कक्षा 11 भूगोल: अपवाह तंत्र NCERT समाधान
यह पृष्ठ सीबीएसई कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 3, 'अपवाह तंत्र' के लिए विस्तृत समाधान प्रदान करता है। इसमें भारत की प्रमुख नदियों, उनकी द्रोणियों और विभिन्न अपवाह प्रतिरूपों जैसे वृक्षाकार, जालीनुमा, अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय प्रतिरूपों पर चर्चा की गई है। समाधान बहुवैकल्पिक प्रश्नों और अंतर स्पष्ट करने वाले प्रश्नों के उत्तर देते हैं, जिनमें नदी द्रोणी और जल संभर के बीच अंतर, तथा वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रतिरूपों के बीच अंतर शामिल हैं। यह छात्रों को अपवाह तंत्र की अवधारणाओं को गहराई से समझने और परीक्षा की तैयारी में मदद करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | भूगोल |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3. अपवाह तंत्र |
Chapter summary
कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 3 'अपवाह तंत्र' के ये NCERT समाधान भारत की नदी प्रणालियों पर केंद्रित हैं। इसमें प्रमुख नदियों, 'बंगाल का शोक' जैसी उपमाओं वाली नदियाँ, सबसे बड़ी नदी द्रोणी, पंचनद में शामिल नदियाँ और भ्रंश घाटियों में बहने वाली नदियाँ शामिल हैं। समाधान विभिन्न अपवाह प्रतिरूपों और नदी द्रोणी व जल संभर जैसे महत्वपूर्ण शब्दों के बीच अंतर को भी स्पष्ट करते हैं।
Learning outcomes
- भारत की प्रमुख नदियों और उनकी विशेषताओं की पहचान करना।
- विभिन्न प्रकार के अपवाह प्रतिरूपों को समझना।
- नदी द्रोणी और जल संभर के बीच अंतर स्पष्ट करना।
- नदियों के भौगोलिक महत्व को समझना।
Topics covered
Paper topics
- अपवाह तंत्र
- नदी द्रोणी
- जल संभर
- प्रमुख नदियाँ (गंगा, सिंधु, ब्रह्मपुत्र)
- पंचनद
- भ्रंश घाटी में बहने वाली नदियाँ
- वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप
- जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप
- अपकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप
- अभिकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप
- नदी संगम स्थल (देव प्रयाग)
Important topics
- नदी द्रोणी और जल संभर में अंतर
- वृक्षाकार और जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप
- अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप
- भ्रंश घाटी में बहने वाली नदियाँ
- प्रमुख नदी द्रोणियाँ
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Questions and Solutions
बहुवैकल्पिक प्रश्न 1
- (क) गंडक
- (ख) कोसी
- (ग) सोन
- (घ) दामोदर
बहुवैकल्पिक प्रश्न 2
- (क) सिंधु
- (ख) ब्रह्मपुत्र
- (ग) गंगा
- (घ) कृष्णा
बहुवैकल्पिक प्रश्न 3
- (क) रावी
- (ख) सिंधु
- (ग) चेनाब
- (घ) झेलम
बहुवैकल्पिक प्रश्न 4
- (क) सोन
- (ख) यमुना
- (ग) नर्मदा
- (घ) लूनी
बहुवैकल्पिक प्रश्न 5
- (क) विष्णु प्रयाग
- (ख) रूद्र प्रयाग
- (ग) कर्ण प्रयाग
- (घ) देव प्रयाग
अंतर स्पष्ट करें 1
- नदी द्रोणी (River Basin): यह एक बड़ी नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा अपवाहित संपूर्ण क्षेत्र होता है। नदी द्रोणी का आकार सामान्यतः बहुत बड़ा होता है। उदाहरण के लिए, गंगा नदी द्रोणी।
- जल संभर (Watershed): यह एक छोटी नदी, नाले या छोटी जलधारा द्वारा अपवाहित क्षेत्र होता है। जल संभर का आकार नदी द्रोणी की तुलना में छोटा होता है। यह किसी विशेष क्षेत्र में वर्षा जल के प्रवाह को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
अंतर स्पष्ट करें 2
- वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप (Dendritic Drainage Pattern): जब मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियाँ एक वृक्ष की शाखाओं के समान फैल जाती हैं, तो इस पैटर्न को वृक्षाकार अपवाह प्रतिरूप कहा जाता है। यह तब बनता है जब नदियाँ एक ढलान वाले क्षेत्र में बहती हैं और विभिन्न दिशाओं से पानी इकट्ठा करती हैं। उत्तरी भारत की अधिकांश नदियाँ इस प्रकार का प्रतिरूप दर्शाती हैं।
- जालीनुमा अपवाह प्रतिरूप (Trellis Drainage Pattern): इस पैटर्न में, मुख्य नदियाँ एक-दूसरे के समानांतर बहती हैं और उनकी सहायक नदियाँ लगभग समकोण पर उनसे मिलती हैं। यह पैटर्न तब विकसित होता है जब नदी की धाराएँ एक कठोर और नरम चट्टानों की परतों के ऊपर से बहती हैं, जहाँ नरम चट्टानें अधिक आसानी से कट जाती हैं और समानांतर घाटियाँ बनाती हैं।
अंतर स्पष्ट करें 3
- अपकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप (Centrifugal Drainage Pattern): इस पैटर्न में, नदियाँ एक केंद्रीय उच्च क्षेत्र (जैसे पर्वत शिखर या पठार) से निकलकर सभी दिशाओं में बाहर की ओर बहती हैं। यह पैटर्न ऐसे क्षेत्रों में पाया जाता है जहाँ जल का स्रोत एक ऊँचाई पर होता है और गुरुत्वाकर्षण के कारण पानी चारों ओर फैल जाता है।
- अभिकेंद्रीय अपवाह प्रतिरूप (Centripetal Drainage Pattern): इस पैटर्न में, नदियाँ विभिन्न दिशाओं से आकर एक निम्न क्षेत्र (जैसे झील, दलदल या अंतर्देशीय बेसिन) में मिल जाती हैं। यह तब होता है जब जल एक केंद्रीय अवसाद की ओर प्रवाहित होता है।
Common mistakes
- नदी द्रोणी और जल संभर के बीच अंतर को समझने में भ्रमित होना।
- विभिन्न अपवाह प्रतिरूपों की सही पहचान न कर पाना।
- नदियों के भौगोलिक उपनामों को गलत याद रखना।
Revision tips
- प्रत्येक नदी की मुख्य विशेषताओं और अपवाह प्रतिरूपों को सारणीबद्ध करें।
- नदी द्रोणी और जल संभर के बीच के अंतर को उदाहरण सहित समझें।
- मानचित्र पर प्रमुख नदियों और उनके संगम स्थलों को चिह्नित करें।
Practice MCQs
Q1. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी को 'बंगाल का शोक' के नाम से जाना जाता था?
Explanation: दामोदर नदी को उसकी विनाशकारी बाढ़ के कारण 'बंगाल का शोक' कहा जाता था।
Q2. भारत में किस नदी की द्रोणी सबसे बड़ी है?
Explanation: गंगा नदी की द्रोणी भारत में सबसे बड़ी है, जो एक विशाल क्षेत्र को कवर करती है।
Q3. निम्नलिखित में से कौन-सी नदी पंचनद में शामिल नहीं है?
Explanation: पंचनद में झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज नदियाँ शामिल हैं; सिंधु नदी इसका हिस्सा नहीं है।
Q4. कौन-सी नदी भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती है?
Explanation: नर्मदा नदी एक भ्रंश घाटी से होकर बहती है, जो इसे अन्य नदियों से अलग करती है।
Q5. अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम स्थल कौन सा है?
Explanation: अलकनंदा और भागीरथी नदियों का संगम देव प्रयाग में होता है, जहाँ से वे गंगा नदी के रूप में आगे बढ़ती हैं।
Frequently asked questions
कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 3 में किन मुख्य अवधारणाओं को शामिल किया गया है?
इस अध्याय में भारत के अपवाह तंत्र, प्रमुख नदियों, नदी द्रोणियों, जल संभर क्षेत्रों और विभिन्न प्रकार के अपवाह प्रतिरूपों जैसे वृक्षाकार, जालीनुमा, अपकेंद्रीय और अभिकेंद्रीय प्रतिरूपों को शामिल किया गया है।
नदी द्रोणी और जल संभर में क्या अंतर है?
नदी द्रोणी बड़ी नदियों के बड़े जल ग्रहण क्षेत्र को संदर्भित करती है, जबकि जल संभर छोटी नदियों या नालों द्वारा अपवाहित छोटे क्षेत्र को संदर्भित करता है।
कौन सी नदियाँ भ्रंश घाटी से होकर बहती हैं?
नर्मदा और ताप्ती नदियाँ मुख्य रूप से भ्रंश घाटियों से होकर बहती हैं।
यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?
यह समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने, बहुवैकल्पिक और अंतर-स्पष्ट करने वाले प्रश्नों के उत्तर देने और परीक्षा की तैयारी को मजबूत करने में मदद करता है।
पंचनद में कौन-कौन सी नदियाँ शामिल हैं?
पंचनद में पाँच नदियाँ शामिल हैं: झेलम, चेनाब, रावी, ब्यास और सतलुज। ये नदियाँ मिलकर सिंधु नदी में मिलती हैं।
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