Class 11 Hindi Chapter 12 Krishna Sobti NCERT Solutions

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This section provides detailed NCERT Solutions for Class 11 Hindi (Core A), Chapter 12, focusing on the chapter about Krishna Sobti and her portrayal of Mian Nasiruddin. The solutions delve into the character of Mian Nasiruddin, a skilled traditional bread-maker, exploring why he is called the 'messiah of nanbais' and his unique approach to his craft. It covers the author's visit to his shop, the reasons for Mian Nasiruddin's disinterest in certain topics, and a vivid description of his personality and appearance. The solutions also touch upon the importance of traditional occupations, the role of journalism, and language nuances within the chapter. These solutions are designed to help students understand the nuances of the chapter, analyze the characters, and prepare effectively for their Hindi examinations by offering clear explanations and insights into the text.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter12. कृष्णा सोबती

Chapter summary

This chapter's NCERT Solutions for Class 11 Hindi (Core A) focus on the character sketch of Mian Nasiruddin, a traditional bread-maker, as depicted by Krishna Sobti. The solutions explain his unique status as the 'messiah of nanbais,' his artistic approach to bread-making, and his family's legacy. They also explore the author's interaction with him, his reactions to certain questions, and a detailed description of his personality. The exercises further discuss the relevance of traditional professions in contemporary times and the role of journalism.

Learning outcomes

  • Understand the significance of Mian Nasiruddin as a traditional craftsman.
  • Analyze the author's portrayal of Mian Nasiruddin's personality and skills.
  • Explain the concept of 'messiah of nanbais' in the context of the chapter.
  • Discuss the importance of preserving traditional occupations.
  • Evaluate the role and perception of journalism as presented in the text.
  • Identify and appreciate the nuances of language used in the chapter.

Topics covered

Paper topics

  • Mian Nasiruddin's character sketch
  • The art of bread-making (Nanbais)
  • Traditional occupations vs. modern careers
  • Role of journalism
  • Author's interaction with the subject
  • Character description
  • Language and vocabulary
  • Krishna Sobti's writing style

Important topics

  • Mian Nasiruddin's identity as the 'messiah of nanbais'
  • Detailed characterization of Mian Nasiruddin
  • The significance of traditional skills and professions
  • Author's perspective and journalistic approach
  • Analysis of Mian Nasiruddin's dialogue and attitude

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?
Solution: मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा इसलिए कहा गया है क्योंकि वे केवल साधारण नानबाई नहीं थे, बल्कि वे अपने पेशे को एक कला मानते थे और उसे मसीहाई अंदाज़ से करते थे। अन्य नानबाई केवल रोटी पकाते हैं, जबकि मियाँ नसीरुद्दीन छप्पन प्रकार की रोटियाँ बनाने की अपनी खानदानी कला के लिए जाने जाते थे। वे स्वयं को सर्वश्रेष्ठ नानबाई मानते थे और अपने काम में एक विशेष महारत रखते थे, जो उन्हें अन्य नानबाइयों से अलग करती थी।

प्रश्न 2

लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास क्यों गई थीं?
Solution: लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास एक पत्रकार की हैसियत से गई थीं। उनका उद्देश्य मियाँ नसीरुद्दीन की रोटी बनाने की अनूठी कला और उनके व्यवसाय के बारे में जानकारी प्राप्त करना था, ताकि वे इस जानकारी को अपने लेख में प्रकाशित कर सकें। लेखिका ने एक मामूली सी दुकान पर आटे का ढेर सनता देखा तो उनकी जिज्ञासा बढ़ी और वे उस दुकान के मालिक, मियाँ नसीरुद्दीन, के बारे में जानने के लिए प्रेरित हुईं।

प्रश्न 3

बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही लेखिका की बातों में मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म होने लगी?
Solution: बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी लेखिका की बातों में इसलिए खत्म होने लगी क्योंकि उन्हें किसी खास बादशाह का नाम ठीक से याद नहीं था। वे जो भी बातें बता रहे थे, वे केवल सुनी-सुनाई थीं और उनमें सच्चाई की कमी थी। ऐसा इसलिए था क्योंकि उनके किसी बुजुर्ग ने कभी किसी बादशाह के बावर्चीखाने में काम नहीं किया था। जब वे अपनी बातों को सिद्ध नहीं कर पा रहे थे, तो उनकी रुचि स्वाभाविक रूप से कम हो गई।

प्रश्न 4

मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर किसी दबे हुए अंधड़ के आसार देख यह मज़मून न छेड़ने का फ़ैसला किया - इस कथन के पहले और बाद के प्रसंग का उल्लेख करते हुए इसे स्पष्ट कीजिए।
Solution: इस कथन के पहले का प्रसंग यह है कि बादशाह के नाम का ज़िक्र आने पर मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी लेखिका में कम हो गई थी। इसके बाद, उन्होंने किसी को भट्टी सुलगाने के लिए पुकारा। लेखिका ने पूछा तो पता चला कि वह उनके कारीगर बब्बन मियाँ हैं। इस पर लेखिका के मन में यह सवाल आया कि क्या उनके बेटे-बेटियाँ भी हैं। लेकिन जब लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे पर एक प्रकार की बेरुखी या उदासी (दबे हुए अंधड़ के आसार) देखी, तो उन्होंने उस विषय पर और अधिक प्रश्न न पूछने का निर्णय लिया।

प्रश्न 5

पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र लेखिका ने कैसे खींचा है?
Solution: लेखिका ने मियाँ नसीरुद्दीन का शब्दचित्र बड़ी कुशलता से खींचा है। उन्होंने बताया कि मियाँ नसीरुद्दीन सत्तर वर्ष के थे। जब लेखिका ने दुकान के अंदर झाँका, तो उन्होंने मियाँ को चारपाई पर बैठे बीड़ी पीते हुए देखा। उनके चेहरे का वर्णन करते हुए लेखिका ने लिखा है कि वह 'मौसमों की मार से पका चेहरा' था, आँखों में 'काइयाँ भोलापन' था और पेशानी पर एक 'मँजे हुए कारीगर के तेवर' थे। वे बड़ी सधे हुए अंदाज़ में जवाब देते थे, कभी पंचहजारी अंदाज में सिर हिलाते, कभी आँखों के कंचे फेरते और कभी आँखें तरेरते। वे अपनी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बताने में भी माहिर थे।

प्रश्न 6

मियाँ नसीरुद्दीन की कौन-सी बातें आपको अच्छी लगीं?
Solution: हमें मियाँ नसीरुद्दीन की निम्नलिखित बातें अच्छी लगीं:
  • उनका आत्मविश्वास से भरा व्यक्तित्व, जिससे वे अपने काम के प्रति दृढ़ दिखते थे।
  • अपने काम के प्रति गहरी रुचि और लगाव, जिसे वे कला मानते थे।
  • सटीक और सधे हुए अंदाज़ में जवाब देने की उनकी कला।
  • तरह-तरह की रोटियाँ बनाने में उनकी महारत, जो उनकी विशेषज्ञता को दर्शाती है।
  • अपने शागिर्दों को उचित वेतन देने की उनकी व्यावसायिक नैतिकता।

प्रश्न 7

तालीम की तालीम ही बड़ी चीज़ होती है - यहाँ लेखक ने तालीम शब्द का दो बार प्रयोग क्यों किया है? क्या आप दूसरी बार आए तालीम शब्द की जगह कोई अन्य शब्द रख सकते हैं? लिखिए।
Solution: लेखिका ने 'तालीम' शब्द का दो बार प्रयोग किया है। पहली बार 'तालीम' का अर्थ है 'काम की ट्रेनिंग' या 'हुनर सिखाना', जो कि खानदानी व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए आवश्यक है। दूसरी बार 'तालीम' का अर्थ 'शिक्षा' या 'ज्ञान' है, जो कि एक व्यापक अवधारणा है। हाँ, दूसरी बार आए 'तालीम' शब्द की जगह 'शिक्षा' शब्द का प्रयोग किया जा सकता है। वाक्य इस प्रकार होगा: "काम की ट्रेनिंग ही बड़ी चीज़ होती है - यहाँ लेखक ने काम की ट्रेनिंग और शिक्षा शब्द का प्रयोग किया है।"

प्रश्न 8

मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी के हैं जिसने अपने खानदानी व्यवसाय को अपनाया। वर्तमान समय में प्रायः लोग अपने पारंपरिक व्यवसाय को नहीं अपना रहे हैं। ऐसा क्यों?
Solution: मियाँ नसीरुद्दीन के दादा आला नानबाई मियाँ कल्लन थे, उनके वालिद मियाँ बरकत शाही नानबाई थे, और इस प्रकार तीसरी पीढ़ी में मियाँ नसीरुद्दीन ने यह खानदानी व्यवसाय अपनाया। वर्तमान समय में लोग अपने पारंपरिक व्यवसायों को इसलिए नहीं अपना रहे हैं क्योंकि:
  • पारंपरिक व्यवसायों के प्रति लोगों की रुचि कम हो गई है।
  • आधुनिक शिक्षा और तकनीकी विकास के कारण लोग अधिक आकर्षक और लाभप्रद समझे जाने वाले नए व्यवसायों की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
  • आधुनिक व्यवसायों में आय की संभावना अधिक मानी जाती है।
  • पारंपरिक व्यवसायों को अक्सर कम प्रतिष्ठित या कम आय वाला समझा जाता है।

प्रश्न 9

मियाँ, कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफ़ात है - अखबार की भूमिका को देखते हुए इस पर टिप्पणी करें।
Solution: मियाँ नसीरुद्दीन का यह कथन कि "कहीं अखबारनवीस तो नहीं हो? यह तो खोजियों की खुराफ़ात है" पत्रकारिता की भूमिका पर एक टिप्पणी है। अखबारनवीस यानी पत्रकार समाज को जागृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे नई-से-नई खबरों की खोज करते हैं और जनता तक पहुंचाते हैं। अखबार जनता को न्याय दिलाने का एक माध्यम भी बन सकता है। हालाँकि, मियाँ नसीरुद्दीन के इस कथन में थोड़ी शंका और शायद थोड़ी आलोचना भी छिपी है, जो आज के समय में अखबारों द्वारा बातों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने की प्रवृत्ति की ओर इशारा करती है, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।

Common mistakes

  • Confusing Mian Nasiruddin's skill with ordinary bread-making.
  • Misinterpreting the author's intentions during the interview.
  • Underestimating the value of traditional professions.
  • Failing to grasp the subtle criticisms of modern journalism.

Revision tips

  • Focus on understanding Mian Nasiruddin's character and his unique skills.
  • Pay attention to the author's descriptive language and narrative techniques.
  • Consider the social commentary on traditional occupations versus modern careers.
  • Review the questions about journalism and its portrayal in the chapter.
  • Practice answering questions that require character analysis and contextual understanding.

Practice MCQs

Q1. मियाँ नसीरुद्दीन को नानबाइयों का मसीहा क्यों कहा गया है?

Q2. लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन के पास किस हैसियत से गई थीं?

Q3. बादशाह के नाम का प्रसंग आते ही मियाँ नसीरुद्दीन की दिलचस्पी क्यों खत्म हो गई?

Q4. पाठ में मियाँ नसीरुद्दीन के चेहरे का वर्णन कैसे किया गया है?

Q5. मियाँ नसीरुद्दीन अपने शागिर्दों को क्या देते थे?

Frequently asked questions

यह समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

ये समाधान कक्षा 11 के हिंदी (कोर ए) विषय के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 12: कृष्णा सोबती पर केंद्रित हैं।

अध्याय 12 में मुख्य पात्र कौन है और उसकी क्या विशेषता है?

अध्याय 12 में मुख्य पात्र मियाँ नसीरुद्दीन हैं, जो एक खानदानी नानबाई हैं और रोटी बनाने की कला में माहिर हैं। उन्हें 'नानबाइयों का मसीहा' कहा गया है।

लेखिका मियाँ नसीरुद्दीन से मिलने क्यों गई थीं?

लेखिका एक पत्रकार के तौर पर मियाँ नसीरुद्दीन की नानबाई कला के बारे में जानकारी प्राप्त करने और उसे प्रकाशित करने के उद्देश्य से उनसे मिलने गई थीं।

क्या ये समाधान परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे?

हाँ, ये समाधान अध्याय की गहरी समझ, पात्र विश्लेषण और महत्वपूर्ण अवधारणाओं को स्पष्ट करके परीक्षा की तैयारी में मदद करेंगे।

पाठ में पारंपरिक व्यवसायों के बारे में क्या चर्चा की गई है?

पाठ में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि मियाँ नसीरुद्दीन तीसरी पीढ़ी के हैं जिन्होंने अपना खानदानी व्यवसाय अपनाया, जबकि वर्तमान समय में लोग पारंपरिक व्यवसायों को कम अपना रहे हैं।

अखबारनवीस (पत्रकार) की भूमिका पर पाठ में क्या टिप्पणी की गई है?

पाठ में अखबारनवीस की समाज को जागृत करने वाली भूमिका का उल्लेख है, लेकिन साथ ही आजकल के अखबारों में बातों को बढ़ा-चढ़ाकर लिखने की प्रवृत्ति पर भी टिप्पणी की गई है।

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