कक्षा 11 समाजशास्त्र: ग्रामीण तथा नगरीय समाज में सामाजिक परिवर्तन तथा सामाजिक व्यवस्था - NCERT समाधान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 समाजशास्त्र के अध्याय 7, 'ग्रामीण तथा नगरीय समाज में सामाजिक परिवर्तन तथा सामाजिक व्यवस्था' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें सामाजिक परिवर्तन की प्रकृति, संरचनात्मक परिवर्तन के उदाहरण, और पर्यावरण संबंधी सामाजिक परिवर्तनों जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई है। समाधान छात्रों को यह समझने में मदद करते हैं कि सामाजिक परिवर्तन एक सतत और अक्सर तीव्र प्रक्रिया है, जो मानव इतिहास के विभिन्न चरणों में अलग-अलग गति से घटित हुई है। यह अध्याय छात्रों को यह भी सिखाता है कि कैसे आर्थिक, राजनीतिक, और सांस्कृतिक कारक सामाजिक संरचनाओं और संस्थाओं को बदलते हैं, और कैसे पर्यावरणीय घटनाएँ समाज पर स्थायी प्रभाव डाल सकती हैं। ये समाधान छात्रों को परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने और सामाजिक परिवर्तन की जटिलताओं की गहरी समझ विकसित करने में सहायता करेंगे।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectसमाजशास्त्र
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. ग्रामीण तथा नगरीय समाज में सामाजिक परिवर्तन तथा सामाजिक व्यवस्था

Chapter summary

कक्षा 11 समाजशास्त्र के अध्याय 7 के ये NCERT समाधान ग्रामीण और नगरीय समाजों में सामाजिक परिवर्तन और व्यवस्था के प्रमुख पहलुओं पर केंद्रित हैं। समाधान सामाजिक परिवर्तन की गति और नवीनता, इसे अन्य परिवर्तनों से अलग करने के तरीके, और संरचनात्मक परिवर्तनों के उदाहरणों की पड़ताल करते हैं। इसमें कागजी मुद्रा के उद्भव और बचपन की अवधारणा में बदलाव जैसे उदाहरण शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, यह अध्याय पर्यावरणीय आपदाओं के कारण होने वाले सामाजिक परिवर्तनों पर भी प्रकाश डालता है। ये समाधान छात्रों को सामाजिक परिवर्तन की विभिन्न शक्तियों और उनके प्रभावों को समझने में मदद करते हैं।

Learning outcomes

  • सामाजिक परिवर्तन की नवीनता और गति को समझना।
  • सामाजिक परिवर्तन को अन्य प्रकार के परिवर्तनों से अलग करना सीखना।
  • संरचनात्मक परिवर्तनों के उदाहरणों की पहचान करना और उन्हें स्पष्ट करना।
  • पर्यावरण संबंधी सामाजिक परिवर्तनों के प्रभावों का विश्लेषण करना।
  • सामाजिक परिवर्तन के विभिन्न कारकों और उनके प्रभावों को समझना।

Topics covered

Paper topics

  • सामाजिक परिवर्तन की परिभाषा
  • सामाजिक परिवर्तन की गति
  • सामाजिक परिवर्तन और अन्य परिवर्तन
  • संरचनात्मक परिवर्तन
  • मुद्रा के रूप में कागजी मुद्रा
  • बचपन की अवधारणा में परिवर्तन
  • बाल श्रम
  • पर्यावरणीय कारक और समाज
  • प्राकृतिक विपदाएँ और सामाजिक प्रभाव
  • सुनामी का सामाजिक प्रभाव
  • मरुस्थलीय वातावरण का प्रभाव
  • सामाजिक व्यवस्था

Important topics

  • सामाजिक परिवर्तन की नवीनता और गति
  • संरचनात्मक परिवर्तन के उदाहरण
  • मूल्यों और मान्यताओं में परिवर्तन का प्रभाव
  • पर्यावरणीय आपदाओं के सामाजिक परिणाम
  • सामाजिक परिवर्तन की व्यापक अवधारणा

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

क्या आप इस बात से सहमत हैं कि तीव्र सामाजिक परिवर्तन मनुष्य के इतिहास में तुलनात्मक रूप से नवीन घटना है? अपने उत्तर के लिए कारण दें।
Solution:

हाँ, मैं इस बात से सहमत हूँ कि तीव्र सामाजिक परिवर्तन मनुष्य के इतिहास में तुलनात्मक रूप से एक नवीन घटना है। इसके निम्नलिखित कारण हैं:

  1. पृथ्वी पर मानव जाति का अस्तित्व लगभग 5,00,000 (पाँच लाख) वर्षों से माना जाता है, लेकिन उनकी सभ्यता का विकास अपेक्षाकृत हाल ही में, लगभग 6000 वर्षों से ही माना जाता रहा है।

  2. परिवर्तन की गति में तेजी विशेष रूप से पिछले 100 वर्षों में देखी गई है। यह निरंतर बहती धारा की तरह है, और यह संभवतः सही है कि पिछले सौ वर्षों में, प्रथम पचास वर्षों की तुलना में अंतिम पचास वर्षों में अधिक परिवर्तन हुए हैं।

  3. इन सभ्य माने जाने वाले वर्षों में भी, मात्र 400 वर्षों से हमने लगातार एवं तीव्र परिवर्तन देखे हैं।

  4. और भी विशिष्ट रूप से कहें तो, पिछले पचास वर्षों के अंतर्गत, पहले तीस वर्षों की तुलना में विश्व में परिवर्तन अंतिम तीस वर्षों में अधिक आया है। यह दर्शाता है कि परिवर्तन की गति समय के साथ बढ़ती गई है, जो इसे एक अपेक्षाकृत नवीन घटना बनाती है।

प्रश्न 2

सामाजिक परिवर्तन को अन्य परिवर्तनों से किस प्रकार अलग किया जा सकता है?
Solution:

सामाजिक परिवर्तन को अन्य परिवर्तनों से निम्नलिखित प्रकार से अलग किया जा सकता है:

  1. व्यापकता: 'सामाजिक परिवर्तन' एक सामान्य अवधारणा है जिसका प्रयोग किसी भी परिवर्तन हेतु किया जा सकता है जो अन्य विशिष्ट अवधारणाओं, जैसे कि आर्थिक अथवा राजनीतिक परिवर्तन, के माध्यम से पूरी तरह से परिभाषित नहीं किया जा सकता। यह एक व्यापक शब्द है जिसमें समाज की संरचना, संस्थाओं, मूल्यों और व्यवहारों में होने वाले सभी महत्वपूर्ण बदलाव शामिल होते हैं।

  2. महत्वपूर्ण परिवर्तन: सामाजिक परिवर्तन में केवल बड़े परिवर्तन शामिल होते हैं जो वस्तुओं को बुनियादी तौर पर बदल देते हैं। यह छोटे या सतही बदलावों के बजाय समाज की मूल संरचना को प्रभावित करने वाले परिवर्तनों पर केंद्रित होता है।

  3. वर्गीकरण: सामाजिक परिवर्तन को और अधिक विशेष बनाने के लिए, इसके स्रोतों (जैसे प्रौद्योगिकी, संस्कृति, पर्यावरण) अथवा कारकों के आधार पर इसका वर्गीकरण किया जाता है। इसका वर्गीकरण प्रकृति के द्वारा अथवा समाज पर इसके प्रभाव अथवा इसकी गति के आधार पर भी किया जा सकता है।

  4. मूलभूत संरचना में बदलाव: सामाजिक परिवर्तन का सरोकार उन परिवर्तनों से है जो आवश्यक हैं, अर्थात, वे परिवर्तन जो किसी वस्तु अथवा परिस्थिति की मूलाधार संरचना को समयावधि में बदल दें। यह समाज के मूलभूत ढाँचे में होने वाले स्थायी बदलावों को दर्शाता है।

प्रश्न 3

संरचनात्मक परिवर्तन से आप क्या समझते हैं? पुस्तक से अलग उदाहरणों द्वारा स्पष्ट कीजिए।
Solution:

संरचनात्मक परिवर्तन से तात्पर्य समाज की संरचना में हुए उन परिवर्तनों से है, जो न केवल सामाजिक संस्थाओं को प्रभावित करते हैं, बल्कि उन नियमों और मानदंडों को भी बदलते हैं जिनसे इन संस्थाओं को संचालित किया जाता है। यह समाज के मूलभूत ढाँचे में होने वाले गहरे और स्थायी बदलावों को दर्शाता है।

पुस्तक से अलग कुछ अन्य उदाहरण निम्नलिखित हैं:

  1. डिजिटल क्रांति और संचार: कागजी मुद्रा के प्रचलन की तरह, डिजिटल क्रांति ने संचार और सूचना के आदान-प्रदान के तरीके में एक संरचनात्मक परिवर्तन लाया है। इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के आगमन ने लोगों के संवाद करने, जानकारी प्राप्त करने, सामाजिक संबंध बनाने और यहाँ तक कि राजनीतिक भागीदारी के तरीकों को मौलिक रूप से बदल दिया है। इसने पारंपरिक संचार माध्यमों (जैसे डाक, टेलीफोन) की भूमिका को कम कर दिया है और सूचना तक पहुँच को लोकतांत्रिक बनाया है, जिससे समाज की सूचना संरचना में एक बड़ा बदलाव आया है।

  2. शिक्षा प्रणाली में परिवर्तन: शिक्षा के पारंपरिक मॉडल, जो शिक्षक-केंद्रित और कक्षा-आधारित थे, अब ऑनलाइन शिक्षा, मिश्रित शिक्षण (blended learning) और व्यक्तिगत सीखने के रास्तों जैसे नए तरीकों से बदल रहे हैं। यह परिवर्तन न केवल शिक्षण विधियों को बदलता है, बल्कि सीखने की पहुँच, मूल्यांकन के तरीकों और शिक्षा के उद्देश्य को भी प्रभावित करता है, जिससे शिक्षा की संरचना में एक महत्वपूर्ण बदलाव आता है।

  3. पारिवारिक संरचना में बदलाव: पारंपरिक संयुक्त परिवार प्रणाली से एकल परिवार की ओर बढ़ना, या परिवार के सदस्यों की भूमिकाओं में बदलाव (जैसे महिलाओं का कार्यबल में अधिक भागीदारी) भी संरचनात्मक परिवर्तन के उदाहरण हैं। ये बदलाव न केवल परिवार के आंतरिक संबंधों को प्रभावित करते हैं, बल्कि सामाजिक सुरक्षा, संपत्ति के उत्तराधिकार और बच्चों के पालन-पोषण जैसी संस्थाओं को भी बदलते हैं।

इसके अतिरिक्त, समाज में मूल्यों तथा मान्यताओं में परिवर्तन भी सामाजिक परिवर्तन लाने में सहायक होते हैं। उदाहरण के लिए, बच्चों तथा बचपन से संबंधित विचारों तथा मान्यताओं में परिवर्तन बहुत आवश्यक तरह के सामाजिक परिवर्तन में सहायक सिद्ध हुआ है। एक समय था जब बच्चों को केवल श्रम के स्रोत के रूप में देखा जाता था और बचपन की कोई विशिष्ट संकल्पना नहीं थी। उन्नीसवीं तथा पूर्व बीसवीं शताब्दियों के अंतर्गत 'बचपन जीवन की एक विशिष्ट अवस्था है' यह संकल्पना प्रभावी हुई। इस समय छोटे बच्चों का काम करना अविधारणीय हो गया तथा अनेक देशों ने बाल श्रम को कानून द्वारा बंद कर दिया। उदाहरणत: उन्नीसवीं शताब्दी के अंत में, यह ठीक माना जाने लगा कि बच्चे जितनी जल्दी काम करने के योग्य हो जाएँ, काम पर लग जाएँ; बच्चे अपने परिवारों की काम करने में मदद पाँच अथवा छह वर्ष की आयु से ही प्रारंभ कर देते थे; प्रारंभिक फैक्ट्री व्यवस्था बच्चों के श्रम पर आश्रित थी। लेकिन बाद में, बचपन को सुरक्षा और शिक्षा की अवधि के रूप में देखा जाने लगा, जिससे बाल श्रम कानून बने और शिक्षा का महत्व बढ़ा।

प्रश्न 4

पर्यावरण संबंधित कुछ सामाजिक परिवर्तनों के बारे में बताइए।
Solution:

पर्यावरण संबंधी सामाजिक परिवर्तन वे परिवर्तन हैं जो प्रकृति, पारिस्थितिकी और भौतिक पर्यावरण के कारण समाज की संरचना और स्वरूप पर आवश्यक प्रभाव डालते हैं। ये परिवर्तन विनाशकारी या सृजनात्मक दोनों हो सकते हैं।

पर्यावरण संबंधी सामाजिक परिवर्तन के कुछ उदाहरण इस प्रकार हैं:

  1. प्राकृतिक विपदाएँ और समाज का पुनर्निर्माण: इतिहास में प्राकृतिक विपदाओं के विभिन्न उदाहरण देखने को मिलते हैं, जो समाज को पूरी तरह से परिवर्तित कर देते हैं या नष्ट कर देते हैं। त्वरित और विध्वंसकारी घटनाएँ, जैसे-ज्वालामुखी विस्फोट, बाढ़, भूकंप तथा ज्वारभाटीय तरंगें (जैसा कि दिसंबर 2004 में सुनामी की लहरों से श्रीलंका, अंडमान द्वीप, तमिलनाडु, इंडोनेशिया के कुछ भाग प्रभावित हुए थे) समाज को पूरी तरह से बदल देते हैं। ये परिवर्तन अक्सर अपरिवर्तनीय होते हैं, अर्थात् ये स्थायी होते हैं तथा चीज़ों को वापस अपनी पूर्वस्थिति में नहीं आने देते। विगत समय के संदर्भ में यह विशेष रूप से सही है, जब मानव प्रकृति के प्रभावों को सोचने तथा सहने में कम सक्षम था। ऐसी आपदाओं के बाद, समाज को न केवल पुनर्निर्माण करना पड़ता है, बल्कि अक्सर अपनी संरचना, आवास, अर्थव्यवस्था और जीवन शैली को भी बदलना पड़ता है।

  2. जलवायु परिवर्तन और जीवन शैली: वैश्विक जलवायु परिवर्तन, जैसे कि तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव, या समुद्र स्तर का बढ़ना, समाज पर दूरगामी प्रभाव डालता है। यह कृषि पद्धतियों को बदल सकता है, जल संसाधनों को प्रभावित कर सकता है, और लोगों को नए स्थानों पर प्रवास करने के लिए मजबूर कर सकता है। इसके परिणामस्वरूप, समाज को अपनी खाद्य सुरक्षा, आवास, और आर्थिक गतिविधियों को जलवायु परिवर्तन के अनुकूल बनाने के लिए संरचनात्मक परिवर्तन करने पड़ते हैं।

  3. संसाधन उपलब्धता और सामाजिक संगठन: किसी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधनों (जैसे पानी, खनिज, उपजाऊ भूमि) की उपलब्धता समाज के संगठन और विकास को गहराई से प्रभावित करती है। उदाहरण के लिए, मरुस्थलीय वातावरण में रहने वाले लोगों के लिए एक स्थान पर रहकर कृषि करना संभव नहीं था, जैसे, मैदानी भागों अथवा नदियों के किनारे इत्यादि। अतः जिस प्रकार का भोजन वे करते थे, कपड़े पहनते थे, जीविका चलाते थे, वह उस वातावरण के अनुकूल होता था, जो अक्सर खानाबदोशी या विशिष्ट प्रकार की कृषि पर आधारित होता था। संसाधनों की कमी या अधिकता समाज की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक संरचनाओं को आकार देती है।

  4. पर्यावरणीय चेतना और सामाजिक आंदोलन: पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता ने नए सामाजिक आंदोलनों को जन्म दिया है जो पर्यावरण संरक्षण की वकालत करते हैं। ये आंदोलन नीतियों में बदलाव, टिकाऊ प्रथाओं को अपनाने और पर्यावरण के प्रति सामाजिक दृष्टिकोण को बदलने के लिए दबाव डालते हैं, जिससे समाज में एक सकारात्मक और सृजनात्मक परिवर्तन आता है।

Common mistakes

  • सामाजिक परिवर्तन को केवल नकारात्मक या विनाशकारी घटना मानना।
  • संरचनात्मक परिवर्तनों को केवल आर्थिक या राजनीतिक परिवर्तनों तक सीमित समझना।
  • पर्यावरणीय परिवर्तनों के सामाजिक प्रभावों को कम आंकना।
  • सामाजिक परिवर्तन की गति को सभी समाजों और कालों के लिए समान मानना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दिए गए कारणों और उदाहरणों को ध्यान से समझें।
  • संरचनात्मक परिवर्तन के उदाहरणों को अपने दैनिक जीवन से जोड़कर देखें।
  • पर्यावरणीय परिवर्तनों के सामाजिक प्रभावों पर विशेष ध्यान दें।
  • सामाजिक परिवर्तन की गति और उसके ऐतिहासिक संदर्भ को याद रखें।

Practice MCQs

Q1. मानव इतिहास में तीव्र सामाजिक परिवर्तन को तुलनात्मक रूप से नवीन घटना क्यों माना जाता है?

Q2. निम्नलिखित में से कौन सा सामाजिक परिवर्तन का एक उदाहरण है जो 'बुनियादी तौर पर वस्तुओं को बदल देता है'?

Q3. बच्चों तथा बचपन से संबंधित विचारों में परिवर्तन किस प्रकार के सामाजिक परिवर्तन का उदाहरण है?

Q4. पर्यावरणीय परिवर्तन समाज को किस प्रकार प्रभावित कर सकते हैं?

Q5. सुनामी जैसी त्वरित और विध्वंसकारी घटनाएँ किस प्रकार के परिवर्तन लाती हैं?

Frequently asked questions

कक्षा 11 समाजशास्त्र के अध्याय 7 में किन मुख्य विषयों को शामिल किया गया है?

इस अध्याय में सामाजिक परिवर्तन की प्रकृति, इसकी गति, इसे अन्य परिवर्तनों से अलग करने के तरीके, संरचनात्मक परिवर्तन के उदाहरण (जैसे कागजी मुद्रा का प्रचलन, बचपन की अवधारणा में बदलाव), और पर्यावरणीय कारकों के कारण होने वाले सामाजिक परिवर्तनों पर चर्चा की गई है।

सामाजिक परिवर्तन को अन्य परिवर्तनों से कैसे अलग किया जाता है?

सामाजिक परिवर्तन एक व्यापक अवधारणा है जो समाज की बुनियादी संरचना या संस्थाओं में बड़े बदलावों को संदर्भित करती है, जबकि आर्थिक या राजनीतिक परिवर्तन अधिक विशिष्ट हो सकते हैं। सामाजिक परिवर्तन उन परिवर्तनों पर केंद्रित होता है जो समाज को मौलिक रूप से बदलते हैं।

संरचनात्मक परिवर्तन का एक उदाहरण क्या है?

कागजी मुद्रा का मुद्रा के रूप में प्रचलन एक महत्वपूर्ण संरचनात्मक परिवर्तन है। इसने वित्तीय संस्थाओं, लेन-देन के तरीकों और मूल्य की अवधारणा को मौलिक रूप से बदल दिया, जो सोने-चांदी के सिक्कों पर आधारित था।

पर्यावरणीय परिवर्तन समाज को कैसे प्रभावित करते हैं?

पर्यावरणीय परिवर्तन, जैसे कि ज्वालामुखी विस्फोट, बाढ़, या सुनामी, समाज को पूरी तरह से बदल सकते हैं या नष्ट कर सकते हैं। ये परिवर्तन अक्सर अपरिवर्तनीय होते हैं और समाज की संरचना और स्वरूप पर स्थायी प्रभाव डालते हैं।

क्या तीव्र सामाजिक परिवर्तन हमेशा मानव इतिहास का हिस्सा रहा है?

नहीं, समाधान बताते हैं कि तीव्र सामाजिक परिवर्तन मनुष्य के इतिहास में तुलनात्मक रूप से एक नवीन घटना है, जो विशेष रूप से पिछले सौ वर्षों में, और विशेष रूप से अंतिम पचास वर्षों में अधिक स्पष्ट हुई है।

ये NCERT समाधान परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान प्रत्येक प्रश्न के लिए विस्तृत और स्पष्ट उत्तर प्रदान करते हैं, जिससे छात्रों को अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर देने के लिए आवश्यक ज्ञान प्राप्त करने में मदद मिलती है।

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