कक्षा 6 हिंदी वसंत भाग 1 - पाठ 17: साँस – साँस में बाँस NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 6 की हिंदी पुस्तक 'वसंत भाग 1' के पाठ 17, 'साँस – साँस में बाँस' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह पाठ बाँस के विभिन्न उपयोगों, विशेष रूप से असम जैसे क्षेत्रों में मछली पकड़ने के लिए इसके उपयोग, और बाँस की बुनाई के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालता है। समाधान बताते हैं कि बूढ़ा बाँस क्या होता है और युवा बाँस से कैसे भिन्न होता है, साथ ही बाँस की बुनाई के मानव इतिहास से जुड़ाव पर भी चर्चा करते हैं। यह पाठ छात्रों को बाँस की बहुमुखी प्रतिभा और सांस्कृतिक महत्व को समझने में मदद करता है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए पाठ की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करेंगे।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 6 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Vasant Part – 1 - Ch 17: साँस – साँस में बांस |
Chapter summary
कक्षा 6 के लिए 'वसंत भाग 1' पुस्तक के पाठ 17 'साँस – साँस में बाँस' के NCERT समाधान यहाँ दिए गए हैं। यह पाठ बाँस के पारंपरिक उपयोगों, जैसे कि असम में 'जकाई' नामक मछली पकड़ने का जाल बनाना, और बाँस की बुनाई के ऐतिहासिक विकास पर केंद्रित है। समाधान यह भी बताते हैं कि बाँस को बूढ़ा कब माना जाता है और युवा बाँस की तुलना में उसमें क्या अंतर होता है। यह पाठ छात्रों को बाँस के महत्व और इसके उपयोग से संबंधित सांस्कृतिक प्रथाओं को समझने में मदद करता है।
Learning outcomes
- बाँस को बूढ़ा कब कहा जाता है, यह समझना।
- युवा और बूढ़े बाँस के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- बाँस से बनी विभिन्न वस्तुओं और उनके उपयोगों की पहचान करना।
- बाँस की बुनाई के ऐतिहासिक महत्व को समझना।
- बाँस के विभिन्न उपयोगों से संबंधित भौगोलिक क्षेत्रों को जानना।
Topics covered
Paper topics
- बाँस की उम्र और विशेषताएँ
- बाँस से बनी वस्तुएँ
- बाँस का उपयोग (मछली पकड़ने का जाल)
- बाँस की बुनाई का इतिहास
- बाँस का सांस्कृतिक महत्व
- भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और बाँस
Important topics
- बाँस की उम्र और युवा/बूढ़े बाँस में अंतर
- बाँस से बनी 'जकाई' (मछली पकड़ने का जाल)
- बाँस की बुनाई का ऐतिहासिक जुड़ाव
- बाँस के विभिन्न उपयोग और भौगोलिक संदर्भ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
पाठ के अनुसार, तीन साल से अधिक उम्र के बाँस को बूढ़ा माना जाता है। बूढ़े बाँस की मुख्य विशेषता यह होती है कि वे सख्त हो जाते हैं और कभी-कभी टूट भी जाते हैं। इसके विपरीत, युवा बाँस लचीला, मुलायम और हरा होता है, जिसे आसानी से अपनी आवश्यकतानुसार मोड़ा या काटा जा सकता है। बूढ़े बाँसों से शाखाएँ और पत्तियाँ हटा दी जाती हैं, और फिर उनमें से उन बाँसों को चुना जाता है जिनकी गाँठें एक-दूसरे से दूर होती हैं, जो उन्हें बुनाई के लिए उपयुक्त बनाती हैं।
प्रश्न 2
बाँस से बनाई जाने वाली चीजों में सबसे आश्चर्यजनक चीज असम में बाँस से बना मछली पकड़ने का जाल, जिसे 'जकाई' कहा जाता है, लगती है। यह जाल अपनी अनोखी बनावट और उपयोगिता के कारण आश्चर्यजनक है। इसे बाँस की खपच्चियों को इस तरह से बाँधकर बनाया जाता है कि वे एक शंकु (cone) का आकार ले लेते हैं। इस शंकु का ऊपरी सिरा अंडाकार होता है और निचला नुकीला सिरा खपच्चियों के आपस में गुँथे होने से बनता है। इस जाल का उपयोग छोटी मछलियों को पकड़ने के लिए किया जाता है, जिसे पानी की सतह पर रखकर या धीरे-धीरे चलते हुए खींचा जाता है। इसकी यह विशेष बनावट और कार्यक्षमता इसे बहुत खास बनाती है।
प्रश्न 3
ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि बाँस की बुनाई का काम तब से शुरू हुआ होगा जब इंसान ने अपने हाथों से कलात्मक और उपयोगी चीजें बनाना सीखा। यह संभवतः उस दौर से जुड़ा है जब मनुष्य भोजन इकट्ठा करने के लिए डलिया या टोकरी जैसी चीजें बनाता था। समय के साथ, आवश्यकतानुसार इसमें बदलाव होते रहे हैं और यह कला आज भी जारी है। बाँस की बुनाई का रिश्ता मानव के प्रारंभिक काल से है, जब उसने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करना शुरू किया था।
प्रश्न 4
बाँस के विभिन्न उपयोगों से संबंधित जानकारी मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पूर्वी भू-भाग के संदर्भ में दी गई है। भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के सात राज्यों में बाँस बहुतायत में उगता है, जिसके कारण वहाँ बाँस से चीजें बनाने का चलन बहुत अधिक है। इन क्षेत्रों के समुदायों के जीवनयापन में बाँस का महत्वपूर्ण योगदान है। विशेष रूप से, नागालैंड और असम जैसे राज्यों में बाँस की चीजें बनाने का प्रचलन बहुत अधिक है। एटलस में इन राज्यों की भौगोलिक स्थिति को देखा जा सकता है, जो इस क्षेत्र में बाँस की उपलब्धता और उसके उपयोग को समझने में मदद करता है।
Common mistakes
- बाँस की उम्र और उसकी विशेषताओं के बीच संबंध को ठीक से न समझना।
- बाँस से बनी वस्तुओं के उपयोगों को गलत बताना।
- बाँस की बुनाई के ऐतिहासिक संदर्भ को अस्पष्ट समझना।
Revision tips
- बाँस की उम्र और उसके गुणों के बीच के अंतर को याद करें।
- बाँस से बनने वाली वस्तुओं की सूची बनाएं और उनके उपयोगों को समझें।
- बाँस की बुनाई के ऐतिहासिक महत्व पर ध्यान केंद्रित करें।
- पाठ में उल्लिखित विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों और बाँस के उपयोगों का संबंध स्थापित करें।
Practice MCQs
Q1. पाठ के अनुसार, बाँस को बूढ़ा कब कहा जाता है?
Explanation: पाठ में बताया गया है कि तीन साल से अधिक उम्र के बाँस को बूढ़ा माना जाता है।
Q2. असम में मछली पकड़ने के लिए बाँस से बने किस अनोखे जाल का उल्लेख किया गया है?
Explanation: पाठ में असम में मछली पकड़ने के लिए बाँस से बने 'जकाई' नामक जाल का वर्णन है।
Q3. युवा बाँस की क्या विशेषता होती है?
Explanation: युवा बाँस लचीला, मुलायम और हरा होता है, जिसे आसानी से आकार दिया जा सकता है।
Q4. बाँस की बुनाई का संबंध मानव इतिहास के किस दौर से जोड़ा गया है?
Explanation: ऐसा माना जाता है कि बाँस की बुनाई का रिश्ता उस दौर से है जब इंसान भोजन इकट्ठा करने के लिए डलियानुमा चीजें बनाता था।
Q5. बाँस के उपयोग से संबंधित जानकारी भारत के किस भू-भाग के संदर्भ में प्रमुखता से दी गई है?
Explanation: पाठ में बाँस के उपयोग और बुनाई के चलन के बारे में जानकारी मुख्य रूप से भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों के संदर्भ में दी गई है।
Frequently asked questions
कक्षा 6 के हिंदी पाठ 'साँस – साँस में बाँस' में क्या सिखाया गया है?
यह पाठ बाँस के विभिन्न उपयोगों, जैसे कि असम में मछली पकड़ने के लिए 'जकाई' नामक जाल बनाना, और बाँस की बुनाई के ऐतिहासिक महत्व के बारे में बताता है। यह युवा और बूढ़े बाँस के बीच के अंतर को भी स्पष्ट करता है।
बाँस को बूढ़ा कब माना जाता है और क्यों?
पाठ के अनुसार, तीन साल से अधिक उम्र के बाँस को बूढ़ा कहा जाता है। बूढ़े बाँस सख्त होते हैं और टूट भी सकते हैं, जबकि युवा बाँस लचीला और मुलायम होता है।
बाँस की बुनाई का इतिहास क्या है?
ऐसा माना जाता है कि बाँस की बुनाई का संबंध उस समय से है जब इंसान ने हाथ से कलात्मक चीजें बनानी शुरू कीं, संभवतः भोजन इकट्ठा करने के लिए डलियानुमा चीजें बनाते समय।
यह NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करेंगे?
ये समाधान छात्रों को पाठ की सामग्री को बेहतर ढंग से समझने, मुख्य अवधारणाओं को याद रखने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करेंगे।
बाँस से बनी कौन सी वस्तु का विशेष उल्लेख किया गया है?
पाठ में असम में मछली पकड़ने के लिए बाँस से बने 'जकाई' नामक अनोखे जाल का विशेष उल्लेख किया गया है।
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