NCERT Class 12 Physics Bhautiki-II: Chapter 3 — 3. विद्युत धारा
यह अध्याय, NCERT कक्षा 12 भौतिकी, Bhautiki-II, अध्याय 11, 'विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रवृफति' की पड़ताल करता है। यह 1887 में मैक्सवेल के समीकरणों और हर्ट्ज़ के प्रयोगों से प्रकाश की तरंगीय प्रकृति की स्थापना से शुरू होता है। यह रूंटगेन की X-किरणों (1895) और जे.जे. थॉमसन की इलेक्ट्रॉन (1897) की खोज पर प्रकाश डालता है, जो परमाणु संरचना को समझने में महत्वपूर्ण थे। थॉमसन ने कैथोड किरणों के कणों के वेग और आवेश-द्रव्यमान अनुपात (e/m) को प्रायोगिक रूप से निर्धारित किया, यह निष्कर्ष निकालते हुए कि ये कण प्रकृति में समान थे और इन्हें इलेक्ट्रॉन नाम दिया। मिलिकन के तेल-बूंद प्रयोग (1913) ने विद्युत आवेश के क्वांटीकरण को स्थापित किया। अध्याय इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन की विभिन्न विधियों पर भी चर्चा करता है, जैसे तापायनिक उत्सर्जन, क्षेत्र उत्सर्जन और प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन, जो CBSE पाठ्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण अवधारणाएं हैं।
Quick info
| Board | CBSE / NCERT |
|---|---|
| Class | Class 12 |
| Subject | Physics |
| Book | Bhautiki-II |
| Chapter | Chapter 3 — 3. विद्युत धारा |
| Language | Hindi |
| PDF type | NCERT Textbook |
| Session | CBSE 2026 |
| Reading time | 5 minutes |
| Word count | 837 |
Learning outcomes
- प्रकाश की तरंगीय प्रकृति और कण प्रकृति की ऐतिहासिक स्थापना को समझना।
- X-किरणों और इलेक्ट्रॉनों की खोज के महत्व को जानना।
- जे.जे. थॉमसन के प्रयोगों और इलेक्ट्रॉन के गुणों को समझना।
- मिलिकन के तेल-बूंद प्रयोग और आवेश के क्वांटीकरण के सिद्धांत को समझना।
- इलेक्ट्रॉन उत्सर्जन की विभिन्न विधियों (तापायनिक, क्षेत्र, प्रकाश-विद्युत) की व्याख्या करना।
Vocabulary
| Word | Meaning |
|---|---|
| वैद्युतचुंबकीय किरणें | विद्युत और चुंबकीय क्षेत्रों से बनी तरंगें जो निर्वात में प्रकाश की गति से यात्रा करती हैं। |
| तरंगीय प्रवृत्ति | प्रकाश या अन्य विकिरण का तरंगों के रूप में व्यवहार करने का गुण। |
| कैथोड किरणें | निर्वात नलिकाओं में कैथोड से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉनों की धारा। |
| इलेक्ट्रॉन | एक ऋणात्मक रूप से आवेशित मौलिक कण जो परमाणु का एक घटक है। |
| आपेक्षिक आवेश (e/m) | कण के आवेश और उसके द्रव्यमान का अनुपात। |
| क्वांटीकरण | यह सिद्धांत कि कुछ भौतिक राशियाँ केवल असतत मान ही ले सकती हैं। |
| कार्य-फलन (φ0) | धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा। |
| इलेक्ट्रॉन वोल्ट (eV) | ऊर्जा की एक इकाई, जो एक इलेक्ट्रॉन द्वारा 1 वोल्ट विभवांतर से त्वरित होने पर प्राप्त ऊर्जा के बराबर होती है। |
| तापायनिक उत्सर्जन | गर्मी के कारण किसी धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन। |
| क्षेत्र उत्सर्जन | एक मजबूत विद्युत क्षेत्र के प्रभाव में धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन। |
| प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन | प्रकाश के आपतन के कारण धातु की सतह से इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन। |
| प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन | प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन द्वारा उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन। |
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Practice questions
- इलेक्ट्रॉन की खोज का श्रेय किस वैज्ञानिक को जाता है? Answer: जे.जे. थॉमसन।
- कार्य-फलन क्या है? Answer: धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक न्यूनतम ऊर्जा।
- प्रकाशिक इलेक्ट्रॉन क्या होते हैं? Answer: प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन द्वारा धातु की सतह से उत्सर्जित इलेक्ट्रॉन।
- 1 eV को जूल में व्यक्त करें। Answer: 1 eV = 1.602 × 10⁻¹⁹ J
Practice MCQs
Q1. इलेक्ट्रॉन पर आवेश का मापन किस प्रयोग द्वारा किया गया?
Explanation: आर.ए. मिलिकन ने अपने तेल-बूंद प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन पर आवेश का परिशुद्ध मापन किया।
Q2. कैथोड किरणों की प्रकृति क्या होती है?
Explanation: कैथोड किरणें तीव्र गति से चलने वाले ऋणावेशित कणों की धारा से बनी होती हैं, जिन्हें बाद में इलेक्ट्रॉन नाम दिया गया।
Q3. इलेक्ट्रॉन का आवेश-द्रव्यमान अनुपात (e/m) किसने ज्ञात किया?
Explanation: जे.जे. थॉमसन ने प्रायोगिक तौर पर कैथोड-किरण कणों के आवेश और द्रव्यमान का अनुपात (e/m) ज्ञात किया।
Q4. कार्य-फलन (φ0) किस पर निर्भर करता है?
Explanation: कार्य-फलन धातु के आंतरिक गुण और उसकी सतह की प्रकृति पर निर्भर करता है।
Q5. तापायनिक उत्सर्जन का क्या कारण है?
Explanation: तापायनिक उत्सर्जन में, मुक्त इलेक्ट्रॉनों को पर्याप्त तापीय ऊर्जा देकर धातु से बाहर निकाला जाता है।
Frequently asked questions
विकिरण तथा द्रव्य की द्वैत प्रवृत्ति का क्या अर्थ है?
इसका अर्थ है कि विकिरण (जैसे प्रकाश) और द्रव्य (जैसे इलेक्ट्रॉन) दोनों तरंग और कण दोनों के गुण प्रदर्शित कर सकते हैं।
इलेक्ट्रॉन की खोज किसने और कब की?
इलेक्ट्रॉन की खोज का श्रेय ब्रिटिश भौतिक विज्ञानी जे.जे. थॉमसन को 1897 में जाता है।
मिलिकन के तेल-बूंद प्रयोग का क्या महत्व है?
इस प्रयोग ने यह स्थापित किया कि विद्युत आवेश क्वांटीकृत होता है, अर्थात यह हमेशा एक मूल आवेश (इलेक्ट्रॉन के आवेश) के पूर्ण गुणज के रूप में होता है।
कार्य-फलन को परिभाषित करें।
कार्य-फलन वह न्यूनतम ऊर्जा है जो किसी धातु की सतह से एक इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक होती है।
प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन क्या है?
जब उपयुक्त आवृत्ति का प्रकाश किसी धातु की सतह पर पड़ता है, तो इलेक्ट्रॉनों का उत्सर्जन होता है, जिसे प्रकाश-विद्युत उत्सर्जन कहते हैं।
1 eV का मान जूल में कितना होता है?
1 eV = 1.602 × 10⁻¹⁹ जूल।
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NCERT Class 12 Physics — Bhautiki-II — Chapter 3 — 3. विद्युत धारा. Verified by NCERT Help Editorial Team. Reviewed on 29 Jul 2026. Last updated 10 Aug 2026.