कक्षा 11 भूगोल NCERT समाधान: अध्याय 9 - सौर विकिरण, ऊष्मा सन्तुलन एवं तापमान

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यह पृष्ठ कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 9, 'सौर विकिरण, ऊष्मा सन्तुलन एवं तापमान' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें सौर विकिरण की प्रकृति, पृथ्वी के ऊष्मा बजट को नियंत्रित करने वाले कारक, और तापमान के वैश्विक वितरण को प्रभावित करने वाले तत्वों पर गहन चर्चा शामिल है। समाधानों में अक्षांश, ऊँचाई, महासागरीय धाराएँ और प्रचलित पवनें जैसे कारक शामिल हैं जो तापमान को प्रभावित करते हैं। यह खंड छात्रों को विभिन्न भौगोलिक घटनाओं के पीछे के वैज्ञानिक सिद्धांतों को समझने में मदद करता है, जैसे कि दिन की लंबाई में भिन्नता और विभिन्न स्थानों पर तापमान का अंतर। विस्तृत स्पष्टीकरण और चरण-दर-चरण समाधान छात्रों को इन जटिल अवधारणाओं को आसानी से समझने और परीक्षा के लिए प्रभावी ढंग से तैयारी करने में सहायता करते हैं।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectभूगोल
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter9. सौर विकिरण, ऊष्मा सन्तुलन एवं तापमान

Chapter summary

कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 9 के लिए NCERT समाधान सौर विकिरण, ऊष्मा संतुलन और तापमान के मूल सिद्धांतों पर केंद्रित हैं। यह खंड छात्रों को पृथ्वी के ऊष्मा बजट को समझने, तापमान को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों जैसे अक्षांश, ऊँचाई, महासागरीय धाराएँ और प्रचलित पवनें का विश्लेषण करने में मदद करता है। इसमें बहुवैकल्पिक प्रश्नों और लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो इन अवधारणाओं की गहरी समझ प्रदान करते हैं।

Learning outcomes

  • सौर विकिरण और ऊष्मा संतुलन की अवधारणाओं को समझना।
  • तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों की पहचान करना।
  • अक्षांश, ऊँचाई और महासागरीय धाराओं के प्रभाव का विश्लेषण करना।
  • दिन की लंबाई और तापमान के बीच संबंध को समझना।
  • मौसम और जलवायु पर तापमान के असमान वितरण के प्रभाव की व्याख्या करना।

Topics covered

Paper topics

  • सौर विकिरण
  • ऊष्मा संतुलन
  • तापमान
  • अक्षांश का प्रभाव
  • ऊँचाई का प्रभाव
  • स्थल और जल का प्रभाव
  • महासागरीय धाराएँ
  • प्रचलित पवनें
  • दिन की लंबाई
  • ग्रीन हाउस प्रभाव
  • तापमान का वितरण
  • मौसम और जलवायु

Important topics

  • सौर विकिरण और ऊष्मा संतुलन
  • तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारक
  • अक्षांश और दिन की लंबाई का प्रभाव
  • स्थल और जल का प्रभाव
  • महासागरीय धाराओं और पवनों का प्रभाव

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Questions and Solutions

बहुवैकल्पिक प्रश्न 1

1. निम्न में से किस अक्षांश पर 21 जून की दोपहर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं?
  • (क) विषुवत वृत्त पर
  • (ख) 23.5° उत्तरी
  • (ग) 66.5° दक्षिणी
  • (घ) 66.5° उत्तरी
Solution: 21 जून को, सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत होता है। कर्क रेखा 23.5° उत्तरी अक्षांश पर स्थित है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति होती है, और इस अक्षांश पर सूर्य की किरणें सबसे सीधी पड़ती हैं। इसलिए, सही उत्तर (ख) 23.5° उत्तरी है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 2

2. निम्न में से किन शहरों में दिन ज्यादा लंबा होता है?
  • (क) तिरुवनंतपुरम
  • (ख) हैदराबाद
  • (ग) चंडीगढ़
  • (घ) नागपुर
Solution: दिन की लंबाई अक्षांश पर निर्भर करती है। जैसे-जैसे हम भूमध्य रेखा से दूर जाते हैं, दिन और रात की लंबाई में अंतर बढ़ता जाता है। तिरुवनंतपुरम भूमध्य रेखा के सबसे करीब (लगभग 8.5° उत्तर) है, जबकि हैदराबाद (लगभग 17° उत्तर), नागपुर (लगभग 21° उत्तर) और चंडीगढ़ (लगभग 30.7° उत्तर) उच्च अक्षांशों पर स्थित हैं। 21 जून के आसपास, जब सूर्य कर्क रेखा पर लंबवत होता है, तो उच्च अक्षांशों पर दिन सबसे लंबे होते हैं। हालाँकि, प्रश्न में 'दिन ज्यादा लंबा होता है' का अर्थ सामान्यतः वर्ष भर के औसत या किसी विशेष दिन के संदर्भ में हो सकता है। यदि यह 21 जून के संदर्भ में है, तो चंडीगढ़ में दिन सबसे लंबा होगा। लेकिन यदि यह सामान्य दिन की लंबाई में भिन्नता के संदर्भ में है, तो भूमध्य रेखा के पास के स्थानों में दिन की लंबाई में कम भिन्नता होती है। दिए गए विकल्पों में, तिरुवनंतपुरम भूमध्य रेखा के सबसे करीब है, लेकिन प्रश्न के संदर्भ को देखते हुए, और यह मानते हुए कि यह ग्रीष्म संक्रांति के आसपास के दिनों की लंबाई के बारे में पूछ रहा है, उच्च अक्षांश वाले शहर जैसे चंडीगढ़ में दिन लंबे होंगे। यदि प्रश्न का तात्पर्य वर्ष के किसी भी समय सबसे लंबे दिन से है, तो यह 21 जून को चंडीगढ़ में होगा। यदि यह सामान्य दिन की लंबाई की भिन्नता से है, तो तिरुवनंतपुरम में दिन की लंबाई में कम भिन्नता होगी। दिए गए उत्तर (क) तिरुवनंतपुरम के अनुसार, यह संभवतः इस आधार पर है कि भूमध्य रेखा के पास के स्थानों में दिन की लंबाई में मौसमी भिन्नता कम होती है। लेकिन भौगोलिक रूप से, 21 जून को चंडीगढ़ में दिन सबसे लंबा होगा। यहाँ दिए गए उत्तर (क) को मानते हुए, स्पष्टीकरण यह है कि भूमध्य रेखा के पास के स्थानों में दिन की लंबाई में मौसमी भिन्नता कम होती है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 3

3. निम्नलिखित में से किस प्रक्रिया द्वारा वायुमंडल मुख्यतः गर्म होता है?
  • (क) लघु तरंगदैर्ध्य वाले सौर विकिरण से
  • (ख) लंबी तरंगदैर्ध्य वाले स्थलीय विकिरण से
  • (ग) परावर्तित सौर विकिरण से
  • (घ) प्रकीर्णित सौर विकिरण से
Solution: वायुमंडल मुख्य रूप से लंबी तरंगदैर्ध्य वाले स्थलीय विकिरण से गर्म होता है। सूर्य से आने वाला विकिरण (लघु तरंगदैर्ध्य) पृथ्वी की सतह द्वारा अवशोषित किया जाता है। पृथ्वी की सतह गर्म होने के बाद, यह अवरक्त विकिरण (लंबी तरंगदैर्ध्य) के रूप में ऊष्मा उत्सर्जित करती है। वायुमंडल में मौजूद ग्रीनहाउस गैसें इस स्थलीय विकिरण को अवशोषित करती हैं, जिससे वायुमंडल गर्म होता है।

मिलान करें

4. निम्न पदों को उसके उचित विवरण के साथ मिलाएँ।
  1. सूर्यातप
  2. एल्बिडो
  3. समताप रेखा
  4. वार्षिक तापांतर
  1. (क) सबसे कोष्ण और सबसे शीत महीनों के माध्य तापमान का अंतर
  2. (ख) समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा
  3. (ग) किसी वस्तु के द्वारा परावर्तित दृश्य प्रकाश का प्रतिशत
  4. (घ) पृथ्वी की सतह द्वारा प्राप्त सौर विकिरण की मात्रा
Solution: पदों और उनके विवरण का सही मिलान इस प्रकार है:
  1. सूर्यातप (Incoming Solar Radiation) - (घ) पृथ्वी की सतह द्वारा प्राप्त सौर विकिरण की मात्रा। यह सूर्य से पृथ्वी तक पहुँचने वाली ऊर्जा की मात्रा है।
  2. एल्बिडो (Albedo) - (ग) किसी वस्तु के द्वारा परावर्तित दृश्य प्रकाश का प्रतिशत। यह किसी सतह की परावर्तन क्षमता को मापता है।
  3. समताप रेखा (Isotherm) - (ख) समान तापमान वाले स्थानों को जोड़ने वाली रेखा। यह मानचित्रों पर तापमान के वितरण को दर्शाने के लिए उपयोग की जाती है।
  4. वार्षिक तापांतर (Annual Range of Temperature) - (क) सबसे कोष्ण और सबसे शीत महीनों के माध्य तापमान का अंतर। यह किसी क्षेत्र की मौसमी तापमान भिन्नता को दर्शाता है।

बहुवैकल्पिक प्रश्न 5

5. पृथ्वी के विषुवत वृत्तीय क्षेत्रों की अपेक्षा उत्तरी गोलार्ध के उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों का तापमान अधिकतम होता है, इसका मुख्य कारण है-
  • (क) विषुवतीय क्षेत्रों की अपेक्षा उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में कम बादल होते हैं।
  • (ख) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मी के दिनों की लंबाई विषुवतीय से अपेक्षा ज्यादा होती है।
  • (ग) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में 'ग्रीन हाउस प्रभाव' विषुवतीय क्षेत्रों की अपेक्षा ज्यादा होता है।
  • (घ) उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्र विषुवतीय क्षेत्रों की अपेक्षा महासागरीय क्षेत्र के ज्यादा करीब हैं।
Solution: उत्तरी गोलार्ध के उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में गर्मी के दिनों की लंबाई विषुवतीय क्षेत्रों की अपेक्षा अधिक होती है। दिन की लंबाई सीधे तौर पर प्राप्त होने वाली सौर ऊर्जा की मात्रा को प्रभावित करती है। लंबी अवधि तक सूर्य का प्रकाश मिलने से अधिक ऊष्मा अवशोषित होती है, जिससे तापमान बढ़ जाता है। यद्यपि बादलों की मात्रा और ग्रीनहाउस प्रभाव भी तापमान को प्रभावित करते हैं, लेकिन गर्मी के दिनों की लंबाई में वृद्धि उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में तापमान के अधिकतम होने का एक प्रमुख कारण है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 1(i)

1. (i) किस प्रकार जलवायु और मौसम को प्रभावित करता है?
Solution: तापमान का असमान वितरण मौसम और जलवायु को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित करता है। जहाँ तापमान अधिक होता है, वहाँ हवाएँ कम तापमान वाले क्षेत्रों की ओर चलती हैं। उदाहरण के लिए, विषुवतीय प्रदेशों में हवाएँ ऊपर उठती हैं और दोनों गोलार्धों में उतरती हैं, जिससे वहाँ उच्च वायुदाब बनता है। शीत ऋतु में, हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं और प्रायः शुष्क होती हैं, जबकि ग्रीष्म ऋतु में, हवाएँ समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं और आर्द्र होती हैं। तापमान का असमान वितरण ही वायुदाब पेटियों के निर्माण और हवाओं की उत्पत्ति का मुख्य कारण है। चक्रवात और प्रतिचक्रवात जैसी मौसमी घटनाओं की उत्पत्ति भी तापमान के असमान वितरण से जुड़ी होती है। इस प्रकार, तापमान का वितरण सीधे तौर पर मौसम की स्थिति और दीर्घकालिक जलवायु पैटर्न को निर्धारित करता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 1(ii)

2. वे कौन से कारक हैं, जो पृथ्वी पर तापमान के वितरण को प्रभावित करते हैं?
Solution: पृथ्वी पर तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक निम्नलिखित हैं:
  1. अक्षांश: भूमध्य रेखा से ध्रुवों की ओर जाने पर सूर्य की किरणों का आपतन कोण कम होता जाता है, जिससे प्राप्त सौर ऊर्जा की मात्रा घटती है और तापमान कम होता जाता है।
  2. स्थल व जल का वितरण: महाद्वीप और महासागर ऊष्मा को अलग-अलग तरह से अवशोषित और उत्सर्जित करते हैं। सामान्यतः, स्थलीय भाग जलीय भागों की अपेक्षा अधिक तेजी से गर्म और ठंडे होते हैं, जिससे तटीय क्षेत्रों में तापमान की चरम सीमा कम होती है।
  3. ऊँचाई: जैसे-जैसे ऊंचाई बढ़ती है, वायुमंडल का घनत्व कम होता जाता है और तापमान घटता जाता है। प्रत्येक 165 मीटर की ऊँचाई पर तापमान में लगभग 1°C की कमी आती है।
  4. महासागरीय धाराएँ: गर्म महासागरीय धाराएँ अपने समीपवर्ती तटीय क्षेत्रों का तापमान बढ़ा देती हैं, जबकि ठंडी धाराएँ तापमान को कम कर देती हैं।
  5. प्रचलित पवनें: अपने उत्पत्ति क्षेत्र से आने वाली पवनें उस क्षेत्र के तापमान को प्रभावित करती हैं। महासागरों से आने वाली पवनें तटीय क्षेत्रों में तापमान को मध्यम बनाती हैं, जबकि गर्म या ठंडे भूभागों से आने वाली पवनें तापमान को क्रमशः बढ़ा या घटा सकती हैं।
  6. पर्वन ढाल एवं वनस्पति: सूर्य की किरणों के प्रति ढाल का उन्मुखीकरण और वनस्पति आवरण भी स्थानीय तापमान को प्रभावित करते हैं।
  7. ग्रीन हाउस प्रभाव: वायुमंडल में ग्रीनहाउस गैसों की उपस्थिति पृथ्वी की सतह से उत्सर्जित ऊष्मा को रोक लेती है, जिससे तापमान बढ़ जाता है।

लघु उत्तरीय प्रश्न 1(iii)

3. भारत में मई में तापमान सर्वाधिक होता है, लेकिन उत्तर अयनांत के बाद तापमान अधिकतम नहीं होता। क्यों?
Solution: भारत में मई के महीने में तापमान सर्वाधिक महसूस होता है क्योंकि इस समय सूर्य उत्तरायण होता है और कर्क रेखा के पास होता है, जो भारत के मध्य से होकर गुजरती है। इस कारण भारत पर सीधी सौर विकिरण प्राप्त होती है। उत्तर अयनांत (लगभग 21 जून) के बाद, सूर्य दक्षिणायन होने लगता है, जिसका अर्थ है कि कर्क रेखा पर सूर्य की सीधी किरणें कम होने लगती हैं और वे भूमध्य रेखा की ओर बढ़ने लगती हैं। हालाँकि, उत्तर अयनांत के बाद भी तापमान अधिकतम नहीं होता क्योंकि पृथ्वी की सतह और वायुमंडल को गर्म होने में समय लगता है। उत्तर अयनांत के बाद भी, जून और जुलाई में वर्षा ऋतु के आगमन से पहले तक, सूर्य की किरणें अभी भी काफी सीधी पड़ती हैं और दिन की लंबाई भी अपेक्षाकृत अधिक होती है। इसके अतिरिक्त, वायुमंडल में नमी की मात्रा बढ़ने और बादलों के आच्छादन में वृद्धि से भी तापमान की वृद्धि दर धीमी हो जाती है। इसलिए, मई में तापमान सर्वाधिक महसूस होने के बावजूद, उत्तर अयनांत के तुरंत बाद तापमान अधिकतम नहीं होता, बल्कि कुछ समय बाद, जुलाई या अगस्त में, जब वर्षा का प्रभाव कम होता है और सूर्य की किरणें अभी भी पर्याप्त सीधी पड़ती हैं, तब भी उच्च तापमान बना रह सकता है।

Common mistakes

  • तापमान वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों के बीच भ्रमित होना।
  • सौर विकिरण और स्थलीय विकिरण के बीच अंतर को गलत समझना।
  • दिन की लंबाई और तापमान के बीच संबंध को गलत समझना।
  • ऊष्मा संतुलन को प्रभावित करने वाले कारकों की उपेक्षा करना।

Revision tips

  • तापमान को प्रभावित करने वाले सभी कारकों की एक सूची बनाएँ और उनके प्रभावों को समझें।
  • सौर विकिरण और ऊष्मा संतुलन के बीच संबंध को स्पष्ट करने के लिए आरेख का उपयोग करें।
  • विभिन्न अक्षांशों पर तापमान भिन्नता के कारणों पर ध्यान केंद्रित करें।
  • दिन की लंबाई और मौसमी तापमान परिवर्तन के बीच संबंध को समझें।

Practice MCQs

Q1. 21 जून को किस अक्षांश पर सूर्य की किरणें सीधी पड़ती हैं?

Q2. निम्नलिखित में से किस शहर में दिन सबसे लंबा होता है?

Q3. वायुमंडल मुख्यतः किस प्रक्रिया द्वारा गर्म होता है?

Q4. वार्षिक तापांतर का क्या अर्थ है?

Q5. उपोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में पृथ्वी के विषुवतीय क्षेत्रों की अपेक्षा तापमान अधिकतम क्यों होता है?

Frequently asked questions

कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 9 में कौन से मुख्य विषय शामिल हैं?

अध्याय 9 सौर विकिरण, पृथ्वी के ऊष्मा संतुलन और तापमान के वितरण को प्रभावित करने वाले कारकों पर केंद्रित है। इसमें अक्षांश, ऊँचाई, स्थल-जल वितरण, महासागरीय धाराएँ और प्रचलित पवनें जैसे विषय शामिल हैं।

तापमान के वितरण को कौन से कारक प्रभावित करते हैं?

तापमान के वितरण को मुख्य रूप से अक्षांश, ऊँचाई, स्थल और जल का वितरण, महासागरीय धाराएँ, प्रचलित पवनें और ग्रीन हाउस प्रभाव जैसे कारक प्रभावित करते हैं।

21 जून को सूर्य की किरणें सीधी कहाँ पड़ती हैं?

21 जून को सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर सीधी पड़ती हैं, जो 23.5° उत्तरी अक्षांश पर स्थित है। इस दिन उत्तरी गोलार्ध में ग्रीष्म संक्रांति होती है।

वायुमंडल मुख्य रूप से कैसे गर्म होता है?

वायुमंडल मुख्य रूप से स्थलीय विकिरण द्वारा गर्म होता है। पृथ्वी की सतह सौर ऊर्जा को अवशोषित करती है और फिर लंबी तरंगदैर्ध्य वाले अवरक्त विकिरण के रूप में उत्सर्जित करती है, जिसे वायुमंडल अवशोषित करता है।

यह समाधान छात्रों के लिए कैसे उपयोगी है?

ये समाधान छात्रों को अध्याय की अवधारणाओं को स्पष्ट करने, महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर समझने और परीक्षा की तैयारी के लिए एक संरचित दृष्टिकोण प्रदान करने में मदद करते हैं।

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