कक्षा 7 हिंदी NCERT समाधान: चिड़िया की बच्ची
यह पृष्ठ कक्षा 7 हिंदी की पुस्तक ' वसंत भाग 2' के अध्याय 9 'चिड़िया की बच्ची' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इन समाधानों में कहानी के पात्रों, जैसे माधवदास और नन्ही चिड़िया के विचारों और भावनाओं का गहन विश्लेषण शामिल है। यह बताता है कि कैसे माधवदास की संपन्नता के बावजूद वह सुखी नहीं था, और कैसे चिड़िया अपनी स्वतंत्रता को सबसे अधिक महत्व देती है। समाधानों में माँ के महत्व, स्वाधीनता बनाम प्रलोभन, और प्रकृति के अनुशासन जैसे विषयों पर भी प्रकाश डाला गया है। ये समाधान छात्रों को कहानी के पात्रों के मनोभावों को समझने, मुख्य संदेशों को आत्मसात करने और परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करने में मदद करेंगे।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 7 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 9 चिड़िया की बच्ची |
Chapter summary
कक्षा 7 हिंदी के अध्याय 'चिड़िया की बच्ची' के ये NCERT समाधान कहानी के मुख्य पात्रों के दृष्टिकोणों का विश्लेषण करते हैं। इसमें माधवदास की संपन्नता और उसके अकेलेपन, चिड़िया के लिए स्वतंत्रता का महत्व, और माँ के स्नेह की अनमोलता जैसे विषयों पर ध्यान केंद्रित किया गया है। समाधान छात्रों को स्वाधीनता और प्रलोभन के बीच अंतर समझने में मदद करते हैं और प्रकृति में पाए जाने वाले स्वाभाविक अनुशासन के उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।
Learning outcomes
- माधवदास के जीवन की संपन्नता और उसके अकेलेपन के कारणों को समझना।
- चिड़िया के लिए स्वतंत्रता के महत्व और उसके प्राकृतिक सुखों को पहचानना।
- माँ के स्नेह और जीवन में उसके महत्व को अपने शब्दों में व्यक्त करना।
- स्वाधीनता और प्रलोभनों से भरी पराधीनता के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- प्रकृति में पाए जाने वाले अनुशासन के उदाहरणों को पहचानना और समझाना।
- कहानी के पात्रों के मनोभावों के अंतर का विश्लेषण करना।
Topics covered
Paper topics
- माधवदास का जीवन और संपन्नता
- माधवदास का अकेलापन और असुख
- चिड़िया की स्वतंत्रता का महत्व
- स्वाधीनता बनाम प्रलोभन
- माँ का स्नेह और जीवन में उसका महत्व
- प्रकृति का अनुशासन
- पात्रों के मनोभावों का अंतर
- कहानी का शीर्षक
- स्वच्छंदता का मूल्य
Important topics
- चिड़िया की स्वतंत्रता का महत्व
- स्वाधीनता बनाम प्रलोभन
- माँ का स्नेह और जीवन में उसका महत्व
- माधवदास का अकेलापन और असुख
- पात्रों के मनोभावों का अंतर
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
किन बातों से ज्ञात होता है कि माधवदास का जीवन संपन्नता से भरा था और किन बातों से ज्ञात होता है कि वह सुखी नहीं था?
माधवदास के जीवन की संपन्नता निम्नलिखित बातों से स्पष्ट होती है:
- उनके पास संगमरमर की एक बड़ी कोठी थी।
- कोठी के सामने एक सुंदर बगीचा था।
- उनका रहन-सहन रईसों जैसा था।
- वे चिड़िया के लिए सोने का पिंजरा बनवाने और उसे मालामाल करने की बात करते थे।
- उन्होंने स्वयं स्वीकार किया कि उनके पास कई कोठियाँ, बगीचे और नौकर-चाकर हैं।
इसके विपरीत, माधवदास के सुखी न होने के संकेत निम्नलिखित बातों से मिलते हैं:
- उनके जीवन में एक खालीपन था।
- उन्होंने स्वयं कहा कि उनका महल सूना है और वहाँ कोई चहचहाता नहीं।
- वे अपने अकेलेपन को दूर करने के लिए चिड़िया को अपने साथ रहने के लिए मजबूर करना चाहते थे, जो दर्शाता है कि सारी संपन्नताओं के बावजूद वे प्रसन्न नहीं थे।
प्रश्न 2
माधवदास क्यों बार-बार चिड़िया से कहता है कि यह बगीचा तुम्हारा ही हैं? क्या माधवदास निःस्वार्थ मन से ऐसा कह रहा था? स्पष्ट कीजिए।
माधवदास बार-बार चिड़िया से कहता है कि बगीचा उसका ही है, क्योंकि वह चाहता है कि चिड़िया हमेशा के लिए उसी के बगीचे में रह जाए और कहीं और न जाए। वह उसे अपने पास आकर्षित करने का प्रयास कर रहा था।
माधवदास का यह कथन निःस्वार्थ नहीं था। उसके इस कथन के पीछे उसका गहरा स्वार्थ छिपा हुआ था। वह चिड़िया को अपने महल में, संभवतः एक पिंजरे में, बंद करके रखना चाहता था ताकि वह अपनी इच्छा पूरी कर सके। वह उसकी सुंदरता को निहारना चाहता था और उसकी मधुर आवाज़ सुनना चाहता था। इसलिए, वह उसे बहला-फुसलाकर अपने पास रोकने की कोशिश कर रहा था।
प्रश्न 3
माधवदास के बार-बार समझाने पर भी चिड़िया सोने के पिंजरे और सुख-सुविधाओं को कोई महत्त्व नहीं दे रही थी। दूसरी तरफ़ माधवदास की नज़र में चिड़िया की जिद को कोई तुक न था। माधवदास और चिड़िया के मनोभावों के अंतर, क्या-क्या थे। अपने शब्दों में लिखिए।
माधवदास और चिड़िया के मनोभावों में बहुत अंतर था:
चिड़िया के मनोभाव:
- चिड़िया के लिए सुख-सुविधाएँ प्रकृति में ही निहित थीं, जैसे हवा, धूप और फूल।
- उसकी सबसे बड़ी संपत्ति उसकी माँ, उसका परिवार और उसकी स्वच्छंदता थी।
- वह किसी भी प्रकार के सोने-चाँदी या भौतिक सुख-सुविधाओं को महत्व नहीं देती थी, क्योंकि वह जानती थी कि ये चीजें उसे उसके प्राकृतिक सुखों से वंचित कर देंगी।
- उसके लिए घर और माँ का स्नेह सबसे बढ़कर था।
माधवदास के मनोभाव:
- माधवदास सांसारिक सुखों और धन-दौलत में लिप्त रहने वाले व्यक्ति थे।
- उनके लिए प्रकृति का सौंदर्य केवल निहारने की वस्तु थी, न कि जीवन का आधार।
- वे धन-दौलत और शक्ति को संसार की सबसे मूल्यवान वस्तुएँ मानते थे, जिनसे वे दुनिया पर राज कर सकते थे।
- इसी कारण, वे चिड़िया की अपनी माँ और घर के प्रति जिद को मूर्खतापूर्ण और अतार्किक समझ रहे थे, क्योंकि वे उसके प्राकृतिक सुखों के महत्व को नहीं समझते थे।
प्रश्न 4
कहानी के अंत में नन्ही चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलने की बात पढ़कर तुम्हें कैसा लगा? चालीस-पचास या इससे कुछ अधिक शब्दों में अपनी प्रतिक्रिया लिखिए।
कहानी के अंत में नन्ही चिड़िया का सेठ के नौकर के पंजे से भाग निकलना पढ़कर मुझे अत्यंत खुशी और गहरी राहत महसूस हुई। यदि वह माधवदास के चंगुल में फँस जाती, तो उसकी सारी स्वतंत्रता, खुशी और माँ का स्नेह छिन जाता, और उसका शेष जीवन कैद में व्यतीत होता। उसके सुरक्षित बच निकलने की बात से मन को बहुत सुकून मिला और ईश्वर का धन्यवाद हुआ कि उसने उस नन्ही सी जान को एक बड़े संकट से बचा लिया।
प्रश्न 5
'माँ मेरी बाट देखती होगी'-नन्ही चिड़िया बार-बार इसी बात को कहती है। आप अपने अनुभव के आधार पर बताइए कि हमारी ज़िंदगी में माँ का क्या महत्त्व है?
हमारी ज़िंदगी में माँ का स्थान सर्वोपरि है। माँ ही जीवन का आधार होती हैं और उनसे ही सारे सुख जुड़े होते हैं। माँ हमें हर विपत्ति और कष्ट से बचाती हैं। वे अपनी संतान के लिए हर दुख सहने को तैयार रहती हैं और अपनी संतान पर कभी कोई आँच नहीं आने देना चाहतीं। माँ एक सुरक्षा कवच की तरह होती हैं, जो हमें हर बुरी बला से बचाती है। माँ का स्नेह और आशीर्वाद हमेशा हमारी सफलता में सहायक होता है। माँ के बिना जीवन अधूरा है; वे ईश्वर का ही रूप हैं। माँ की महिमा का वर्णन शब्दों में करना कठिन है। यही कारण है कि कोई भी बच्चा, चाहे वह कितना भी छोटा या अनजान क्यों न हो, किसी भी प्रलोभन के बावजूद अपनी माँ से दूर नहीं रहना चाहता।
प्रश्न 6
इस कहानी का कोई और शीर्षक देना हो तो आप क्या देना चाहेंगे और क्यों?
इस कहानी के लिए एक उपयुक्त वैकल्पिक शीर्षक 'बच गई चिड़िया' हो सकता है। इसका कारण यह है कि कहानी के अंत में चिड़िया सेठ माधवदास के द्वारा उसे फँसाने के सभी प्रयासों (प्रलोभन और धोखे) से सफलतापूर्वक बच निकलती है और अपनी माँ के पास पहुँच जाती है। यह शीर्षक कहानी के मुख्य घटनाक्रम और उसके सुखद अंत को दर्शाता है।
प्रश्न 1
इस कहानी में आपने देखा कि वह चिड़िया अपने घर से दूर आकर भी फिर अपने घोंसले तक वापस पहुँच जाती है। मधुमक्खियों, चींटियों, ग्रह-नक्षत्रों तथा प्रकृति की अन्य चीजों में हमें एक अनुशासनबद्धता देखने को मिलती है। इस तरह के स्वाभाविक अनुशासन का रूप, आपको कहाँ-कहाँ देखने को मिलता है? उदाहरण देकर बताइए।
प्रकृति में स्वाभाविक अनुशासन का रूप हमें अनेक स्थानों पर देखने को मिलता है, जो जीवन को सुचारू रूप से चलाने के लिए आवश्यक है। कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:
- ऋतुओं का क्रम: ऋतुएँ एक निश्चित क्रम में आती-जाती रहती हैं। गर्मी के बाद बरसात और फिर सर्दी का आना, यह एक स्वाभाविक अनुशासन है। इसमें कोई उलटफेर नहीं होता, अन्यथा धरती पर जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता।
- पशु-पक्षियों का लौट आना: दिन भर चाहे पशु-पक्षी कहीं भी घूमते रहें, लेकिन शाम होते ही वे अपने-अपने आश्रय या घोंसलों में लौट आते हैं। यह उनके दैनिक जीवन का एक स्वाभाविक अनुशासन है।
- दिन-रात का चक्र: प्रकृति में रात और दिन का एक निश्चित क्रम बना हुआ है। सूरज ठीक समय पर निकलता है और डूबता है। इस क्रम में कोई बदलाव नहीं होता, जो पृथ्वी पर जीवन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
- नदियों का प्रवाह: नदियाँ हमेशा पहाड़ों से निकलकर समुद्र की ओर बहती हैं, यह भी एक स्वाभाविक अनुशासन है।
यह सभी अनुशासनबद्धताएँ पृथ्वी पर जीवन को व्यवस्थित और सुचारू बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
प्रश्न 2
सोचकर लिखिए कि यदि सारी सुविधाएँ देकर एक कमरे में आपको सारे दिन बंद रहने को कहा जाए तो क्या आप स्वीकार करेंगे? आपको अधिक प्रिय क्या होगा? 'स्वाधीनता' या 'प्रलोभनोंवाली पराधीनता'? ऐसा क्यों कहा जाता है कि पराधीन व्यक्ति को सपने में भी सुख नहीं मिलपाता। नीचे दिए गए कारणों को पढ़ें और विचार करें-
- (क) क्योंकि किसी को पराधीन बनाने की इच्छा रखनेवाला व्यक्ति स्वयं दुखी होता है, वह किसी को सुखी नहीं कर सकता ।
- (ख) क्योंिक पराधीन व्यक्ति सुख के सपने देखना ही नही चाहता।
- (ग) क्योंकि पराधीन व्यक्ति को सुख के सपने देखने का भी अवसर नहीं मिलता।
सारी सुख-सुविधाएँ देकर एक कमरे में बंद रहने का प्रस्ताव कोई भी व्यक्ति स्वीकार नहीं करेगा, क्योंकि मनुष्य स्वभाव से ही स्वतंत्र होता है। मुझे 'स्वाधीनता' ही सबसे अधिक प्रिय होगी, न कि 'प्रलोभनों वाली पराधीनता'।
ऐसा कहा जाता है कि पराधीन व्यक्ति को सपने में भी सुख नहीं मिल पाता, क्योंकि उसकी स्वतंत्रता छिन जाती है। वह अपनी इच्छाओं और आकांक्षाओं को पूरा नहीं कर पाता। उसे हर पल दूसरों के अधीन रहना पड़ता है। दिए गए कारणों में से, कारण (ग) सबसे अधिक प्रासंगिक है: 'क्योंकि पराधीन व्यक्ति को सुख के सपने देखने का भी अवसर नहीं मिलता।' जब व्यक्ति स्वयं ही स्वतंत्र नहीं है और अपनी इच्छाओं को पूरा नहीं कर सकता, तो वह सुख के सपने कैसे देख सकता है? उसकी सारी ऊर्जा और इच्छाएँ दबी रह जाती हैं। कारण (क) भी कुछ हद तक सही है कि जो दूसरों को पराधीन बनाना चाहता है, वह स्वयं भी सुखी नहीं हो सकता, लेकिन मुख्य कारण व्यक्ति की अपनी स्वतंत्रता का हनन है। कारण (ख) गलत है क्योंकि पराधीन व्यक्ति सुख के सपने देखना तो दूर, सुख का अनुभव ही नहीं कर पाता।
Common mistakes
- स्वतंत्रता के महत्व को कम आंकना और भौतिक सुख-सुविधाओं को अधिक महत्व देना।
- माधवदास के अकेलेपन के कारणों को केवल बाहरी संपन्नता से जोड़ना।
- चिड़िया के प्राकृतिक सुखों के महत्व को न समझना।
- माँ के स्नेह के वास्तविक मूल्य को न पहचान पाना।
Revision tips
- माधवदास और चिड़िया के विचारों के अंतर को समझने पर ध्यान केंद्रित करें।
- स्वतंत्रता के महत्व को दर्शाने वाले कहानी के अंशों को रेखांकित करें।
- माँ के महत्व पर दिए गए उत्तर को अपने व्यक्तिगत अनुभवों से जोड़कर याद करें।
- प्रकृति के अनुशासन से संबंधित उदाहरणों को सूचीबद्ध करें।
Practice MCQs
Q1. माधवदास के जीवन में किन बातों से संपन्नता का पता चलता है?
Explanation: माधवदास की संगमरमर की कोठी, सुंदर बगीचा, रईसों जैसा रहन-सहन और चिड़िया के लिए सोने का पिंजरा बनवाने की इच्छा, ये सभी उसकी संपन्नता को दर्शाते हैं।
Q2. माधवदास के सुखी न होने का क्या कारण था?
Explanation: माधवदास स्वयं स्वीकार करता है कि उसका महल सूना है और कोई चहचहाता नहीं, जो उसके अकेलेपन और जीवन में खालीपन को दर्शाता है।
Q3. माधवदास चिड़िया से बार-बार बगीचा अपना कहने के पीछे क्या स्वार्थ था?
Explanation: माधवदास चिड़िया को अपने बगीचे में फँसाकर रखना चाहता था ताकि वह उसकी सुंदरता और चहचहाहट का आनंद ले सके, इसलिए वह बार-बार बगीचे को उसका बताता था।
Q4. चिड़िया के लिए सबसे बड़ा सुख क्या था?
Explanation: चिड़िया के लिए हवा, धूप, फूल, माँ, परिवार और उसकी स्वच्छंदता ही सबसे बड़े सुख थे, न कि सोने-चाँदी जैसी चीजें।
Q5. कहानी के अंत में चिड़िया का नौकर के पंजे से भाग निकलना पढ़कर कैसा लगा?
Explanation: चिड़िया का सुरक्षित बच निकलना पढ़कर अत्यंत खुशी और राहत महसूस हुई, क्योंकि उसकी स्वतंत्रता बच गई थी।
Q6. जीवन में माँ का क्या महत्व है?
Explanation: माँ जीवन में सुख, सुरक्षा और ईश्वर का रूप होती है, वह संतान के लिए सब कुछ होती है।
Frequently asked questions
कक्षा 7 हिंदी के 'चिड़िया की बच्ची' पाठ में मुख्य पात्र कौन हैं?
इस पाठ में मुख्य पात्र माधवदास (एक संपन्न व्यक्ति) और एक नन्ही चिड़िया हैं।
माधवदास चिड़िया को अपने पास क्यों रोकना चाहता था?
माधवदास अपने अकेलेपन को दूर करने और चिड़िया की सुंदरता व चहचहाहट का आनंद लेने के लिए उसे अपने पास रोकना चाहता था।
चिड़िया के लिए सबसे महत्वपूर्ण क्या था?
चिड़िया के लिए उसकी माँ, उसका परिवार और उसकी स्वच्छंदता सबसे महत्वपूर्ण थी।
क्या माधवदास का चिड़िया को बगीचा अपना कहना निःस्वार्थ था?
नहीं, माधवदास का यह कहना निःस्वार्थ नहीं था। वह चिड़िया को अपने स्वार्थ के लिए वहीं फँसाए रखना चाहता था।
कहानी से हमें माँ के बारे में क्या सीखने को मिलता है?
कहानी सिखाती है कि माँ का स्नेह अनमोल होता है और वह बच्चे के लिए सुरक्षा कवच की तरह होती है, जिसके बिना बच्चा बेचैन रहता है।
स्वाधीनता और प्रलोभनों वाली पराधीनता में क्या अंतर है?
स्वाधीनता का अर्थ है अपनी मर्जी से जीवन जीना, जबकि प्रलोभनों वाली पराधीनता में सुख-सुविधाओं का लालच देकर स्वतंत्रता छीन ली जाती है।
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