कक्षा 9 स्पर्श NCERT समाधान: पाठ 6 - कीचड़ का काव्य

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यह पृष्ठ कक्षा 9 के हिंदी स्पर्श पुस्तक के पाठ 6, 'कीचड़ का काव्य' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। काका कालेलकर द्वारा लिखित इस पाठ में, लेखक कीचड़ के प्रति समाज की नकारात्मक धारणा को चुनौती देते हैं और इसके छिपे हुए सौंदर्य और महत्व को उजागर करते हैं। समाधानों में पाठ के विभिन्न प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो छात्रों को कीचड़ के विभिन्न रूपों, उसके रंग के प्रति कलाकारों के आकर्षण, और उसके महत्व को समझने में मदद करते हैं। ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने और परीक्षा की तैयारी में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter6. काका कालेलकर - कीचड़ का काव्य

Chapter summary

कक्षा 9 के हिंदी स्पर्श पुस्तक के पाठ 6 'कीचड़ का काव्य' के ये NCERT समाधान काका कालेलकर के लेख पर केंद्रित हैं। समाधान छात्रों को कीचड़ के प्रति आम धारणा से परे जाकर उसके सौंदर्य और उपयोगिता को समझने में मदद करते हैं। इसमें कीचड़ के रंग, सूखने पर उसके दृश्य, और कलाकारों द्वारा उसे पसंद किए जाने जैसे पहलुओं पर चर्चा की गई है। साथ ही, यह भी बताया गया है कि कैसे कीचड़ हमारे जीवन और कृषि के लिए आवश्यक है, भले ही हम उसे तिरस्कृत करते हों।

Learning outcomes

  • कीचड़ के प्रति सामान्य दृष्टिकोण और उसके छिपे सौंदर्य को समझना।
  • कलाकारों और फोटोग्राफरों द्वारा कीचड़ के रंग को पसंद करने के कारणों का विश्लेषण करना।
  • सूखे कीचड़ के विभिन्न दृश्यों और उन पर अंकित पदचिह्नों के महत्व को पहचानना।
  • यह समझना कि कैसे कीचड़ हमारे भोजन और जीवन का अभिन्न अंग है।
  • लेखक के विचारों को अपने शब्दों में व्यक्त करना सीखना।

Topics covered

Paper topics

  • कीचड़ का काव्य
  • काका कालेलकर
  • सौंदर्य की धारणा
  • कला और कीचड़
  • प्रकृति का महत्व
  • सामाजिक दृष्टिकोण
  • कीचड़ का रंग
  • सूखे कीचड़ के दृश्य
  • पंक और पंकज
  • कृषि और जीवन
  • लेखक का दृष्टिकोण
  • पाठ का सार

Important topics

  • कीचड़ के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण का विश्लेषण
  • कलाकारों द्वारा कीचड़ के रंग की प्रशंसा
  • सूखे कीचड़ के दृश्यों का वर्णन
  • कीचड़ का जीवन और कृषि में महत्व
  • पंक और पंकज के अर्थ में अंतर

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

रंग की शोभा ने क्या कर दिया?
Solution: रंग की शोभा ने पूर्व दिशा की अपेक्षा उत्तर दिशा में थोड़े समय के लिए लालिमा फैला दी। यह एक क्षणिक और सुंदर दृश्य था जो प्रकृति के बदलते रंगों को दर्शाता है।

प्रश्न 2

बादल किसकी तरह हो गए थे?
Solution: लेखक के अनुसार, बादल एकदम श्वेत पूनी (सफेद रुई) की तरह हो गए थे। यह उनकी कोमलता और सफेदी का वर्णन करता है, जो आकाश में एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत कर रहे थे।

प्रश्न 3

लोग किन-किन चीजों का वर्णन करते हैं?
Solution: सामान्यतः लोग आकाश, पृथ्वी और जलाशयों जैसी प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करते हैं। वे इन तत्वों के भव्य और मनमोहक रूपों की प्रशंसा करते हैं, लेकिन कीचड़ जैसे तत्वों के सौंदर्य की उपेक्षा कर देते हैं।

प्रश्न 4

कीचड से क्या होता है?
Solution: कीचड़ से मुख्य रूप से हमारे कपड़े गंदे होते हैं और शरीर पर मैल चढ़ता है, जिससे लोग उससे घृणा करते हैं। हालाँकि, इसी कीचड़ में कमल जैसा सुंदर फूल भी खिलता है, जो इसके विपरीत एक सकारात्मक पहलू है।

प्रश्न 5

कीचड़ जैसा रंग कौन लोग पंसद करते हैं?
Solution: कीचड़ जैसा रंग कला प्रेमी, कलाकार और फोटोग्राफर बहुत पसंद करते हैं। वे इस रंग की गहराई और प्राकृतिकता को महत्व देते हैं और इसे गत्तों, दीवारों और वस्त्रों पर भी प्रयोग करते हैं।

प्रश्न 6

नदी के किनारे कीचड़ कब सुंदर दिखता है?
Solution: नदी के किनारे कीचड़ तब सुंदर दिखता है जब वह सूख जाता है और उसमें आड़ी-तिरछी दरारें पड़ जाती हैं, जो एक अनोखा और आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करती हैं। कभी-कभी, किनारे पर फैला समतल और चिकना कीचड़ भी सुन्दर लगता है।

प्रश्न 7

कीचड़ कहाँ सुदंर लगता है?
Solution: कीचड़ नदी किनारे मीलों तक फैला हुआ, सूखा हुआ और ठोस हो जाने पर विशेष रूप से सुन्दर लगता है। जब उस पर बगुले, पक्षी, गाय, बैल, भैंस, पाड़े, बकरी आदि के पदचिन्ह अंकित हो जाते हैं, तो वह दृश्य और भी मनमोहक हो जाता है।

प्रश्न 8

'पंक' और 'पंकज' शब्द में क्या अंतर है?
Solution: 'पंक' शब्द का अर्थ 'कीचड़' होता है, जिससे सामान्यतः लोग घृणा करते हैं। वहीं, 'पंकज' शब्द 'पंक' (कीचड़) और 'ज' (उत्पन्न) से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है 'कीचड़ में उत्पन्न होने वाला', जैसे कि कमल। समाज पंकज (कमल) को सम्मान देता है और उसे माथे पर लगाता है, जबकि पंक (कीचड़) को तिरस्कृत करता है।

प्रश्न 9

कीचड़ के प्रति किसी को सहानुभूति क्यों नहीं होती?
Solution: कीचड़ के प्रति किसी को सहानुभूति इसलिए नहीं होती क्योंकि लोग केवल बाहरी सुंदरता को महत्व देते हैं और कीचड़ को गंदगी व मैल का प्रतीक मानते हैं। कोई भी व्यक्ति न तो कीचड़ में रहना चाहता है और न ही अपने कपड़ों या शरीर को गंदा करना चाहता है, इसलिए वे इसके प्रति उदासीन रहते हैं।

प्रश्न 10

ज़मीन ठोस होने पर उस पर किनके पदचिह्न अंकित होते हैं?
Solution: जब ज़मीन (विशेषकर कीचड़ वाली ज़मीन) ठोस हो जाती है, तो उस पर पक्षी, गाय, बैल, भैंस, पाड़े, बकरी आदि विभिन्न जानवरों के पदचिह्न अंकित हो जाते हैं। ये पदचिह्न उस सूखी हुई सतह पर एक अनूठी और आकर्षक छाप छोड़ते हैं, जो कभी-कभी किसी युद्ध के मैदान के दृश्य का आभास भी करा सकती है।

प्रश्न 11

मनुष्य को क्या भान होता जिससे वह कीचड़ का तिरस्कार न करता।
Solution: यदि मनुष्य को यह बोध या ज्ञान होता कि उसका अन्न और कई अन्य खाद्य पदार्थ सीधे कीचड़ में ही उत्पन्न होते हैं, तो वह कीचड़ का तिरस्कार नहीं करता। यह समझ उसे कीचड़ के महत्व और जीवन में उसकी भूमिका का एहसास कराती, जिससे उसका दृष्टिकोण बदल जाता।

प्रश्न 12

पहाड़ लुप्त कर देने वाले कीचड़ की क्या विशेषता है?
Solution: 'पहाड़ लुप्त कर देने वाले कीचड़' की विशेषता उसकी अत्यधिक गहराई और विस्तार है। यह कीचड़ इतना गहरा और विस्तृत होता है कि यह न केवल हाथी जैसे बड़े जानवर को, बल्कि पहाड़ जैसी विशाल वस्तु को भी अपने अंदर समा सकता है। ऐसे कीचड़ गंगा, खंभात की खाड़ी और सिंधु नदी के किनारों पर पाए जाते हैं, जो इसकी प्रचंडता को दर्शाते हैं।

प्रश्न 13

कीचड़ का रंग किन-किन लोगों को खुश करता है?
Solution: कीचड़ का रंग विशेष रूप से कलाकारों, चित्रकारों और मूर्तिकारों को प्रसन्न करता है। वे इस रंग की गहराई और प्राकृतिकता को पसंद करते हैं और इसे पुस्तकों के गत्तों, दीवारों, कच्चे मकानों और कपड़ों के रंगों में भी इस्तेमाल करते हैं। फोटोग्राफर भी इसे 'वार्मटोन' या पक्के रंग की झलक के रूप में पसंद करते हैं।

प्रश्न 14

कीचड़ सूखकर किस प्रकार के दृश्य उपस्थित करता है?
Solution: जब कीचड़ सूख जाता है, तो वह टुकड़ों में बँट जाता है और उसमें टेढ़ी-मेढ़ी दरारें पड़ जाती हैं। ये दरारें और टुकड़े सुखाए हुए खोपरों जैसे सुंदर लगते हैं। इसके अतिरिक्त, जब समतल किनारों वाला कीचड़ सूखता है और उस पर पशु-पक्षियों के पैर के चिह्न बन जाते हैं, तो वह दृश्य भी बहुत सुन्दर लगता है, मानो वहां कोई अनोखी घटना घटी हो।

Common mistakes

  • कीचड़ को केवल गंदगी और अप्रिय मानना।
  • कीचड़ के सौंदर्य पक्ष को अनदेखा करना।
  • कीचड़ के व्यावहारिक महत्व को न समझना।
  • लेखक के व्यंग्यात्मक दृष्टिकोण को न पकड़ पाना।

Revision tips

  • पाठ को ध्यान से पढ़ें और कीचड़ के विभिन्न रूपों पर लेखक के विचारों को नोट करें।
  • समाधानों में दिए गए कीचड़ के सौंदर्य और महत्व से संबंधित बिंदुओं को याद करें।
  • कलाकारों और फोटोग्राफरों के दृष्टिकोण को समझने का प्रयास करें।
  • कीचड़ के प्रति अपने स्वयं के दृष्टिकोण पर विचार करें और उसे पाठ के आधार पर बदलें।

Practice MCQs

Q1. रंग की शोभा ने पूर्व दिशा की अपेक्षा किस दिशा में लालिमा फैलाई?

Q2. लेखक के अनुसार बादल किस चीज़ की तरह हो गए थे?

Q3. लोग सामान्यतः किन प्राकृतिक तत्वों का वर्णन करते हैं?

Q4. कीचड़ से क्या उत्पन्न होता है, जिसे समाज महत्व देता है?

Q5. कीचड़ जैसा रंग कौन से लोग विशेष रूप से पसंद करते हैं?

Q6. 'पंक' शब्द का क्या अर्थ है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए है?

यह NCERT समाधान कक्षा 9 के हिंदी (स्पर्श भाग 1) विषय के लिए है, विशेष रूप से पाठ 6 'कीचड़ का काव्य' पर केंद्रित है।

'कीचड़ का काव्य' पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक काका कालेलकर हैं, जो अपनी सरल और विचारोत्तेजक शैली के लिए जाने जाते हैं।

इन समाधानों से छात्रों को क्या लाभ होगा?

ये समाधान छात्रों को पाठ की गहरी समझ विकसित करने, लेखक के विचारों को समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में मदद करेंगे।

क्या ये समाधान केवल पाठ के सारांश हैं?

नहीं, ये समाधान पाठ के प्रत्येक प्रश्न का विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को विषय की पूरी जानकारी मिलती है।

पाठ में 'पंक' और 'पंकज' शब्दों के बीच क्या अंतर बताया गया है?

पाठ में बताया गया है कि 'पंक' का अर्थ कीचड़ होता है, जबकि 'पंकज' का अर्थ है कीचड़ में उत्पन्न होने वाला, जैसे कि कमल। समाज कीचड़ से घृणा करता है पर पंकज (कमल) को सिर पर धारण करता है।

लेखक कीचड़ के किस गुण को उजागर करना चाहते हैं?

लेखक यह उजागर करना चाहते हैं कि जिस कीचड़ को हम तुच्छ समझते हैं, वही जीवन का आधार है और उसमें भी एक विशेष प्रकार का सौंदर्य छिपा है, जिसे कलाकार पहचानते हैं।

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