कक्षा 11 भूगोल: पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 के लिए 'भौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत' पुस्तक के अध्याय 2, 'पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास' पर केंद्रित NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें पृथ्वी की आयु, विभिन्न भूवैज्ञानिक समय अवधियों की लंबाई, वायुमंडल के निर्माण में सहायक कारक, पार्थिव ग्रहों की प्रकृति और पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है। समाधानों में बहुवैकल्पिक प्रश्नों के उत्तर और संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्नों की विस्तृत व्याख्या शामिल है, जो छात्रों को पृथ्वी के विकास की जटिलताओं को समझने में मदद करते हैं। यह सामग्री छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए एक स्पष्ट और संक्षिप्त मार्गदर्शिका प्रदान करती है, जिससे वे प्रमुख अवधारणाओं को प्रभावी ढंग से दोहरा सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभौतिक भूगोल के मूल सिद्धांत
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter2. पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास

Chapter summary

कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 2, 'पृथ्वी की उत्पत्ति एवं विकास' के लिए NCERT समाधान, पृथ्वी की आयु (लगभग 460 करोड़ वर्ष) और ब्रह्मांड की आयु (लगभग 13.7 अरब वर्ष) जैसे महत्वपूर्ण तथ्यों को स्पष्ट करते हैं। यह अध्याय विभिन्न भूवैज्ञानिक समय मापों (इयान, महाकल्प, कल्प, युग) की तुलना करता है और वायुमंडल के विकास में सहायक कारकों पर प्रकाश डालता है। पार्थिव ग्रहों की चट्टानी प्रकृति और पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय (लगभग 3.8 अरब वर्ष पहले) की भी व्याख्या की गई है। समाधानों में कान्ट-लाप्लेस और चैम्बरलेन-मोल्टन की परिकल्पनाओं के बीच अंतर और विभेदन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी शामिल है।

Learning outcomes

  • पृथ्वी की आयु और ब्रह्मांड की आयु का अनुमान लगाना।
  • भूवैज्ञानिक समय की विभिन्न इकाइयों (इयान, महाकल्प, कल्प, युग) के बीच अंतर समझना।
  • वायुमंडल के निर्माण और संशोधन में सहायक कारकों की पहचान करना।
  • पार्थिव ग्रहों की विशेषताओं और उनके निर्माण की प्रक्रिया को समझना।
  • पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति के समय का आकलन करना।
  • पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित विभिन्न वैज्ञानिक परिकल्पनाओं (जैसे कान्ट-लाप्लेस, चैम्बरलेन-मोल्टन) के बीच अंतर स्पष्ट करना।
  • विभेदन (Differentiation) की प्रक्रिया को परिभाषित करना और समझना।

Topics covered

Paper topics

  • पृथ्वी की आयु
  • ब्रह्मांड की आयु
  • भूवैज्ञानिक समय माप (इयान, महाकल्प, कल्प, युग)
  • वायुमंडल का निर्माण और संशोधन
  • सौर पवन
  • गैस उत्सर्जन
  • प्रकाश संश्लेषण
  • पार्थिव ग्रह (Terrestrial Planets)
  • गैसीय ग्रह (Gas Giants)
  • पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति
  • वैज्ञानिक परिकल्पनाएं (कान्ट-लाप्लेस, चैम्बरलेन-मोल्टन)
  • विभेदन (Differentiation)

Important topics

  • पृथ्वी की आयु और उत्पत्ति का समय
  • भूवैज्ञानिक समय की विभिन्न अवधियों का क्रम
  • पार्थिव ग्रहों की विशेषताएँ
  • विभेदन प्रक्रिया की समझ
  • जीवन की उत्पत्ति का अनुमानित समय

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Questions and Solutions

बहुवैकल्पिक प्रश्न 1

निम्नलिखित में से कौन-सी संख्या पृथ्वी की आयु को प्रदर्शित करती है?
  • (क) ४६ लाख वर्ष
  • (ख) ४६० करोड़ वर्ष
  • (ग) १३.७ अरब वर्ष
  • (घ) १३.७ खरब वर्ष
Solution: पृथ्वी की आयु का अनुमान रेडियोमेट्रिक डेटिंग जैसी वैज्ञानिक विधियों द्वारा लगाया गया है। इन विधियों के आधार पर, पृथ्वी की आयु लगभग ४६० करोड़ वर्ष (या ४.६ अरब वर्ष) मानी जाती है। १३.७ अरब वर्ष ब्रह्मांड की अनुमानित आयु है। इसलिए, सही विकल्प (ख) है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 2

निम्न में कौन-सी अवधि सबसे लम्बी है?
  • (क) इयान (Eons)
  • (ख) महाकल्प (Era)
  • (ग) कल्प (Period)
  • (घ) युग (Epoch)
Solution: भूवैज्ञानिक समय को विभिन्न इकाइयों में विभाजित किया गया है। इनमें सबसे बड़ी और सबसे लंबी अवधि 'इयान' (Eon) होती है। इसके बाद महाकल्प (Era), कल्प (Period) और युग (Epoch) का क्रम आता है। अतः, सबसे लंबी अवधि इयान है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 3

निम्न में कौन-सा तत्व वर्तमान वायुमंडल के निर्माण व संशोधन में सहायक नहीं है?
  • (क) सौर पवन
  • (ख) गैस उत्सर्जन
  • (ग) विभेदन
  • (घ) प्रकाश संश्लेषण
Solution: वर्तमान वायुमंडल के निर्माण और संशोधन में सौर पवन (जो कुछ गैसों को हटा सकती है), गैस उत्सर्जन (ज्वालामुखी क्रिया से) और प्रकाश संश्लेषण (ऑक्सीजन का उत्पादन) महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विभेदन (Differentiation) पृथ्वी के आंतरिक भाग के निर्माण से संबंधित एक प्रक्रिया है, जिसमें भारी तत्व केंद्र की ओर और हल्के तत्व सतह की ओर जमा हुए थे। इसका वायुमंडल के निर्माण में सीधा योगदान नहीं है। इसलिए, सही विकल्प (ग) है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 4

निम्नलिखित में से भीतरी ग्रह कौन-से हैं?
  • (क) पृथ्वी व सूर्य के बीच पाए जाने वाले ग्रह
  • (ख) सूर्य व छुद्र ग्रहों की पट्टी के बीच पाए जाने वाले ग्रह
  • (ग) वे ग्रह जो गैसीय हैं।
  • (घ) बिना उपग्रह वाले ग्रह
Solution: भीतरी ग्रह, जिन्हें पार्थिव ग्रह भी कहा जाता है, सूर्य के सबसे निकट स्थित चार ग्रह हैं: बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल। ये ग्रह सूर्य और क्षुद्रग्रहों की पट्टी के बीच स्थित हैं और मुख्य रूप से चट्टानों और धातुओं से बने होते हैं। गैसीय ग्रह (जैसे बृहस्पति, शनि) क्षुद्रग्रहों की पट्टी के बाद आते हैं। इसलिए, सही विकल्प (ख) है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 5

पृथ्वी पर जीवन निम्नलिखित में से लगभग कितने वर्षों पहले आरंभ हुआ?
  • (क) १ अरब ३७ करोड़ वर्ष पहले
  • (ख) ४६० करोड़ वर्ष पहले
  • (ग) ३८ लाख वर्ष पहले
  • (घ) ३ अरब, ८० करोड़ वर्ष पहले
Solution: जीवाश्मों और भूवैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर, पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का अनुमान लगभग ३.८ अरब वर्ष पहले लगाया गया है। यह वह समय था जब पृथ्वी का वातावरण और महासागर जीवन के पनपने के लिए अनुकूल होने लगे थे। विकल्प (घ) '३ अरब, ८० करोड़ वर्ष पहले' इसी अवधि को दर्शाता है।

प्रश्न 1

पार्थिव ग्रह चट्टानी क्यों हैं?
Solution: पार्थिव ग्रह, जिन्हें भीतरी ग्रह भी कहा जाता है (बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल), चट्टानी इसलिए हैं क्योंकि वे सूर्य के अपेक्षाकृत करीब बने थे। प्रारंभिक सौर मंडल में, सूर्य के निकट का तापमान बहुत अधिक था। इस उच्च तापमान के कारण, केवल वे पदार्थ जो उच्च गलनांक वाले थे, जैसे कि सिलिकेट और धातुएँ, ही संघनित होकर ठोस कण बना सके। ये कण धीरे-धीरे गुरुत्वाकर्षण के कारण एकत्रित होकर पार्थिव ग्रहों का निर्माण किया। इसके विपरीत, सूर्य से दूर के क्षेत्रों में तापमान कम था, जिससे जल, मीथेन और अमोनिया जैसी वाष्पशील गैसें भी संघनित होकर बड़े गैसीय ग्रहों का निर्माण कर सकीं। पार्थिव ग्रहों का आकार छोटा होने के कारण उनकी गुरुत्वाकर्षण शक्ति भी कम थी, जिससे वे अपनी प्रारंभिक अवस्था में मौजूद हल्की गैसों को रोक नहीं पाए और वे अंतरिक्ष में विलीन हो गईं।

प्रश्न 2

पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित दिए गए तर्कों में निम्न वैज्ञानिकों के मूलभूत अंतर बताइए :
  • (क) कान्ट व लाप्लेस
  • (ख) चैम्बरलेन व मोल्टन
Solution: पृथ्वी की उत्पत्ति से संबंधित विभिन्न वैज्ञानिक परिकल्पनाओं में कान्ट और लाप्लेस की नीहारिका परिकल्पना तथा चैम्बरलेन और मोल्टन की ग्रहाणु परिकल्पना के बीच मूलभूत अंतर निम्नलिखित हैं:

(क) कान्ट व लाप्लेस की परिकल्पना:

  • कान्ट (1755): कान्ट ने अपनी 'एकाश्मिक परिकल्पना' (Monetary Hypothesis) में सुझाव दिया कि ब्रह्मांड धूल के एक विशाल, ठंडे, घूमते हुए बादल (नीहारिका) से बना था। गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से यह बादल धीरे-धीरे संघनित हुआ, जिससे केंद्र में सूर्य का निर्माण हुआ और शेष पदार्थ से ग्रहों का निर्माण हुआ।
  • लाप्लेस (1796): लाप्लेस ने अपनी 'नीहारिका परिकल्पना' (Nebular Hypothesis) में कान्ट के विचार को परिष्कृत किया। उन्होंने माना कि सूर्य एक गर्म, घूमती हुई नीहारिका थी। जैसे-जैसे यह ठंडी होकर सिकुड़ी, इसके घूर्णन के कारण भूमध्य रेखा पर एक छल्ला निकला। यह छल्ला ठंडा होकर खंडित हुआ और ग्रहों का निर्माण किया। इस परिकल्पना के अनुसार, पृथ्वी का आंतरिक भाग गैसीय अवस्था से बना होना चाहिए था।

(ख) चैम्बरलेन व मोल्टन की ग्रहाणु परिकल्पना:

  • चैम्बरलेन व मोल्टन (1900): इन वैज्ञानिकों ने 'द्वैतवादी परिकल्पना' (Dualistic Hypothesis) प्रस्तुत की। उनके अनुसार, पृथ्वी का निर्माण किसी एक नीहारिका से नहीं हुआ, बल्कि एक अन्य भ्रमणशील तारा सूर्य के पास से गुजरा। इस तारे के शक्तिशाली गुरुत्वाकर्षण बल के कारण सूर्य की सतह से सिगार के आकार का पदार्थ (प्रोटो-प्लैनेट) बाहर निकल गया। यह पदार्थ सूर्य के चारों ओर घूमने लगा और धीरे-धीरे ठंडा होकर छोटे-छोटे कणों (ग्रहाणुओं) में विभाजित हो गया। ये ग्रहाणु आपस में टकराकर और जुड़कर ग्रहों का निर्माण किए। इस सिद्धांत के अनुसार, ग्रह ठोस पदार्थों से बने हैं।
मुख्य अंतर: कान्ट और लाप्लेस ने एकल नीहारिका से ग्रहों के निर्माण का सुझाव दिया (एकलवादी सिद्धांत), जबकि चैम्बरलेन और मोल्टन ने एक बाहरी तारे के प्रभाव से सूर्य से निकले पदार्थ से ग्रहों के निर्माण का सुझाव दिया (द्वैतवादी सिद्धांत)। लाप्लेस के अनुसार ग्रह गैसीय होने चाहिए थे, जबकि चैम्बरलेन और मोल्टन के अनुसार वे ठोस पदार्थों से बने थे।

प्रश्न 3

विभेदन प्रक्रिया से आप क्या समझते हैं?
Solution: विभेदन (Differentiation) वह भूवैज्ञानिक प्रक्रिया है जिसके द्वारा किसी ग्रह या खगोलीय पिंड के निर्माण के प्रारंभिक चरणों में, उसके घटक पदार्थ घनत्व के आधार पर अलग हो जाते हैं। पृथ्वी की उत्पत्ति के दौरान, प्रारंभिक पृथ्वी अत्यधिक गर्म और पिघली हुई अवस्था में थी। इस उच्च तापमान के कारण, भारी तत्व जैसे लोहा और निकल, गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव में पिंड के केंद्र की ओर डूब गए, जिससे पृथ्वी के कोर (Core) का निर्माण हुआ। दूसरी ओर, हल्के तत्व जैसे सिलिकेट, ऊपर की ओर तैरकर आ गए, जिससे मेंटल (Mantle) और क्रस्ट (Crust) का निर्माण हुआ। इस प्रकार, भारी और हल्के पदार्थों का उनके घनत्व के अनुसार अलग होना ही विभेदन प्रक्रिया कहलाती है। इस प्रक्रिया के परिणामस्वरूप ही पृथ्वी की आंतरिक संरचना विभिन्न परतों में विभाजित हुई है।

Common mistakes

  • पृथ्वी की आयु और ब्रह्मांड की आयु के बीच भ्रमित होना।
  • भूवैज्ञानिक समय की विभिन्न इकाइयों के क्रम और अवधि को गलत समझना।
  • पार्थिव ग्रहों और गैसीय ग्रहों के बीच अंतर करने में गलती करना।
  • विभेदन प्रक्रिया के कारण और परिणाम को गलत समझना।

Revision tips

  • पृथ्वी की आयु और जीवन की उत्पत्ति के समय को याद रखने के लिए फ्लैशकार्ड का उपयोग करें।
  • भूवैज्ञानिक समय की इकाइयों को उनके घटते क्रम में सूचीबद्ध करें।
  • कान्ट-लाप्लेस और चैम्बरलेन-मोल्टन की परिकल्पनाओं के मुख्य अंतरों को एक तालिका में सारणीबद्ध करें।
  • विभेदन प्रक्रिया को एक सरल चित्र या आरेख की सहायता से समझें।

Practice MCQs

Q1. पृथ्वी की अनुमानित आयु निम्नलिखित में से किस संख्या द्वारा सबसे सटीक रूप से प्रदर्शित की जाती है?

Q2. भूवैज्ञानिक समय की सबसे लंबी अवधि निम्नलिखित में से कौन सी है?

Q3. निम्नलिखित में से कौन सा कारक पृथ्वी के वर्तमान वायुमंडल के निर्माण और संशोधन में महत्वपूर्ण भूमिका नहीं निभाता है?

Q4. पार्थिव ग्रह (Terrestrial Planets) वे ग्रह हैं जो मुख्य रूप से किससे बने होते हैं?

Q5. पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का अनुमानित समय निम्नलिखित में से किसके सबसे करीब है?

Frequently asked questions

पृथ्वी की आयु कितनी मानी जाती है?

वैज्ञानिकों के अनुसार, पृथ्वी की आयु लगभग ४६० करोड़ वर्ष (4.6 बिलियन वर्ष) है।

भूवैज्ञानिक समय की सबसे लंबी इकाई कौन सी है?

भूवैज्ञानिक समय की सबसे लंबी इकाई 'इयान' (Eon) है।

पार्थिव ग्रह क्या होते हैं और उनके उदाहरण क्या हैं?

पार्थिव ग्रह वे ग्रह होते हैं जो चट्टानों और धातुओं से बने होते हैं और सूर्य के करीब स्थित होते हैं। उदाहरण: बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल।

विभेदन (Differentiation) प्रक्रिया क्या है?

विभेदन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा पृथ्वी के निर्माण के दौरान भारी तत्व (जैसे लोहा) केंद्र की ओर और हल्के तत्व सतह की ओर चले गए, जिससे घनत्व के आधार पर परतें बनीं।

पृथ्वी पर जीवन कब उत्पन्न हुआ?

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति का अनुमान लगभग ३.८ अरब वर्ष पहले लगाया जाता है।

कान्ट और लाप्लेस की परिकल्पना में क्या अंतर है?

कान्ट ने एक ठंडी घूमती हुई नीहारिका से ग्रहों के निर्माण का सुझाव दिया, जबकि लाप्लेस ने एक गर्म, घूमती हुई नीहारिका से ग्रहों के निर्माण की बात कही, जिसमें से छल्ले निकलकर ग्रह बने।

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