CBSE Class 9 Hindi NCERT Solutions: Chapter 5 - Sir C.V. Raman

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This chapter delves into the life and scientific journey of Sir C.V. Raman, a luminary in the field of science. The NCERT Solutions for Class 9 Hindi (Sparsh) Chapter 5, 'वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन' (The Carrier of Scientific Consciousness: Chandrashekhar Venkata Raman), provide detailed answers to questions about Raman's early life, his passion for science, his groundbreaking discovery of the 'Raman Effect', and his contributions to understanding light and sound. The solutions explain his motivations for leaving a stable government job to pursue academic research and his interactions with prominent scientists. They also highlight the various prestigious awards and honors bestowed upon him, including the Nobel Prize and the Bharat Ratna. These solutions are designed to help students grasp the essence of Raman's scientific spirit and his significant impact on physics, aiding in their exam preparation by offering clear, concise, and informative explanations.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 9
Subjectस्पर्श
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter5. धिरंजन मालवे - वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन

Chapter summary

NCERT Solutions for Class 9 Hindi (Sparsh) Chapter 5 focuses on the life and scientific achievements of Sir C.V. Raman. It covers his early scientific curiosity, his deep interest in natural phenomena like the blue color of the sea, and his research on sound and light. The solutions explain the 'Raman Effect' and its significance, his decision to leave government service for research, and the recognition he received, including the Nobel Prize and Bharat Ratna. This chapter aims to instill an appreciation for scientific inquiry and the contributions of Indian scientists.

Learning outcomes

  • Understand the early life and scientific inclinations of C.V. Raman.
  • Explain the scientific curiosity that led to the discovery of the 'Raman Effect'.
  • Identify the key questions Raman sought to answer through his research.
  • Recognize the importance of Raman's contributions to physics.
  • Appreciate Raman's decision to prioritize research over a stable government career.
  • List the major awards and honors received by Sir C.V. Raman.

Topics covered

Paper topics

  • Sir C.V. Raman's biography
  • Scientific curiosity and inquiry
  • The 'Raman Effect'
  • Study of light and its properties
  • Study of sound and musical instruments
  • Physics education in India
  • Career choices in science
  • Nobel Prize and Bharat Ratna
  • Molecular and atomic structure
  • Scientific temper
  • Indian scientists
  • History of science

Important topics

  • The 'Raman Effect' and its significance
  • C.V. Raman's scientific journey and motivations
  • The importance of scientific temper and curiosity
  • Awards and recognition of C.V. Raman
  • Raman's research on light and sound

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी के अलावा और क्या थे?
Solution: रामन् केवल एक भावुक प्रकृति प्रेमी ही नहीं थे, बल्कि वे एक अत्यंत योग्य और जिज्ञासु वैज्ञानिक भी थे। उनकी वैज्ञानिक प्रवृत्ति उन्हें प्रकृति के रहस्यों को गहराई से समझने के लिए प्रेरित करती थी, और वे एक समर्पित अनुसंधानकर्ता के रूप में भी जाने जाते थे।

प्रश्न 2

समुद्र को देखकर रामन् के मन में कौन-सी दो जिज्ञासाएँ उठीं?
Solution: समुद्र के विशाल फैलाव और उसके गहरे नीले रंग को देखकर रामन् के मन में दो प्रमुख जिज्ञासाएँ उत्पन्न हुईं:
  1. समुद्र के पानी का रंग विशेष रूप से नीला ही क्यों दिखाई देता है?
  2. क्या समुद्र के पानी का रंग नीले रंग के अतिरिक्त कोई अन्य रंग भी हो सकता है, और यदि हाँ, तो क्यों नहीं?
ये प्रश्न उनकी वैज्ञानिक सोच और प्रकृति के प्रति उनकी गहरी रुचि को दर्शाते हैं।

प्रश्न 3

रामन् के पिता ने उनमें किन विषयों की सशक्त नींव डाली?
Solution: रामन् के पिता स्वयं गणित और भौतिकी के शिक्षक थे। उन्होंने अपने पुत्र सी.वी. रामन् में गणित और भौतिकी जैसे विषयों की एक अत्यंत मजबूत और गहरी नींव डाली। इस प्रारंभिक शिक्षा ने रामन् की आगे की वैज्ञानिक यात्रा के लिए एक ठोस आधार प्रदान किया।

प्रश्न 4

वाद्ययंत्रों की ध्वनियों के अध्ययन के द्वारा रामन् क्या करना चाहते थे?
Solution: रामन् वाद्ययंत्रों से उत्पन्न होने वाली विभिन्न ध्वनियों का अध्ययन करके उनके पीछे छिपे वैज्ञानिक रहस्यों को उजागर करना चाहते थे। वे यह समझना चाहते थे कि इन ध्वनियों की उत्पत्ति कैसे होती है और उनके कंपन के पीछे क्या भौतिक सिद्धांत कार्य करते हैं।

प्रश्न 5

सरकारी नौकरी छोड़ने के पीछे रामन् की क्या भावना थी?
Solution: सरकारी नौकरी छोड़ने के पीछे रामन् की मुख्य भावना यह थी कि वे अपना सारा कीमती समय और ऊर्जा केवल अध्ययन, अध्यापन और वैज्ञानिक शोध कार्यों में लगाना चाहते थे। वे एक विश्वविद्यालय के शिक्षक बनकर ज्ञान के प्रसार और नए वैज्ञानिक सत्यों की खोज में पूरी तरह समर्पित होना चाहते थे, न कि सरकारी नौकरी की औपचारिकताओं में बंधे रहना चाहते थे।

प्रश्न 6

'रामन् प्रभाव' की खोज के पीछे कौन-सा सवाल हिलोरें ले रहा था?
Solution: 'रामन् प्रभाव' की खोज के पीछे मुख्य सवाल यह था कि 'आखिर समुद्र के पानी का रंग नीला ही क्यों होता है?' इसी प्रश्न का उत्तर खोजने के प्रयास में, रामन् ने तरल पदार्थों पर प्रकाश की किरणों के प्रभाव का गहन अध्ययन किया। इस अध्ययन के परिणामस्वरूप ही 'रामन् प्रभाव' नामक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक खोज हुई, जिसने प्रकाश के प्रकीर्णन को समझने में क्रांति ला दी।

प्रश्न 7

प्रकाश तरंगों के बारे में आइंस्टाइन ने क्या बताया?
Solution: प्रकाश तरंगों के संबंध में अल्बर्ट आइंस्टाइन ने एक महत्वपूर्ण सिद्धांत प्रस्तुत किया था। उन्होंने बताया कि प्रकाश केवल तरंगों के रूप में ही नहीं, बल्कि अति सूक्ष्म कणों की एक तीव्र धारा के रूप में भी व्यवहार करता है। उन्होंने इन प्रकाश कणों को 'फोटॉन' नाम दिया और उनकी तुलना बुलेट की तीव्र प्रवाह से की, जो ऊर्जा के पैकेट के रूप में संचरित होते हैं।

प्रश्न 8

रामन् की खोज ने किन अध्ययनों को सहज बनाया?
Solution: सर सी.वी. रामन् की 'रामन् प्रभाव' की खोज ने पदार्थों के अणुओं और परमाणुओं की आंतरिक संरचना के अध्ययन को अत्यंत सहज और सुगम बना दिया। इस खोज के माध्यम से वैज्ञानिक अब पदार्थों के सूक्ष्म कणों की संरचना और उनके व्यवहार को पहले से कहीं अधिक सरलता से समझ सकते थे।

प्रश्न 9

कॉलेज के दिनों में रामन् की दिली इच्छा क्या थी?
Solution: कॉलेज के दिनों में सी.वी. रामन् की सबसे बड़ी दिली इच्छा यह थी कि वे निरंतर नए-नए वैज्ञानिक प्रयोग करें और अपना पूरा जीवन शोधकार्यों में लगा दें। उनका मन और मस्तिष्क विज्ञान के अनसुलझे रहस्यों को सुलझाने के लिए हमेशा बेचैन रहता था। हालांकि, उस समय विज्ञान को एक पूर्णकालिक कैरियर के रूप में अपनाने की विशेष व्यवस्था न होने के कारण, उनकी यह तीव्र इच्छा उनके मन में ही रह गई थी।

प्रश्न 10

वाद्ययंत्रों पर की गई खोजों से रामन् ने कौन-सी भ्रांति तोड़ने की कोशिश की?
Solution: रामन् ने अपने अध्ययन में देशी और विदेशी दोनों प्रकार के वाद्ययंत्रों को शामिल किया। इस शोध के माध्यम से वे पश्चिमी देशों में प्रचलित एक भ्रांति को तोड़ना चाहते थे। यह भ्रांति यह थी कि विदेशी वाद्ययंत्रों की ध्वनियाँ भारतीय वाद्ययंत्रों की तुलना में अधिक उन्नत और श्रेष्ठ होती हैं, और इसलिए भारतीय वाद्ययंत्रों को घटिया माना जाता था। रामन् ने अपने अध्ययन से सिद्ध किया कि भारतीय वाद्ययंत्र भी अपनी ध्वनि गुणवत्ता में उन्नत हैं।

प्रश्न 11

रामन् के लिए नौकरी संबंधी कौन-सा निर्णय कठिन था?
Solution: रामन् के लिए नौकरी संबंधी सबसे कठिन निर्णय तब आया जब प्रसिद्ध शिक्षा शास्त्री सर आशुतोष मुखर्जी ने उन्हें कलकत्ता विश्वविद्यालय में प्रोफेसर का पद स्वीकार करने का आग्रह किया। यह निर्णय इसलिए कठिन था क्योंकि उन्हें अपनी अच्छी तनख्वाह और अनेक सुविधाओं वाली सरकारी नौकरी छोड़कर, कम वेतन और कम सुविधाओं वाली विश्वविद्यालय की नौकरी चुननी थी। परंतु, ज्ञान की साधना को अधिक महत्व देते हुए, रामन् ने अंततः सरकारी नौकरी छोड़कर विश्वविद्यालय की नौकरी को चुना, जो उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण परंतु महत्वपूर्ण निर्णय था।

प्रश्न 12

सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् को समय-समय पर किन-किन पुरस्कारों से सम्मानित किया गया?
Solution: सर चंद्रशेखर वेंकट रामन् को उनके असाधारण वैज्ञानिक योगदान के लिए समय-समय पर अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों और सम्मानों से नवाजा गया, जिनमें प्रमुख हैं:
  • 1924 में रॉयल सोसायटी की सदस्यता प्रदान की गई।
  • 1929 में उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा 'सर' की उपाधि से विभूषित किया गया।
  • 1930 में उन्हें भौतिकी के क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व कार्य 'रामन् प्रभाव' के लिए विश्व का सर्वोच्च पुरस्कार, नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया।
  • 1954 में उन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया।
  • उन्हें रॉयल सोसायटी द्वारा 'ह्यूज पदक' से भी सम्मानित किया गया।
  • फिलाडेल्फिया इंस्टीट्यूट ने उन्हें 'फ्रेंकलिन पदक' से सम्मानित किया।
  • सोवियत संघ ने उन्हें 'अंतर्राष्ट्रीय लेनिन पुरस्कार' से नवाजा।
  • इटली के रोम शहर द्वारा उन्हें 'मेत्यूसी पदक' प्रदान किया गया।
ये पुरस्कार उनकी वैज्ञानिक प्रतिभा और वैश्विक प्रभाव के प्रमाण हैं।

Common mistakes

  • Confusing the 'Raman Effect' with other optical phenomena.
  • Underestimating the significance of studying sound and musical instruments.
  • Not understanding the personal sacrifices made for scientific research.
  • Failing to recall the specific scientific questions that motivated Raman.

Revision tips

  • Focus on understanding the 'Raman Effect' and its underlying principles.
  • Note down the key life events and decisions of C.V. Raman.
  • Memorize the major awards and their significance.
  • Relate Raman's curiosity about the sea to his scientific approach.
  • Understand the context of his decision to leave government service.

Practice MCQs

Q1. समुद्र के पानी का रंग नीला क्यों होता है, इस प्रश्न ने किस वैज्ञानिक की खोज को प्रेरित किया?

Q2. रामन् भावुक प्रकृति प्रेमी के अलावा क्या थे?

Q3. 'रामन् प्रभाव' की खोज किस प्रकार के अध्ययन से संबंधित है?

Q4. रामन् ने वाद्ययंत्रों के अध्ययन से कौन-सी भ्रांति तोड़ने का प्रयास किया?

Q5. सर सी.वी. रामन् को किस वर्ष नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया?

Frequently asked questions

यह पाठ किस भारतीय वैज्ञानिक के जीवन और कार्यों पर आधारित है?

यह पाठ 'वैज्ञानिक चेतना के वाहक चंद्रशेखर वेंकट रामन' पर आधारित है, जो भारत के एक महान भौतिक विज्ञानी थे।

'रामन् प्रभाव' क्या है और इसकी खोज कैसे हुई?

'रामन् प्रभाव' प्रकाश के अणुओं द्वारा प्रकीर्णन से संबंधित है। इसकी खोज समुद्र के पानी के नीले रंग के पीछे के सवाल का अध्ययन करते हुए हुई।

सी.वी. रामन् ने सरकारी नौकरी क्यों छोड़ी?

रामन् ने सरकारी नौकरी इसलिए छोड़ी क्योंकि वे अपना पूरा समय अध्ययन, अध्यापन और शोध कार्यों में लगाना चाहते थे, जो उन्हें विश्वविद्यालय में प्रोफेसर बनकर संभव था।

सी.वी. रामन् को किन प्रमुख पुरस्कारों से सम्मानित किया गया?

सी.वी. रामन् को नोबेल पुरस्कार (1930) और भारत रत्न (1954) जैसे सर्वोच्च सम्मानों के अलावा रॉयल सोसायटी की सदस्यता, सर की उपाधि, ह्यूज पदक, फ्रेंकलिन पदक, लेनिन पुरस्कार और मेत्यूसी पदक से भी सम्मानित किया गया।

वाद्ययंत्रों के अध्ययन से रामन् क्या सिद्ध करना चाहते थे?

रामन् वाद्ययंत्रों के अध्ययन से यह भ्रांति तोड़ना चाहते थे कि विदेशी वाद्ययंत्र भारतीय वाद्ययंत्रों से अधिक उन्नत हैं।

यह पाठ कक्षा 9 के छात्रों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह पाठ छात्रों को वैज्ञानिक जिज्ञासा, शोध के महत्व और भारत के महान वैज्ञानिकों के योगदान से परिचित कराता है, जो उनकी परीक्षा की तैयारी में सहायक है।

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