CBSE Class 10 Hindi NCERT Solutions: स्पर्श पाठ-४ प्रहलाद अग्रवाल

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CBSE कक्षा 10 हिंदी (पाठ्यक्रम बी) के लिए यह खंड 'प्रहलाद अग्रवाल' नामक अध्याय 13 पर केंद्रित विस्तृत एनसीईआरटी समाधान प्रस्तुत करता है। ये समाधान 'तीसरी कसम' नामक फिल्म के विश्लेषण में गहराई से उतरते हैं, यह समझाते हुए कि इसे 'सेल्यूलाइड पर लिखी कविता' क्यों कहा गया, वितरकों को खोजने में इसे किन चुनौतियों का सामना करना पड़ा, और इसके निर्माण के पीछे की कलात्मक दृष्टि क्या थी। यह एक कलाकार की भूमिका और जिम्मेदारियों, फिल्मों में दुखद स्थितियों के महिमामंडन, और फिल्म निर्माताओं तथा गीतकारों के बीच सहजीवी संबंध की भी पड़ताल करता है, जिसमें राज कपूर और शैलेन्द्र प्रमुख उदाहरण हैं। समाधान आगे चलकर सिनेमा में 'शोमैन' की अवधारणा और फिल्म रूपांतरणों की साहित्यिक अखंडता पर भी चर्चा करते हैं। ये समाधान छात्रों को फिल्म आलोचना, कलात्मक अभिव्यक्ति और सिनेमा के सांस्कृतिक महत्व की बारीकियों को समझने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जिससे उनकी परीक्षा की तैयारी में सहायता मिलेगी।

Quick info

BoardCBSE
ClassClass 10
Subjectहिंदी
Session2026
LanguageHindi
TypeNCERT Solutions
Chapter13. प्रहलाद अग्रवाल

Chapter summary

This chapter's NCERT Solutions for Class 10 Hindi (Course B) focus on the film 'Teesri Kasam' and the artistic contributions of Shailendra. It covers the reasons behind the film's unique poetic quality, its distribution challenges, and the philosophical aspects of filmmaking and artistry. Students will learn about the responsibilities of artists towards audience taste, the portrayal of tragedy in cinema, and the collaborative spirit in filmmaking, particularly highlighting the relationship between Raj Kapoor and Shailendra.

Learning outcomes

  • Understand the reasons for calling 'Teesri Kasam' a 'poem written on celluloid'.
  • Analyze the challenges faced by artistic films in the distribution market.
  • Explain the artist's duty towards refining audience taste.
  • Discuss the portrayal and glorification of tragic situations in films.
  • Comprehend the synergy between a director's vision and a lyricist's words.
  • Define the term 'showman' in the context of cinema.
  • Evaluate how films can uphold literary integrity.
  • Identify the characteristics of Shailendra's songs and filmmaking.

Topics covered

Paper topics

  • Analysis of the film 'Teesri Kasam'
  • Poetic qualities in cinema
  • Film distribution challenges
  • The role and responsibility of an artist
  • Audience taste and refinement
  • Portrayal of tragedy in films
  • Artistic integrity in film adaptation
  • The concept of a 'showman'
  • Shailendra's contribution as a lyricist and filmmaker
  • Raj Kapoor's persona
  • Literary and cinematic expression
  • Emotional depth in storytelling

Important topics

  • Understanding 'Teesri Kasam' as a poetic film
  • Artist's duty towards audience
  • Commercial vs. artistic filmmaking
  • The 'showman' concept
  • Literary justice in film adaptations
  • Shailendra's lyrical and directorial approach

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Questions and Solutions

प्रश्न 1

'तीसरी कसम' फ़िल्म को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' क्यों कहा गया है?
Solution: 'तीसरी कसम' फ़िल्म को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' इसलिए कहा गया है क्योंकि यह फ़िल्म एक कवि की कोमल और संवेदनशील भावनाओं को पर्दे पर उतारती है। इसमें एक काव्यात्मक अनुभूति, गहरी संवेदना और भावुकता है, जो इसे एक चलती-फिरती कविता का अनुभव कराती है।

प्रश्न 2

'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?
Solution: 'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार इसलिए नहीं मिल रहे थे क्योंकि यह एक सामान्य, मसालेदार मनोरंजक फ़िल्म न होकर एक उच्च कोटि की साहित्यिक और कलात्मक फ़िल्म थी। इसमें व्यावसायिक सफलता के लिए आवश्यक अनावश्यक तत्व नहीं थे। फ़िल्म वितरक इसकी करुणा और कलात्मकता को व्यावसायिक लाभ के पैमाने पर तौल रहे थे और कोई भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं था।

प्रश्न 3

शैलेंद्र के अनुसार कलाकार का कर्तव्य क्या है?
Solution: शैलेंद्र के अनुसार, प्रत्येक कलाकार का यह परम कर्तव्य है कि वह दर्शकों की रुचि और समझ को परिष्कृत करने का प्रयास करे। कलाकार को दर्शकों की पसंद का अनुकरण करके सस्ता और उथला मनोरंजन परोसने के बजाय, उन्हें उच्च स्तरीय कला का अनुभव कराना चाहिए।

प्रश्न 4

फिल्‍मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन ग्‍लोरिफाई क्‍यों कर दिया जाता है?
Solution: फिल्मों में त्रासद स्थितियों का चित्रांकन अक्सर इसलिए ग्लोरिफाई ( महिमामंडित) कर दिया जाता है ताकि दर्शकों की भावनाओं को गहराई से छुआ जा सके और उन्हें फिल्म से भावनात्मक रूप से जोड़ा जा सके। वास्तविकता को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत करने से फिल्म अधिक नाटकीय और आकर्षक बन जाती है, जिससे दर्शकों का भावनात्मक शोषण हो सकता है और फिल्म की व्यावसायिक बिक्री बढ़ सकती है।

प्रश्न 5

'शैलेंद्र ने राजकपूर की भावनाओं को शब्‍द दिए हैं' - इस कथन से आप क्‍या समझते हैं? स्‍पष्‍ट कीजिए।
Solution: इस कथन का अर्थ है कि राजकपूर, जो अपनी आँखों से बहुत कुछ कह जाते थे और अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में माहिर थे, उनकी उन अनकही भावनाओं और विचारों को गीतकार शैलेंद्र ने अपने गीतों के माध्यम से सुंदर शब्दों में पिरोया। राजकपूर जो अपनी फिल्मों के माध्यम से कहना चाहते थे, शैलेंद्र के गीत उसे स्पष्ट अभिव्यक्ति प्रदान करते थे।

प्रश्न 6

लेखक ने राजकपूर को एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है। शोमैन से आप क्‍या समझते हैं?
Solution: 'शोमैन' उस व्यक्ति को कहा जाता है जो अपने जीवनकाल में ही एक किंवदंती बन चुका हो। उसका नाम इतना प्रसिद्ध और प्रभावशाली हो कि केवल उसके नाम से ही फिल्में बिक जाएं और दर्शक सिनेमाघर तक खिंचे चले आएं। राजकपूर अपनी फिल्मों और अपने व्यक्तित्व के बल पर इस मापदंड पर खरे उतरते थे, इसलिए लेखक ने उन्हें एशिया का सबसे बड़ा शोमैन कहा है।

प्रश्न 7

फ़िल्म 'तीसरी कसम' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर संगीतकार जयकिशन ने आपत्ति क्यों की?
Solution: संगीतकार जयकिशन ने फ़िल्म 'श्री 420' के गीत 'रातों दसों दिशाओं से कहेंगी अपनी कहानियाँ' पर आपत्ति इसलिए जताई क्योंकि उनका मानना था कि साहित्यिक सोच और आम जनमानस की सोच में अंतर होता है। जहाँ गीतकार 'दस दिशाओं' की बात कर रहा था, वहीं आम दर्शक केवल चार दिशाओं से परिचित होता है। जयकिशन को डर था कि इससे गीतकार और श्रोता के बीच संवाद का अभाव हो सकता है। हालाँकि, बाद में यह गीत बहुत लोकप्रिय हुआ।

प्रश्न 8

राजकपूर द्वारा फ़िल्म की असफलता के खतरों से आगाह करने पर भी शैलेंद्र ने यह फ़िल्म क्यों बनाई?
Solution: राजकपूर जैसे अनुभवी निर्माता-निर्देशक द्वारा आगाह किए जाने के बावजूद शैलेंद्र ने 'तीसरी कसम' फ़िल्म इसलिए बनाई क्योंकि उनकी प्राथमिकता धन या सम्मान कमाना नहीं थी। वे अपनी कलात्मक संतुष्टि, मन की भावनाओं की अभिव्यक्ति और दर्शकों के हृदय को छूना चाहते थे। उन्होंने लाभ-हानि के व्यावसायिक समीकरणों से ऊपर उठकर, अपने कलाकार मन के साथ समझौता न करते हुए इस फ़िल्म का निर्माण किया।

प्रश्न 9

'तीसरी कसम' में राजकपूर का महिमामय व्यक्तित्व किस तरह हीरामन की आत्मा में उतर गया है? स्पष्ट कीजिए।
Solution: 'तीसरी कसम' में राजकपूर ने हीरामन का किरदार इतनी गहराई से निभाया कि वे उस पात्र में पूरी तरह समा गए, लेकिन उन्होंने अपने अभिनय से हीरामन के मूल स्वरूप को हावी नहीं होने दिया। यह एक कलाकार की महान उपलब्धि है। राजकपूर ने हीरामन के भोलेपन, हीराबाई के प्रति उसके स्नेह, उसकी उपेक्षा पर आत्म-संघर्ष और दिल की बात समझने की क्षमता को बड़ी कुशलता से प्रस्तुत किया, जो सीधे आत्मा को छूता है।

प्रश्न 10

लेखक ने ऐसा क्‍यों लिखा है कि 'तीसरी कसम' ने साहित्‍य-रचना के साथ शत-प्रतिशत न्‍याय किया है?
Solution: लेखक ने ऐसा इसलिए लिखा है क्योंकि 'तीसरी कसम' फ़िल्म मूल रूप से फणीश्वर नाथ 'रेणु' की कहानी पर आधारित थी और इसकी पटकथा स्वयं रेणु जी ने लिखी थी। फ़िल्म बनाते समय कहानी के मूल भाव, उसकी आत्मा और संवेदनशीलता के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई। इसमें दर्शकों को आकर्षित करने के लिए कोई अनावश्यक या काल्पनिक मनोरंजन नहीं जोड़ा गया। फ़िल्म को उसी रूप में प्रस्तुत किया गया जैसा मूल कहानी में था, इसलिए इसने साहित्य के साथ पूरा न्याय किया।

प्रश्न 11

शैलेंद्र के गीतों की क्‍या विशेषताएँ हैं? अपने शब्‍दों में लिखिए।
Solution: शैलेंद्र एक अत्यंत भावनात्मक और आदर्शवादी कवि थे। उनकी गीतों की मुख्य विशेषताएँ हैं: सरलता, सहजता, गहरा संदेश और श्रोताओं के मन को छूने की क्षमता। उनके गीतों में जहाँ एक ओर गहरी भावनाएँ होती थीं, वहीं दूसरी ओर वे आम आदमी के जीवन और उसकी भाषा से भी जुड़े होते थे। उनका सीधा और सरल व्यक्तित्व उनकी गीत रचनाओं में भी झलकता था, जो उन्हें कठिनता से कोसों दूर रखता था।

प्रश्न 12

फ़िल्म निर्माता के रूप में शैलेंद्र की विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।
Solution: 'तीसरी कसम' शैलेंद्र की निर्माता के रूप में पहली और एकमात्र फ़िल्म थी। निर्माता के तौर पर उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उन्होंने यह फ़िल्म बिना किसी व्यावसायिक लाभ या प्रसिद्धि की लालसा के, केवल अपनी आत्म-संतुष्टि के लिए बनाई थी। उनके सीधे-सादे और आदर्शवादी व्यक्तित्व की झलक फ़िल्म के मुख्य पात्र हीरामन के चरित्र में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने फ़िल्म निर्माण से जुड़े जोखिमों को जानते हुए भी एक शुद्ध कलात्मक कृति का निर्माण किया।

Common mistakes

  • Confusing artistic merit with commercial viability.
  • Underestimating the impact of audience taste on film reception.
  • Failing to recognize the deeper meaning behind artistic choices in films.
  • Misinterpreting the role of a 'showman' as mere showmanship.

Revision tips

  • Focus on understanding the specific reasons given for 'Teesri Kasam' being called poetic.
  • Pay attention to the distinction between artistic films and commercial entertainers.
  • Analyze the examples of Raj Kapoor and Shailendra to grasp the artist-filmmaker relationship.
  • Consider the ethical implications of portraying and glorifying tragedy in films.
  • Revisit the definition and characteristics of a 'showman' as described in the text.

Practice MCQs

Q1. 'तीसरी कसम' फ़िल्म को 'सैल्यूलाइड पर लिखी कविता' क्यों कहा गया?

Q2. 'तीसरी कसम' फ़िल्म को खरीददार क्यों नहीं मिल रहे थे?

Q3. शैलेंद्र के अनुसार कलाकार का मुख्य कर्तव्य क्या है?

Q4. राजकपूर को 'एशिया का सबसे बड़ा शोमैन' क्यों कहा गया?

Q5. संगीतकार जयकिशन ने 'दस दिशाओं' वाले गीत पर आपत्ति क्यों जताई?

Frequently asked questions

What is the main focus of these NCERT Solutions for Class 10 Hindi?

These solutions focus on Chapter 13, "Prahlad Agarwal," primarily analyzing the film 'Teesri Kasam,' its artistic significance, and the contributions of its creators like Shailendra and Raj Kapoor.

Why was 'Teesri Kasam' considered a 'poem written on celluloid'?

It was called so because the film presented the delicate emotions of a poet through its narrative, possessing a poetic sensibility and emotional depth that resonated like poetry.

What challenges did 'Teesri Kasam' face in the film industry?

The film struggled to find buyers because it was a high-quality literary film, lacking the typical commercial 'masala' elements that distributors sought, and they were hesitant to take risks on its artistic merit.

What does the chapter say about an artist's responsibility?

According to Shailendra, an artist's responsibility is to try and refine the audience's taste rather than pandering to low standards by offering cheap entertainment.

Who is a 'showman' in the context of cinema?

A 'showman' is someone who has become a legend in their own lifetime, whose name alone can sell films and draw audiences to theaters, like Raj Kapoor was described.

How did Shailendra ensure literary justice with 'Teesri Kasam'?

Shailendra made the film based on Phanishwar Nath 'Renu's story without altering its original essence or forcing commercial entertainment, thus staying true to the literary work.

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