कक्षा 11 इतिहास: बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ - NCERT समाधान

NCERT Solutions PDF Class 11 PDF

यह पृष्ठ कक्षा 11 इतिहास के अध्याय 7, 'बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय पुनर्जागरण काल की शुरुआत, यूरोप में हुए सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवर्तनों पर केंद्रित है। इसमें इटली के पुनरुत्थान के कारणों, मानवतावाद के उदय, कला और विज्ञान के क्षेत्र में हुए नवाचारों, और कोपरनिकस जैसे वैज्ञानिकों के क्रांतिकारी सिद्धांतों की पड़ताल की गई है। समाधानों में 'रेनेसाँ व्यक्ति', यथार्थवाद, और सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत जैसी प्रमुख अवधारणाओं की व्याख्या की गई है। ये समाधान छात्रों को परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके उत्तरों को समझने में मदद करेंगे, जिससे वे इस जटिल ऐतिहासिक काल की गहरी समझ विकसित कर सकें।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectइतिहास
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter7. बदलती हुई सांस्कृतिक परम्पराएँ

Chapter summary

कक्षा 11 इतिहास के अध्याय 7 के ये NCERT समाधान 'बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ' पर केंद्रित हैं। इनमें पुनर्जागरण काल के दौरान यूरोप में हुए प्रमुख सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवर्तनों को शामिल किया गया है। समाधान इटली के पुनरुत्थान के कारणों, मानवतावादी विचारों के प्रसार, कला, विज्ञान और खगोल विज्ञान में हुए विकास की व्याख्या करते हैं। यह छात्रों को उस युग की महत्वपूर्ण अवधारणाओं और घटनाओं को समझने में सहायता करता है।

Learning outcomes

  • इटली के तटवर्ती बंदरगाहों के पुनर्जीवित होने के कारणों को समझना।
  • 'रेनेसाँ व्यक्ति' की अवधारणा और उसके महत्व को स्पष्ट करना।
  • वेनिस और जेनेवा की विशिष्टताओं को पहचानना।
  • कला के क्षेत्र में यथार्थवाद के अर्थ को समझना।
  • मानवतावादी विषयों के अध्ययन के महत्व का विश्लेषण करना।
  • मुद्रण के प्रसार में भूमिका को समझना।
  • सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत और ईसाइयों के विश्वास के बीच अंतर बताना।

Topics covered

Paper topics

  • पुनर्जागरण का उदय
  • इटली के बंदरगाहों का पुनर्जीवन
  • रेनेसाँ व्यक्ति की अवधारणा
  • वेनिस और जेनेवा की विशिष्टताएँ
  • कला में यथार्थवाद
  • माइकल एंजेलो की कला
  • मानवतावाद का अध्ययन
  • पैट्रार्क के विचार
  • मुद्रण का प्रभाव
  • मध्यकालीन समाज में महिलाओं की स्थिति
  • कॉन्सटेन्टाइन का अनुवाद
  • सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत

Important topics

  • पुनर्जागरण का उदय और कारण
  • मानवतावाद का अर्थ और महत्व
  • कला और विज्ञान में नवाचार
  • कोपरनिकस का सूर्य-केंद्रित सिद्धांत
  • मुद्रण क्रांति का प्रभाव

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 1

इटली के तटवर्ती बंदरगाहों के पुनर्जीवित होने के दो मुख्य कारण बताइये।
Solution: इटली के तटवर्ती बंदरगाहों के पुनर्जीवन के दो मुख्य कारण निम्नलिखित थे:
  1. बाइज़ेंटाइन साम्राज्य और इस्लामी देशों के बीच व्यापार: इन साम्राज्यों के साथ व्यापारिक संबंधों के विस्तार ने इटली के बंदरगाहों को आर्थिक रूप से समृद्ध बनाया।
  2. मंगोलों का चीन के साथ व्यापार: मंगोलों द्वारा स्थापित व्यापार मार्गों ने एशिया के साथ व्यापार को सुगम बनाया, जिससे इटली के बंदरगाहों को लाभ हुआ।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 2

'रेनेसाँ व्यक्ति' शब्द की व्याख्या कीजिए।
Solution: 'रेनेसाँ व्यक्ति' (Renaissance Man) उस व्यक्ति को कहा जाता है जिसकी विभिन्न क्षेत्रों में गहरी रुचि हो और वह कई कलाओं, हुनर या विषयों में महारत हासिल रखता हो। यह शब्द पुनर्जागरण काल के उन बहुमुखी प्रतिभा वाले व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता था जो कला, विज्ञान, साहित्य, दर्शन आदि विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते थे।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 3

वेनिस और जेनेवा यूरोप के अन्य क्षेत्रों से किस प्रकार भिन्न थे?
Solution: वेनिस और जेनेवा यूरोप के अन्य क्षेत्रों से इस प्रकार भिन्न थे:
  1. राजनीतिक शक्ति का वितरण: इन नगरों में, धर्माधिकारी और सामंत राजनीतिक दृष्टि से उतने शक्तिशाली नहीं थे जितने कि यूरोप के अन्य हिस्सों में थे।
  2. व्यापारियों और महाजनों की भूमिका: नगर के धनी व्यापारियों और महाजनों का शासन में सक्रिय रूप से भाग होता था, जिससे वे राजनीतिक निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे।
यह भिन्नता इन नगरों को अधिक व्यापार-उन्मुख और कम सामंती बनाती थी।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 4

'दि पाइटा' नामक चित्र के चित्रकार कौन हैं? इसमें क्या दर्शाया गया है?
Solution: 'दि पाइटा' नामक प्रसिद्ध चित्र के चित्रकार **माइकल एंजेलो** थे। इस चित्र में **ईसा मसीह की मृत्यु के बाद उनकी माँ, मैरी, द्वारा उनके शरीर को गोद में उठाए हुए** दर्शाया गया है। यह पुनर्जागरण काल की उत्कृष्ट मूर्तिकला का एक उदाहरण है।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 5

यथार्थवाद से क्या अभिप्राय है?
Solution: यथार्थवाद से अभिप्राय कला में वास्तविकता को उसी रूप में चित्रित करने का प्रयास है जैसा वह दिखाई देता है। इतालवी कला में, शरीर विज्ञान, ज्यामिति, भौतिकी और सौंदर्य की उत्कृष्ट भावना के ज्ञान का उपयोग करके यथार्थवादी चित्र बनाने की कोशिश की गई। इस दृष्टिकोण ने इतालवी कला को एक नया रूप दिया, जिसे बाद में यथार्थवाद के रूप में जाना गया।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 6

15वीं शताब्दी में किन लोगों को मानवतावादी कहा गया?
Solution: 15वीं शताब्दी में, मानवतावादी उन लोगों को कहा गया जो भौतिक संपत्ति, गौरव और शक्ति से आकर्षित थे। साथ ही, जिनकी अच्छे व्यवहारों, शिष्टाचार और मानवीय मूल्यों के प्रति गहरी दिलचस्पी थी। वे प्राचीन यूनानी और रोमन साहित्य तथा संस्कृति के अध्ययन को महत्व देते थे।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 7

पाप स्वीकारोक्ति नामक दस्तावेज क्या था?
Solution: पाप स्वीकारोक्ति (Indulgence) चर्च द्वारा जारी किया जाने वाला एक प्रकार का दस्तावेज था। इस दस्तावेज के माध्यम से व्यक्ति को उसके द्वारा किए गए पापों से पूर्ण या आंशिक मुक्ति दिलाने का दावा किया जाता था। यह अक्सर दान या चर्च को आर्थिक सहायता के बदले में जारी किया जाता था।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 8

सूर्य केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत क्या था?
Solution: सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत (Heliocentric Solar System Theory) के अनुसार, सूर्य ब्रह्मांड के केंद्र में स्थिर है और पृथ्वी सहित अन्य सभी ग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं। यह सिद्धांत उस समय प्रचलित पृथ्वी-केंद्रित (Geocentric) सिद्धांत के विपरीत था, जिसके अनुसार पृथ्वी स्थिर थी और सूर्य तथा अन्य ग्रह उसकी परिक्रमा करते थे।

अति लघु प्रश्न (2 अंक वाले) - प्रश्न 9

मार्टिन लूथर कौन थे?
Solution: मार्टिन लूथर एक जर्मन भिक्षु और धर्मशास्त्री थे। उन्होंने 16वीं शताब्दी में कैथोलिक चर्च की कुछ प्रथाओं और सिद्धांतों के विरुद्ध एक शक्तिशाली आंदोलन छेड़ा, जिसे प्रोटेस्टेंट सुधार (Protestant Reformation) के नाम से जाना जाता है। उन्होंने चर्च की सत्ता और पाप स्वीकारोक्ति जैसे दस्तावेजों की आलोचना की।

लघु प्रश्न (4 अंक वाले) - प्रश्न 1

विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में अरबियों के योगदान की व्याख्या कीजिए।
Solution: विज्ञान और दर्शन के क्षेत्र में अरबियों का योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण था। उन्होंने निम्नलिखित तरीकों से योगदान दिया:
  1. अतीत की पांडुलिपियों का संरक्षण और अनुवाद: अरब विद्वानों ने यूनानी और रोमन दार्शनिकों तथा वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण रचनाओं को संरक्षित किया और उनका अरबी में अनुवाद किया।
  2. इब्न सिना और इब्न रुश्द का योगदान: इब्न सिना (एविसेना) और इब्न रुश्द (एवेरोस) जैसे विद्वानों ने चिकित्सा, दर्शन और विज्ञान के क्षेत्र में मौलिक कार्य किए, जिनके विचारों का बाद में यूरोप पर गहरा प्रभाव पड़ा।
  3. ज्ञान का प्रसार: इन अनुवादों और मौलिक कार्यों के माध्यम से, अरब विद्वानों ने प्राचीन ज्ञान को न केवल संरक्षित किया बल्कि उसे यूरोप तक फैलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यूरोपीय पुनर्जागरण को बल मिला।

लघु प्रश्न (4 अंक वाले) - प्रश्न 2

पैट्रार्क के विचारों के परिप्रेक्ष्य में मानवतावादी विषयों के अध्ययन के महत्व को स्पष्ट कीजिए।
Solution: पैट्रार्क, जिन्हें अक्सर मानवतावाद का जनक कहा जाता है, के विचारों के अनुसार मानवतावादी विषयों के अध्ययन का अत्यधिक महत्व था। पैट्रार्क का मानना था कि प्राचीन यूनानियों और रोमनों की सभ्यता एक विशिष्ट और उत्कृष्ट सभ्यता थी। उन्होंने तर्क दिया कि इस महान सभ्यता को केवल उनके वास्तविक शब्दों, यानी उनके साहित्य और लेखन के माध्यम से ही अच्छी तरह से समझा जा सकता है। इसलिए, उन्होंने प्राचीन लेखकों की रचनाओं के अध्ययन पर जोर दिया ताकि उस काल के ज्ञान, मूल्यों और जीवन शैली को पुनर्जीवित किया जा सके। मानवतावादी विषयों के अध्ययन से व्यक्ति का बौद्धिक और नैतिक विकास होता है, ऐसा उनका मानना था।

लघु प्रश्न (4 अंक वाले) - प्रश्न 3

मुद्रण ने किस प्रकार मानवतावादी संस्कृति के प्रसार में सहायता की?
Solution: मुद्रण (Printing Press) के आविष्कार ने मानवतावादी संस्कृति के प्रसार में क्रांति ला दी। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
  1. तेजी से प्रसार: मुद्रण से पहले, पुस्तकों की प्रतियाँ हाथ से लिखी जाती थीं, जो एक धीमी और महंगी प्रक्रिया थी। मुद्रण के कारण, जो कुछ भी इटली में लिखा गया या सोचा गया, वह बहुत तेजी से और बड़ी संख्या में छपकर विदेशों तक पहुँचने लगा।
  2. ज्ञान का व्यापक प्रसारण: विचारों, मतों और ज्ञान का तेजी से प्रसारण संभव हुआ। इससे मानवतावादी विचार, साहित्य और वैज्ञानिक खोजें अधिक लोगों तक पहुँच सकीं।
  3. सस्ती उपलब्धता: मुद्रित पुस्तकें हस्तलिखित प्रतियों की तुलना में बहुत सस्ती होती थीं, जिससे वे अधिक लोगों के लिए सुलभ हो गईं।
इस प्रकार, मुद्रण ने मानवतावादी संस्कृति को जन-जन तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लघु प्रश्न (4 अंक वाले) - प्रश्न 4

मध्यकालीन यूरोपीय समाज में महिलाओं की स्थिति स्पष्ट कीजिए।
Solution: मध्यकालीन यूरोपीय समाज में महिलाओं की स्थिति आम तौर पर पुरुषों की तुलना में सीमित थी, हालांकि इसमें कुछ भिन्नताएँ थीं:
  1. पारिवारिक और सार्वजनिक जीवन में भागीदारी: अधिकांशतः महिलाओं की पारिवारिक निर्णयों में या सार्वजनिक जीवन में बहुत कम भागीदारी होती थी। निर्णय लेने का अधिकार मुख्य रूप से पुरुषों के पास होता था।
  2. व्यापार और व्यवसाय: कारोबार चलाने या व्यावसायिक निर्णयों में महिलाओं की सीधी राय अक्सर नहीं होती थी, भले ही उनके दहेज के रूप में दिए गए धन का उपयोग व्यवसाय में किया जाता हो।
  3. व्यापारी महिलाओं की स्थिति: कुछ अपवाद थे, विशेष रूप से व्यापारी वर्ग की महिलाओं के लिए। कुछ व्यापारी महिलाएँ अपने पतियों के व्यवसाय में सक्रिय भूमिका निभाती थीं और कुछ हद तक स्वतंत्र निर्णय भी ले पाती थीं।
  4. धार्मिक और कुलीन वर्ग: मठों में रहने वाली ननों या कुलीन परिवारों की महिलाओं की स्थिति थोड़ी भिन्न हो सकती थी, लेकिन कुल मिलाकर समाज में उनकी भूमिकाएँ प्रायः गौण ही रहती थीं।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि यह एक सामान्य अवलोकन है और विभिन्न क्षेत्रों और सामाजिक वर्गों में स्थिति भिन्न हो सकती थी।

लघु प्रश्न (4 अंक वाले) - प्रश्न 5

कॉन्सटेन्टाइन के अनुवाद नामक दस्तावेज क्या था? मानवतावादी विद्वानों की इसके प्रति प्रतिक्रिया से चर्च के विरोधी राजाओं को खुशी क्यों हुई?
Solution: 'कॉन्सटेन्टाइन का अनुवाद' (Donation of Constantine) नामक दस्तावेज एक कथित शाही फरमान था। ऐसा माना जाता था कि यह संभवतः प्रथम ईसाई रोमन सम्राट कॉन्सटेन्टाइन द्वारा जारी किया गया था, जिसमें उसने पोप को रोम और पश्चिमी रोमन साम्राज्य पर महत्वपूर्ण न्यायिक और वित्तीय शक्तियाँ प्रदान की थीं। मानवतावादी विद्वानों ने इस दस्तावेज का गहन अध्ययन किया और यह दर्शाने में सफल रहे कि यह एक **असली दस्तावेज नहीं है, बल्कि परवर्ती काल में जालसाजी द्वारा तैयार किया गया है**। उन्होंने भाषा, शैली और ऐतिहासिक संदर्भों का विश्लेषण करके इसे नकली साबित कर दिया। इस खोज से **चर्च के विरोधी राजाओं को खुशी हुई** क्योंकि:
  • यह दस्तावेज चर्च (विशेषकर पोप) की राजनीतिक और आर्थिक शक्ति का एक प्रमुख आधार था।
  • इसे नकली साबित होने से पोप के दावों की वैधता पर प्रश्नचिह्न लग गया।
  • इससे राजाओं को अपनी संप्रभुता स्थापित करने और चर्च के हस्तक्षेप को कम करने का अवसर मिला।
इस प्रकार, मानवतावादी विद्वानों की अकादमिक खोज ने राजाओं के राजनीतिक हितों को साधने में मदद की।

लघु प्रश्न (4 अंक वाले) - प्रश्न 6

ब्रह्मांड के प्रति कोपरनिकस के सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत तथा ईसाइयों के विश्वास में अन्तर स्पष्ट कीजिए।
Solution: ब्रह्मांड के प्रति कोपरनिकस के सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत और तत्कालीन ईसाइयों के विश्वास के बीच निम्नलिखित मुख्य अंतर थे: कोपरनिकस का सूर्य-केंद्रित सिद्धांत:
  • यह सिद्धांत मानता है कि सूर्य ब्रह्मांड के केंद्र में स्थित है और स्थिर है।
  • पृथ्वी सहित अन्य सभी ग्रह सूर्य के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में परिक्रमा करते हैं।
  • यह एक वैज्ञानिक अवलोकन और गणितीय गणना पर आधारित था।
ईसाइयों का तत्कालीन विश्वास (पृथ्वी-केंद्रित):
  • यह विश्वास मानता था कि पृथ्वी ब्रह्मांड के केंद्र में स्थिर है।
  • सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रह पृथ्वी के चारों ओर परिक्रमा करते हैं।
  • यह विश्वास बाइबिल की कुछ व्याख्याओं और अरस्तू के विचारों पर आधारित था।
  • इस विश्वास के अनुसार, पृथ्वी को पापों से भरा और महत्वहीन माना जाता था, इसलिए वह ब्रह्मांड के केंद्र में स्थिर थी।
यह अंतर वैज्ञानिक सोच और धार्मिक आस्था के बीच एक महत्वपूर्ण टकराव को दर्शाता है, जिसने बाद में वैज्ञानिक क्रांति को बढ़ावा दिया।

लघु प्रश्न (4 अंक वाले) - प्रश्न 7

ईसाई मानवतावादी इंग्लैंड के टॉमस मोर और हॉलैंड के इरेस्मस की चर्च के प्रति क्या अवधारणा थी?
Solution: इंग्लैंड के टॉमस मोर और हॉलैंड के इरेस्मस, जो प्रमुख ईसाई मानवतावादी थे, की चर्च के प्रति एक आलोचनात्मक अवधारणा थी। वे चर्च की कुछ प्रथाओं और संस्थाओं की कड़ी आलोचना करते थे। उनकी मुख्य अवधारणाएँ निम्नलिखित थीं:
  • चर्च की लालच और भ्रष्टाचार: उन्होंने चर्च को एक लालची और लूट-खसोट करने वाली संस्था के रूप में देखा, जो धन इकट्ठा करने पर अधिक ध्यान केंद्रित करती थी।
  • पाप स्वीकारोक्ति का दुरुपयोग: वे मानते थे कि पाप स्वीकारोक्ति (Indulgences) जैसे दस्तावेज केवल धन ठगने का एक तरीका थे, न कि वास्तविक आध्यात्मिक मुक्ति का साधन।
  • जालसाजी का आरोप: उन्होंने 'कॉन्सटेन्टाइन के अनुवाद' जैसे दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाया और उन्हें जालसाजी का परिणाम बताया, जिससे चर्च की ऐतिहासिक वैधता को चुनौती मिली।
  • किसानों पर करों का बोझ: उन्होंने किसानों पर लगाए गए अत्यधिक और अनुचित करों की भी आलोचना की, जो चर्च की आर्थिक नीतियों का हिस्सा थे।
संक्षेप में, वे चर्च में सुधार चाहते थे और उसकी तत्कालीन शक्ति, धन और भ्रष्टाचार की आलोचना करते थे, जबकि वे ईसाई धर्म की मूल शिक्षाओं का सम्मान करते थे।

Common mistakes

  • पुनर्जागरण काल की प्रमुख अवधारणाओं को समझने में भ्रम।
  • कला और विज्ञान के क्षेत्र में हुए नवाचारों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना।
  • मानवतावादी विचारों के ऐतिहासिक संदर्भ को न समझना।
  • वैज्ञानिक सिद्धांतों और धार्मिक विश्वासों के बीच के अंतर को स्पष्ट न कर पाना।

Revision tips

  • प्रत्येक प्रश्न के उत्तर में दी गई प्रमुख अवधारणाओं को रेखांकित करें।
  • कलाकारों, वैज्ञानिकों और विचारकों के योगदान को सारणीबद्ध करें।
  • पुनर्जागरण काल की प्रमुख घटनाओं और उनके कारणों के बीच संबंध स्थापित करें।
  • वैज्ञानिक सिद्धांतों और तत्कालीन धार्मिक विश्वासों के बीच के अंतर को स्पष्ट रूप से समझें।

Practice MCQs

Q1. 'रेनेसाँ व्यक्ति' शब्द का क्या अर्थ है?

Q2. 'दि पाइटा' नामक प्रसिद्ध चित्र के चित्रकार कौन हैं?

Q3. सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत के अनुसार क्या सत्य है?

Q4. 15वीं शताब्दी में मानवतावादी किसे कहा गया?

Q5. मुद्रण के आविष्कार ने मानवतावादी संस्कृति के प्रसार में कैसे सहायता की?

Frequently asked questions

कक्षा 11 इतिहास के अध्याय 7 का मुख्य विषय क्या है?

कक्षा 11 इतिहास के अध्याय 7, 'बदलती हुई सांस्कृतिक परंपराएँ', मुख्य रूप से यूरोप में पुनर्जागरण काल के दौरान हुए सांस्कृतिक और बौद्धिक परिवर्तनों पर केंद्रित है, जिसमें मानवतावाद, कला, विज्ञान और खगोल विज्ञान में हुए विकास शामिल हैं।

ये NCERT समाधान छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?

ये समाधान छात्रों को अध्याय के महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके विस्तृत उत्तरों को समझने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले विभिन्न प्रकार के प्रश्नों के लिए बेहतर ढंग से तैयार हो सकें।

'रेनेसाँ व्यक्ति' से क्या तात्पर्य है?

'रेनेसाँ व्यक्ति' उस व्यक्ति को कहा जाता है जो विभिन्न क्षेत्रों में रुचि रखता हो और कई कलाओं या हुनर में निपुणता रखता हो, जैसे कि कला, विज्ञान, साहित्य आदि।

सूर्य-केंद्रित सौरमंडलीय सिद्धांत क्या है?

यह सिद्धांत बताता है कि सूर्य ब्रह्मांड के केंद्र में स्थिर है और पृथ्वी सहित अन्य सभी ग्रह उसकी परिक्रमा करते हैं। यह तत्कालीन ईसाइयों के पृथ्वी-केंद्रित विश्वास के विपरीत था।

मानवतावाद के अध्ययन का क्या महत्व था?

मानवतावादी विद्वानों का मानना था कि प्राचीन यूनानियों और रोमनों की रचनाओं के अध्ययन से ही उस काल की सभ्यता को बेहतर ढंग से समझा जा सकता था, इसलिए उन्होंने प्राचीन लेखकों की रचनाओं के अध्ययन पर जोर दिया।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.