नहीं होना चाहिए। इसके बजाय, कलाकार का दायित्व है कि वह दर्शकों की रुचि का परिष्कार करे और उन्हें बेहतर कलात्मक अनुभव प्रदान करे। शैलेंद्र मानते थे कि कलाकार को एक स्वस्थ और सुंदर समाज के निर्माण में योगदान देना चाहिए, न कि विकृत मानसिकता को बढ़ावा देना चाहिए।
Common mistakes
- Confusing Shailendra's role as a producer with that of a director.
- Not understanding the metaphorical meaning of 'celluloid poem'.
- Overlooking the emotional depth and artistic intent of 'Teesri Kasam'.
Revision tips
- Focus on understanding Shailendra's artistic vision beyond just the film's plot.
- Note down the specific awards received by 'Teesri Kasam'.
- Pay attention to the distinction between commercial appeal and artistic merit in cinema.
- Review the roles of Raj Kapoor and Waheeda Rehman in the film.
Practice MCQs
Q1. 'तीसरी कसम' फिल्म को किस प्रतिष्ठित पुरस्कार से सम्मानित किया गया था?
Explanation: फिल्म 'तीसरी कसम' को राष्ट्रपति द्वारा स्वर्णपदक से सम्मानित किया गया था, जो एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सम्मान है।
Q2. शैलेंद्र ने अपने जीवनकाल में मुख्य रूप से कितनी फिल्मों का निर्माण किया?
Explanation: शैलेंद्र ने केवल एक फिल्म, 'तीसरी कसम', का निर्माण किया, जो उनकी एकमात्र निर्मित फिल्म थी।
Q3. फिल्म 'तीसरी कसम' में राज कपूर ने कौन सा पात्र निभाया था?
Explanation: राज कपूर ने फिल्म 'तीसरी कसम' में 'हीरामन' नामक पात्र का अभिनय किया था।
Q4. फिल्म समीक्षकों के अनुसार राज कपूर किस प्रकार के कलाकार थे?
Explanation: फिल्म समीक्षक राज कपूर को एक उत्कृष्ट कलाकार मानते थे जो अपनी आँखों के हाव-भाव से दर्शकों से जुड़ जाते थे।
Q5. 'तीसरी कसम' को 'सेल्यूलाइट पर लिखी कविता' क्यों कहा गया है?
Explanation: फिल्म को 'सेल्यूलाइट पर लिखी कविता' इसलिए कहा गया है क्योंकि यह कैमरे पर एक साहित्यिक रचना की तरह हूबहू, भावुकता और संवेदनशीलता के साथ चित्रित की गई थी।
Frequently asked questions
यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?
यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 10 के हिंदी विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 13 'तीसरी कसम के शिल्पकार शैलेंद्र' पर केंद्रित हैं।
अध्याय 13 में मुख्य रूप से किस पर चर्चा की गई है?
अध्याय 13 प्रसिद्ध गीतकार और फिल्म निर्माता शैलेंद्र के जीवन, उनकी एकमात्र निर्मित फिल्म 'तीसरी कसम', और उनके कलात्मक विचारों पर केंद्रित है।
फिल्म 'तीसरी कसम' को 'सेल्यूलाइट पर लिखी कविता' क्यों कहा गया है?
इसे इसलिए कहा गया है क्योंकि फिल्म में साहित्यिक रचना की तरह ही भावुकता, संवेदनशीलता और मार्मिकता को कैमरे पर हूबहू उतारा गया है।
शैलेंद्र के अनुसार एक कलाकार का क्या कर्तव्य है?
शैलेंद्र मानते थे कि कलाकार का कर्तव्य दर्शकों की रुचि के नाम पर उथलेपन को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि उनके विचारों को परिष्कृत करना और एक स्वस्थ समाज के निर्माण में योगदान देना है।
क्या इन समाधानों से परीक्षा की तैयारी में मदद मिलेगी?
हाँ, ये समाधान अध्याय के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद मिलेगी।
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