CBSE Class 8 Hindi Bharat ki Khoj Chapter 3: NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Chapter 3 of Class 8 Hindi 'Bharat ki Khoj'. It delves into historical and contemporary perspectives on various social and economic issues discussed in the chapter. The solutions cover topics such as the multifaceted nature of Kautilya's Arthashastra, the evolution of marriage and divorce laws, the historical struggle for widow remarriage, and the persistent challenges faced by farmers in India, both before and after independence. Students will find clear explanations and analyses that help in understanding the societal changes and ongoing issues related to these subjects. These solutions are designed to aid students in their exam preparation by offering a deeper insight into the chapter's content and its relevance to modern times.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 8
SubjectHindi Bharat ki Khoj
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
ChapterChapter 3

Chapter summary

Chapter 3 of Class 8 Hindi 'Bharat ki Khoj' NCERT Solutions focuses on key social and economic aspects of Indian society. It examines the broad scope of Kautilya's Arthashastra, discusses the changing dynamics of marriage and divorce, and traces the historical context and progress of widow remarriage. Additionally, it analyzes the enduring problems faced by farmers in India. These solutions provide a clear understanding of these topics, helping students grasp historical perspectives and contemporary relevance.

Learning outcomes

  • Understand the diverse subjects covered in Kautilya's Arthashastra.
  • Analyze the historical and modern status of marriage and divorce.
  • Explain the significance and evolution of widow remarriage in India.
  • Identify and discuss the contemporary problems faced by Indian farmers.
  • Relate historical social issues to present-day societal conditions.
  • Understand the importance of public works and citizen participation.

Topics covered

Paper topics

  • Kautilya's Arthashastra
  • Marriage and Divorce
  • Widow Remarriage
  • Farmers' Issues
  • Social Reforms
  • Public Works
  • Historical Context
  • Socio-economic Conditions
  • Indian Society
  • Women's Rights

Important topics

  • Evolution of Marriage and Divorce
  • Significance of Widow Remarriage
  • Contemporary Farmers' Problems
  • Role of Social Reformers
  • Citizen's Role in Public Works

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में अनेक विषयों की चर्चा है, जैसे, "व्यापार और वाणिज्य, कानून और न्यायालय, नगर-व्यवस्था, सामाजिक रीति-रिवाज, विवाह और तलाक, स्त्रियों के अधिकार, कर और लगान, कृषि, खानों और कारखानों को चलाना, दस्तकारी, मंडियाँ, बागवानी, उद्योग-धंधे, सिंचाई और जलमार्ग, जहाज़ और जहाज़रानी, निगर्मे, जन-गणना, मत्स्य-उद्योग, कसाई खाने, पासपोर्ट और जेल-सब शामिल हैं। इसमें विधवा विवाह को मान्यता दी गई है और विशेष परिस्थितियों में तलाक को भी।" वर्तमान में इन विषयों कि क्या स्थिति है? अपनी पसंद के किन्हीं दो-तीन विषयों पर लिखिए।
Solution:

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में वर्णित विषयों में से विवाह और तलाक, तथा विधवा विवाह की वर्तमान स्थिति इस प्रकार है:

विवाह और तलाक

विवाह एक सामाजिक और कानूनी बंधन है जो दो व्यक्तियों को एक साथ लाता है, जिससे उनके परिवार और रिश्ते भी जुड़ते हैं। वर्तमान समय में विवाह की संस्था में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। शिक्षा और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के बढ़ते महत्व के कारण, विवाह अब केवल दो परिवारों का मिलन नहीं रह गया है, बल्कि यह दो व्यक्तियों की आपसी समझ और सहमति पर अधिक आधारित है।

पहले जहाँ विवाह में महिलाओं की भूमिका मुख्य रूप से गृहस्थी संभालने तक सीमित थी, वहीं आज शिक्षित महिलाएँ करियर और व्यक्तिगत विकास पर भी ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इस बदलाव के कारण, विवाह में दोनों साथियों के बीच समानता और साझेदारी का महत्व बढ़ा है।

तलाक की स्थिति में भी परिवर्तन आया है। जहाँ पहले तलाक को एक सामाजिक कलंक माना जाता था और इसे बहुत कम स्वीकार किया जाता था, वहीं आज के प्रगतिशील समाज में, आपसी मतभेद, असहमति या दुर्व्यवहार की स्थिति में तलाक को एक विकल्प के रूप में देखा जाने लगा है। हालाँकि, तलाक की बढ़ती दर को विवाह जैसी पवित्र संस्था के लिए एक चिंता का विषय भी माना जाता है, और इसे आपसी समझ और संवाद से सुलझाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

विधवा विवाह

प्राचीन भारतीय समाज में विधवा विवाह को लेकर कठोर नियम थे। एक स्त्री के पति की मृत्यु के बाद उसे या तो सती होना पड़ता था या फिर एकाकी जीवन व्यतीत करना पड़ता था, जिसे अक्सर समाज से अलग कर दिया जाता था। विधवाओं की यह दयनीय स्थिति बाल विवाह के कारण और भी गंभीर हो जाती थी, क्योंकि कम उम्र में विवाह होने से वे जल्दी विधवा हो जाती थीं।

समाज सुधारकों, जैसे राजा राममोहन राय, के अथक प्रयासों से सती प्रथा का उन्मूलन हुआ और विधवा विवाह को कानूनी मान्यता मिली। आज के समाज में, विधवा विवाह को स्वीकार किया जाता है और इसे बुरी नजर से नहीं देखा जाता। शिक्षा के प्रसार और सामाजिक जागरूकता के कारण बाल विवाह में कमी आई है, जिससे विधवाओं की संख्या भी पहले की तुलना में कम हुई है। अब विधवाओं को भी सम्मानजनक जीवन जीने और पुनर्विवाह करने का अधिकार प्राप्त है, जो समाज की प्रगति का प्रतीक है।

प्रश्न 2

आज़ादी से पहले किसानों की समस्याएँ निम्नलिखित थीं- "गरीबी, कर्ज़, निहित स्वार्थ, ज़र्मीदार, महाजन, भारी लगान और कर, प्लिस के अत्याचार..." आपके विचार से आजकल किसानों की समस्याएँ कौन-कौन सी हैं?
Solution:

आज़ादी से पहले किसानों को जिन समस्याओं का सामना करना पड़ता था, उनमें से कई आज भी मौजूद हैं, हालांकि कुछ नई समस्याएं भी जुड़ गई हैं। आज के किसानों की प्रमुख समस्याएं इस प्रकार हैं:

  • गरीबी और आर्थिक तंगी: आज भी कई किसान गरीबी से जूझ रहे हैं। खेती के लिए आवश्यक सामग्री, जैसे बीज, खाद और आधुनिक मशीनें खरीदना उनके लिए मुश्किल होता है।
  • जलवायु परिवर्तन का प्रभाव: मौसम में अप्रत्याशित बदलाव, जैसे अनियमित वर्षा, सूखा या अत्यधिक बारिश, किसानों की फसलों को गंभीर नुकसान पहुँचाते हैं। इससे पैदावार पर बुरा असर पड़ता है और उनकी आर्थिक स्थिति जस की तस बनी रहती है।
  • सिंचाई सुविधाओं का अभाव: पर्याप्त सिंचाई साधनों की कमी के कारण किसानों को अपनी फसलों के लिए पानी की व्यवस्था करने में कठिनाई होती है, जिससे पैदावार प्रभावित होती है। वे पूरी तरह मौसम पर निर्भर रहते हैं।
  • उन्नत बीज और तकनीक की कमी: पैदावार बढ़ाने के लिए किसानों को अक्सर उन्नत किस्म के बीज और आधुनिक कृषि तकनीकें उपलब्ध नहीं हो पाती हैं।
  • कर्ज़ का बढ़ता बोझ: खेती की लागत बढ़ने और पैदावार कम होने के कारण किसान अक्सर कर्ज़ के जाल में फंस जाते हैं। यह कर्ज़ का बोझ इतना बढ़ जाता है कि कई बार वे हताश होकर गलत कदम उठा लेते हैं, यहाँ तक कि आत्महत्या भी कर लेते हैं।
  • सरकारी नीतियों का अप्रभावी होना: सरकार किसानों की स्थिति सुधारने के लिए कई योजनाएं बनाती है, लेकिन अक्सर ये योजनाएं जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पातीं या वादे पूरे नहीं होते, जिससे किसानों की स्थिति दयनीय बनी रहती है।

प्रश्न 3

"सार्वजनिक काम राजा की मर्ज़ी के मोहताज़ नहीं होते, उसे खुद हमेशा इनके लिए तैयार रहना चाहिए।" ऐसे कौन-कौन से सार्वजनिक कार्य हैं जिन्हें आप बिना किसी हिचकिचाहट के करने को तैयार हो जाते हैं?
Solution:

यह कथन सार्वजनिक कार्यों के महत्व और नागरिकों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर देता है। ऐसे कई सार्वजनिक कार्य हैं जिन्हें हम बिना किसी सरकारी आदेश या हिचकिचाहट के स्वेच्छा से कर सकते हैं:

  • मानवीय सहायता: किसी भी व्यक्ति या जानवर की मदद करना, चाहे वह बीमार हो, घायल हो या किसी अन्य संकट में हो, एक ऐसा कार्य है जिसके लिए सरकारी अनुमति की आवश्यकता नहीं होती। हम स्वेच्छा से उनकी सहायता कर सकते हैं।
  • शिक्षा का प्रसार: गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पढ़ाने के लिए हम अपना समय और ज्ञान दे सकते हैं। शिक्षा का प्रसार एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य है जिसे व्यक्तिगत स्तर पर भी किया जा सकता है।
  • पर्यावरण संरक्षण: अपने आसपास के क्षेत्र को स्वच्छ रखना, वृक्षारोपण करना, और जल संरक्षण जैसे कार्यों में भाग लेना हमारे देश और समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ये कार्य सामूहिक प्रयासों से ही संभव हैं।
  • सामाजिक जागरूकता: समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाना और लोगों को जागरूक करना भी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य है। उदाहरण के लिए, महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों के लिए प्रयास करना।
  • सामुदायिक सहयोग: किसी भी आपातकालीन स्थिति, जैसे दुर्घटना या प्राकृतिक आपदा के समय, घायलों की मदद करना और राहत कार्यों में सहयोग करना हमारा नैतिक कर्तव्य है।
  • नागरिक सजगता: यदि सरकार या स्थानीय प्रशासन अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन नहीं कर रहा है, तो उसके प्रति सजग रहना और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाना भी एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक कार्य है।

ये सभी कार्य समाज को बेहतर बनाने में योगदान देते हैं और इन्हें करने के लिए किसी राजा या सरकार की इच्छा पर निर्भर रहने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि यह हमारी अपनी जिम्मेदारी है।

Common mistakes

  • Confusing historical social norms with current legal frameworks.
  • Underestimating the complexity of farmers' issues.
  • Overlooking the role of social reformers in advocating for change.
  • Failing to connect individual actions to broader societal improvements.

Revision tips

  • Focus on the comparison between historical and present-day situations for marriage, divorce, and widow remarriage.
  • List the specific problems faced by farmers, both past and present, as discussed in the solutions.
  • Identify the key social reformers mentioned and their contributions.
  • Reflect on the examples of public works that can be undertaken without government intervention.

Practice MCQs

Q1. कौटिल्य के अर्थशास्त्र में किन विषयों की चर्चा की गई है?

Q2. आधुनिक समाज में तलाक की प्रवृत्ति बढ़ने का एक मुख्य कारण क्या है?

Q3. विधवा विवाह को समाज में मान्यता दिलाने में किनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है?

Q4. आज़ादी से पहले किसानों की मुख्य समस्याएँ क्या थीं?

Q5. आज के किसानों के लिए जलवायु परिवर्तन एक बड़ी समस्या क्यों है?

Frequently asked questions

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में किन-किन विषयों पर प्रकाश डाला गया है?

कौटिल्य के अर्थशास्त्र में व्यापार, वाणिज्य, कानून, न्यायालय, नगर-व्यवस्था, सामाजिक रीति-रिवाज, विवाह, तलाक, स्त्रियों के अधिकार, कर, लगान, कृषि, खानों, कारखानों, उद्योग-धंधों, सिंचाई, जहाज़रानी, जन-गणना, मत्स्य-उद्योग, कसाई खाने, पासपोर्ट और जेल जैसे अनेक विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई है।

आधुनिक समय में विवाह और तलाक की स्थिति क्या है?

आधुनिक समय में शिक्षा और करियर पर महिलाओं के बढ़ते ध्यान के कारण विवाह और तलाक की प्रवृत्ति में बदलाव आया है। जहाँ विवाह में दोनों साथी जिम्मेदारियां साझा करते हैं, वहीं आपसी समझ में कमी और व्यस्तता के कारण तलाक की दर भी बढ़ी है।

विधवा विवाह का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

प्राचीन काल में विधवा विवाह को समाज में उचित नहीं माना जाता था और विधवाओं का जीवन दयनीय होता था। राजा राममोहन राय जैसे समाज सुधारकों के प्रयासों से सती प्रथा का उन्मूलन हुआ और विधवा विवाह को मान्यता मिली, जिससे स्त्रियों की स्थिति सुधरी।

आज़ादी के बाद किसानों की समस्याओं में क्या बदलाव आया है?

आज़ादी से पहले की गरीबी, कर्ज़, जमींदार और महाजन के अत्याचार जैसी कुछ समस्याएं कम हुई हैं, लेकिन जलवायु परिवर्तन, सिंचाई साधनों का अभाव, उन्नत बीज की कमी और सरकारी वादों का पूरा न होना जैसी नई और पुरानी समस्याएं आज भी किसानों के सामने विकट रूप में मौजूद हैं।

सार्वजनिक कार्यों के लिए सरकार की प्रतीक्षा क्यों नहीं करनी चाहिए?

कई सार्वजनिक कार्य, जैसे किसी की मदद करना, गरीब बच्चों को पढ़ाना, पर्यावरण की रक्षा करना, और स्वच्छता बनाए रखना, ऐसे हैं जिन्हें नागरिक बिना सरकारी हस्तक्षेप के स्वयं कर सकते हैं। यह समाज के प्रति हमारे कर्तव्यों का निर्वहन है।

यह समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान 'भारत की खोज' के तीसरे अध्याय के महत्वपूर्ण विषयों जैसे कौटिल्य के अर्थशास्त्र, विवाह, तलाक, विधवा विवाह और किसानों की समस्याओं पर विस्तृत और स्पष्ट जानकारी प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों के उत्तर देने में सहायता मिलती है।

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