CBSE Class 11 Hindi NCERT Solutions: Chapter 10 निर्मला पुतुल

NCERT Solutions PDF Class 11 PDF

This chapter provides NCERT Solutions for Class 11 Hindi, focusing on Nirmala Putul's poem. The solutions delve into the poet's exploration of identity, culture, and the impact of modernization on tribal communities. Key themes discussed include the significance of preserving one's roots, symbolized by "माटी का रंग" (the color of the soil), and the importance of maintaining the unique "झारखंडीपन" (Jharkhandi essence) in language and lifestyle. The solutions also address the need to balance innocence with assertiveness and resilience, highlighting the potential pitfalls of urban influence such as loss of enthusiasm, alcoholism, and mistrust. Furthermore, the text emphasizes the value of retaining hope, faith, and dreams amidst societal changes. These solutions are designed to help students understand the deeper meanings within the poem and prepare effectively for their examinations by offering clear explanations and insights into the poet's message.

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 11
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter10. निर्मला पुतुल

Chapter summary

Chapter 10 of the Class 11 Hindi NCERT Solutions focuses on the poem by Nirmala Putul. It explores themes of cultural identity, the preservation of tribal heritage against urban influences, and the importance of retaining core values like simplicity, assertiveness, and resilience. The solutions explain the poet's call to protect the unique essence of Jharkhandi culture and language, and to foster hope and trust in a changing world.

Learning outcomes

  • Understand the symbolism of "माटी का रंग" in preserving identity.
  • Analyze the concept of "झारखंडीपन" in language and culture.
  • Explain the necessity of balancing innocence with assertiveness and resilience.
  • Identify the negative impacts of urbanization on tribal societies as depicted in the poem.
  • Appreciate the poet's message of retaining hope and collective effort.
  • Analyze the poetic devices used to convey the poem's message.

Topics covered

Paper topics

  • निर्मला पुतुल की कविता
  • सांस्कृतिक पहचान
  • माटी का रंग
  • झारखंडीपन
  • आदिवासी समाज
  • शहरीकरण का प्रभाव
  • भोलापन, अक्खड़पन और जुझारूपन
  • विश्वास, उम्मीद और सपने
  • काव्य सौंदर्य
  • भाषा और संस्कृति का संरक्षण

Important topics

  • सांस्कृतिक पहचान का संरक्षण
  • शहरीकरण के नकारात्मक प्रभाव
  • 'माटी का रंग' और 'झारखंडीपन' का महत्व
  • मानवीय मूल्यों का महत्व (विश्वास, उम्मीद, सपने)
  • सरलता के साथ दृढ़ता की आवश्यकता

PDF preview

Read page by page below. PDF is streamed from the official NCERT website — no download button on this page.

Loading document …
Page of
Loading page …

Questions and Solutions

प्रश्न 1

माटी का रंग प्रयोग करते हुए किस बात की ओर संकेत किया गया है?
Solution: कवयित्री निर्मला पुतुल 'माटी का रंग' का प्रयोग अपनी मूल पहचान को बनाए रखने की ओर संकेत करने के लिए करती हैं। इस कविता के माध्यम से, वह स्थानीय संथाली लोकजीवन की विशेषताओं को उजागर करती हैं। उनका मानना है कि लोगों को अपनी सादगी, भोलापन, प्रकृति से जुड़ाव और संघर्ष करने की क्षमता को बनाए रखना चाहिए ताकि उनकी संस्कृति जीवंत रह सके।

प्रश्न 2

भाषा में झारखंडीपन से क्या अभिप्राय है?
Solution: भाषा में 'झारखंडीपन' से कवयित्री का अभिप्राय संथाली आदिवासियों की मातृभाषा 'संथाली' की उस स्वाभाविक विशेषता से है, जो उनके दैनिक व्यवहार में झलकती है और उनके राज्य झारखंड की पहचान को दर्शाती है। कवयित्री चाहती हैं कि संथाली लोग अपनी भाषा के इस स्थानीय और स्वाभाविक स्वरूप को बनाए रखें, क्योंकि खड़ी बोली का प्रयोग कभी-कभी बनावटीपन का आभास दे सकता है।

प्रश्न 3

भोलेपन के साथ-साथ अक्खड़पन और जुझारूपन को भी बचाने की आवश्यकता पर क्यों बल दिया गया है?
Solution: कवयित्री ने 'दिल के भोलेपन' में सहजता, सच्चाई और ईमानदारी के भाव को महत्वपूर्ण माना है। हालाँकि, वह यह भी स्पष्ट करती हैं कि केवल भोलापन पर्याप्त नहीं है। भोलेपन का फायदा उठाने वालों के सामने 'अक्खड़पन' दिखाना आवश्यक है, जिसका अर्थ है अपनी बात पर दृढ़ रहना। साथ ही, कर्मों को पूरा करने के लिए 'जुझारूपन', यानी संघर्षशीलता भी ज़रूरी है। इसलिए, इन तीनों विशेषताओं - भोलेपन, अक्खड़पन और जुझारूपन - को बचाए रखने पर बल दिया गया है।

प्रश्न 4

प्रस्तुत कविता आदिवासी समाज की किन बुराइयों की ओर संकेत करती है?
Solution: प्रस्तुत कविता आदिवासी समाज की कुछ ऐसी बुराइयों की ओर संकेत करती है जो शहरी प्रभाव के कारण उत्पन्न हो रही हैं:
  1. आदिवासी समाज अपने स्वाभाविक जीवन को भूलकर शहरी प्रभाव में आता जा रहा है।
  2. उनके जीवन में उत्साह की कमी और काम के प्रति अरुचि बढ़ती जा रही है।
  3. शराबखोरी और आपसी अविश्वास की भावना भी उनमें बढ़ रही है।
  4. अपनी भाषा से अलगाव, अशिक्षा और अपनी परंपराओं को गलत समझने जैसे दुर्गुण भी पनप रहे हैं।

प्रश्न 5

इस दौर में भी बचाने को बहुत कुछ बचा है - से क्या आशय है?
Solution: कवयित्री का आशय है कि आज के इस अविश्वास और भागदौड़ भरे दौर में भी, आपसी विश्वास, उम्मीदें और सपने अभी भी बचाए जा सकते हैं। इन मूल्यों को सामूहिक प्रयासों से संरक्षित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, संथाली समाज अपनी बुराइयों को दूर करके और अपनी भाषा, परिवेश व संस्कृति को शहरी प्रभाव के बावजूद बचाकर अपने वास्तविक स्वरूप को पुनः प्राप्त कर सकता है।

प्रश्न 6.1

निम्नलिखित पंक्तियों के काव्य सौंदर्य को उद्घाटित कीजिए - ठंडी होती दिनचर्या में जीवन की गर्माहट
Solution: इन पंक्तियों के माध्यम से कवयित्री निर्मला पुतुल आदिवासी समाज की दिनचर्या में आई नीरसता और उदासीनता (ठंडक) की ओर संकेत करती हैं। वह इस नीरसता को दूर करने और जीवन में पुनः उमंग, उत्साह और क्रियाशीलता (गर्माहट) लाने की आवश्यकता पर बल देती हैं। ये पंक्तियाँ लाक्षणिक हैं और कम शब्दों में गहरी बात कहती हैं, जिससे कविता में एक प्रकार का गांभीर्य आता है।

प्रश्न 6.2

निम्नलिखित पंक्तियों के काव्य सौंदर्य को उद्घाटित कीजिए - थोड़ा-सा विश्वास, थोड़ी-सी उम्मीद, थोड़े-से सपने, आओ, मिलकर बचाएँ।
Solution: इन पंक्तियों में कवयित्री निर्मला पुतुल यह संदेश देती हैं कि आज के अविश्वास भरे दौर में भी आपसी विश्वास, उम्मीद और सपने बचाए जा सकते हैं, यदि हम सब मिलकर प्रयास करें। 'थोड़ा-सा', 'थोड़ी-सी', 'थोड़े-से' जैसे शब्दों का बार-बार प्रयोग एक लय का निर्माण करता है और बात पर ज़ोर देता है। भाषा में उर्दू, तत्सम और तद्भव शब्दों का मिश्रण होने के बावजूद, यह सहज और सुबोध बनी हुई है, जो कविता के भाव को प्रभावी ढंग से व्यक्त करती है।

प्रश्न 7

बस्तियों को शहर की किस आबो-हवा से बचाने की आवश्यकता है?
Solution: बस्तियों को शहरों के बनावटीपन, भावहीनता, एकाकी जीवन, अलगाव, व्यर्थता और जड़ता जैसी आबो-हवा से बचाने की आवश्यकता है। शहरी वातावरण में वेशभूषा, जीवनशैली और पर्यावरणीय प्रदूषण भी बड़ी समस्याएँ हैं। यदि बस्तियाँ भी इन शहरी प्रभावों को अपना लेंगी, तो उनमें सांस्कृतिक और पर्यावरणीय प्रदूषण फैल जाएगा। कवयित्री इन्हीं नकारात्मक प्रभावों से बस्तियों को बचाना चाहती हैं ताकि उनका स्वाभाविक स्वरूप बना रहे।

प्रश्न 8

आप अपने शहर या बस्ती की किन चीज़ों को बचाना चाहेंगे?
Solution: मैं अपने शहर या बस्ती की स्वाभाविक विशेषताओं जैसे हरे-भरे मैदान, सामूहिक उत्सवों की परंपरा, आपसी मेलजोल और भाईचारे की भावना, तथा स्थानीय कला और संस्कृति को बचाना चाहूँगा। ये चीज़ें हमारे जीवन को समृद्ध बनाती हैं और हमारी पहचान का अभिन्न अंग हैं। इन्हें शहरीकरण के दबाव के बावजूद संरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।

Common mistakes

  • Confusing "झारखंडीपन" with mere regionalism.
  • Underestimating the importance of preserving cultural identity.
  • Failing to recognize the dual nature of innocence and the need for assertiveness.
  • Overlooking the subtle critique of urbanization's negative effects.

Revision tips

  • Focus on understanding the symbolic meanings of key phrases like 'माटी का रंग' and 'झारखंडीपन'.
  • Analyze how the poet contrasts traditional tribal values with modern urban influences.
  • Pay attention to the poet's call for preserving hope, trust, and dreams.
  • Review the explanations for each question to grasp the nuances of the poem's message.

Practice MCQs

Q1. कवयित्री 'माटी का रंग' प्रयोग करके किस बात पर जोर देती हैं?

Q2. भाषा में 'झारखंडीपन' से कवयित्री का क्या अभिप्राय है?

Q3. भोलेपन के साथ-साथ किस गुण को बचाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया गया है?

Q4. कविता में आदिवासी समाज की किस बुराई का संकेत है?

Q5. 'इस दौर में भी बचाने को बहुत कुछ बचा है' - इस पंक्ति का क्या आशय है?

Frequently asked questions

यह NCERT समाधान किस कक्षा और विषय के लिए हैं?

यह NCERT समाधान CBSE कक्षा 11 हिंदी (कोर) के लिए हैं, विशेष रूप से अध्याय 10 'निर्मला पुतुल' पर केंद्रित हैं।

कविता में 'माटी का रंग' का क्या महत्व है?

'माटी का रंग' का प्रयोग कवयित्री अपनी मूल पहचान और स्थानीय संथाली लोकजीवन की विशेषताओं को बनाए रखने के संकेत के रूप में करती हैं।

कवयित्री भाषा में 'झारखंडीपन' को क्यों बचाना चाहती हैं?

कवयित्री चाहती हैं कि संथाली लोग अपनी भाषा की स्वाभाविक विशेषता को नष्ट न करें, क्योंकि यही उनके राज्य झारखंड की पहचान को दर्शाती है।

कविता आदिवासी समाज की किन बुराइयों की ओर संकेत करती है?

कविता शहरी प्रभाव, उत्साह की कमी, काम के प्रति अरुचि, शराबखोरी, अविश्वास, भाषा से अलगाव और परंपराओं को गलत समझने जैसी बुराइयों की ओर संकेत करती है।

कवयित्री 'इस दौर में भी बचाने को बहुत कुछ बचा है' कहकर क्या संदेश देना चाहती हैं?

इसका अर्थ है कि आज के अविश्वास भरे समय में भी आपसी विश्वास, उम्मीद और सपने सामूहिक प्रयासों से बचाए जा सकते हैं, जिससे समाज का वास्तविक स्वरूप बना रहे।

इन समाधानों का उपयोग परीक्षा की तैयारी के लिए कैसे किया जा सकता है?

ये समाधान कविता के मुख्य संदेशों, प्रतीकों और सामाजिक आलोचनाओं को समझने में मदद करते हैं, जिससे छात्र परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का उत्तर प्रभावी ढंग से दे सकते हैं।

Content reviewed by the NCERT Help team. Editorial Team and update policy

NCERT Solutions PDF PDF on NCERT Help. URL unchanged for search indexing.