CBSE Class 10 Hindi Sparsh II: Chapter 6 - मधुर-मधुर मेरे दीपक जल NCERT Solutions
CBSE Class 10 हिंदी के स्पर्श II पाठ्यपुस्तक के अध्याय 6, 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल' के लिए विस्तृत NCERT समाधान यहाँ दिए गए हैं। ये समाधान 'दीपक' और 'प्रियतम' के प्रतीकात्मक अर्थों की गहराई में जाते हैं, जो क्रमशः आस्था, आत्मा और ईश्वर का प्रतिनिधित्व करते हैं। छात्र कवि की दीपक को जलते रहने की विनती, 'विश्व-शलभ' की लौ में भस्म होने की इच्छा, और कविता की सुंदरता को बढ़ाने वाले दोहराए जाने वाले वाक्यांशों और बिम्बों के महत्व को समझेंगे। समाधान कवि के अपने प्रियतम, ईश्वर के मार्ग को रोशन करने के इरादे की भी पड़ताल करते हैं, और तारों के प्रति कवि की धारणा तथा शलभ के विलाप का विश्लेषण करते हैं। ये समाधान छात्रों को कविता की बारीकियों को समझने, उसके गहरे अर्थों को आत्मसात करने और जटिल काव्यात्मक तत्वों और विषयों को स्पष्ट करके अपनी परीक्षाओं की प्रभावी ढंग से तैयारी करने में मदद करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
Quick info
| Board | CBSE |
|---|---|
| Class | Class 10 |
| Subject | हिंदी |
| Session | 2026 |
| Language | Hindi |
| Type | NCERT Solutions |
| Chapter | Chapter 6 |
Chapter summary
NCERT Solutions for CBSE Class 10 Hindi Sparsh II, Chapter 6, 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल', focuses on understanding the poem's core themes. It explains the symbolism of the lamp and the beloved, the poet's earnest requests to the lamp, and the philosophical concept of self-immolation for a greater purpose. The solutions also analyze the poem's aesthetic elements, such as the use of repetition and imagery, and interpret specific verses to clarify the poet's message about devotion and spiritual enlightenment.
Learning outcomes
- Understand the symbolic meaning of the 'deepak' and 'priyatam' in the poem.
- Analyze the poet's plea for continuous devotion and illumination.
- Explain the concept of self-sacrifice and merging with the divine.
- Identify and appreciate the use of imagery and repetition in the poem.
- Interpret the poet's feelings towards the stars and the moth's existential dilemma.
- Grasp the central message of spiritual longing and enlightenment.
Topics covered
Paper topics
- Symbolism of Deepak and Priyatam
- Poet's plea for continuous devotion
- Concept of self-sacrifice and spiritual merging
- Imagery and visual representation in poetry
- Use of repetition for poetic effect
- Analysis of poetic verses
- Themes of faith and divine love
- Interpretation of existential dilemmas (Vishva-shalabh, Patanga)
- Poetic language and expression
- Spiritual enlightenment
Important topics
- Symbolism of Deepak and Priyatam
- The plea for continuous burning and its spiritual significance
- The concept of self-immolation for divine union
- Analysis of poetic devices: imagery and repetition
- The poet's spiritual journey and longing
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Questions and Solutions
प्रश्न 1
इस कविता में, 'दीपक' ईश्वर के प्रति गहरी आस्था, आत्मा की पवित्रता और ज्ञान के प्रकाश का प्रतीक है। 'प्रियतम' उस परम आराध्य ईश्वर का प्रतीक है, जिसकी प्राप्ति के लिए कवियत्री अपने जीवन को समर्पित कर रही हैं। दीपक का जलना आत्मा के जागृत और प्रकाशित होने का सूचक है, जो प्रियतम (ईश्वर) तक पहुँचने का मार्ग प्रशस्त करता है।
प्रश्न 2
कवियत्री महादेवी वर्मा दीपक से निरंतर जलते रहने का आग्रह कर रही हैं। इसका कारण यह है कि वे ईश्वर को अपने जीवन का सर्वोपरि लक्ष्य मानती हैं और चाहती हैं कि उनका आत्म-दीपक कभी बुझे नहीं। यह निरंतर जलता हुआ दीपक उनके प्रियतम (ईश्वर) के पथ को आलोकित करता रहेगा, जिससे उन्हें ईश्वर की प्राप्ति का मार्ग स्पष्ट दिखेगा। यह आग्रह आध्यात्मिक साधना में निरंतरता और अटूट विश्वास को दर्शाता है।
प्रश्न 3
विश्व-शलभ (संसार का पतंगा) दीपक के साथ जलकर अपने अस्तित्व को विलीन कर प्रकाशमय होना चाहता है। यह इच्छा केवल विनाश की नहीं, बल्कि एक उच्चतर उद्देश्य की पूर्ति की है। जिस प्रकार दीपक स्वयं जलकर संसार को प्रकाश और ऊर्जा देता है, उसी प्रकार विश्व-शलभ भी उस दिव्य प्रकाश में स्वयं को समर्पित करके, जनहित या ईश्वर में विलीन होकर एक सार्थक अस्तित्व प्राप्त करना चाहता है। यह स्वयं को मिटाकर ईश्वर में एकाकार होने की गहरी आध्यात्मिक अभिलाषा को दर्शाता है।
प्रश्न 4
इस कविता का सौंदर्य मुख्य रूप से शब्दों की पुनरावृत्ति (आवृति) और सफल बिंब अंकन, दोनों पर ही निर्भर करता है।
- शब्दों की आवृति: 'मधुर-मधुर', 'युग-युग', 'सिहर-सिहर', 'विहँस-विहँस' जैसे शब्दों का बार-बार प्रयोग कविता को एक विशेष लय, संगीतात्मकता और प्रवाह प्रदान करता है। यह पुनरावृत्ति भावों की गहनता को भी बढ़ाती है।
- बिंब अंकन: कविता में बिंबों का प्रयोग अत्यंत प्रभावशाली है। उदाहरण के लिए, 'विश्व-शलभ सिर धुन कहता, मृदुल मोम सा घुल रे मृदु तन' जैसे बिंब पाठक के मन में एक स्पष्ट चित्र उकेरते हैं और कविता के भावों को गहराई से महसूस कराते हैं।
प्रश्न 5
कवियत्री अपने प्रियतम का पथ आलोकित करना चाह रही हैं। इस कविता के संदर्भ में, उनका प्रियतम ईश्वर है। वह चाहती हैं कि उनका आत्म-दीपक निरंतर जलता रहे ताकि ईश्वर रूपी प्रियतम के आगमन का मार्ग प्रकाशित हो सके और वे अपने प्रियतम से मिल सकें।
प्रश्न 6
कवियत्री को आकाश के तारे स्नेहहीन इसलिए प्रतीत हो रहे हैं क्योंकि उनका प्रकाश क्षीण हो गया है और वे अपनी चमक खो चुके हैं। उनमें आपसी प्रेम या जुड़ाव का भाव भी समाप्त हो गया है। यह स्थिति कवियत्री की अपनी आध्यात्मिक अवस्था या संसार की निष्ठुरता के प्रति उनकी भावना को भी प्रतिबिंबित कर सकती है, जहाँ उन्हें प्रेम और स्नेह का अभाव महसूस होता है।
प्रश्न 7
पतंगा अपने क्षोभ (दुःख या पश्चाताप) को सिर धुनकर व्यक्त कर रहा है। वह इस बात पर विचार कर रहा है कि काश वह भी दीपक की लौ के साथ जलकर उस दिव्य प्रकाश में विलीन हो गया होता। यह अभिव्यक्ति उसकी अधूरी इच्छा और उस क्षणिक सुख या ज्ञान की प्राप्ति के लिए उसकी तड़प को दर्शाती है जो उसे दीपक की लौ में प्राप्त हो सकता था।
प्रश्न 8
कवियत्री दीपक को विभिन्न भावों और अवस्थाओं में जलने के लिए कहती हैं ताकि यह दर्शाया जा सके कि आध्यात्मिक साधना में हर प्रकार की भावनाएं और स्थितियां महत्वपूर्ण हैं।
- मधुर-मधुर: प्रेम और मिठास के साथ जलना।
- पुलक-पुलक: आनंद और उत्साह से भरकर जलना।
- सिहर-सिहर: प्रभु के स्मरण में पुलकित होकर, एक विशेष अनुभूति के साथ कांपते हुए जलना।
- विहँस-विहँस: प्रसन्नता और उल्लास के साथ जलना।
प्रश्न 9
(क) स्नेहहीन दीपक से तात्पर्य:
कवियत्री का 'स्नेहहीन दीपक' से तात्पर्य उन लोगों या आत्माओं से है जिनमें प्रेम, करुणा या ईश्वर के प्रति भक्ति का भाव समाप्त हो गया है। ये ऐसे दीपक हैं जो जल तो रहे हैं (अर्थात जीवन जी रहे हैं) पर उनमें वह आंतरिक प्रकाश या स्नेह नहीं है जो दूसरों को प्रकाशित कर सके या स्वयं को सार्थक बना सके। यह संसार की निष्ठुरता या आध्यात्मिक शून्यता का प्रतीक हो सकता है।
(ख) सागर को जलमय कहने का अभिप्राय और हृदय का जलना:
कवियत्री ने सागर को 'जलमय' कहा है, जिसका अर्थ है पानी से भरपूर। यहाँ 'जलमय' का अभिप्राय संसार की व्यापकता और उसमें व्याप्त सांसारिकता से भी है। सागर में अथाह जल होने के बावजूद वह प्यास नहीं बुझा सकता, उसी प्रकार संसार में बहुत कुछ होते हुए भी यदि उसमें ईश्वर भक्ति या प्रेम न हो तो वह व्यर्थ है। सागर का हृदय 'जलता' है क्योंकि वह अपनी विशालता और जलराशि के बावजूद किसी की प्यास नहीं बुझा पा रहा है, या शायद वह भी उस प्रेम और स्नेह की कमी महसूस कर रहा है जो उसे सार्थक बना सके। यह संसार की उस स्थिति को दर्शाता है जहाँ भौतिकता तो बहुत है पर आत्मिक शांति या प्रेम का अभाव है।
(ग) बादलों की विशेषता:
पंक्तियों में बादलों की विशेषता यह बताई गई है कि वे विद्युत (बिजली) लेकर घिरते हैं। इसका अर्थ है कि बादल वर्षा लाने के लिए आते हैं, और वर्षा अक्सर बिजली की कड़क के साथ होती है। यह बादलों की शक्ति और प्रकृति के उस रूप को दर्शाता है जो जीवनदायी होने के साथ-साथ विनाशकारी भी हो सकता है, या यह केवल वर्षा ऋतु के आगमन का एक स्वाभाविक चित्रण है।
(घ) कवियत्री का दीपक को विहँस-विहँस जलने का आग्रह:
कवियत्री दीपक को 'विहँस-विहँस' (हँसते हुए, प्रसन्नतापूर्वक) जलने के लिए कह रही हैं ताकि यह दर्शाया जा सके कि आध्यात्मिक साधना और ईश्वर के प्रति प्रेम का मार्ग आनंद और उल्लास से भरा होना चाहिए। यह आग्रह दीपक से यह अपेक्षा करता है कि वह केवल कर्तव्यवश या मजबूरी में न जले, बल्कि प्रभु के स्मरण और मिलन की आशा में प्रसन्नता और उत्साह के साथ जले। यह ईश्वर भक्ति की उस अवस्था को दर्शाता है जहाँ साधक को अपने लक्ष्य की प्राप्ति में आनंद आता है, न कि कोई कष्ट।
Common mistakes
- Confusing the literal meaning of 'deepak' with its symbolic representation.
- Misinterpreting the 'vishva-shalabh's' desire as mere self-destruction rather than spiritual merging.
- Overlooking the significance of repetitive phrases in creating poetic effect.
- Failing to connect the poet's personal devotion with a universal spiritual quest.
Revision tips
- Focus on the symbolic meanings of key elements like the lamp and the beloved.
- Pay attention to the poet's emotional tone and her requests to the lamp.
- Analyze the examples of imagery and repetition provided in the solutions.
- Relate the poem's themes to broader concepts of faith and spirituality.
- Practice answering questions about the poem's deeper meanings and poetic devices.
Practice MCQs
Q1. प्रस्तुत कविता में 'दीपक' किसका प्रतीक है?
Explanation: कविता में दीपक को ईश्वर के प्रति अटूट आस्था और आत्मा का प्रतीक माना गया है।
Q2. कवियत्री अपने प्रियतम का पथ आलोकित करने के लिए किसे जलने को कह रही हैं?
Explanation: कवियत्री अपने आत्मदीपक को निरंतर जलते रहने का आग्रह कर रही हैं ताकि वह ईश्वर रूपी प्रियतम के मार्ग को प्रकाशित कर सके।
Q3. विश्व-शलभ दीपक के साथ क्यों जल जाना चाहता है?
Explanation: विश्व-शलभ दीपक की लौ में जलकर अपने अस्तित्व को विलीन कर प्रकाशमय होना चाहता है, जो एक आध्यात्मिक मिलन का प्रतीक है।
Q4. कविता में 'मधुर-मधुर', 'सिहर-सिहर' जैसे शब्दों का प्रयोग किस प्रभाव के लिए किया गया है?
Explanation: शब्दों की पुनरावृत्ति (जैसे मधुर-मधुर, सिहर-सिहर) कविता में एक विशेष लय और प्रवाह उत्पन्न करती है, जिससे वह अधिक प्रभावी बनती है।
Q5. कवियत्री को आकाश के तारे स्नेहहीन क्यों प्रतीत हो रहे हैं?
Explanation: कवियत्री को आकाश के तारे स्नेहहीन इसलिए लगते हैं क्योंकि उनका प्रकाश फीका पड़ गया है और उनमें आपसी प्रेम या जुड़ाव का भाव नहीं दिखता।
Frequently asked questions
कक्षा 10 हिंदी स्पर्श भाग II के अध्याय 6 'मधुर-मधुर मेरे दीपक जल' में मुख्य विषय क्या हैं?
इस अध्याय में मुख्य रूप से दीपक और प्रियतम के प्रतीकात्मक अर्थ, निरंतर जलते रहने का आग्रह, आत्म-बलिदान की भावना और ईश्वर के प्रति गहरी आस्था जैसे विषयों पर चर्चा की गई है।
कविता में 'दीपक' और 'प्रियतम' किसके प्रतीक हैं?
कविता में 'दीपक' ईश्वर के प्रति आस्था, आत्मा और ज्ञान का प्रतीक है, जबकि 'प्रियतम' उस आराध्य ईश्वर का प्रतीक है जिसे कवियत्री पाना चाहती हैं।
कवियत्री दीपक को 'मधुर-मधुर', 'पुलक-पुलक' आदि कहकर जलने को क्यों कह रही हैं?
कवियत्री चाहती हैं कि दीपक हर परिस्थिति में, चाहे वह सुखद हो या दुखद, आनंद और उत्साह के साथ जलता रहे, ताकि वह ईश्वर रूपी प्रियतम के मार्ग को प्रकाशित कर सके।
विश्व-शलभ का दीपक के साथ जलना क्या दर्शाता है?
विश्व-शलभ का दीपक के साथ जलना स्वयं को मिटाकर प्रकाशमय होने और ईश्वर में विलीन हो जाने की तीव्र इच्छा को दर्शाता है, जो एक आध्यात्मिक मिलन का प्रतीक है।
ये NCERT समाधान कक्षा 10 के छात्रों की परीक्षा की तैयारी में कैसे मदद करेंगे?
ये समाधान छात्रों को कविता के कठिन प्रतीकों, बिंबों और भावार्थ को समझने में मदद करते हैं, जिससे वे परीक्षा में पूछे जाने वाले विश्लेषणात्मक प्रश्नों का उत्तर आत्मविश्वास से दे सकते हैं।
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