कक्षा 9 हिंदी क्षितिज NCERT समाधान: पाठ 9 - कबीर

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यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 9 हिंदी (क्षितिज) के पाठ 9, 'कबीर - साखियाँ एवं सबद' के लिए विस्तृत और सटीक NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें कबीर की साखियों और सबदों से संबंधित सभी प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को उनकी गहरी समझ विकसित करने में मदद करते हैं। समाधानों में 'मानसरोवर' के प्रतीकात्मक अर्थ, सच्चे प्रेमी की पहचान, अनुभवजन्य ज्ञान का महत्व, और सच्चे संत के लक्षण जैसे विषयों पर प्रकाश डाला गया है। यह पृष्ठ छात्रों को यह समझने में भी सहायता करता है कि कबीर ने ईश्वर को कहाँ-कहाँ खोजा जाता है और किन प्रचलित धार्मिक विश्वासों का खंडन किया है। इसके अतिरिक्त, काव्य सौंदर्य के स्पष्टीकरण और ज्ञान की आँधी के प्रभाव जैसे पहलुओं पर भी चर्चा की गई है। ये समाधान परीक्षा की तैयारी और विषय की गहन समीक्षा के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectक्षितिज
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. कबीर - साखियाँ एवं सबद

Chapter summary

कक्षा 9 हिंदी (क्षितिज) के पाठ 9, 'कबीर - साखियाँ एवं सबद' के ये NCERT समाधान कबीर की शिक्षाओं और दर्शन को समझने पर केंद्रित हैं। इसमें मानसरोवर, सच्चे प्रेमी, अनुभवजन्य ज्ञान, और सच्चे संत की पहचान जैसे प्रतीकात्मक अर्थों की व्याख्या की गई है। समाधान ईश्वर की सर्वव्यापकता, आडंबरपूर्ण भक्ति का खंडन, और ज्ञान के महत्व पर भी प्रकाश डालते हैं। छात्रों को काव्य सौंदर्य के विश्लेषण और ज्ञान की आँधी के प्रभाव को समझने में मदद मिलेगी, जो परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण है।

Learning outcomes

  • कबीर की साखियों में प्रयुक्त प्रतीकों (जैसे मानसरोवर, हंस) के अर्थ को समझना।
  • सच्चे प्रेम और ईश्वर प्राप्ति के कबीर के विचारों को स्पष्ट करना।
  • अनुभवजन्य ज्ञान और सहज साधना के महत्व को पहचानना।
  • कबीर के अनुसार सच्चे संत की विशेषताओं का वर्णन करना।
  • ईश्वर की सर्वव्यापकता और आडंबरपूर्ण भक्ति के खंडन को समझना।
  • ज्ञान के आगमन के प्रभाव और उसके महत्व का विश्लेषण करना।

Topics covered

Paper topics

  • कबीर की साखियाँ
  • सबद
  • मानसरोवर का प्रतीकात्मक अर्थ
  • ईश्वर प्राप्ति के साधन
  • सच्चे प्रेमी की पहचान
  • अनुभवजन्य ज्ञान का महत्व
  • सच्चे संत के लक्षण
  • धार्मिक आडंबरों का खंडन
  • कर्मों का महत्व
  • ज्ञान की आँधी का प्रभाव
  • काव्य सौंदर्य (भाषा, छंद, अलंकार)
  • कबीर की दार्शनिक विचारधारा

Important topics

  • मानसरोवर और हंस का प्रतीकात्मक अर्थ
  • सच्चे प्रेमी की कसौटी
  • अनुभवजन्य ज्ञान का महत्व
  • सच्चे संत की विशेषताएँ
  • ईश्वर को सर्वत्र मानना और आडंबरों का खंडन
  • ज्ञान की आँधी का प्रभाव

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

'मानसरोवर' से कवि का क्या अभिप्राय है?
Solution: 'मानसरोवर' से कवि का तात्पर्य मन रूपी पवित्र सरोवर से है। इस सरोवर में स्वच्छ विचारधारा रूपी जल भरा हुआ है। यहाँ हंस रूपी जीवात्मा प्रभु भक्ति में लीन होकर मुक्ति रूपी मोती (मुक्ताफल) चुगती है। इसका अर्थ यह है कि आत्मा सांसारिक मोह-माया से ऊपर उठकर ईश्वर की शरण में जाना चाहती है।

प्रश्न 2

कवि ने सच्चे प्रेमी की क्या कसौटी बताई है?
Solution: कवि ने सच्चे प्रेमी की कसौटी यह बताई है कि ईश्वर को कहीं बाहर, जैसे मंदिर या मस्जिद में खोजने के बजाय, उसे अपने हृदय के भीतर खोजना चाहिए। जब ईश्वर हृदय में मिल जाता है, तो मन के सारे विकार दूर हो जाते हैं और मन प्रसन्न हो जाता है।

प्रश्न 3

तीसरे दोहे में कवि ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्त्व दिया है?
Solution: तीसरे दोहे में कवि ने अनुभव से प्राप्त होने वाले ज्ञान को सबसे अधिक महत्त्व दिया है। यह ज्ञान सहज साधना से प्राप्त होता है। कबीर ने इस प्रकार के ज्ञान को हाथी की सवारी के समान बताया है, जिसे प्राप्त करने के बाद ईश्वर का साक्षात्कार सहज हो जाता है।

प्रश्न 4

इस संसार में सच्चा संत कौन कहलाता है?
Solution: कबीर के अनुसार, सच्चा संत वह व्यक्ति होता है जो किसी भी प्रकार के साम्प्रदायिक भेदभाव से दूर रहता है। वह सांसारिक मोह-माया से भी परे होता है और जीवन की हर परिस्थिति में (चाहे सुख हो या दुख, लाभ हो या हानि, ऊँच हो या नीच, अच्छा हो या बुरा) समभाव बनाए रखता है। ऐसा व्यक्ति निश्छल भाव से प्रभु भक्ति में लीन रहता है।

प्रश्न 5

अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने किस तरह की संकीर्णता की ओर संकेत किया है?
Solution: अंतिम दो दोहों के माध्यम से कबीर ने दो प्रकार की संकीर्णताओं की ओर संकेत किया है:
  1. धार्मिक संकीर्णता: अपने धर्म को श्रेष्ठ बताना और दूसरे के धर्म की निंदा करना।
  2. जातिगत/कुलगत संकीर्णता: केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने के कारण स्वयं को श्रेष्ठ समझना। कबीर के अनुसार, मनुष्य अपने कर्मों से महान बनता है, न कि केवल कुल से।

प्रश्न 6

किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कुल से होती है या कर्मों से? तर्क सहित उत्तर दीजिए।
Solution: किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि केवल उसके कुल से। इसका तर्क यह है कि इतिहास में राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर जैसे महापुरुष केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने के कारण महान नहीं बने, बल्कि वे अपने उच्च कर्मों के कारण पूजनीय हुए। इसके विपरीत, कबीर, सूरदास, तुलसीदास जैसे महान संत सामान्य परिवारों में जन्मे, परन्तु उन्होंने अपने सद्कर्मों और रचनाओं से संसार में ख्याति प्राप्त की। इसलिए, व्यक्ति की महत्ता उसके कर्मों पर निर्भर करती है।

प्रश्न 7

काव्य सौंदर्य स्पष्ट कीजिए - 'हस्ती चढ़िये ज्ञान कौ, सहज दुलीचा डारि। स्वान रूप संसार है, भूँकन दे झख मारि।'
Solution:

भाव सौंदर्य: इस दोहे में कवि ने ज्ञान के महत्व को दर्शाया है। कवि कहते हैं कि ज्ञान की प्राप्ति के लिए दृढ़ता और सहज साधना आवश्यक है। संसार के लोग, जो आलोचना करने वाले कुत्तों के समान हैं, वे अपनी व्यर्थ की बातों (भोंकने) से हमें विचलित नहीं कर सकते। हमें हाथी पर सवार होकर (ज्ञान प्राप्त करके) आगे बढ़ते रहना चाहिए और उनकी बातों को अनसुना कर देना चाहिए।

शिल्प सौंदर्य:

रस: रचना में भक्ति रस की प्रधानता है।

भाषा: सधुक्कड़ी भाषा का प्रयोग किया गया है, जो लोकप्रचलित है।

छंद: दोहा छंद का प्रयोग किया गया है।

अलंकार: 'हस्ती' (हाथी) और 'स्वान' (कुत्ता) जैसे शब्दों का प्रयोग रूपक अलंकार के रूप में हुआ है, जो ज्ञान और संसार का प्रतीक हैं।

तत्सम शब्द: 'हस्ती', 'स्वान', 'ज्ञान' जैसे तत्सम शब्दों का प्रयोग भी हुआ है।

प्रश्न 8

मनुष्य ईश्वर को कहाँ-कहाँ ढूँढता फिरता है?
Solution: मनुष्य ईश्वर को खोजने के लिए विभिन्न स्थानों और तरीकों का सहारा लेता है। वह ईश्वर को मंदिर, मस्जिद, देवालय जैसे धार्मिक स्थलों पर खोजता है। वह काबा, काशी, कैलाश जैसे पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा करता है। इसके अतिरिक्त, वह योग, वैराग्य, यज्ञ, पूजा-पाठ और अन्य कई प्रकार की धार्मिक क्रियाओं में भी ईश्वर को खोजने का प्रयास करता है।

प्रश्न 9

कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए किन प्रचलित विश्वासों का खंडन किया है?
Solution: कबीर ने ईश्वर प्राप्ति के लिए प्रचलित कई आडंबरपूर्ण विश्वासों का खंडन किया है। इनमें शामिल हैं: मंदिर या मस्जिद में जाकर पूजा-अर्चना करना, नमाज पढ़ना, कठोर योग साधना करना, सांसारिक मोह-माया का त्याग कर वैरागी बन जाना, पवित्र तीर्थ स्थलों की यात्रा करना, और दिखावटी भक्ति करके ईश्वर को प्रसन्न करने की इच्छा रखना। कबीर के अनुसार, ये बाहरी क्रियाएँ ईश्वर प्राप्ति का सच्चा मार्ग नहीं हैं।

प्रश्न 10

कबीर ने ईश्वर को सब स्वाँसों की स्वाँस में क्यों कहा है?
Solution: कबीर ने ईश्वर को 'सब स्वाँसों की स्वाँस' में इसलिए कहा है क्योंकि सभी जीवों की रचना ईश्वर द्वारा ही की गई है। ईश्वर का अस्तित्व हर प्राणी के भीतर और हर श्वास में समाहित है। वह संसार के कण-कण में व्याप्त है। इसलिए, ईश्वर को किसी विशेष स्थान या रूप में खोजने के बजाय, उसे अपने भीतर और प्रत्येक जीव में महसूस करना चाहिए।

प्रश्न 11

कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न कर आँधी से क्यों की?
Solution: कबीर ने ज्ञान के आगमन की तुलना सामान्य हवा से न करके आँधी से इसलिए की, क्योंकि सामान्य हवा का प्रभाव सीमित होता है, जबकि आँधी में व्यापक परिवर्तन लाने की क्षमता होती है। इसी प्रकार, ज्ञान रूपी आँधी के आने से मनुष्य के मन पर पड़ा अज्ञान और मोह-माया का पर्दा पूरी तरह हट जाता है। छल-कपट रूपी कूड़ा नष्ट हो जाता है, और मन निर्मल होकर प्रभु भक्ति में लीन हो जाता है। यह एक पूर्ण परिवर्तनकारी अनुभव है, जो सामान्य हवा से संभव नहीं।

प्रश्न 12

ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Solution: ज्ञान की आँधी का भक्त के जीवन पर गहरा और सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इस आँधी के आने से भक्त की सारी शंकाएँ और अज्ञानता समाप्त हो जाती है। वह माया-मोह के सांसारिक बंधनों से मुक्त हो जाता है। उसका मन पूरी तरह से पवित्र और निश्छल हो जाता है, और वह प्रभु भक्ति में तल्लीन हो जाता है। यह एक प्रकार की आध्यात्मिक शुद्धि और मुक्ति का अनुभव है।

Common mistakes

  • प्रतीकों (जैसे मानसरोवर, हंस) के लाक्षणिक अर्थों को समझने में चूक करना।
  • ईश्वर को केवल बाहरी आडंबरों में खोजने की प्रवृत्ति।
  • ज्ञान और अनुभव के बीच के संबंध को ठीक से न समझना।
  • कर्मों के महत्व की तुलना में कुल को अधिक महत्व देना।

Revision tips

  • प्रत्येक साखी के मूल भाव को समझने के लिए उसे अपने शब्दों में लिखें।
  • कबीर द्वारा खंडित की गई धार्मिक आडंबरों की सूची बनाएँ।
  • ज्ञान की आँधी और उसके प्रभावों से संबंधित दोहे को विशेष रूप से याद करें।
  • काव्य सौंदर्य के तत्वों (भाषा, छंद, अलंकार) पर ध्यान दें।

Practice MCQs

Q1. कबीर के अनुसार 'मानसरोवर' से कवि का क्या अभिप्राय है?

Q2. सच्चे प्रेमी की कसौटी क्या है, जिसके अनुसार ईश्वर को पाना चाहिए?

Q3. तीसरे दोहे में कबीर ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्व दिया है?

Q4. कबीर के अनुसार, संसार में सच्चा संत कौन है?

Q5. किसी व्यक्ति की श्रेष्ठता किस पर निर्भर करती है?

Q6. कबीर ने ज्ञान की आँधी का वर्णन किस रूपक से किया है?

Frequently asked questions

कक्षा 9 हिंदी क्षितिज के पाठ 9 में कबीर की किन रचनाओं का अध्ययन किया जा रहा है?

कक्षा 9 हिंदी (क्षितिज) के पाठ 9 में कबीर की 'साखियाँ' और 'सबद' का अध्ययन किया जा रहा है।

कबीर के अनुसार 'मानसरोवर' क्या है?

कबीर के अनुसार 'मानसरोवर' मन रूपी पवित्र सरोवर है, जिसमें जीवात्मा ईश्वर भक्ति में लीन रहती है।

ईश्वर को कहाँ खोजना चाहिए?

कबीर के अनुसार ईश्वर को मंदिर-मस्जिद या तीर्थ स्थलों में नहीं, बल्कि अपने हृदय में खोजना चाहिए।

कबीर ने किस प्रकार के ज्ञान को महत्व दिया है?

कबीर ने अनुभव से प्राप्त सहज ज्ञान को महत्व दिया है, जो साधना से मिलता है।

व्यक्ति की पहचान किससे होती है - कुल से या कर्मों से?

कबीर के अनुसार, व्यक्ति की पहचान उसके कर्मों से होती है, न कि केवल ऊँचे कुल में जन्म लेने से।

ज्ञान की आँधी का क्या प्रभाव होता है?

ज्ञान की आँधी आने से मनुष्य के मन से अज्ञान, माया-मोह और शंकाएँ दूर हो जाती हैं, जिससे मन निर्मल हो जाता है।

ये समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान पाठ के सभी महत्वपूर्ण प्रश्नों के विस्तृत उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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