कक्षा 11 भूगोल: वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ NCERT समाधान
यह पृष्ठ कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 10, 'वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रदान करता है। इसमें बहुवैकल्पिक प्रश्नों और लघु उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर शामिल हैं, जो वायुमंडलीय दबाव, दाब प्रवणता बल, कोरिऑलिस प्रभाव, भू-विक्षेपी पवनें, तथा समुद्री और स्थलीय समीर जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करते हैं। समाधानों को सरल भाषा में समझाया गया है, जिससे छात्रों को इन जटिल विषयों को समझने में आसानी हो। यह सामग्री परीक्षा की तैयारी और विषय की गहरी समझ के लिए एक उत्कृष्ट संसाधन है, जो छात्रों को वायुमंडलीय गतिशीलता के सिद्धांतों को प्रभावी ढंग से सीखने में मदद करती है।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 11 |
| Subject | भूगोल |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 10. वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ |
Chapter summary
यह खंड कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 10, 'वायुमंडलीय परिसंचरण तथा मौसम प्रणालियाँ' के लिए NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। इसमें वायुमंडलीय दबाव की इकाइयों, समुद्र तल पर वायुदाब को समायोजित करने के कारणों, दाब प्रवणता बल और कोरिऑलिस प्रभाव के कारण पवनों की दिशा निर्धारण, भू-विक्षेपी पवनों की प्रकृति, तथा दिन और रात में समुद्र व स्थल समीर के निर्माण की प्रक्रिया का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। यह छात्रों को वायुमंडलीय परिसंचरण के मूल सिद्धांतों को समझने में सहायता करता है।
Learning outcomes
- वायुमंडलीय दबाव मापने की इकाइयों को समझना।
- समुद्र तल पर वायुदाब को समायोजित करने के कारण की व्याख्या करना।
- दाब प्रवणता बल और कोरिऑलिस प्रभाव के बीच संबंध को समझना।
- उत्तरी गोलार्ध में पवनों की दिशा के निर्धारण को समझना।
- भू-विक्षेपी पवनों की विशेषताओं का वर्णन करना।
- समुद्र समीर और स्थल समीर के निर्माण की प्रक्रिया को समझाना।
Topics covered
Paper topics
- वायुमंडलीय परिसंचरण
- मौसम प्रणालियाँ
- वायुदाब
- मिलीबार
- किलोपास्कल (hpa)
- समदाब रेखाएँ
- दाब प्रवणता बल
- कोरिऑलिस बल
- भू-विक्षेपी पवनें
- समुद्र समीर
- स्थल समीर
- व्यापारिक पवनें
Important topics
- दाब प्रवणता बल और कोरिऑलिस बल का प्रभाव
- भू-विक्षेपी पवनें
- समुद्र समीर और स्थल समीर
- वायुदाब मापन और समदाब रेखाएँ
- अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ)
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
- (क) 700 मिलीबार
- (ख) 900 मिलीबार
- (ग) 1,100 मिलीबार
- (घ) 1300 मिलीबार
उत्तर: (ख) 900 मिलीबार
प्रश्न 2
- (क) विषुवत् वृत के निकट
- (ख) कर्क रेखा के निकट
- (ग) मकर रेखा के निकट
- (घ) आर्कटिक वृत्त के निकट
उत्तर: (क) विषुवत् वृत के निकट
प्रश्न 3
- (क) घड़ी की सुइयों के चलने की दिशा के अनुरूप
- (ख) घड़ी की सुइयों के चलने की दिशा के विपरीत
- (ग) समदाब रेखाओं के समकोण पर
- (घ) समदाब रेखाओं के समानांतर
उत्तर: (ख) घड़ी की सुइयों के चलने की दिशा के विपरीत
प्रश्न 4
- (क) विषुवतीय वन
- (ख) साइबेरिया का मैदानी भाग
- (ग) हिमालय पर्वत
- (घ) दक्कन पठार
उत्तर: (ख) साइबेरिया का मैदानी भाग
प्रश्न 5 (i)
प्रश्न 5 (ii)
प्रश्न 5 (iii)
प्रश्न 5 (iv)
समुद्र समीर: यह दिन के समय चलती है। दिन में, स्थल समुद्र की अपेक्षा अधिक तेजी से गर्म होता है। स्थल पर हवा गर्म होकर ऊपर उठती है, जिससे वहाँ निम्न दाब का क्षेत्र बनता है। इसके विपरीत, समुद्र अपेक्षाकृत ठंडा रहता है और वहाँ उच्च दाब बना रहता है। इस दाब प्रवणता के कारण, पवनें समुद्र से स्थल की ओर चलती हैं, जिसे समुद्र समीर कहते हैं।
स्थल समीर: यह रात्रि के समय चलती है। रात में, स्थल समुद्र की अपेक्षा अधिक तेजी से ठंडा होता है। स्थल पर हवा ठंडी और सघन होकर नीचे बैठती है, जिससे वहाँ उच्च दाब बनता है। समुद्र अपेक्षाकृत गर्म रहता है और वहाँ निम्न दाब बनता है। इस दाब प्रवणता के कारण, पवनें स्थल से समुद्र की ओर चलती हैं, जिसे स्थल समीर कहते हैं।
प्रश्न 6 (i)
- दाब प्रवणता बल (Pressure Gradient Force): यह वह बल है जो वायुदाब में क्षैतिज अंतर के कारण उत्पन्न होता है। पवनें हमेशा उच्च दाब वाले क्षेत्र से निम्न दाब वाले क्षेत्र की ओर चलती हैं। दाब प्रवणता जितनी अधिक होगी, पवनों का वेग उतना ही अधिक होगा।
- कोरिऑलिस बल (Coriolis Force): पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन के कारण यह बल उत्पन्न होता है। यह उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा से दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित करता है। यह बल पवनों के वेग के साथ बढ़ता है और भूमध्य रेखा पर शून्य होता है।
- घर्षण बल (Frictional Force): यह बल धरातल की सतह पर चलने वाली पवनों के वेग को कम करता है और उनकी दिशा को भी प्रभावित करता है। यह बल विशेष रूप से धरातल के निकट अधिक प्रभावी होता है और समदाब रेखाओं के समानांतर बहने वाली भू-विक्षेपी पवनों को भी प्रभावित करता है, जिससे वे समदाब रेखाओं की ओर मुड़ जाती हैं।
- स्थानीय कारक: जैसे कि स्थलाकृति (पहाड़, घाटियाँ) और जल तथा स्थल का वितरण भी स्थानीय पवनों की दिशा और वेग को प्रभावित कर सकते हैं।
Common mistakes
- कोरिऑलिस बल के प्रभाव को गलत समझना (जैसे दिशा या गोलार्ध में अंतर)।
- दाब प्रवणता बल और कोरिऑलिस बल के बीच संतुलन को ठीक से न समझना।
- समुद्र और स्थल समीर के निर्माण के लिए तापमान अंतर के प्रभाव को गलत बताना।
Revision tips
- प्रत्येक बल (दाब प्रवणता, कोरिऑलिस, घर्षण) के प्रभाव को अलग-अलग समझें।
- वायुमंडलीय परिसंचरण के आरेखों का अभ्यास करें, विशेषकर पवनों की दिशा के लिए।
- समुद्र और स्थल समीर के दैनिक चक्र को याद रखने के लिए एक तुलनात्मक तालिका बनाएँ।
- महत्वपूर्ण शब्दावली जैसे भू-विक्षेपी पवनें, दाब प्रवणता, और कोरिऑलिस प्रभाव को परिभाषित करें।
Practice MCQs
Q1. यदि धरातल पर वायुदाब 1,000 मिलीबार है, तो धरातल से 1 कि.मी. की ऊँचाई पर वायुदाब लगभग कितना होगा?
Explanation: ऊँचाई बढ़ने के साथ वायुदाब घटता है। सामान्यतः, प्रत्येक 100 मीटर की ऊँचाई पर वायुदाब लगभग 10-12 मिलीबार कम हो जाता है। इसलिए, 1,000 मीटर (1 कि.मी.) की ऊँचाई पर वायुदाब लगभग 100-120 मिलीबार कम होगा, जिससे यह 900 मिलीबार के आसपास होगा।
Q2. अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) सामान्यतः कहाँ स्थित होता है?
Explanation: अंतर उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) एक निम्न दाब पेटी है जो विषुवत् वृत के पास स्थित होती है, जहाँ व्यापारिक पवनें अभिसरित होती हैं।
Q3. उत्तरी गोलार्ध में निम्न वायुदाब के चारों ओर पवनों की दिशा क्या होती है?
Explanation: उत्तरी गोलार्ध में, कोरिऑलिस बल के प्रभाव के कारण निम्न दाब के चारों ओर पवनें घड़ी की सुइयों के चलने की दिशा के विपरीत घूमती हैं।
Q4. वायुराशियों के निर्माण के लिए कौन-सा क्षेत्र एक प्रमुख उद्गम क्षेत्र है?
Explanation: साइबेरिया का विशाल और स्थिर मैदानी भाग, विशेष रूप से सर्दियों में, ठंडी और स्थिर वायुराशियों के निर्माण के लिए एक आदर्श उद्गम क्षेत्र है।
Q5. समुद्र समीर किस ओर से किस ओर चलती है?
Explanation: समुद्र समीर दिन के समय चलती है जब स्थल समुद्र की अपेक्षा अधिक गर्म हो जाता है। गर्म हवा स्थल पर ऊपर उठती है, जिससे निम्न दाब बनता है, और ठंडी हवा समुद्र से स्थल की ओर प्रवाहित होती है।
Frequently asked questions
वायुदाब मापने की मुख्य इकाई क्या है और मौसम मानचित्रों के लिए इसे समुद्र तल तक क्यों घटाया जाता है?
वायुदाब मापने की मुख्य इकाई मिलीबार (mb) है, और व्यापक रूप से किलोपास्कल (hPa) का भी प्रयोग होता है। इसे समुद्र तल तक घटाया जाता है ताकि विभिन्न स्थानों के वायुदाब की तुलना ऊंचाई के प्रभाव को हटाकर की जा सके, जिससे वायुदाब के क्षैतिज वितरण का सही अध्ययन हो सके।
कोरिऑलिस बल पवनों की दिशा को कैसे प्रभावित करता है?
कोरिऑलिस बल पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होता है। यह उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा से दाईं ओर और दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित करता है। यह बल पवनों के वेग के साथ बढ़ता है।
भू-विक्षेपी पवनें क्या होती हैं और वे कैसे चलती हैं?
भू-विक्षेपी पवनें ऊपरी वायुमंडल में चलती हैं जहाँ घर्षण का प्रभाव नगण्य होता है। इनमें दाब प्रवणता बल और कोरिऑलिस बल संतुलित हो जाते हैं, जिसके कारण ये पवनें समदाब रेखाओं के समानांतर बहती हैं।
दिन और रात में समुद्र समीर और स्थल समीर कैसे बनती हैं?
दिन में, स्थल समुद्र से जल्दी गर्म होता है, जिससे स्थल पर निम्न दाब बनता है और समुद्र से स्थल की ओर समुद्र समीर चलती है। रात में, स्थल जल्दी ठंडा होता है, जिससे समुद्र से स्थल की ओर स्थल समीर चलती है।
कक्षा 11 भूगोल के अध्याय 10 के ये NCERT समाधान छात्रों की मदद कैसे करते हैं?
ये समाधान छात्रों को वायुमंडलीय परिसंचरण और मौसम प्रणालियों से संबंधित जटिल अवधारणाओं को स्पष्ट, चरण-दर-चरण तरीके से समझने में मदद करते हैं। यह परीक्षा की तैयारी के लिए महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर और स्पष्टीकरण प्रदान करता है।
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