कक्षा 10 हिंदी NCERT समाधान: सवैया और कवित्त
यह पृष्ठ कक्षा 10 हिंदी के अध्याय 'सवैया और कवित्त' के लिए विस्तृत NCERT समाधान प्रस्तुत करता है। यह अध्याय कवि देव की दो प्रसिद्ध रचनाओं - सवैया और कवित्त - पर केंद्रित है। समाधानों में कवि द्वारा श्री कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन, वसंत ऋतु के परंपरागत चित्रण से भिन्न बाल-रूप का चित्रण, और चाँदनी रात की मनमोहक छटा का विश्लेषण शामिल है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर स्पष्ट, संक्षिप्त और समझने योग्य भाषा में दिया गया है, जिसमें अलंकारों, भाव सौंदर्य और शिल्प सौंदर्य पर विशेष ध्यान दिया गया है। ये समाधान छात्रों को कवि की काव्य शैली, भाषा प्रयोग और भावों को गहराई से समझने में मदद करेंगे, जिससे वे परीक्षा की तैयारी प्रभावी ढंग से कर सकें।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | 3 सवैया और कवित्त |
Chapter summary
कक्षा 10 हिंदी के अध्याय 'सवैया और कवित्त' के ये NCERT समाधान कवि देव की उत्कृष्ट कृतियों का विश्लेषण प्रस्तुत करते हैं। इसमें श्री कृष्ण के रूप-सौंदर्य का वर्णन, वसंत ऋतु के बाल-रूप के रूप में नवीन चित्रण, और चाँदनी रात की मनमोहक छवि का विस्तृत अध्ययन शामिल है। समाधानों में अलंकारों, भावों और भाषा की बारीकियों पर प्रकाश डाला गया है, जो छात्रों को कवि की काव्य-कला को समझने में सहायक हैं।
Learning outcomes
- कवि देव द्वारा श्री कृष्ण के सौंदर्य का वर्णन समझना।
- वसंत ऋतु के परंपरागत चित्रण से भिन्न बाल-रूप के चित्रण को पहचानना।
- चाँदनी रात की सुंदरता के लिए प्रयुक्त उपमानों का विश्लेषण करना।
- अनुप्रास, रूपक और व्यतिरेक जैसे अलंकारों की पहचान और उनका काव्य में प्रयोग समझना।
- कवि देव की ब्रजभाषा और काव्य-शैली की विशेषताओं को जानना।
Topics covered
Paper topics
- श्री कृष्ण का सौंदर्य चित्रण
- वसंत ऋतु का बाल-रूप चित्रण
- चाँदनी रात का सौंदर्य
- अनुप्रास अलंकार
- रूपक अलंकार
- व्यतिरेक अलंकार
- भाव सौंदर्य
- शिल्प सौंदर्य
- ब्रजभाषा का प्रयोग
- रीतिकालीन काव्य
- कवि देव की काव्य विशेषताएँ
- सवैया और कवित्त छंद
Important topics
- श्री कृष्ण का वर्णन
- वसंत का परंपरागत चित्रण से भिन्न वर्णन
- चाँदनी रात के उपमान
- अलंकारों की पहचान (अनुप्रास, रूपक, व्यतिरेक)
- कवि देव की काव्यगत विशेषताएँ
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
प्रश्न 2
पहले सवैया में अनुप्रास अलंकार का प्रयोग निम्नलिखित पंक्तियों में हुआ है:
- 'पाँयनि नूपुर मंजू बजैं, किट किंकिनि के धुनि की मधुराई।' (यहाँ 'प', 'न', 'क', 'ट', 'ध', 'म' वर्णों की आवृत्ति है)
- 'साँवरे अंग लसे पट पीत, हिये हुलसै बनमाल सुहाई।' (यहाँ 'स', 'ल', 'प', 'ह', 'व' वर्णों की आवृत्ति है)
रूपक अलंकार का प्रयोग निम्नलिखित पंक्तियों में हुआ है:
- 'मद हैंसी मुखचंद जुंहाई, जय जग-मंदिर-दीपक स्न्दर।' (यहाँ मुख को 'चंद्र' और संसार को 'मंदिर' तथा श्री कृष्ण को 'दीपक' कहकर रूपक अलंकार का प्रयोग किया गया है।)
प्रश्न 3
भाव सौंदर्य: इन पंक्तियों में कवि देव ने श्री कृष्ण के मनमोहक रूप का अत्यंत सजीव चित्रण किया है। उनके पैरों में बंधी पैजनियों (नूपुर) की मधुर ध्वनि और कमर में बंधी करधनी (किंकिनि) की ध्वनि की मधुरता का वर्णन किया गया है। श्री कृष्ण के साँवले शरीर पर पीले वस्त्र बहुत सुंदर लग रहे हैं। उनके हृदय में विराजमान वनमाला भी अत्यंत सुशोभित हो रही है और आनंदित है। यह चित्रण अत्यंत भावपूर्ण है।
शिल्प सौंदर्य: कवि देव ने इस पद में शुद्ध साहित्यिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जो अत्यंत मधुर और प्रवाहमयी है। यहाँ श्रृंगार रस की प्रधानता है। 'पाँयनि नूपुर', 'किट किंकिनि', 'साँवरे अंग', 'पट पीत', 'हिये हुलसे', 'बनमाल सुहाई' जैसे वाक्यांशों में अनुप्रास अलंकार का सुंदर प्रयोग हुआ है। रीतिकालीन काव्य की विशेषता के अनुसार यहाँ सौंदर्य-चित्रण पर विशेष बल दिया गया है।
प्रश्न 4
दूसरे कवित्त में कवि देव ने ऋतुराज वसंत के बाल-रूप का वर्णन परंपरागत वसंत वर्णन से बिल्कुल भिन्न तरीके से किया है। परंपरागत रूप से, वसंत को कामदेव का रूप मानकर उसका मादक और उन्मादक चित्रण किया जाता था, जिसमें प्रकृति के सभी तत्व कामदेव की मादकता से प्रभावित दिखते थे। नायक-नायिका के मिलन, झूले झूलने आदि का वर्णन होता था।
इसके विपरीत, कवि देव ने वसंत को कामदेव का पुत्र न मानकर, एक छोटे बालक राजकुमार के रूप में चित्रित किया है। यहाँ प्रकृति को ममतामयी माँ के रूप में दर्शाया गया है, जो इस बालक वसंत का लालन-पालन कर रही है। सभी प्राकृतिक उपादान जैसे फूल, हवा आदि इस बालक वसंत के खेल-खिलौनों और सेवा में सहायक बने हुए हैं। इस प्रकार, देव ने वसंत के परंपरागत वर्णन की रूढ़ियों को तोड़कर उसे एक नवीन, वात्सल्यपूर्ण और अनूठे रूप में प्रस्तुत किया है।
प्रश्न 5
प्रश्न 6
- उन्होंने आकाश में फैली चाँदनी को स्फटिक (क्रिस्टल) जैसी निर्मल शिला से निकलने वाली दुधिया रोशनी के समान माना है, जो पूरे संसार रूपी मंदिर पर छाई हुई है।
- उन्हें ऐसा प्रतीत होता है मानो धरती पर दही का अथाह समुद्र हिलोरे ले रहा हो।
- चाँदनी की रंगत को फ़र्श पर फैले दूध के झाग के समान बताया है।
- उसकी स्वच्छता और कोमलता को दूध के बुलबुले के समान झीना और पारदर्शी कहा है।
प्रश्न 7
भाव: इस पंक्ति का भाव यह है कि कवि को आकाश में चमकता हुआ चंद्रमा प्यारी राधिका के प्रतिबिंब के समान प्रतीत हो रहा है। कवि कल्पना करता है कि आकाश एक दर्पण है और उसमें चंद्रमा का बिम्ब राधिका के सौंदर्य का प्रतिबिंब है। यह पंक्ति चाँदनी रात में चंद्रमा की दिव्य और मनमोहक छवि को दर्शाती है।
अलंकार: इस पंक्ति में 'व्यतिरेक अलंकार' है। व्यतिरेक अलंकार में उपमेय (यहाँ चंद्रमा) को उपान (यहाँ राधिका) से हीन या कमतर दिखाया जाता है, जबकि उपमा में उपमेय को उपान के समान बताया जाता है। यहाँ चंद्रमा को राधिका के प्रतिबिंब के समान बताकर, अप्रत्यक्ष रूप से राधिका के सौंदर्य को चंद्रमा से श्रेष्ठतर दर्शाया गया है, इसलिए यह व्यतिरेक अलंकार है, उपमा नहीं।
प्रश्न 8
- स्फटिक (क्रिस्टल) शिला से निर्मित मंदिर
- दही का समुद्र
- दूध का झाग (बुलबुला)
- मोतियों की चमक
- दर्पण की स्वच्छता
प्रश्न 9
- ब्रजभाषा पर अधिकार: देव ब्रजभाषा के सिद्धहस्त कवि थे। उनकी भाषा अत्यंत मधुर, कोमल और माधुर्य गुण से परिपूर्ण है।
- छंदों का प्रयोग: उन्होंने कवित्त और सवैया जैसे छंदों का कुशलतापूर्वक प्रयोग किया है।
- प्रकृति चित्रण: देव ने प्रकृति के चित्रण को विशेष महत्व दिया है। उनका प्रकृति वर्णन सजीव और कल्पनाशील है।
- अलंकारों का सहज प्रयोग: वे अनुप्रास, उपमा, रूपक आदि अलंकारों का प्रयोग अत्यंत सहज और स्वाभाविक रूप से करते हैं।
- अपारम्परिकता: देव की सबसे बड़ी विशेषता उनकी अपारम्परिकता है। उन्होंने परंपरागत वर्णन शैलियों को तोड़कर नवीनता का समावेश किया है, जैसे वसंत को बालक रूप में चित्रित करना।
- सौंदर्य-चित्रण: उनकी कविताओं में श्रृंगार रस और सौंदर्य-चित्रण की प्रचुरता है, जो रीतिकालीन काव्य की प्रमुख विशेषता है।
Common mistakes
- अलंकारों की पहचान में भ्रम (जैसे उपमा और व्यतिरेक में अंतर)।
- काव्य पंक्तियों के भावार्थ को सतही तौर पर समझना।
- परंपरागत वर्णन और कवि देव के नवीन चित्रण के बीच अंतर न कर पाना।
Revision tips
- प्रत्येक सवैया और कवित्त के केंद्रीय भाव को समझने पर ध्यान केंद्रित करें।
- कवि द्वारा प्रयुक्त अलंकारों और उनके उदाहरणों को याद करें।
- कवि देव की भाषा-शैली और प्रकृति चित्रण की विशेषताओं को रेखांकित करें।
- प्रश्न-उत्तरों को अपनी भाषा में लिखने का अभ्यास करें।
Practice MCQs
Q1. कवि देव ने 'श्रीबन्नदूलह' किसके लिए प्रयोग किया है?
Explanation: कवि देव ने 'श्रीबन्नदूलह' शब्द का प्रयोग श्री कृष्ण भगवान के लिए किया है, उन्हें संसार रूपी मंदिर का दीपक बताया है।
Q2. पहले सवैया में अनुप्रास अलंकार का उदाहरण कौन सी पंक्ति है?
Explanation: पंक्ति 'पाँयनि नूपुर मंजू बजैं, किट किंकिनि के धुनि की मधुराई।' में 'क' और 'प' वर्णों की आवृत्ति के कारण अनुप्रास अलंकार है।
Q3. कवि देव ने ऋतुराज वसंत को परंपरागत रूप से क्या मानकर भिन्न चित्रित किया है?
Explanation: कवि देव ने वसंत को कामदेव का पुत्र न मानकर, एक बालक राजकुमार के रूप में चित्रित किया है, जो परंपरागत वर्णन से भिन्न है।
Q4. चाँदनी रात की उज्ज्वलता का वर्णन करने के लिए कवि देव ने किसका उपमान प्रयोग किया है?
Explanation: कवि देव ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता को दर्शाने के लिए स्फटिक शिला, दही के समुद्र, दूध के झाग जैसे कई उपमानों का प्रयोग किया है।
Q5. 'प्यारी राधिका को प्रतिबिंब सो लगत चंद' पंक्ति में कौन सा अलंकार है?
Explanation: इस पंक्ति में चाँद को राधिका के प्रतिबिंब के समान बताया गया है, जहाँ उपमेय (चंद्रमा) को उपान (राधिका) से हीन दिखाया गया है, इसलिए व्यतिरेक अलंकार है।
Frequently asked questions
कक्षा 10 हिंदी के अध्याय 'सवैया और कवित्त' में मुख्य रूप से किन कवियों की रचनाएँ शामिल हैं?
इस अध्याय में मुख्य रूप से कवि देव की रचनाएँ - सवैया और कवित्त - शामिल हैं।
कवि देव ने श्री कृष्ण को 'संसार रूपी मंदिर दीपक' क्यों कहा है?
कवि देव ने श्री कृष्ण को संसार रूपी मंदिर का दीपक इसलिए कहा है क्योंकि वे इस संसार में ईश्वरीय प्रकाश और पवित्रता का संचार करते हैं, जिससे यह संसार प्रकाशित होता है।
वसंत ऋतु के वर्णन में कवि देव ने परंपरागत चित्रण से क्या भिन्नता दिखाई है?
परंपरागत कवियों ने वसंत को कामदेव के रूप में चित्रित किया, जबकि देव ने उसे एक बालक राजकुमार के रूप में चित्रित किया है, जिसकी माँ प्रकृति है।
चाँदनी रात के वर्णन में कवि देव ने किन उपमानों का प्रयोग किया है?
कवि देव ने चाँदनी रात की उज्ज्वलता के लिए स्फटिक शिला, दही का समुद्र, दूध का झाग, मोतियों की चमक और दर्पण की स्वच्छता जैसे उपमानों का प्रयोग किया है।
क्या ये समाधान कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए उपयोगी हैं?
हाँ, ये समाधान कक्षा 10 की बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए अत्यंत उपयोगी हैं क्योंकि ये विस्तृत, स्पष्ट और परीक्षा-उन्मुख हैं।
इन समाधानों से छात्रों को क्या सीखने को मिलेगा?
छात्र कवि देव की काव्य-शैली, अलंकारों के प्रयोग, भाव सौंदर्य और प्रकृति चित्रण की बारीकियों को गहराई से समझ पाएंगे।
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